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आजादी के बाद मुसलमानों की अग्नि-परीक्षा !

पुण्य प्रसून बाजपेयी 1952 में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को जब नेहरु ने रामपुर से चुनाव लड़ने को कहा तो अब्दुल कलाम ने नेहरु से यही सवाल किया था कि उन्हें मुस्लिम बहुल रामपुर से चुनाव नहीं लड़ना चाहिये। क्योंकि वह हिन्दुस्तान के पक्ष में हैं और रामपुर से चुनाव लड़ने पर लोग यही समझेंगे कि वह हिन्दुस्तान में पाकिस्तान नहीं जाने वाले मुसलमानों के नुमाइन्दे भर हैं। लेकिन नेहरु माने नहीं। वह आजादी के बाद पहला चुनाव था और उस वक्त कुल 17 करोड़ वोटर देश में थे। संयोग देखिये 2014 के चुनाव के वक्त देश में 17...

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मोदी से डर क्यों लगता है?

सलीम अख्तर सिद्दीकी जैसे-जैसे चुनाव बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम मुसलमान में बदल रहा है। कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों की कोशिश है कि मोदी का भय दिखाकर उनके वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जाए। लेकिन जिस तरह से मुसलमानों के वोट बिखरे हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी कोशिश कामयाब नजर होती नजर नहीं आ रही है। उत्तर प्रदेश की 10 लोकसभा सीटों पर 10 अप्रैल को हुए चुनाव बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी फायदे में नजर आ रही है। सवाल उठता है कि क्या मुसलमानों में नरेंद्र मोदी...

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सियासत की मंडी में मज़हब

फ़ज़ल इमाम मल्लिक पिछले कई दिनों से एक अजब तरह का सन्नाटा भीतर पसरा है। ऐसा सन्नाटा पिछले महीने भी पसरा था। तब बिहार में था। अब दिल्ली में हूं तो यह सन्नाटा और भीतर तक उतर आया है। लेकिन भीतर पसरे इस सन्नाटे में कई तरह की आवाज़ें भी गूंजती हैं। कई सवाल सर उठाते हैं। कई लोगों के चेहरे घुलमिल जाते हैं। इन चेहरों में कई जाने-पहचाने हैं तो कई अनजाने। लेकिन हर चेहरे पर एक ही इबारत लिखी है जो अपनी कहानी ख़ुद बयां करती है। उन चेहरों पर लिखी इबारतें भीतर पसरे सन्नाटे में चीख़...

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विलुप्त होने के कगार पर खड़ी एक कौम

लव कुमार सिंह जीव विज्ञान में अभी तक हम यही सुनते आए थे कि फलां पक्षी विलुप्त होने के कगार पर है या फलां जंतु विलुप्त हो चुका है। मनुष्यों के विभिन्न समुदायों या कौमों में से किसी के बारे में अभी तक ऐसा नहीं सुना गया था, लेकिन देश और दुनिया की बढ़ती आबादी के बीच एक कौम ऐसी है जिसकी जनसंख्या लगातार घट रही है और यही हाल रहा तो अगली सदी तक इस समुदाय का नामलेवा शायद कोई नहीं रहेगा। जी हां, यह समुदाय भारत का पारसी समुदाय है, जिसकी जनसंख्या बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार...

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कुपोषण एक भयंकर टाइम बम ,हम पोलियो मुक्त देश बन गए हैं पर…

अश्वनी कुमार कुपोषण एक ऐसा चक्र है जिसकी चपेट में कोई भी बच्चा अपनी माँ के गर्भ से ही आ जाता है. और उन बच्चो के जीवन की नियति इस दुनिया में अपना कदम रखने से पहले ही आरम्भ हो जाती है. यह नियति उन देशों में और उन लोगों सबसे अधिक देखी जा सकती है जहां गरीबी और भुखमरी ने सभी को अपने अंतर्गत ले रखा हो जहां पोषण के नाम पर केवल वादें ही किये जाते रहे हों. कुपोषण का रंग स्याह उदास है, जिसमें कहीं तक भी कोई रंग दिखाई नहीं देता, बल्कि यह जीवन के...

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