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सेलेब्रिटीज के अनोखे शौक

लव कुमार सिंह अपने काम-धंधे के अलावा हर व्यक्ति के कुछ शौक भी होते हैं। कुछ लोग शौक को ही अपना प्रोफेशन बना लेते हैं, लेकिन जो ऐसा नहीं कर पाते वे समय निकालकर अपने शौक को पूरा करने की कोशिश करते हैं। कुछ के शौक व्यस्तता के कारण दम तोड़ देते हैं तो कुछ लोग इसे हर कीमत पर कायम रखते हैं। फिल्मी दुनिया के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सितारे अपनी फिल्मों के कारण भले ही अलग और लार्जर दैन लाइफ इमेज वाले प्राणी लगते हों, पर शौक के मामले में वे आम इंसानों से जरा भी अलग नहीं...

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عظیم تر اسرائیل! صہیونی منصوبہ

صابر کربلائی عظیم تر اسرائیل یا پھر گریٹر اسرائیل کے جملے سے تو دنیا آشنا ہے، لیکن اس بارے میں شاید اکثریت اس بات سے آشنا نہیں ہے کہ آخر یہ گریٹر اسرائیل کیا ہے؟ گریٹر اسرائیل کہاں سے شروع ہے او ر کہاں پر ختم ، شاید کوئی نہیں جانتا لیکن دنیا کے با شعور اور سیاست دان اور حکومت دان اس بات سے بخوبی واقف ہیں کہ آخر یہ گریٹر اسرائیل کا ماجرا کیا ہے؟اور اس کے پیچھے کیا منطق کارفرما ہے۔ گریٹر اسرائیل ایک ایسے منصوبے اور خواب کا نام ہے جسے صہیونیزم کے بانی تھیوڈر...

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मोदी के हनीमूनकाल बीतने का इंतजार तो कीजिये

पुण्य प्रसून बाजपेयी रक्षा मंत्री की खोज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को करनी है और बीजेपी के अध्यक्ष की खोज संघ परिवार को करनी है। लेकिन दोनों ही खोज में दोनों ही सहमति होनी चाहिये। इसलिये रक्षा मंत्री होगा कौन यह सवाल बीतते वक्त के साथ सरकार के लिये बड़ा होता जा रहा है, वहीं अध्यक्ष को लेकर भी आरएसएस के लिये परिस्थितियां उलझ रही हैं। फैसला जल्दबाजी में होना नहीं चाहिये। यह आरएसएस का विचार है और रक्षा मंत्रालय कभी भी वित्त मंत्री के पास रहता नहीं यह सरकार चलाने वाले अब खुले तौर पर मान भी रहे हैं...

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सिनेमा से परिवर्तन वाया हीरा मोती

सैयद एस.तौहीद आजादी बाद देश के समक्ष नवनिर्माण का बडा लक्ष्य था। सभी क्षेत्रों की सहभागिता जरूरी थी । सिनेमा भी इस दिशा में काम कर रहा था। साहित्य में उपलब्ध कहानियों को अधिक लोगों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में फ़िल्मों का निर्माण हुआ । हिन्दी व अन्य भाषाओं की महत्त्वपूर्ण कृतियों पर फिल्मों का निर्माण इसी का उदाहरण है । बांग्ला कथाकार शरतचंद्र ,विभूतिभूषण बंधोपाध्याय,रवीन्द्रनाथ टेगोर से लेकर हिन्दी के मुंशी प्रेमचंद,फणीश्वर नाथ रेणु,निर्मल वर्मा,मोहन राकेश,राजेन्द्र यादव की रचनाओं पर फ़िल्में बनी । साहित्य का फिल्म की दुनिया से रिश्ता स्वतंत्र व्याख्या का विषय है । बहरहाल कथा-सम्राट...

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1971 के बाद जम्मू – कश्मीर

प्रदीप दुबे आज जब नए सिरे से तूल पकड़ रहा है भारतीय संविधान में जम्मू – कश्मीर के लिए विशेष रूप से प्रावधान किया गया अनुच्छेद 370, और इसके वजूद में रहने न रहने पर बहस हो रही है तो ऐसे में एक आम भारतीय नागरिक होने के नाते मै भी अपने कुछ विचार साझा करना चाहता हूँ और इस मुद्दे को 25 मार्च सन 1971 से जोड़कर इसपर प्रकाश डालना चाहता हूँ ! 25 मार्च 1971 इतिहास का एक ऐसा पन्ना जिसे दुनिया एक नए देश बांग्लादेश के अभ्युदय के रूप में याद करती है एक ऐसे देश...

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