बाल श्रमिक पर सायरा क़ुरैशी की एक कविता !

वो कृष्णा, थक जाता होगा सारा दिन … सर पे बोझ उठता होगा , मेरा घर कब बनपायेगा ??ऐसा ख़्वाब...

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