गावस्कर बनाम कपिल !!!

by— वीर विनोद छाबड़ा

सुनील गावस्कर और कपिल देव, इंटरनेशनल क्रिकेट में इंडियन क्रिकेट की साख़ बढ़ाने वाले दो महान सितारे. दोनों एक साथ कई साल तक टीम का अटूट हिस्सा रहे, एक-दूसरे की कप्तानी में खेले. क्रिकेट का खूब फ़ायदा हुआ. लेकिन आज की पीढ़ी नहीं जानती होगी कि इनके बीच एक बार ऐसा ज़बरदस्त विवाद हुआ था कि उस दौर के क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष एनकेपी साल्वे ने दोनों को बुला कर कहना पड़ा कि अपने मतभेद फ़ौरन ख़त्म करो. हुआ ये था कि 1984-85 में होम टर्फ पर हो रही इंग्लैंड के विरुद्ध 5 टेस्ट की सीरीज़ में बम्बई में पहला टेस्ट जीत कर इंडिया के हौंसले बहुत बुलंद थे. अगला टेस्ट दिल्ली में होना था. इंडिया ने 307 रन बनाये. जवाब में इंग्लैंड ने 418 रन बना डाले. 111 रन के घाटे को कप्तान सुनील गावस्कर (65) और मोहिंदर अमरनाथ (64) ने पूरा कर दिया.

आख़िरी दिन चाय से कुछ देर पहले तक स्कोर 4 विकेट पर 208 रन था. संदीप पाटिल और रवि शास्त्री खूंटा गाड़े हुए थे. निश्चित ड्रा की तरफ जा रहा था मैच. कई दर्शक भी उठ कर जाने लगे. बिग हिट्टर पाटिल को निर्देश थे कि एडवेंचर करने की कोशिश न करें. ये क्रिकेट है, लेने के देने पड़ सकते हैं. लेकिन इसके बावज़ूद संदीप पाटिल (41) खुद को रोक नहीं पाए और स्पिनर फिल एडमंड्स की गेंद पर लम्बी शॉट लगा ही बैठे. नतीजा एलन लैम्ब को कैच थमा दिया. अब बारी आई कपिल देव की. ग्रेट आल राउंडर और एंटरटेनर. उन्हें भी बताया गया, होश नहीं खोना है. लेकिन वो भी खुद को रोक नहीं सके. स्पिनर पैट पोकॉक के मोहजाल में फँस कर लम्बा शॉट मार दिया. उन्हें भी लैम्ब ने लपक लिया. इसके बाद तो तू चल मैं आया. नतीजा ये हुआ कि इंडिया 235 आल आउट. आख़िरी छह विकेट महज़ 26 रन पर गिरे. इंग्लैंड ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जीत एकाएक सामने आ जायेगी. 32 ओवर में 125 रन का टारगेट मिला. दिसंबर के महीने में दिल्ली में सूरज जल्दी ढलता है. मगर इंग्लिश बल्लेबाज़ों ने सोच लिया, अभी नहीं तो कभी नहीं. उन्होंने पेड़ों के लम्बे साये घने होने से पहले 23.4 ओवर में ही 2 विकेट खोकर टारगेट पूरा कर लिया. न सिर्फ टीम के लिए बल्कि पूरे मुल्क के लिए बहुत शॉकिंग थी ये हार. इसके लिए दोषी सिर्फ़ पाटिल और कपिल माने गए. सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन चंदू बोर्डे ने फ़ौरन मीटिंग बुलाई और अगले टेस्ट से दोनों बाहर कर दिया.

कपिल के चाहने वाले लाखों थे. पूरे मुल्क में उबाल आ गया. कपिल ने भी इसके लिए गावस्कर को कसूरवार माना. जबकि गावस्कर इससे लगातार इंकार करते रहे. कलकत्ता टेस्ट में ‘नो कपिल, नो टेस्ट’ के पोस्टर लग गए. गावस्कर पर सड़ी सब्ज़ी और अंडे फेंके गए. गावस्कर दर्शकों के इस व्यवहार से इतना नाराज़ हुए कि उन्होंने क़सम खाई कि वो कलकत्ता में कभी टेस्ट नहीं खेलेंगे और सचमुच 1986-87 में पाकिस्तान के विरुद्ध उन्होंने कलकत्ता टेस्ट स्किप किया. बहरहाल, चेन्नई और कानपुर में चौथे और पांचवें टेस्ट में कपिल ने वापिसी की. लेकिन कुछ ख़ास नहीं कर पाए. नतीजा चेन्नई में इंग्लैंड में नौ विकेट से हार हुए और कानपुर में मैच ड्रा रहा. इंग्लैंड ने सीरीज़ 2-1 से जीती. ये वही सीरीज़ थी जिसमें मो. अज़हरुद्दीन ने लगातार तीन टेस्ट में शतक लगाए थे. कालांतर में भी गावस्कर ने एक समारोह में कपिल की मौजूदगी में फिर स्पष्ट किया कि कपिल को कलकत्ता टेस्ट से बाहर करने के पीछे उनका कोई हाथ नहीं था. जो खिलाड़ी किसी भी क्षण मैच का पांसा पलट सकता हो वो उस बहुमूल्य खिलाड़ी को भला क्यों खोना चाहेंगे? उन्होंने कई ऐसे उदाहरण भी पेश किये. कपिल देव ने भी गावस्कर का एहतराम किया. मक़सद ये कि महान खिलाड़ी आपसी मतभेद बहुत जल्दी भुला देते हैं. –

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