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भारतीय और दुनिया के मुस्लिम मिथक और सच्चाई

  सिकंदर हयात भारत में कुछ लोग ये आशंका जाहिर करने लगे हे की भारत और सारी दुनिया के मुस्लिम आतंकवाद और या कट्टरपंथ के ढके छुपे समर्थक हे खासतोर पर भारतीय मुस्लिमो पर ये आरोप लगता हे की वो पाकिस्तान के पर्ती कोई नरम रुख रखते हे आतंकवाद या अतिवाद की खुल कर निंदा नहीं करते हे वेगारह वेगारह .खासतोर पर आतंकवादी कार्यवहियो के बाद ये बहस बहुत बढ जाती हे कुछ लेखक या लोगो की मानसिकता ये हे की इनकी नज़र में भारत और बाकि दुनिया के सारे मुसलमान तो शायद बुरे हे जो सामान्य व्यक्ति की...

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कश्मीर समस्या का सच !

अफ़ज़ल ख़ान अविभाजित भारत 1946 ई.मे अंग्रेजों द्वारा पेशकश कैबिनेट मिशन प्लान के तहत कांग्रेस और मुस्लिम लीग की गठबंधन सरकार बनाए जाने पर दोनों पक्षों में सहमति हो गई. कांग्रेस की मंजूरी के बावजूद पंडित नेहरू ने इस योजना को खारिज कर भारतीय विभाजन का रास्ता खोला. नेहरू ने ऐसा क्यों किया? इसकी सबसे बड़ी वजह नेहरू सत्ता मे भागीदारी नही चाहते थे और जो दूसरी वजह सामने आती है वह यह है कि नेहरू कृषि सुधार के माध्यम से हिंदुस्तान से जागीरदार प्रणाली का अंत चाहता था. लेकिन जमींदारों पे शामिल मुस्लिम लीग को यह मंजूर नहीं...

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मोदी के तीन इक्के हर दाग धो देंगे !

पुण्य प्रसून बाजपेयी मोदी के पीएम बनने के रास्ते में दलित कार्ड कैसे सीढ़ी का काम कर सकता है। इसके लिये बीजेपी को लेकर देश के मौजूदा हालात और दलित वोट बैंक को लेकर बीजेपी की कुलबुलाहट को को समझना जरुरी है। अभी तक बीजेपी को धर्म के आधार पर वोट बैंक बांटने वाला माना गया। जो यह मिथ इस तिकड़ी के आसरे तोड़ा जा सकता है। बीजेपी को मुस्लिम वोट बैंक के सामानांतर दलित वोट बैंक चाहिये। क्योंकि देश के कुल वोटों का 17 फीसदी दलित समाज से जुड़ा है। दलित वोटरों के 50 फीसदी वोट क्षेत्रीय दलों...

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संघी विचारधारा और पीएम की कुर्सी के बीच झूलते मोदी

अफ़ज़ल ख़ान आज कल मुस्लिम उलेमाओ द्वारा एक दूसरे को काफ़िर का फ़तवा देने का रिवाज़ है खास तौर से पाकिस्तान और मुस्लिम देशो मे जो के एक चिंता का विषय है. अभी जल्द ही कार्टून चॅनेल को भी हरम करार दिया गया है.यही उलेमा दुनिया के हर अविष्कार को हरम क़रार देते है, पेप्सी पीते है मगर उस को भी हरम बताते है. दूसरे को काफ़िर तो कहते ही है साथ मे जो मुसलमान उन के अक़ीदा का नही है उसे भी काफ़िर कह देते है. खैर मे पाकिस्तान के एक मशहूर शाएर सुलेमान हैदर की एक कविता...

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किसकी चाय बेचता है तू

ब्रजरंजन मणि पेश है ब्रजरंजन मणि की यह कविता. अगर यह नहीं भी बताया जाए कि कविता किस पर लिखी गई है तो हजारों अल्पसंख्यक मुसलमानों के खून और बर्बादी से सने अपने चेहरे पर चाय बेचने वाले की मासूमियत ओढ़ कर प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले इस शख्स को आप आसानी से पहचान सकते हैं. ब्रजरंजन मणि जाने माने लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. भारतीय समाज में जाति और प्रभुत्व तथा प्रतिरोध संबंधी उनकी दो किताबें प्रकाशित हुई हैं: Debrahmanising History: Dominance and Resistance in Indian Society तथा Knowledge and Power: A Discourse for Transformation. अपने को...

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