Author: Afzal Khan

इरफ़ान ख़ान को हमने वो नहीं दिया जिसके वो हक़दार थे

शशि बलीगा स्वतंत्र फ़िल्म पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए इरफ़ान ख़ान कमर्शियल हिंदी सिनेमा में किसी अजूबे की तरह थे. बॉलीवुड की दुनिया में वो ‘मिसफ़िट’ थे. एक शानदार मिसफ़िट. वो इसलिए क्योंकि इरफ़ान में किसी और बॉक्स नहीं, सिर्फ़ प्रतिभा के बॉक्स में टिक मार्क की तरह थे. प्रतिभा के अलावा इरफ़ान ख़ान के पास जो कुछ भी था, वो बॉलीवुड में उनके ख़िलाफ़ ही काम करता था. फिर चाहे वो उनका चेहरा-मोहरा हो, उनकी भाव-भंगिमा या फिर किसी आम इंसान जैसा तौर-तरीका. उनमें किसी भी तरह का कोई भड़काऊपन नहीं था और यही उन्हें सबसे अलग करता...

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गोली मारने के बाद उलटा लटका दिया गया था मुसोलिनी को

75 साल पहले 28 अप्रैल, 1945 को इटली के फ़ाशिस्ट तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी को उनकी प्रेमिका क्लारेटा पेटाची के साथ गोली मार दी गई थी. दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत में मुसोलिनी ने एक मशहूर वक्तव्य दिया था, ‘अगर मैं लड़ाई के मैदान से हटूँ तो मुझे गोली मार दो.’ मुसोलिनी ये कह कर सिर्फ़ लफ़्फ़ाज़ी कर रहे थे लेकिन जब मौक़ा आया तो उनके विरोधियों ने उनके इस कथन का अक्षरश: पालन किया. लड़ाई में शिकस्त खाने के बाद मुसोलिनी और उनकी प्रेमिका क्लारेटा उत्तर में स्विटज़रलैंड की सीमा की तरफ़ बढ़ रहे थे कि डोगों क़स्बे के...

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असली हिन्दू हृदय सम्राट …!!!!

by — अपूर्व भारद्वाज बाल ठाकरे भारत की हिन्दूत्व वादी विचारधारा के सबसे आक्रमक चेहरा थे उन्हें हिंदुत्व के कट्टरपंथी समर्थक “हिन्दू हृदय सम्राट” कहकर बुलाते थे और यह उपाधी प्राप्त करने वाले वो पहले राजनेता बने थे बाला ठाकरे का ऐसा जलवा है कि आज नरेन्द्र मोदी के तमाम हिंदूवादी दावे के बाद भी महाराष्ट्र में उन्हें हिन्दू हृदय सम्राट नही कहा जाता है 2002 के गुजरात दंगों के बाद देश की राजनीति में हिंदुत्व के दो ही चेहरे थे एक थे बाल ठाकरे और दूसरे नरेन्द्र मोदी, ठाकरे अपने ढलान पर थे और मोदी अपने उफान पर...

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क्या आप मुझे लखनऊ के नवाबों से जुड़ी मजेदार कहानी बता सकते हैं?

सतीश वर्मा, लखनऊ इतिहास में भी नवाब के चरित्र को लेकर कई किस्से मशहूर हैं. वाजिद अली शाह के विषय में एक सबसे दिलचस्प किस्सा सुनिए.1857 में अंग्रेज अवध को अपने बस में करने के लिए हमला कर रहे थे. वाजिद अली शाह अपने महल में थे. नवाब इसलिए नहीं भाग पाए क्योंकि तब महल में ऐसा कोई सेवादार मौजूद नहीं था जो नवाब साहब के पावों में जूतियां पहना सके. चूंकि नवाब साहब को किसी ने जूतियां नहीं पहनाई इसलिए वो पकड़े गए और इन्हें गिरफ्तार करते हुए कलकत्ता भेज दिया गया. ये किस्सा इतिहास में दर्ज है....

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भारत में एक वाम शासित राज्य कोरोनोवायरस के खिलाफ लड़ाई जीत रहा है

-यदुल कृष्णा जैसे ही कोरोना वायरस फैलता है, मुक्त बाजारों ने दिखाया है कि मुनाफे पर वे कैसे मानवता को विफल कर सकते हैं। कम्युनिस्ट शासित भारतीय राज्य केरल से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, जिसने वायरस से निपटने में काफी दक्षता दिखाई है। जैसा कि कोरोना वायरस के प्रकोप ने व्यापक संक्रमण और शोक के आसन्न खतरे को जन्म दिया है, दुनिया को अभी भी एक स्टैंड का सामना करना पड़ रहा है, जो खुद को ‘होम संगरोध’ के नए मानदंडों को बनाने के लिए मजबूर करता है और दुनिया भर में महामारी के रूप में घर...

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