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इन आंकड़ो के बारे में मीडिया में सवाल क्यूँ नहीं उठाती ?

संजीव कुमार (Antim) हमारी मुख्य धारा की मीडिया हो या सामानांतर या किसी और प्रकार की, सभी एक मुस्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और उनके मुसलमानों के प्रति विचार और नीतियों को समझाने के लिए सिर्फ और सिर्फ सांप्रदायिक दंगो और मुस्लिमों के फेक एनकाउंटर का गुजरात सरकार से सम्बन्ध तक ही अपने आप को सिमित क्यूँ करते रहें है? क्या? हमारी मीडिया के पास और कोई विषय वस्तु नहीं हैं जिसके आधार पर वो गुजरात सरकार की मुस्लिम विरोधी नीतियों को उजागर करने में मदद ले सकती है? हमारी मीडिया क्यूँ मोदी से सिर्फ गोधरा दंगों...

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हिन्दू और मुसलमान दोनों धरती पर बोझ हैं ?

अफ़ज़ल ख़ान हिन्दू और मुसलमान दोनो धरती के बोझ है? – प्रशन इस लिये उठता है के जब मे ने 250 वर्ष के इतिहास कंगाला को पता चला के जो आधुनिक विश्व मतलब 1800 के बाद जो दुनिया मे तरक़्क़ी हुई या विकास हुआ उस मे पश्चिम मुल्को का हाथ है. इस विकास के पीछे सिर्फ यहूदी और ईसाई लोगो का ही हाथ है. हिन्दू और मुस्लिम का इस विकास मे 1 % का भी सहयोग नही है. मनुष्य का इतिहास देखे तो पता चले गा के उसी क़ौम ने तरक्की की जिस मे 3 खूबीया थी. शिक्षा, अर्थ...

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आजादी के बाद मुसलमानों की अग्नि-परीक्षा !

पुण्य प्रसून बाजपेयी 1952 में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को जब नेहरु ने रामपुर से चुनाव लड़ने को कहा तो अब्दुल कलाम ने नेहरु से यही सवाल किया था कि उन्हें मुस्लिम बहुल रामपुर से चुनाव नहीं लड़ना चाहिये। क्योंकि वह हिन्दुस्तान के पक्ष में हैं और रामपुर से चुनाव लड़ने पर लोग यही समझेंगे कि वह हिन्दुस्तान में पाकिस्तान नहीं जाने वाले मुसलमानों के नुमाइन्दे भर हैं। लेकिन नेहरु माने नहीं। वह आजादी के बाद पहला चुनाव था और उस वक्त कुल 17 करोड़ वोटर देश में थे। संयोग देखिये 2014 के चुनाव के वक्त देश में 17...

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मोदी से डर क्यों लगता है?

सलीम अख्तर सिद्दीकी जैसे-जैसे चुनाव बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम मुसलमान में बदल रहा है। कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों की कोशिश है कि मोदी का भय दिखाकर उनके वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जाए। लेकिन जिस तरह से मुसलमानों के वोट बिखरे हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी कोशिश कामयाब नजर होती नजर नहीं आ रही है। उत्तर प्रदेश की 10 लोकसभा सीटों पर 10 अप्रैल को हुए चुनाव बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी फायदे में नजर आ रही है। सवाल उठता है कि क्या मुसलमानों में नरेंद्र मोदी...

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सियासत की मंडी में मज़हब

फ़ज़ल इमाम मल्लिक पिछले कई दिनों से एक अजब तरह का सन्नाटा भीतर पसरा है। ऐसा सन्नाटा पिछले महीने भी पसरा था। तब बिहार में था। अब दिल्ली में हूं तो यह सन्नाटा और भीतर तक उतर आया है। लेकिन भीतर पसरे इस सन्नाटे में कई तरह की आवाज़ें भी गूंजती हैं। कई सवाल सर उठाते हैं। कई लोगों के चेहरे घुलमिल जाते हैं। इन चेहरों में कई जाने-पहचाने हैं तो कई अनजाने। लेकिन हर चेहरे पर एक ही इबारत लिखी है जो अपनी कहानी ख़ुद बयां करती है। उन चेहरों पर लिखी इबारतें भीतर पसरे सन्नाटे में चीख़...

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