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राम रहीम के बहाने !!!

by –वीरेंदर भाटिया ” मेरे एक मित्र अक्सर कहते हैं कि मुल्क की आबादी को समाजशास्त्र और धर्म शास्त्र से भी पहले अर्थशास्त्र समझाया जाना चाहिए। क्योंकि तमाम समाजवादी और धार्मिक कृत्यों के पीछे सीधे या टेढ़े अर्थ जुड़ा रहता है। तमाम धार्मिक चेहरों के पीछे भी अर्थ खड़ा है। तमाम धार्मिक भीड़ के पीछे भी अर्थ खड़ा है। भीड़ में अकेले अकेले आदमी का मनोबिज्ञान पढा जाये तो प्रत्येक का पहला मकसद अर्थवान होना है, मोक्ष वोक्ष का भरम वे बाबाओं से बेहतर जानते हैं। सूत्र बताते हैं कि डेरा सच्चा सौदा तेजी से अपने आर्थिक पतन को...

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कथित ईवीएम हैकर शुजा के दावे एबीपी न्यूज की प्रारंभिक पड़ताल में ही हवा हो गए!

by — लव कुमार सिंह कथित हैकर शैयद शुजा के भारत में चुनावी मशीन ‘ईवीएम’ को हैक करने संबंधी अनेक दावे एबीपी न्यूज की प्रारंभिक पड़ताल में हवा हो गए। मंगलवार 22 जनवरी की रात नौ बजे प्रसारित कार्यक्रम ‘मास्टर स्ट्रोक’ के मुताबिक- शुजा ने दावा किया है कि वह ईवीएम बनाने वाली कंपनी ईसीआईएल (ECIL) का पूर्व कर्मचारी है। लेकिन ईवीएम बनाने वाली कंपनी ने उसके इस दावे को गलत ठहरा दिया है। हैदराबाद स्थित इस कंपनी ने चुनाव आयोग को लिखकर सूचित किया है कि इस नाम का कोई कर्मचारी कभी उसके यहां नहीं रहा और न...

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जेटली एक फरवरी तक न्यूयार्क से नहीं लौटे तो कौन पेश करेगा बजट ?

by –पुण्य प्रसून बाजपेयी इस बार एक फरवरी को बजट पेश कौन करेगा । जब वित्त मंत्री कैंसर के इलाज के लिये न्यूयार्क जा चुक है । क्या 31 जनवरी को पेश होने वाले आर्थिक समीक्षा के आंकडे मैनेज होगें । जिसके संकेत आर्थिक सलाहकार के पद से इस्तिफा दे चुके अरविंद सुब्रहमण्यम ने दिये थे । क्या बजटीय भाषण इस बार प्रधानमंत्री ही देगें । और आर्थिक आंकडे स्वर्णिम काल की तर्ज पर सामने रख जायेगें । क्योकि आम चुनाव से पहले संसद के भीतर मोदी सत्ता की तरफ से पेश देश के आर्थिक हालातो को लेकर दिया...

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हिंदू राष्‍ट्रवादी सत्‍ता की चुनावी सेवा का उभरता औज़ार बॉलीवुड!

By- शिशिर अग्रवाल भारत के लोग दो चीज़ों के लिए हद दर्जे तक दीवाने हैं- पहला क्रिकेट और दूसरा सिनेमा. हमारे देश में आलम यह है कि एक ओर जहाँ सचिन का सौवां शतक जल्द पूरा हो जाए इसके लिए दुआ के साथ-साथ लोगों ने व्रत रखे, तो दूसरी ओर रजनीकांत का मंदिर बनाकर हमने पूजा तक की है. मगर सचिन के छक्के हों या रजनीकांत का एक्शन, लोगों के बीच ये सब टेलीविज़न के माध्यम से ही पहुँच रहा है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा की भारतीय जनमानस में धारणाओं और विचारों की निर्मिति में टीवी...

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आर्थिक आरक्षण की सुबह का होना

by-ललित गर्ग नरेन्द्र मोदी सरकार ने आर्थिक निर्बलता के आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण देने का जो फैसला किया है वह निश्चित रूप से साहिसक कदम है, एक बड़ी राजनीतिक पहल है। इस फैसले से आर्थिक असमानता के साथ ही जातीय वैमनस्य को दूर करने की दिशा में नयी फिजाएं उद्घाटित होंगी। निश्चित ही मोदी सरकार ने आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए यह आरक्षण की व्यवस्था करके केवल एक सामाजिक जरूरत को पूरा करने का ही काम नहीं किया है, बल्कि आरक्षण की राजनीति को भी एक नया मोड़ दिया है। इस फैसले से आजादी के बाद...

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