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जेटली एक फरवरी तक न्यूयार्क से नहीं लौटे तो कौन पेश करेगा बजट ?

by –पुण्य प्रसून बाजपेयी इस बार एक फरवरी को बजट पेश कौन करेगा । जब वित्त मंत्री कैंसर के इलाज के लिये न्यूयार्क जा चुक है । क्या 31 जनवरी को पेश होने वाले आर्थिक समीक्षा के आंकडे मैनेज होगें । जिसके संकेत आर्थिक सलाहकार के पद से इस्तिफा दे चुके अरविंद सुब्रहमण्यम ने दिये थे । क्या बजटीय भाषण इस बार प्रधानमंत्री ही देगें । और आर्थिक आंकडे स्वर्णिम काल की तर्ज पर सामने रख जायेगें । क्योकि आम चुनाव से पहले संसद के भीतर मोदी सत्ता की तरफ से पेश देश के आर्थिक हालातो को लेकर दिया...

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हिंदू राष्‍ट्रवादी सत्‍ता की चुनावी सेवा का उभरता औज़ार बॉलीवुड!

By- शिशिर अग्रवाल भारत के लोग दो चीज़ों के लिए हद दर्जे तक दीवाने हैं- पहला क्रिकेट और दूसरा सिनेमा. हमारे देश में आलम यह है कि एक ओर जहाँ सचिन का सौवां शतक जल्द पूरा हो जाए इसके लिए दुआ के साथ-साथ लोगों ने व्रत रखे, तो दूसरी ओर रजनीकांत का मंदिर बनाकर हमने पूजा तक की है. मगर सचिन के छक्के हों या रजनीकांत का एक्शन, लोगों के बीच ये सब टेलीविज़न के माध्यम से ही पहुँच रहा है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा की भारतीय जनमानस में धारणाओं और विचारों की निर्मिति में टीवी...

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आर्थिक आरक्षण की सुबह का होना

by-ललित गर्ग नरेन्द्र मोदी सरकार ने आर्थिक निर्बलता के आधार पर दस प्रतिशत आरक्षण देने का जो फैसला किया है वह निश्चित रूप से साहिसक कदम है, एक बड़ी राजनीतिक पहल है। इस फैसले से आर्थिक असमानता के साथ ही जातीय वैमनस्य को दूर करने की दिशा में नयी फिजाएं उद्घाटित होंगी। निश्चित ही मोदी सरकार ने आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए यह आरक्षण की व्यवस्था करके केवल एक सामाजिक जरूरत को पूरा करने का ही काम नहीं किया है, बल्कि आरक्षण की राजनीति को भी एक नया मोड़ दिया है। इस फैसले से आजादी के बाद...

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हिन्दुत्व का विज्ञान द्वेष !!

by — मीरा नंदा (मीरा नंदा के इस महत्वपूर्ण लेख को हिंदी में पढ़वाने का श्रेय शुभनीत कौशिक को है।) हिन्दू राष्ट्रवादी आरंभ से ही वैदिक विश्व-दृष्टि और आधुनिक विज्ञान के बीच मौलिक एकता के दावे करते आ रहे हैं। अगर आधुनिक विज्ञान हमारे ऋषियों को ज्ञात वैदिक आध्यात्मिक ज्ञान के महासागर में समाहित होने वाली महज एक तुच्छ उपधारा भर है, तब तो आधुनिक विज्ञान और पश्चिमी वैज्ञानिकों को वेदों से ईर्ष्या करनी चाहिए। अगर ज्ञान की कोई एक परंपरा है जो जो दुनिया के हर कोने में व्यावहारिक तौर पर आधुनिक युग को पारिभाषित करती है तो...

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दिलीप कुमार ने कादर खान के हुनर को पहचाना तो कादर खान ने अमिताभ को अपने हुनर से नवाजा

by — पुण्य प्रसून बाजपेयी जन्म काबुल में । पिता कंधार के । बचपन मुफलिसी मे बीता । संघर्ष जिन्दगी की पहचान थी । 1973 में फिल्म दाग से फिल्मी सफर की शुरुआत हुई । पहचान डायलाग डिलिवरी की बनी । फिल्म कोई भी हो । स्किरप्ट राइटर कोई भी हो लेकिन खुद के डायलाग खुद ही लिखेगें । और डायलाग इतने असरदार की फिल्मो की पहचान ही डायलाग किसने लिखा इससे भी बनने लगी । और उस शख्स की मौत की खबर जब बरस के पहले ही दिन आई तो 70-80 के दशक में फिल्मो के शौकिनो में...

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