आज़म खान की दुर्गति के लिए योगी सरकार नहीं रामपुर के नवाब खानदानऔर कॉंग्रेस्सिये ज़िम्मेदार हैं !

By–मोहम्मद जाहिद

तौहीद तो ये है कि ख़ुदा हश्र में कह दे

ये बंदा ज़माने से ख़फ़ा मेरे लिए है

✍-मौलाना मोहम्मद अली जौहर

आज़म खान की अस्पताल से आई तस्वीरें दुखद है पर उससे दुखद है काँग्रेस के तमाम नेताओं की उनको दी जा रही संवेदना और उससे भी दुखद है काँग्रेसियों के आज़मखान के नाम पर बहाए जा रहे घड़ियाली आँसू।सीतापुर की जेल में बेटे के साथ बंद रहे सांसद आजम खां के खिलाफ अब तक 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं , जिसमें से 70 मुकदमेे 2019 में दर्ज हुए हैं।2019 में आजम खां के खिलाफ आलियागंज के किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में 28 मुकदमे काँग्रेसियों ने ही दर्ज कराए उनमें एक पूर्व काँग्रेसी नवाब का समर्थक ज़ाकिर है।

ध्यान दीजिए कि जौहर यूनिवर्सिटी के नाम पर रो रहे कुछ काँग्रेसी नेताओं को पता ही नहीं कि आलियागंज की ज़मीनों पर ही “जौहर युनिवर्सिटी” बनी हुई है। और इसी “जौहर यूनिवर्सिटी” पर काँग्रेस के पूर्व विधायक नावेद अली आक्रमण कर रहे हैं।दरअसल नवाब रामपुर और प्रख्यात शायर और पत्रकार मौलाना मुहम्मद अली जौहर की अदावत 1857 की क्रांति के कारण है , जिसमें नवाब रामपुर ने अंग्रेजों का साथ दिया था और इसी 1857 के गदर में जब कुछ अंग्रेज अपनी जान बचाने के लिए भागे तो रामपुर के नवाब युसूफ अली खान ने उन्हें ख़ुशी-ख़ुशी अपनी रियासत में पनाह दी थी।लंदन से मॉर्डन हिस्ट्री की पढ़ाई करके आए मौलाना मोहम्मद अली जौहर के तेवर अंग्रेजों के खिलाफ थे और रामपुर स्टेट में रहते हुए उन्होंने अंग्रेजी हुकुमत की मुखालफत शुरू कर दी।मौलाना जौहर ने अंग्रेजी अख़बारों में अंग्रेजों के खिलाफ लिखना शुरू कर दिया और यह चीज नवाब की छोटी सी रियासत के लिए खतरा पैदा कर सकती थी।

नवाबों द्वारा मौलाना साहब को ऐसा करने से मना किया गया और जब नहीं माने तो 17 दिनों के लिए नजरबंद कर दिया गया। इसके बाद मौलाना मुहम्मद अली जौहर रामपुर छोड़कर चले गए।उन्हीं नवाब रामपुर के वंशजों के खिलाफ आज़म खान ने राजनैतिक लड़ाई लड़ी और रामपुर में अपना वर्चस्व स्थापित किया , और नवाब रामपुर के विरोध के प्रतीक के रूप में उस युनिवर्सिटी का नाम “मौलाना जौहर” के नाम पर रखा जो आज़म खान का ड्रीम प्रोजेक्ट था।इस युनिवर्सिटी के सबसे बड़े विरोधी आज उसी नवाब रामपुर के वंशज हैं जो काँग्रेस के ही हैं , काँग्रेस से सांसद और विधायक रहे हैं और सालों साल रहे हैं। नवाब जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां पांच बार सांसद रहे। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी बेगम नूरबानो दो बार सांसद चुनी गईं। उनके बेटे नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां पांच बार विधायक चुने गए और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे।2017 को स्वार सीट पर वह अब्दुल्ला आजम से हार गये और आजम खान और उनके परिवार पर मुकदमों की बाढ़ आती गयी।आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में 20 मुकदमें और यतीमखाना के लोगों के घर उजाड़ने के आरोप में 10 से मुकदमे जो दर्ज हुए वह भी काँग्रेसियों ने ही कराए हैं।इसके अलावा शत्रु संपत्ति की जमीन कब्जाने, सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर कब्जा करने, अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के साथ मारपीट और धमकी देने के आरोप में भी अलग-अलग थानों में कई मुकदमे 2019 में दर्ज हुए उनको अधिकतर काँग्रेसियों ने ही करवाए हैं।

अब्दुल्ला आजम के खिलाफ जन्म प्रमाणपत्र का मुकदमा तो स्वार के पूर्व काँग्रेसी विधायक नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने दर्ज कराया है।हैरानी की बात यह है कि काँग्रेस के नेता आज़मखान के लिए जो आँसू बहा रहे हैं उनके ही पार्टी के लोगों ने कुल 100 मुकदमों में से 60 मुकदमें आजम खान पर कराए हैं।सब तो छोड़िए कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष फैसल लाला ने आजम खान के बेटे अब्‍दुल्‍ला आजम खान समेत चार के खिलाफ गंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।

सांसद आजम खां सक्रिय राजनीति में पिछले 43 साल से सक्रिय हैं। उनके खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज हुए थे। 2017 तक उनके खिलाफ 21 मुकदमे दर्ज थे। इनमें से नौ मुकदमों को सपा की पिछली सरकार में वापस ले लिया गया था। छह मुकदमों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट और छह में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। आज़म खान की दुर्गति के लिए योगी सरकार को नहीं नवाब खानदान के काँग्रेसियों को कोसिए उनकी आलोचना करिए। और जिन काँग्रेसियों को आज़म खान की दुर्गति पर घड़ियाली आँसू बहाने का शौक है वह अपनी पार्टी के लोगों से कहें कि आज़मखान पर किए मुकदमें वापस लें।नहीं तो आज़म खान का साथ देने का यह ढकोसला काँग्रेसी बंद करें। मेरा शोहरा आज इक आलम में घर घर हो गया तेरे हाथों मुझ को क़ातिल ये मयस्सर हो गया… ✍-मौलाना मोहम्मद अली जौहर

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