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राजधर्म के रास्ते पर भटक तो नहीं गये मोदी-योगी ?

धर्म दीर्घकालीन राजनीति है और राजनीति अल्पकालीन धर्म । यूं तो ये कथन लोहिया का है । पर मौजूदा सियासत जिस राजधर्म पर चल पड़ी है, उसमें कह सकते है कि बीते 25 बरस की राजनीति में राम मंदिर का निर्माण ना होना धर्म की दीर्घकालीन राजनीति है । या फिर मंदिर मंदिर सीएम पीएम ही नहीं अब तो राहुल गांधी भी मस्तक पर लाल टिका लगाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं तो राजनीति अल्पकालीन धर्म है । या फिर पहली बार भारतीय राजनीति हिन्दुत्व के चोगे तले सत्ता पाने या बनाये रखने के ऐसे दौर में पहुंच चुकी...

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अाजकल क्या कर रही हैं पुरानी फिल्मी अभिनेत्रियां!

पिछले दिनों, 90 के दशक में रुपहले परदे पर जलवे बिखेरने वाली दो अभिनेत्रियों के बारे में दो खबरें मिलीं। एक अच्छी और एक बुरी। पूजा बत्रा के बारे में पता चला कि उन्होंने अमेरिका में अपना रेडियो स्टेशन खोल लिया है। उधर, ममता कुलकर्णी के बारे में खबर आई कि उन्हें केन्या में ड्रग्स की तस्करी के आरोप में पति समेत गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों खबरें पढ़कर अचानक याद आया कि अरे हां, इन हीरोइनों को तो हम भूल ही गए थे। फिर इनके बहाने 60, 70, 80 और 90 के दशक की अन्य तमाम अभिनेत्रियों के...

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क्या अमित शाह की नई मुसीबत के पीछे अहमद पटेल हैं?

अमित शाह और उनके बेटे जय शाह के साथ जो हुआ उसके पीछे एक बेहद चौकाने वाली कहानी सामने आ रही है. दिल्ली से लेकर गुजरात तक एक खबर उड़ी हुई है कि अगस्त में गुजरात में हुए राज्यसभा चुनाव और अक्टूबर में जय शाह पर आई मुसीबत का सीधा रिश्ता है. कांग्रेस के एक बड़े नेता ने गुजरात के कुछ पत्रकारों को बताया कि जय शाह के कारोबार की खबर सभी नेताओं को थी, लेकिन उसे हेडलाइन बनवाया कांग्रेस के एक बहुत बड़े नेता ने. जब गुजरात की इस सुनी-सुनाई खबर की कड़ियां दिल्ली में चल रही कानाफूसी...

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आरुषि-हेमराज मर्डर केस- निचली अदालत बनाम ऊपरी अदालत!

फिल्म “जॉली एलएलबी” में जज सुंदर लाल त्रिपाठी बने सौरभ शुक्ला अपने सामने चल रहे मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह जान जाते हैं कि बेशक आरोपी रईसजादे के खिलाफ बहुत पुख्ता सुबूत नहीं हैं, लेकिन सड़क पर कार से कुचलकर जो लोग मारे गए हैं, उसका जिम्मेदार आरोपी रईसजादा ही है। वह यह भी जानते हैं कि उनका फैसला अंतिम फैसला नहीं होगा और आरोपी के पास उच्च अदालत में जाने का विकल्प मौजूद होगा। वह अकाट्य सुबूत न होने के वावजूद अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थिजन्य साक्ष्यों के अाधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हैं और सजा...

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क्या आतंकवाद खत्म करना आसान है?

by – गुलाम गौस आतंकवाद खत्म करना अवश्य सरल है लेकिन वह जो उसके आविष्कारक हैं वे इसे खत्म नहीं करना चाहते क्योंकि इसी में उनका लाभ है-दुनिया हैरान है कि यह कैसे मुसलमान हैं जो अपने आप को एक दूसरे के भाई कहते हैं, लेकिन आपस में इतना लड़ते झगड़ते हैं कि एक दूसरे की जान व माल का लिहाज़ नहीं करते और नरसंहार में व्यस्त रहते हैं।कुछ मुसलमान हज़रात जो विद्वान और अहले दानिश (बुद्धिजीवी) हैं वे भी इस बात से परेशान और दुखी हैं कि यह कैसा समय आ गया जहां विशेषतः इराक, सीरिया, अफगानिस्तान और...

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