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इंडियन पोलिटिकल लीग-एक विकल्प

भारत में आजकी राजनीती और क्रिकेट के रिश्तों पर आधारित एक कटाक्ष मोहम्मद शारिक सोलहवीं लोकसभा की घोषणा के बाद मानो भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया हो.रात को जो एक पार्टी में था सुबह आँख खुलते ही वो दूसरी पार्टी में शामिल हो गया.किसी को आंधी बहा कर ले जा रही है तो किसी को सत्ता जाने का दर सता रहा है,कोई अपने वोट बैंक (समुदाए ) की दुहाई देकर दूसरी पार्टी में जा बैठा है,चुनाव के समय वंशवाद याद आ रहा है तो कोई पार्टी में नज़रंदाज़ किये जाने से पार्टी बदल रहा है,किसी को अमुक पार्टी...

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सिनेमा देविका रानी को याद करेगा

सैयद एस. तौहीद देविका रानी का शुमार भारतीय सिनेमा की अग्रणी नायिकाओं के तौर पर होता है। बीस के दशक में रिलीज एक द्विभाषी फिल्म से सिनेमा का रूख किया था। उसे उस समय के जाने माने निर्माता हिमांशु राय ने एक विदेशी कंपनी के साथ मिलकर बनाई थी। उस समय देविका लंदन में कला की शिक्षा ले रही थी। देविका की हिमांशु से पहली मुलाकात वहीं हुई। देविका का सिनेमा रुझान देखते हुए हिमांशु ने उन्हें काम करने का न्योता दिया। देविका ने उस फिल्म में मंच सज्जा की। किंतु उनके नाम को नामों की सूचि में नहीं...

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इन आंकड़ो के बारे में मीडिया में सवाल क्यूँ नहीं उठाती ?

संजीव कुमार (Antim) हमारी मुख्य धारा की मीडिया हो या सामानांतर या किसी और प्रकार की, सभी एक मुस्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और उनके मुसलमानों के प्रति विचार और नीतियों को समझाने के लिए सिर्फ और सिर्फ सांप्रदायिक दंगो और मुस्लिमों के फेक एनकाउंटर का गुजरात सरकार से सम्बन्ध तक ही अपने आप को सिमित क्यूँ करते रहें है? क्या? हमारी मीडिया के पास और कोई विषय वस्तु नहीं हैं जिसके आधार पर वो गुजरात सरकार की मुस्लिम विरोधी नीतियों को उजागर करने में मदद ले सकती है? हमारी मीडिया क्यूँ मोदी से सिर्फ गोधरा दंगों...

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हिन्दू और मुसलमान दोनों धरती पर बोझ हैं ?

अफ़ज़ल ख़ान हिन्दू और मुसलमान दोनो धरती के बोझ है? – प्रशन इस लिये उठता है के जब मे ने 250 वर्ष के इतिहास कंगाला को पता चला के जो आधुनिक विश्व मतलब 1800 के बाद जो दुनिया मे तरक़्क़ी हुई या विकास हुआ उस मे पश्चिम मुल्को का हाथ है. इस विकास के पीछे सिर्फ यहूदी और ईसाई लोगो का ही हाथ है. हिन्दू और मुस्लिम का इस विकास मे 1 % का भी सहयोग नही है. मनुष्य का इतिहास देखे तो पता चले गा के उसी क़ौम ने तरक्की की जिस मे 3 खूबीया थी. शिक्षा, अर्थ...

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आजादी के बाद मुसलमानों की अग्नि-परीक्षा !

पुण्य प्रसून बाजपेयी 1952 में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को जब नेहरु ने रामपुर से चुनाव लड़ने को कहा तो अब्दुल कलाम ने नेहरु से यही सवाल किया था कि उन्हें मुस्लिम बहुल रामपुर से चुनाव नहीं लड़ना चाहिये। क्योंकि वह हिन्दुस्तान के पक्ष में हैं और रामपुर से चुनाव लड़ने पर लोग यही समझेंगे कि वह हिन्दुस्तान में पाकिस्तान नहीं जाने वाले मुसलमानों के नुमाइन्दे भर हैं। लेकिन नेहरु माने नहीं। वह आजादी के बाद पहला चुनाव था और उस वक्त कुल 17 करोड़ वोटर देश में थे। संयोग देखिये 2014 के चुनाव के वक्त देश में 17...

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