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क्या मोदी सरकार ने चोरी से विदेश भेजा 200 टन सोना? फ़ैक्ट चेक

फ़ैक्ट चेक टीम बीबीसी न्यूज़ सोशल मीडिया पर कुछ लोग ये दावा कर रहे हैं कि ‘मोदी सरकार ने आते ही रिज़र्व बैंक का 200 टन सोना चोरी छिपे विदेश भेज दिया था’. बीबीसी के बहुत से पाठकों ने वॉट्सऐप के ज़रिए हमें उन अख़बारों की कटिंग और वेबसाइट्स के स्क्रीनशॉट्स भेजे हैं जिनमें लिखा है कि ‘मोदी सरकार ने रिज़र्व बैंक का 200 टन सोना चोरी छिपे विदेश भेज दिया है’. बहुत सारे लोगों ने दैनिक अख़बार नेशनल हेराल्ड की स्टोरी का वो लिंक हमें भेजा जिसे कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया...

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नरेंद्र मोदी का राजीव गांधी पर हमला क्या उनकी हताशा है!

by — प्रदीप कुमार बीबीसी संवाददाता भारत में चल रहे आम चुनाव के नतीजे आने में अब महज 18 दिन रह गए हैं. आधे से ज़्यादा चुनाव बीत चुका है. भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वापसी को लेकर भारतीय मीडिया में कई सर्वे आ चुके हैं, चुनाव नतीजों के इंतज़ार किए बिना ‘आएगा तो मोदी ही’ जैसे जुमले खूब प्रचारित हो रहे हैं. चुनावी सर्वे से लेकर अख़बार और टीवी चैनलों की दुनिया में मोदी के सामने कोई विपक्ष को भाव देता नहीं दिख रहा है, ऐसे समय में पांचवें चरण के चुनाव से ठीक पहले उत्तर...

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पाकीज़ा के पीछे की दास्तान !

by – वीर विनोद छाबड़ा दो राय नहीं कि ‘पाकीज़ा’ मीना कुमारी की फिल्म है, क़ामयाबी का क्रेडिट भी मीना को जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसमें कमाल अमरोही की मेहनत का कोई मोल नहीं है, निजी ज़िंदगी में मीना से उनकी अनबन रही हो, लेकिन उनसे उनकी मेहनत का हक़ नहीं छीना जा सकता। डेढ़ करोड़ रूपए की इस फिल्म में उन्होंने कितनी दुश्वारियों का सामना किया, पापड़ बेले, ये हिस्ट्री है। दरअसल, कमाल ने ‘पाकीज़ा’ मीना के साथ 1958 में प्लान की। शूटिंग भी हुई, लेकिन तभी कलर के युग की आहट मिलनी शुरू...

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साहेब का मेरठ…2014 में 1857 का गदर और 2019 में गालिब की ‘सराब’

by — पुण्य परसुनया बाजपेयी 2 फरवरी 2014 और 28 मार्च 2019 का अंतर सिर्फ तारिख भर का नही है । बल्कि भारत जैसे देश में कोई सत्ता कैसे पांच बरस में हाफंने लगती है । कैसे पांच बरस में सपने जगाने का खेल खत्म होता है । पांच बरस में कैसे चेहरे की चमक गायब हो जाती है । पांच बरस बाद कैसे पांच बरस पहले का वातावरण बनाने के लिये कोई क्या क्या कहने लगता है । सबकुछ इन दो तारिखो में कैसे जा सिमटा है इसके लिये 2 फरवरी 2014 में लौट चलना होगा जब मेरठ...

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पर्रीकर थे ताजी हवा के झोंकों का अहसास !

by – ललित गर्ग गोवा के मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर पैंक्रियाटिक कैंसर से एक वर्ष तक जूझने के बाद देह से विदेह हो जाना न केवल गोवा बल्कि भाजपा एवं भारतीय राजनीति के लिए दुखद एवं गहरा आघात है। उनका असमय निधन हो जाना सभी के लिए संसार की क्षणभंगुरता, नश्वरता, अनित्यता, अशाश्वता का बोधपाठ है। उनका निधन राजनीति में चारित्रिक एवं नैतिक मूल्यों के एक युग की समाप्ति है। भाजपा के लिये एक बड़ा आघात है, अपूरणीय क्षति है। आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में जिन लोगों का योगदान...

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