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एक सवाल इलाहाबाद से भी

आदरणीय गांधी और नेहरू परिवार जहा तक याद है ! आनंद भवन, स्वराजभवन इलाहाबाद मे है और पूरी दुनिया उसे गांधी और नेहरू परिवार के बारे मे वही से जानती है फिलहाल मै इलाहाबादी ही हूँ और पूरे इलाहाबाद की तरफ से आप सभी से या पूछना चाहता हो की आखिर क्या कारन था की आज आप को इलाहाबाद से कोई प्यार नहीं चलो मान भी लिया की राजीव , सोनिया, राहुल ,या प्रियंका का कोई कोई लेना देना न हो लकिन क्या जवाहर लाल नेहरू का भी कोई लेना देना इलाहाबाद की जनता या इलाहाबाद से नहीं था...

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पहाड़ के मासूम दामन पर काले सोने की स्याह कालिख के दाग

जितेंदर कुमार (जितेन ठाकुर) पहाड़ की फिजाओं मे एक जानी पहचानी सी महक घुलती जा रही है |देशी ज़मीन ,विदेशी नशल की जड़ों को सींच कर जो कमाल कर रही है उस से कई मालामाल हैं तो कई बेहाल |अपनी खूबशूरत वादियों के लिए जाना पहचाना हिमाचल अब हशीष की खेती के लिए जहाँ देश मे बदनाम हो रहा है वहीँ विदेशों मे खूब नाम कमा रहा है|प्रदेश के कुल्लू मे मलाना नाम का जो गाँव लगभग डेढ़ दशक पहले खोजा गया था तब सभी हैरान हो गये थे |इन लोगों को सिकंदर महान के वँसज के रूप मे...

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हिन्दू शासको ने भी मंदिर तोड़े एंव लुटे

अफ़ज़ल ख़ान हिन्दुस्तान मे हमेशा मंदिर विध्वंश और लुट के लिये और हिन्दुओ के दयनीय हालत के लिये मुस्लिम शासको को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. मुस्लिम शासको के जुल्म को इस तरह बताया जाता है के इस से बड़ा जुल्म दुनिया मे कही नही हुआ है. हम सभी जानते है के जनता के बिना सहयोग से कोई हुकूमत कर ही नही सकता. अगर मुस्लिम शासक इतने क्रूर और जालिम होते तो 1000 साल तक हुकूमत नही करते. जैसा के हम सभी जानते है के अंग्रेज़ो ने अपने हुकूमत काल मे बांटो और हुकूमत करो की पॉलिसी अपनाते हुए...

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बनारस की संस्कृति बनाम आरएसएस की विचारधारा

अवधेश प्रधान बनारस में धर्म, साहित्य, संस्कृति, कला और ज्ञान की एक अटूट धारा वैदिक युग से अब तक बहती आई है, शायद इसीलिए किसी ने इसे ‘अतीत से भी अधिक प्राचीन’ कहा है. वैदिक काल से लेकर आज तक इसका एक पैर परम्परा पर मजबूती से जमा रहा है, तो दूसरा पैर हमेशा आधुनिकता की और बढ़ता रहा है. यहां गंगा के किनारे पाठशालाओं में विद्यार्थी और उनके आचार्य वैदिक ऋचाओं का पाठ करते रहे हैं, तो दूसरी ओर सारनाथ में बौद्ध भिक्षु बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार करते रहे हैं. गया में बोधिवृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त...

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किसका तिलिस्म पहले टूटेगा : नरेन्द्र मोदी या प्रियंका गांधी ?

पुण्य प्रसून बाजपेयी नरेन्द्र मोदी और प्रियंका गांधी। मौजूदा राजनीति के यही दो चेहरे हैं जो अपने अपने ‘औरा’ को लेकर टकरा रहे हैं। और दोनों का ही तिलिस्म बरकरार है। दोनों की राजनीतिक मुठ्टी अभी तक बंद है। लेकिन दोनों ही लीक तोड़कर राजनीतिक पहचान बनाने में माहिर हैं। लेकिन दोनों के तिलिस्म के पीछे दोनों के हालात अलग अलग हैं। प्रियंका इसलिये चमक रही हैं क्योंकि चमकदार राहुल गांधी फीके पड़ चुके हैं। मोदी इसलिये धूमकेतू की तरह नजर आ रहे हैं क्योकि बीजेपी अमावस में खो चुकी है। प्रियंका का औरा इसलिये बरकरार है क्योंकि इंदिरा...

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