Author: admin

दिल्ली तेरे रूप अनेक!!!!

by — प्रिय दर्शन किशन कालजयी जी के कहने पर यह लेख सबलोग के लिए लिखा था। दिल्ली के अपने अनुभवों पर। पिछले दिनों छपा है। आप अगर देखना चाहें। पहली बार दिल्ली मैं 1990 में आया था- एमए में दाख़िले के इरादे से। लेकिन दो महीने रहकर लौट गया। तब यह नहीं सोचा था कि दुबारा दिल्ली लौटूंगा। हालांकि पहली बार आने से पहले भी नहीं सोचा था कि कभी दिल्ली आऊंगा। दरअसल उन दिनों दिल्ली और रांची के बीच की दूरी कहीं ज़्यादा बड़ी थी- मानसिक दूरी भी और वास्तविक दूरी भी। रांची से दिल्ली के बीच...

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सीबीआई भारत की प्रमुख जांच एजेंसी की जगह भस्मासुर बन गई है

by — नीरज कुमार सीबीआई में आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच के विवाद ने इस संस्था की प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता और छवि को गर्त में मिला दिया है. समाचार पत्रों में सीबीआई के नंबर एक अधिकारी आलोक वर्मा और नंबर दो अधिकारी राकेश अस्थाना के बीच आंतरिक विवाद की खबरें भरी पड़ी है. यह मामला उस समय सामने आया जब शीर्ष अधिकारी ने अपने डिप्टी के खिलाफ मामला दर्ज कराया. यह केवल अभूतपूर्व नहीं है बल्कि एक संस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर हमला है. जिसे भारत में ‘प्रमुख जांच एजेंसी’ के रूप में जाना जाता है. अभी तक...

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सुनो लड़कियों, तुम मंदिर क्यों जाना चाहती हो?

by: दिलीप मंडल महिलाओं की मुक्ति की कहानी मंदिरों में नहीं, मार्केट, स्कूल-कॉलेजों और वर्क प्लेस में लिखी जा रही है और इसमें उनका सबसे बड़ा साथी भारत का संविधान है. वे लड़कियां हैं, वे मंदिर जाना चाहती हैं. वे वहां पुजारी बनने या मंदिर का मैनेजर बनने या मंदिरों से जुड़ी अरबों की जायदाद और धार्मिक सत्ता में हिस्सेदारी करने नहीं जा रही हैं. उन्हें मंदिर का मालिक नहीं बनना है. उनकी नज़र मंदिरों में रखे सोने-चांदी पर नहीं है. वे तो आस्था के प्रदर्शन के लिए, पुजारियों का आशीर्वाद लेने और मूर्तियों के दर्शन करने के लिए...

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असम के उस चावल को मिला जीआई टैग जिसे खाने के लिए पकाने की जरूरत नहीं पड़ती

असम के ‘बोका चौल’ चावल को जीआई टैग (जियोलॉजिकल आइडेंटीफिकेशन यानी भौगोलिक पहचान चिह्न) प्रदान किया गया है। इस टैग को मिलने के बाद पूरी दुनिया में ‘बोका चौल’ चावल को असम के विशिष्ट चावल के रूप में पहचाना जाएगा। इस चावल की खास बात यह है कि इसे खाने के लिए पकाना नहीं पड़ता है। उल्लेखनीय है कि जीआई टैग विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित कुछ विशिष्ट कृषि, प्राकृतिक, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों को दिया जाता है। ऐसा उत्पाद जो किसी क्षेत्र में 10 वर्ष या उससे ज्यादा समय से उत्पन्न या निर्मित होता है तो उसे जीआई टैग...

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‘ना गुजरात दंगों में बीजेपी थी ना सिख दंगों में कांग्रेस रही”

by–पुण्य प्रसून बाजपेयी बात 28 फरवरी 2002 की है । बजट का दिन था । हर रिपोर्टर बजट के मद्देनजर बरों को कवर करने दफ्तर से निकल चुका था। मेरे पास कोई काम नहीं था तो मैं झंडेवालान में वीडियोकान टॉवर के अपने दफ्तर आजतक से टहलते हुये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हेडक्वार्टर पहुंच गया, जो 10 मिनट का रास्ता थ। मिलने पहुंचा था आरएसएस के तब के प्रवक्ता एमजी वैद्य से। नागपुर में काम करते वक्त से ही परीचित था तो निकटता थी । निकटता थी तो हर बात खुलकर होती थी । उन्होंने मुझे देखा हाल पूछा...

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