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पर्रीकर थे ताजी हवा के झोंकों का अहसास !

by – ललित गर्ग गोवा के मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रीकर पैंक्रियाटिक कैंसर से एक वर्ष तक जूझने के बाद देह से विदेह हो जाना न केवल गोवा बल्कि भाजपा एवं भारतीय राजनीति के लिए दुखद एवं गहरा आघात है। उनका असमय निधन हो जाना सभी के लिए संसार की क्षणभंगुरता, नश्वरता, अनित्यता, अशाश्वता का बोधपाठ है। उनका निधन राजनीति में चारित्रिक एवं नैतिक मूल्यों के एक युग की समाप्ति है। भाजपा के लिये एक बड़ा आघात है, अपूरणीय क्षति है। आज भाजपा जिस मुकाम पर है, उसे इस मुकाम पर पहुंचाने में जिन लोगों का योगदान...

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विपक्ष की एकता की स्थिति पर

by-अरुण माहेश्वरी मोदी के ख़िलाफ़ विपक्ष की एकता अभी राजनीतिक चर्चा का एक प्रमुख विषय है । कुछ राज्यों की परिस्थिति साफ़ हो चुकी है । लेकिन मूलत: उत्तर प्रदेश का मामला उलझा हुआ होने से इसमें भारी असमंजस और आधा-अधूरापन दिखाई दे रहा है । मन में यह सवाल उठता है कि मायावती क्यों आगे बढ़-बढ़ के कांग्रेस के साथ कोई समझौता न करने की बातें कह रही है ? इसमें राजनीति है या कोई दूसरी गैर-राजनीतिक बात, समझना मुश्किल है । कल ही एक ओर मायावती के वक्त के उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव नेत राम के...

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मोदी ने सचमुच राष्ट्र को शर्मसार कर दिया है!

रफाल का भूत मोदी का पीछा नहीं छोड़ रहा है, न कभी छोड़ सकता है, यह हम सब जानते हैं।‘चौकीदार चोर है’ की गूंज-अनुगूंज आगामी चुनाव में छाई रहेगी। मोदी चाहते थे इसे युद्ध के ढोल-नगाड़ों के शोर में डुबो दें, लेकिन अब वह भी संभव नहीं रहा है। खुद मोदी के सिर पर वह जिस प्रकार नाचने लगा है, इसका नमूना कल नई दिल्ली में ‘इंडिया कनक्लेव’ की सभा में देखने को मिला जब उन्होंने रफाल को याद करते हुए कहा कि -‘अभी रफाल होता तो बात कुछ और होती।’ यह बात वह व्यक्ति कह रहा है, जिसने...

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क्या पाकिस्तान मोदी को चुनाव जितवाना चाहता है?

by– प्रशांत टंडन पुलवामा आतंकी हमले की टाइमिंग हैरान करने वाली है पाकिस्तान कभी भी भारत को एक मजबूत सेक्यूलर राष्ट्र देखना नहीं चाहेगा. धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित भारत का संवैधानिक लोकततंत्र पाकिस्तान के जन्म की बुनियाद को चुनौती देता है. पुलवामा मे हुये आतंकवादी हमले की तह में भी पाकिस्तान की भारत के संवैधानिक लोकतंत्र को चोट पहुंचाने की मंशा झलकती है. लेकिन अपनी इस खीज को मिटाने के लिये पाकिस्तान किस हद तक जाएगा ये बात हैरान करने वाली है. मौजूदा हमले में पाकिस्तान के हाथ और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई की शह पर पल रहे...

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आतंकवाद और धर्म !

by – मुहम्मद ज़ाहिद इस धरती पर “आतंकवाद” नाम का जन्म देने वाला कोई मुसलमान नहीं था , वह था “वी प्रभाकरण” जो एक तमिल हिन्दू था। “लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम” अर्थात “लिट्टे” की स्थापना 5 मई 1976 में “वी प्रभाकरण” ने की जिसका उद्देश्य इसके सहारे अपने धर्म की रक्षा नहीं बल्कि हिंसक पृथकतावादी अभियान शुरू कर के उत्तर और पूर्वी श्रीलंका में एक स्वतंत्र तमिल राज्य की स्थापना करना था। आत्मघाती , फिदाईन और सोसाईड बोम्बर जैसे अविष्कार इसी वी प्रभाकरण की देन थे। लिट्टे अपने संगठन में छोटे छोटे बच्चों को सिपाही के रूप में...

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