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टीपू सुल्तान की राम नम वाली अंगूठी नीलाम !

अफ़ज़ल ख़ान बीबीसी न्यूज की खबर के मुताबिक मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की अंगूठी जिस पर राम लिखा था उस की नीलामी हो गयी है., इस अंगूठी पर देवनागरी लिपि में भगवान राम का नाम लिखा है। अपनी अनुमानित कीमत से 10 गुना से भी अधिक पर करीब 14,287,665 रुपये में इसकी नीलामी हुई। टीपू सुल्तान को मेसूर के शेर के नाम से जाना जाता था, अंग्रेज़ उसे बिर्टिश साम्राज्य के रुकावट के लिये सब से बड़ा खतरा मान रहा था, इसी लिये एक साजिश के तहत टीपू सुल्तान को युद्ध के दौरान धोखे से मारा गया. टीपू...

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मो रफी: फिल्म संगीत का ध्रुवतारा

सैयद एस. तौहीद बचपन के दिनों में संगीत जुनून पर चर्चा करते हुए रफ़ी साहेब ने फ़कीर औरएकतारा की बात कही थी. उन दिनों वह एकतारा लेकर चलने वाले फ़कीर के फ़न सेबहुत प्रभावित रहे, फ़कीर अक्सर एकतारा पर कुछ गाते हुए दूर-दूर तक चलेजाते हैं. जिस किसी ने फ़कीर को गाते सुना होगा,वह जानते हैं किरफ़ी साहेब की दीवानगी यूं ही नही थी . बचपन में फ़कीर के जुनून को सलाम करते हुएबालक रफ़ी उससे सीख लेकर गायकी करते थे. यह प्रयास आने वालेस्वर्णिम भविष्य संकेत के रूप मे देखा जा सकता है . जब लाहौर पहुंचे तो...

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कश्मीरी पंडितों की बदहाली का राजनीतिकरण

राम पुनियानी राजनीति एक अजब-गजब खेल है। इसके खिलाड़ी वोट कबाड़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। इन खेलों से हमें संबंधित खिलाड़ी की राजनैतिक विचारधारा का पता तो चलता ही है, इससे हमें यह भी समझ में आता है कि इस खेल में किस तरह घटनाओं को तोड़ा-मरोड़ा जाता है और एक ही घटना की किस तरह परस्पर विरोधाभासी व्याख्याएँ की जाती हैं। कश्मीरी पंडितों के मामले में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है। अपने चुनाव अभियान के दौरान, भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कई ऐसी बातें कहीं जो या...

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अरब देशों के कारण बेघर हुआ है फिलिस्तीन

अफ़ज़ल ख़ान जब तक हम इतिहास का ध्यानपूर्वक समीक्षा न लें हम इस विवाद की पृष्ठभूमि समझने में कभी सफल नहीं हो सकते . फ़िलिस्तीन में यहूदी लोगों आगमन लगभग 1250 साल ईसा पूर्व होती है . यूं फ़िलिस्तीन सदियों तक यहूदियों और फलसटियनों का संयुक्त देश रहा है . सातवीं शताब्दी में उसे अरबों ने जीत लिया . उसकी बाद फिलिस्तीन लगभग पांच सदियों तक राशदीन , उमवी , अब्बासी और फातमी खिलाफत में अरब साम्राज्य का हिस्सा रहा और इसके बाद यह तुर्क के अधीन आ गया . अरब अवधि में अधिकांश फिलीस्तीनी ईसाई से मुसलमान हुए...

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कुछ नहीं बदलने वाला

माधव अवाना फिर वही माहौल,वही शोर शराबा, वही कुछ नए पुराने चेहरों का बोलबाला । फिर से सज गयी तब्दीलियों की मंडियां, पर असल में कुछ नहीं बदलने वाला । फिर चीखते फिर रहे बदहवास चेहरे, फिर रचे जानें लगें हैं षड्यंत्र गहरे । फिर से गूंजने लगें हैं फजाओं में नारे, पिछलग्गू बन गए हैं कुछ भूख के मारे । फिर से ये बतायी जाने लगी बदलाव की बातें, फिर से कुर्सी कब्जाने को होनें लगीं हैं घातें । घुटन दे गया है चुनाव का मौसम पांचसाला, पर असल में कुछ नहीं बदलनेवाला । कुछ आ जायेंगे चेहरे...

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