Category: पुण्य प्रसून बाजपेयी

कॉरपोरेट फंडिंग के आसरे महंगे होते लोकतंत्र में जनता कहीं नहीं

by — पुण्य प्रसून बाजपेयी तो कॉरपोरेट देश चलाता है या कॉरपोरेट से सांठगांठ के बगैर देश चल...

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गुजरात जनादेश ने निगाहें मिलाने के हालात पैदा तो कर ही दिये!

याद कीजिये 2015 में सड़क पर पाटीदार समाज था। 2017 में सड़क पर कपड़ा व्यापारी थे। इसी बरस सड़क पर...

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विकास की परिभाषा बदलने के लिये खड़ा हुआ है गुजरात का युवा!

गुजरात चुनाव में सड़कों पर अगर युवा नजर आने लगे हैं। तो उसके पीछे महज पाटीदार, दलित या ओबीसी...

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राहुल का सॉफ्ट हिन्दुत्व तो मोहन भागवत का मुस्लिम प्रेम

शहर इलाहाबाद के रहने वाले कश्मीरी पंडित राहुल गांधी । इन्हीं शब्दों के साथ द्वारका के मंदिर में...

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मां-बाप क्या करें ? जब हर जिम्मेदारी से है मुक्त चुनी हुई सरकार

तो सुप्रीम कोर्ट को ही तय करना है कि देश कैसे चले। क्योंकि चुनी हुई सरकारों ने हर जिम्मेदारी से...

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