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प्रधानमंत्री जी आप भारत को विश्व गुरु बना रहे हैं या बेवकूफ बना रहे हैं ?

by — रविश कुमार स्वीस नेशनल बैंक ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि 2017 में उसके यहां जमा भारतीयों का पैसा 50 प्रतिशत बढ़ गया है। नोटबंदी के एक साल बाद यह कमाल हुआ है। ज़रूरी नहीं कि स्विस बैंक में रखा हर पैसा काला ही हो लेकिन काला धन नहीं होगा, यह क्लिन चिट तो मोदी सरकार ही दे सकती है। मोदी सरकार को यह समझदारी की बात तब नहीं सूझी जब ख़ुद नरेंद्र मोदी अपने ट्विटर हैंडल से ट्विट किया करते थे कि स्विस बैंक में जमा काला धन को वापस लाने के लिए वोट...

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महमूद जैसा दूजा न हुआ !

by -वीर विनोद छाबड़ा महमूद साठ और सत्तर के दशक के दौर की फिल्मों की कॉमेडी के बेताज बादशाह थे। पिता मुमताज़ अली प्रसिद्ध डांसर और चरित्र अभिनेता। बाल कलाकार के रूप में महमूद ने कई फिल्मों में काम किया। लेकिन जवान हुए तो फ़िल्में रास नहीं आईं। कई छोटे-मोटे काम किये। निर्माता-निर्देशक प्यारे लाल संतोषी की ड्राईवरी की। भाग्य का खेल है कि संतोषी के पुत्र राजकुमार संतोषी ने महमूद को ‘अंदाज़ अपना में’ (1993) में प्रोड्यूसर की भूमिका में कास्ट किया। बहरहाल, महमूद ने ज़िंदा रहने के लिये मीना कुमारी को टेबल-टेनिस की ट्रेनिंग दी। बाद में...

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बंटवारे के लिए वह ‘पटेल’ सबसे ज्यादा जिम्मेदार था जिसे कोई नहीं जानता!

by — संजय तिवारी प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में खड़े होकर उस ऐतिहासिक बहस को फिर से जिन्दा कर दिया कि आखिर सरदार पटेल प्रधानमंत्री क्यों नहीं बने जबकि यह सरदार पटेल ही थे जिन्होंने देश को एक किया। विभिन्न रजवाड़ों को भारतीय तिरंगे की छत्रछाया में ले आये। संभवत: मोदी यह कहना चाहते थे कि अगर नेहरू पीएम न बनते और सरदार पटेल पीएम होते तो कश्मीर समस्या भी समय के साथ हल हो जाती। लेकिन यहां यह महत्वपूर्ण तथ्य काबिले गौर है कि सरदार पटेल कश्मीर को भी पाकिस्तान को देने के पक्षधर थे। यह नेहरू थे...

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हरियाणा का मिनी पाकिस्तान: मेवात!

by — संजय तिवारी देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर है मेवात । गुड़गांव से अलवर के रास्ते आगे बढ़ने पर सोहना के बाद मेवात का इलाका शुरू हो जाता है। मेवात एक मुस्लिम-बहुल इलाका है। यहां मेव मुसलमानों का दबदबा है। मेव पहले हिन्दू ही थे। मेव एक जाति है। अभी भी कुछ मेव हिन्दू हैं। मेवात का इलाका हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में फैला है। 14 वीं शताब्दी में तुगलक वंश के समय मेवात के लोगों को जबरन मुस्लिम बनाया गया। फिर भी ये लोग वर्षों तक अपनी पहचान को बचाने...

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जय श्री राम की जगह जय भीम का नारा बुलंद करती -काला !

by — अविनाश दास दो साल पहले आयी रजनीकांत की फ़िल्म कबाली में एक दृश्य है। जेल में क़ैद रजनीकांत के हाथ में एक किताब है। हार्पर कालिन्स से छपी वाईबी सत्यनारायण की ‘माइ फादर बलियाह’। तेलंगाना में दलित आंदोलन से जुड़ी एक मशहूर आत्मकथा। कुछ अन्य दृश्यों में अंबेडकर की तस्वीरें हैं। अब वे सारे दृश्य उस राजनीतिक हस्तक्षेप का पूर्वाभ्यास लगते हैं, जो काला में पूरी ताक़त से किया गया है। मेरे लिए काला हैरान होकर देखने वाली फ़िल्म रही, अनुभव रहा। फ़िल्म में उन तमाम पौराणिक मान्यताओं की धज्जियां उड़ायी गयी है, जिसकी वजह से ब्राह्मणवाद...

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