Author: Afzal Khan

उद्धव ठाकरे ने दिखाई अर्णव को उसकी औकात !

By- शकील अख्तर जो हिम्मत बड़े बड़े मुख्यमंत्री नहीं दिखा पाए वह सबसे जूनियर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिखा दी। अर्णव गोस्वामी किसी मुख्यमंत्री यहां तक की वरिष्ठ केन्द्रीय मंत्रियों को भी कुछ नहीं समझता था। इसी तरह किसी पत्रकार, मीडिया मालिक को भी कुछ नहीं। यहां तक कि न्यायपालिका को भी कुछ नहीं, कहता था जज खरीद लो! और इन सबसे खतरनाक और शर्मनाक बात यह कि वह पुलवामा में 40 भारतीय सुरक्षाकर्मियों की शहादत पर खुशियां मना रहा था! किसी की कोई चिन्ता नहीं, दर्द नहीं। सबके लिए अपमानजनक टिप्पणियां, उपहास, अवहेलना का भाव! सबको देशभक्ति के...

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     हिंदी पट्टी के नौजवान !!

BY – हेमंत कुमार झा       हिन्दी पट्टी के नौजवानों से अधिक शोषित और ठगा जाने वाला समुदाय कौन है दुनिया में, इस पर बहस हो सकती है। उनमें बेरोजगारी की दर सबसे अधिक है, उनमें से अधिकतर ऐसे हैं जो ग्रेजुएट होने के बाद भी किसी काम के लायक नहीं बन सके, क्यंकि जो शिक्षा उन्हें मिली या मिल रही है उसमें गुणवत्ता का नितांत अभाव है। बाहरी तौर पर देखने से लगता है कि वे राजनीतिक तौर पर जागरूक हैं, लेकिन वास्तविकता इससे ठीक उलट है। उनमें से अधिकतर को माहौल ने ऐसे ठस दिमाग...

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दंगों का भारत, जिम्मेदार कांग्रेस सपा भाजपा, सभी पार्टियाँ

by– आचार्य साहिल दंगों का भारत, जिम्मेदार कांग्रेस सपा भाजपा, सभी पार्टियाँ 1. कलकत्ता दंगा (1946) सन 1946 में कलकत्ता में हुए इन दंगों को “डायरेक्ट एक्शन दिवस” के नाम से भी जाना जाता है. इसमें 4,000 लोगों ने अपनी जानें गंवाई थी, और 10,000 से भी ज़्यादा लोग घायल हुए थे. हिंदू-मुस्लिम समुदाय में होने वाली हिंसा के कारण यह दंगा हुआ 2- वाराणसी दंगा (1989) वाराणसी को आस्था का शहर माना जाता है. इस पवित्र शहर में क्रमवार 1989, 1990 और 1992 में भयंकर दंगे हुए थे. यह दंगे मुख्यत: हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच पूजा विवाद...

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किसान आंदोलनः किसान संगठनों के भीतर क्या चल रहा है?

By– ख़ुशहाल लाली और दिलनवाज़ पाशा बीबीसी संवाददाता   सरकार के साथ पाँच दिसंबर को हुई बैठक में यूनियन नेताओं ने हाथ में ‘हां या ना’ की तख़्ती लेकर स्पष्ट कर दिया कि वो तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने से कम किसी भी बात पर मानने वाले नहीं हैं. सरकार ने थोड़ा लचीलापन दिखाते हुए संशोधन की बात तो की है लेकिन क़ानून रद्द करने का कोई भरोसा नहीं दिया है. मंगलवार को किसान संगठन भारत बंद करके अपनी ताक़त दिखाएंगे और फिर बुधवार को अगले दौर की वार्ता होगी. जिसमें सरकार ने ठोस प्रस्ताव लाने का वादा...

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लव जिहाद की उन्मादी राजनीति से लव आख्यान नहीं बदलने वाले!

By- विकास नारायण राय कानून सवार लव जिहाद बनाम समाज में लव आख्यान जो वे राजनीति में देखना चाहते हैं, वही कमोबेश कानून व्यवस्था में भी करने वाले हैं। यानी हिन्दू-मुस्लिम! उनका बस चले तो एक समुदाय के अपराधियों पर सामान्य कानून लागू हों जबकि दूसरों पर, उन्हीं अपराधों के लिए, कठोरतम कानून- यूपा, रासुका, गैंगस्टर, राजद्रोह। अपराधों की इसी दूसरी सूची में अब एक और नया अपराध शामिल करने का प्रस्ताव लाया जा रहा है, जिसका नाम होगा ‘लव जिहाद’। इन दिनों दो लड़कियों की नृशंस हत्याएं चर्चा में रहीं, दोनों में हत्या का मकसद लड़की से जबरन शादी...

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