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कुपोषण एक भयंकर टाइम बम ,हम पोलियो मुक्त देश बन गए हैं पर…

अश्वनी कुमार कुपोषण एक ऐसा चक्र है जिसकी चपेट में कोई भी बच्चा अपनी माँ के गर्भ से ही आ जाता है. और उन बच्चो के जीवन की नियति इस दुनिया में अपना कदम रखने से पहले ही आरम्भ हो जाती है. यह नियति उन देशों में और उन लोगों सबसे अधिक देखी जा सकती है जहां गरीबी और भुखमरी ने सभी को अपने अंतर्गत ले रखा हो जहां पोषण के नाम पर केवल वादें ही किये जाते रहे हों. कुपोषण का रंग स्याह उदास है, जिसमें कहीं तक भी कोई रंग दिखाई नहीं देता, बल्कि यह जीवन के...

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क्या अब संत समाज बनाएगा मोदी को पीएम

हरे राम मिश्र िश्व हिन्दू परिषद के संयोजक अशोक सिंघल इन दिनों पूरे देश के दौरे पर हैं। सिंघल द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के चहेते व उग्र हिन्दुत्व के चेहरे नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए हिन्दू धार्मिक संस्थाओं के मुखियाओं, संतों को चुनाव प्रचार के लिए आगे लाने की जीतोड़ कोशिश की जा रही हैं ताकि मोदी की राह को आसान बनाया जा सके। हाल ही में, पता चला था कि अशोक सिंघल नरेन्द्र मोदी के पक्ष में देश के भीतर एक चुनावी लहर का निर्माण करने के लिए धार्मिक संतों...

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औरंगज़ेब अकबर से अधिक धर्मनिरपेक्ष था

अफ़ज़ल ख़ान भारत पे मुग़लो ने लगभग 350 साल हुकूमत की है, जिस मे सिर्फ दो बादशाह अकबर और औरंगज़ेब ने 101 साल हुकूमत की. अकबर का काल 1556-1606 था जब के औरंगज़ेब का काल 1656-1707 था. मुग़ल काल मे जिसे सब से ज्यादा प्रसिद्धि मिली वो अकबर था, उसे अकबर महान और ध्रमनिरपेक्ष राजा कहा जाता है जब के औरंगज़ेब का चित्रण एक रुडीवादी, असहिषून और कट्टरवादी बादशाह के तौर पर पेश किया गया है जब के इतिहास इस से भिन्न है..इतिहास्करो ने भी औरंगज़ेब के साथ इंसाफ नही किया. एक बादशाह जिस ने 50 साल तक हुकूमत...

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काश मे पाकिस्तानी मौलवी होता

काश मे पाकिस्तानी मौलवी होता जो दिल मे आता वही बोलता न सोचता न तौलता काश मे पाकिस्तानी मौलवी होता मुझ से सब डरते मेरा दम भरते मुझ से न लड़ते अगर लड़ते तो मे उनकी गर्दन मरोडता काश मे पाकिस्तानी मौलवी होता तहजीब से क्या वास्ता रखना साइन्स व तरक्की से क्या वास्ता रखना के दुनिया मुस्लिम के लिये क़ैदखाना और बस इधर हलवा ही खाना अपना दिमाग कभी न टटोलता काश मे पाकिस्तानी मौलवी होता जब चाहता अपना जी करता हमेशा अपनी करनी फसाद को बनाता जेहाद और जेहाद को फसाद जेहाद फसाद, फसाद जेहाद कभी कोई...

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15वीं लोकसभा, अब तक का सबसे ख़राब प्रदर्शन ( K.D.Singh)

अनिल यादव जो लोकसभा देश के विकास में एक अहम् भूमिका निभाती है, जनप्रतिनिधियों द्वारा जहां देश हित के कार्यों को अंजाम दिया जाता है, जो लोकतंत्र की गरिमा स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से बनाए हुए है. वो लोकसभा जहां जनता के प्रतिनिधि बैठकर देश के लिए कानूनी का निर्माण करते हैं, कुछ पुराने कानूनों में संशोधन किया जाता है. देश के हित में चर्चाएं की जाती हैं, अगर वहीँ हंगामे और दलों के झगड़े होते रहे तो कैसे देश के हित में कार्य हो सकेंगे? कैसे जनता का भला हो सकेगा? अगर इस ओर गहराई से देखा जाए...

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