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बौद्ध धर्म अपनाये दलित!

संजय शरमन जोठे दुनिया भर का इतिहास देख लीजिये, जब भी व्यापक पैमाने पर सभ्यतागत या नैतिक उत्थान या पतन हुआ है तो वो धर्मों के बदलाव से जुडा हुआ है. इस्लाम पूर्व काल का बर्बर समाज इस्लाम के आने के साथ सामाजिक, नैतिक रूप से एकदम से उंचाई छूने लगता है. उनकी सामाजिक राजनैतिक शक्ति दुनिया का नक्शा बदल डालती है. उनका वैचारिक और दार्शनिक फलक भी अचानक से विस्तार लेने लगता है.यूरोप में जीसस के साथ केथोलिक इसाई धर्म के साथ पूरे यूरोप की सामाजिक नैतिक चेतना एक छलांग लेती है. बाद में मार्टिन लूथर प्रोटेस्टेंट इसाइयत...

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क्या इसमें कुछ ग़लत है अगर नरेंद्र मोदी अच्छा दिखना चाहते हैं?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ में दिए भाषण के दौरान जिस वेश-भूषा और मुद्रा में नज़र आए, उससे उनके ‘परिधान-प्रेम’ को लेकर चर्चाएं हो रही हैं. हालांकि इस तरह की चर्चाएं नई नहीं हैं, और नरेंद्र मोदी ख़ुद भी निःसंकोच कहते रहे हैं कि उन्हें अच्छा दिखना पसंद है. केदारनाथ की तस्वीरों में ललाट पर त्रिपुंड तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला के साथ आंखों पर काले सनग्लासेज़ लगाए मोदी मानो पूछना चाह रहे थे कि ‘ज़रा बताओ, मैं कैसा दिखता हूं!’ गूगल पर सर्च करें तो पता चलता है कि बतौर राजनेता नरेंद्र मोदी अपने फ़ैशन स्टाइल के...

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हर सीडी कुछ कहती है: भारतीय राजनेताओं के गुप्त चलचित्रों का विश्लेषण

देश की राजनीति में कांग्रेस और बीजेपी से लेकर नई-नवेली आप पार्टी के नेताओं की सेक्स सीडी आ चुकी है खबर एकदम ताजा है. चाल चरित्र और चेहरे वाली पार्टी के एक भोले-भोले सांसद सेक्स स्कैंडल में फंस गये हैं. लड़की ने सांसद महोदय को घर पर बुलाया. जनता के बुलावे पर उसके घर जाना ही राजधर्म है. सांसद महोदय का कहना है कि लड़की ने उन्हे फुसलाकर शर्बत पिलाया और नशे की हालत में उनकी इ्ज्ज़त लूट ली. मैं कनफ्यूज हो गया कि अबला शब्द स्त्रीलिंग है, पुल्लिंग. तो दुखियारे सांसद ने कहा है कि लड़की धमकी दे...

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विकास की परिभाषा बदलने के लिये खड़ा हुआ है गुजरात का युवा!

गुजरात चुनाव में सड़कों पर अगर युवा नजर आने लगे हैं। तो उसके पीछे महज पाटीदार, दलित या ओबीसी आंदोलन नही है। और ना ही हार्दिक पटेल,अल्पेश या जिग्नेश के चेहरे भर है । दरअसल गुजरात का युवा जिस संकट से गुजर रहा है उसका सच महंगी शिक्षा और बेरोजगारी है। और छात्र-युवा के बीच के संकट को समझने के लिये पहले कालेजो की उस फेहरिस्त को समझें,जिसने गुजरात की समूची शिक्षा को ही निजी हाथों में सौंप दिया है। जिले दर जिले कालेज हो या यूनिवर्सिटी। टेक्निकल इस्टीट्यूट हो या फिर मेडिकल कालेज। कालेजों की समूची फेहरिस्त ही...

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अमित शाह: गुजरात के वेपारियों से बहुत डर लगता है साहेब!

इस महीने की 5 तारीख को अमित शाह अपना केरल दौरा छोड़कर अचानक दिल्ली पहुंचे। किसलिए? तो मोदी और अरुण जेटली से जीएसटी पर चर्चा करने। इस मीटिंग के बाद सरकार ने जीएसटी कानूनों में कुछ बदलावों की घोषणाएं कीं। वे घोषणाएं क्या थीं, उनका यहां ज़िक़्र करना ज़रूरी नहीं है। हां, यह ज़ाहिर है कि उनका मक़सद था कि जीएसटी को लेकर व्यापारियों में, खासकर गुजरात के व्यापारियों में जो गुस्सा उभर रहा था, उसे शांत किया जाए। सोचता हूं, अमित शाह ने इस मीटिंग में साहेब से क्या कहा होगा। यदि अमित शाह, अमर सिंह होते तो...

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