Author: admin

मोदी ने सचमुच राष्ट्र को शर्मसार कर दिया है!

रफाल का भूत मोदी का पीछा नहीं छोड़ रहा है, न कभी छोड़ सकता है, यह हम सब जानते हैं।‘चौकीदार चोर है’ की गूंज-अनुगूंज आगामी चुनाव में छाई रहेगी। मोदी चाहते थे इसे युद्ध के ढोल-नगाड़ों के शोर में डुबो दें, लेकिन अब वह भी संभव नहीं रहा है। खुद मोदी के सिर पर वह जिस प्रकार नाचने लगा है, इसका नमूना कल नई दिल्ली में ‘इंडिया कनक्लेव’ की सभा में देखने को मिला जब उन्होंने रफाल को याद करते हुए कहा कि -‘अभी रफाल होता तो बात कुछ और होती।’ यह बात वह व्यक्ति कह रहा है, जिसने...

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क्या पाकिस्तान मोदी को चुनाव जितवाना चाहता है?

by– प्रशांत टंडन पुलवामा आतंकी हमले की टाइमिंग हैरान करने वाली है पाकिस्तान कभी भी भारत को एक मजबूत सेक्यूलर राष्ट्र देखना नहीं चाहेगा. धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित भारत का संवैधानिक लोकततंत्र पाकिस्तान के जन्म की बुनियाद को चुनौती देता है. पुलवामा मे हुये आतंकवादी हमले की तह में भी पाकिस्तान की भारत के संवैधानिक लोकतंत्र को चोट पहुंचाने की मंशा झलकती है. लेकिन अपनी इस खीज को मिटाने के लिये पाकिस्तान किस हद तक जाएगा ये बात हैरान करने वाली है. मौजूदा हमले में पाकिस्तान के हाथ और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर पल रहे...

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आतंकवाद और धर्म !

by – मुहम्मद ज़ाहिद इस धरती पर “आतंकवाद” नाम का जन्म देने वाला कोई मुसलमान नहीं था , वह था “वी प्रभाकरण” जो एक तमिल हिन्दू था। “लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम” अर्थात “लिट्टे” की स्थापना 5 मई 1976 में “वी प्रभाकरण” ने की जिसका उद्देश्य इसके सहारे अपने धर्म की रक्षा नहीं बल्कि हिंसक पृथकतावादी अभियान शुरू कर के उत्तर और पूर्वी श्रीलंका में एक स्वतंत्र तमिल राज्य की स्थापना करना था। आत्मघाती , फिदाईन और सोसाईड बोम्बर जैसे अविष्कार इसी वी प्रभाकरण की देन थे। लिट्टे अपने संगठन में छोटे छोटे बच्चों को सिपाही के रूप में...

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हिन्दी भारत की अदालतों में भी प्रतिष्ठित हो!

by -ललित गर्ग संयुक्त अरब अमारात याने दुबई और अबूधाबी ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अरबी और अंग्रेजी के बाद हिंदी को अपनी अदालतों में तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल कर लिया है। इसका मकसद हिंदी भाषी लोगों को मुकदमे की प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सीखने में मदद करना है। न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिहाज से यह कदम उठाया गया है। अमारात की जनसंख्या 90 लाख है। उसमें 26 लाख भारतीय हैं, इन भारतीयों में कई पढ़े-लिखे और धनाढ्य लोग भी हैं लेकिन ज्यादातर मजदूर और कम पढ़े-लिखे लोग हैं। इन लोगों...

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उत्तर कोरिया-रहस्य रोमांच से भरी राजनीति का रक्तरंजित इतिहास!

by — जसबीर चावला कोरिया प्रायद्वीप पर जापान का शासन १९१० से रहा था.१९४५ में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया.कोरिया दो हिस्सों में बाँटा गया.उत्तर में तात्कालिक रूप से सोवियत संघ और दक्षिण में संयुक्त राष्ट्र ने सत्ता संभाली.दोनों हिस्सों के पुनर्मिलन पर अनेक बार वार्ताएँ हुई पर विफल रही.अंत: में १९४८ दो अलग-अलग सरकारें बनी,उत्तरी क्षेत्र के कोरिया में ‘समाजवादी लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य’ और दक्षिण में ‘कोरिया का पूंजीवादी गणराज्य’. बँटवारे के बाद जल्दी ही उत्तर कोरिया नें दक्षिण कोरिया पर सैन्य आक्रमण कर दिया.यह युद्ध १९५० से १९५३ तक चला,जो...

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