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अयोध्या एक मुकदमे भर में सिमट गया है

by — अनिल चमड़िया | हिन्दुत्व एक राजनीति है और इस राजनीति को तभी अपने लिए भारतीय समाज में घुसने के लिए सुराक मिलता है जब आर्थिक और सामाजिक बुनियादी सवालों को हल करने की प्रतिस्पर्द्धा में सक्रिय संविधानमूलक राजनीतिक पार्टियां चूकने लगती है और हिन्दुत्व को ही सत्ता के लिए जरुरी दवा मानने लगती है। राजीव गांधी ने अपने राजनीतिक संकट का समाधान राम मंदिर के शिलान्यास में देखा था लेकिन उन्हें उसका कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला बल्कि उसके बजाय हिन्दुत्व की राजनीति की अगुवाई करने वाली ताकतों के लिए पर्याप्त जगह बना दी।इसका एक अर्थ यह...

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क्या इस्लाम में रसूलुल्लाह के अपमान की सज़ा मौत है?

ए.फ़ैज़ुर्रहमान पाकिस्तान की धरती पर पिछले दिनों रसूलल्लाह (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) के अपमान के मामले में पूर्व गवर्नर सलमान तासीर और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज़ भट्टी को बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया गया था। इन दोनों ने रसूलल्लाह (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) के अपमान की एक आरोपी आसिया बीबी से हमदर्दी का इज़हार किया था। इतिहास गवाह है कि हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) ने अपने विरोधियों के साथ प्यार और हमदर्दी भरा व्यवहार का ऐसा उदाहरण पेश किया है कि रसूलल्लाह (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) के सम्मान में दुर्व्यवहार करने वाला भी जल्द ही हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू...

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ठाकरे’ नवाजुद्दीन की विस्फोटक प्रतिभा की विफलता का स्मारक क्यों है ?

by आशुतोष कुमार अगर आप बाल ठाकरे और उनकी राजनैतिक शैली के प्रति पहले से ही भक्तिभाव से भरे हुए नहीं हैं, तो फिल्म ‘ ठाकरे ‘ आपको हास्यास्पद लगेगी. कोई और समय होता तो इसे एक कॉमिक फिल्म के रूप में भी देखा जा सकता था. लेकिन कोई और समय होता तो यह फ़िल्म सेंसर से ही पास न होती. आखिर जिस फ़िल्म में ‘हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी’ जैसे नारे को महिमामंडित किया गया हो, उसे भारतीय सम्विधान के मुताबिक़ अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं दी जा सकती. यह नारा लुंगीधारी दक्षिण भारतीय लोगों के खिलाफ न केवल नफ़रत...

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राम रहीम के बहाने !!!

by –वीरेंदर भाटिया ” मेरे एक मित्र अक्सर कहते हैं कि मुल्क की आबादी को समाजशास्त्र और धर्म शास्त्र से भी पहले अर्थशास्त्र समझाया जाना चाहिए। क्योंकि तमाम समाजवादी और धार्मिक कृत्यों के पीछे सीधे या टेढ़े अर्थ जुड़ा रहता है। तमाम धार्मिक चेहरों के पीछे भी अर्थ खड़ा है। तमाम धार्मिक भीड़ के पीछे भी अर्थ खड़ा है। भीड़ में अकेले अकेले आदमी का मनोबिज्ञान पढा जाये तो प्रत्येक का पहला मकसद अर्थवान होना है, मोक्ष वोक्ष का भरम वे बाबाओं से बेहतर जानते हैं। सूत्र बताते हैं कि डेरा सच्चा सौदा तेजी से अपने आर्थिक पतन को...

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कथित ईवीएम हैकर शुजा के दावे एबीपी न्यूज की प्रारंभिक पड़ताल में ही हवा हो गए!

by — लव कुमार सिंह कथित हैकर शैयद शुजा के भारत में चुनावी मशीन ‘ईवीएम’ को हैक करने संबंधी अनेक दावे एबीपी न्यूज की प्रारंभिक पड़ताल में हवा हो गए। मंगलवार 22 जनवरी की रात नौ बजे प्रसारित कार्यक्रम ‘मास्टर स्ट्रोक’ के मुताबिक- शुजा ने दावा किया है कि वह ईवीएम बनाने वाली कंपनी ईसीआईएल (ECIL) का पूर्व कर्मचारी है। लेकिन ईवीएम बनाने वाली कंपनी ने उसके इस दावे को गलत ठहरा दिया है। हैदराबाद स्थित इस कंपनी ने चुनाव आयोग को लिखकर सूचित किया है कि इस नाम का कोई कर्मचारी कभी उसके यहां नहीं रहा और न...

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