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शोषित नारी की कथाएँ

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु आदिम काल से नारी शोषण का शिकार रही है। नारी की नारी सुलभ संवेदनाओं की हर युग में उपेक्षा हुई है। समाज का कोई भी वर्ग रहा हो, वह नारी देह के भूगोल की ही व्याख्या करता रहा है। समाज का कोई भी रिश्ता स्त्री को सुरक्षा–कवच प्रदान नहीं कर पाया है। सुरक्षा का नाजुक घेरा टूटते ही नारी केवल शरीर नज़र आती है और पुरुष उपभोक्ता मात्र। इस दयनीय स्थिति के पीछे कई कारण हैं। साहनी जी इन विभिन्न कारणों को विभिन्न लघुकथाओं के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। स्त्री के देह–व्यापार के कारणों में...

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लोकमन को जीतने की विधा “नारे”

सुरेन्द्र अग्निहोत्री लोकमन को जीतने की विधा नारे सभी को लगते है प्यारे यह बात सिर्फ आज के चुनावी युग और प्रचार युग में ही नही प्राचीन काल में भी नारे लोकमन की बात और लोकमन के बीच में अपनी बात को पहुॅचाने की एक सशक्त विधा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। संस्कृत के ‘सुभाषित’ नीति कथनों से भी नारों का काम लिया जाता रहा है। वीर रासो काव्य को भी इसी रुप में ले सकते है जब युद्ध के तौर पर वीरता के लिए लोगों के मन में ललक पैदा करने की कोशिश की जाती...

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जीवन में साहित्य का महत्व : प्रेमचंद

सिकंदर हयात अपने एक लेख में प्रेमचंद बताते हे की जीवन में साहित्य का क्या महत्व हे ? क्या स्थान हे क्यों हे ? आज की भागती दौड़ती जिंदगी में इंसान किसी चीज़ से सबसे ज़्यादा दूर हो रहा हे तो साहित्य भी हे इसके दुष्परिणाम भी साफ़ तौर पर देखे जा सकते हे लोगो की अच्छा कहने सुनने की एक दुसरे को समझने की रोचक बातचीत की क्षमता कम हो रही हे कारण साफ़ हे की दिमाग और मन दोनों की ही खुराक पढ़ना और साहित्य होता ही हे टी वी इंटरनेट और दुसरे माध्यम जीवन में साहित्य...

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इंडियन पोलिटिकल लीग-एक विकल्प

भारत में आजकी राजनीती और क्रिकेट के रिश्तों पर आधारित एक कटाक्ष मोहम्मद शारिक सोलहवीं लोकसभा की घोषणा के बाद मानो भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया हो.रात को जो एक पार्टी में था सुबह आँख खुलते ही वो दूसरी पार्टी में शामिल हो गया.किसी को आंधी बहा कर ले जा रही है तो किसी को सत्ता जाने का दर सता रहा है,कोई अपने वोट बैंक (समुदाए ) की दुहाई देकर दूसरी पार्टी में जा बैठा है,चुनाव के समय वंशवाद याद आ रहा है तो कोई पार्टी में नज़रंदाज़ किये जाने से पार्टी बदल रहा है,किसी को अमुक पार्टी...

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सिनेमा देविका रानी को याद करेगा

सैयद एस. तौहीद देविका रानी का शुमार भारतीय सिनेमा की अग्रणी नायिकाओं के तौर पर होता है। बीस के दशक में रिलीज एक द्विभाषी फिल्म से सिनेमा का रूख किया था। उसे उस समय के जाने माने निर्माता हिमांशु राय ने एक विदेशी कंपनी के साथ मिलकर बनाई थी। उस समय देविका लंदन में कला की शिक्षा ले रही थी। देविका की हिमांशु से पहली मुलाकात वहीं हुई। देविका का सिनेमा रुझान देखते हुए हिमांशु ने उन्हें काम करने का न्योता दिया। देविका ने उस फिल्म में मंच सज्जा की। किंतु उनके नाम को नामों की सूचि में नहीं...

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