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हिन्दी भारत की अदालतों में भी प्रतिष्ठित हो!

by -ललित गर्ग संयुक्त अरब अमारात याने दुबई और अबूधाबी ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अरबी और अंग्रेजी के बाद हिंदी को अपनी अदालतों में तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल कर लिया है। इसका मकसद हिंदी भाषी लोगों को मुकदमे की प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सीखने में मदद करना है। न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिहाज से यह कदम उठाया गया है। अमारात की जनसंख्या 90 लाख है। उसमें 26 लाख भारतीय हैं, इन भारतीयों में कई पढ़े-लिखे और धनाढ्य लोग भी हैं लेकिन ज्यादातर मजदूर और कम पढ़े-लिखे लोग हैं। इन लोगों...

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उत्तर कोरिया-रहस्य रोमांच से भरी राजनीति का रक्तरंजित इतिहास!

by — जसबीर चावला कोरिया प्रायद्वीप पर जापान का शासन १९१० से रहा था.१९४५ में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया.कोरिया दो हिस्सों में बाँटा गया.उत्तर में तात्कालिक रूप से सोवियत संघ और दक्षिण में संयुक्त राष्ट्र ने सत्ता संभाली.दोनों हिस्सों के पुनर्मिलन पर अनेक बार वार्ताएँ हुई पर विफल रही.अंत: में १९४८ दो अलग-अलग सरकारें बनी,उत्तरी क्षेत्र के कोरिया में ‘समाजवादी लोकतांत्रिक जनवादी गणराज्य’ और दक्षिण में ‘कोरिया का पूंजीवादी गणराज्य’. बँटवारे के बाद जल्दी ही उत्तर कोरिया नें दक्षिण कोरिया पर सैन्य आक्रमण कर दिया.यह युद्ध १९५० से १९५३ तक चला,जो...

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अयोध्या एक मुकदमे भर में सिमट गया है

by — अनिल चमड़िया | हिन्दुत्व एक राजनीति है और इस राजनीति को तभी अपने लिए भारतीय समाज में घुसने के लिए सुराक मिलता है जब आर्थिक और सामाजिक बुनियादी सवालों को हल करने की प्रतिस्पर्द्धा में सक्रिय संविधानमूलक राजनीतिक पार्टियां चूकने लगती है और हिन्दुत्व को ही सत्ता के लिए जरुरी दवा मानने लगती है। राजीव गांधी ने अपने राजनीतिक संकट का समाधान राम मंदिर के शिलान्यास में देखा था लेकिन उन्हें उसका कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला बल्कि उसके बजाय हिन्दुत्व की राजनीति की अगुवाई करने वाली ताकतों के लिए पर्याप्त जगह बना दी।इसका एक अर्थ यह...

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क्या इस्लाम में रसूलुल्लाह के अपमान की सज़ा मौत है?

ए.फ़ैज़ुर्रहमान पाकिस्तान की धरती पर पिछले दिनों रसूलल्लाह (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) के अपमान के मामले में पूर्व गवर्नर सलमान तासीर और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज़ भट्टी को बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया गया था। इन दोनों ने रसूलल्लाह (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) के अपमान की एक आरोपी आसिया बीबी से हमदर्दी का इज़हार किया था। इतिहास गवाह है कि हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) ने अपने विरोधियों के साथ प्यार और हमदर्दी भरा व्यवहार का ऐसा उदाहरण पेश किया है कि रसूलल्लाह (सल्लल्लाहू अलैहे वसल्लम) के सम्मान में दुर्व्यवहार करने वाला भी जल्द ही हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहू...

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ठाकरे’ नवाजुद्दीन की विस्फोटक प्रतिभा की विफलता का स्मारक क्यों है ?

by आशुतोष कुमार अगर आप बाल ठाकरे और उनकी राजनैतिक शैली के प्रति पहले से ही भक्तिभाव से भरे हुए नहीं हैं, तो फिल्म ‘ ठाकरे ‘ आपको हास्यास्पद लगेगी. कोई और समय होता तो इसे एक कॉमिक फिल्म के रूप में भी देखा जा सकता था. लेकिन कोई और समय होता तो यह फ़िल्म सेंसर से ही पास न होती. आखिर जिस फ़िल्म में ‘हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी’ जैसे नारे को महिमामंडित किया गया हो, उसे भारतीय सम्विधान के मुताबिक़ अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं दी जा सकती. यह नारा लुंगीधारी दक्षिण भारतीय लोगों के खिलाफ न केवल नफ़रत...

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