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चतुर्वेदी या कोई गैंग भी हो सकता हे फसेबूक की जोया मंसूरी जैसी लड़कियों के पीछे!

सिकंदर हयात आने वाले समय में साफ दिख रहा हे की प्रिंट मिडिया और टेलविजन के पाठक दर्शक कम होंगे नहीं तो कम से कम बढ़ेंगे नहीं जबकि खासकर नेट पर हिंदी पढ़ने लिखने सोचने समझने बहसने वालो की तादाद बढ़ती ही जा रही हे ऐसे में व्यक्ति और समूह के स्तर पर पब्लिसिटी के लिए राजनीती के लिए हिंदी नेट पर पाठको को अपनी तरफ खींचने की खासी मारामारी और बेचैनी देखि जा सकती हे ऐसे में देखा की हिंदी सोशल मिडिया पर काफीसमय से एक ज़ोया मंसूरी नाम की आई डी से संघी बाते की जाती हे...

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70 साल के लोकतंत्र का सबसे खराब समय… न्याय की अंतिम आस अब न्यायालय नहीं, मीडिया!

अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ क्या अब भी कोई शक रह गया है कि भारत आजादी के बाद के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है ? जहां गुंडों को खुली छूट है। अपने अपराधी बचाए जा रहे हैं, दूसरे निरपराध और भले लोग भी फंसाए और बदनाम किये जा रहे हैं। संचार, विचारों और ज्ञान के प्रसार के साधनों, कानून और और न्याय के संस्थानों पर संकीर्ण आरएसएस और काॅरपोरेट परस्त लोगों का कब्जा हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट अभी तक इससे बचा था, जस्टिस दीपक मिश्र के प्रधान न्यायाधीश बनने के बाद यह कमी भी पूरी हो गयी। यह...

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बीमार अर्थव्यवस्था के लिए नाकाम डॉक्टर साबित हुए हैं मोदी-जेटली

अब यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है कि भारत की अर्थ-व्यवस्था की हालत खस्ता है। आंकड़ों की बाजीगरी से खुशफहमी पैदा करने में उस्ताद मोदी-जेटली जुगलजोड़ी भी अब भारी गिरावट के इन तथ्यों को छिपाने में असमर्थ है। नोटबंदी के तुगलकीपन के बाद भी शुरू में जीडीपी के मानदंड में हेरा-फेरी करके दुनिया की एक सबसे तेज गति से विकासमान अर्थ-व्यवस्था की चमक को कायम रखने की कोशिश की गयी थी। लेकिन बार-बार तो इस एक ही तिकड़म को दोहराया नहीं जा सकता था। 2017 की दूसरी तिमाही में जीडीपी में वृद्धि की दर गिर कर सिर्फ...

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ये सब भारत को नर्क बनाने के प्रयोग हैं !

अरुण माहेश्वरी ऐसा लगता है, जब से मोदी सत्ता में आए हैं, पूरे देश में सिर्फ एक ही काम चल रहा है — पूरे सामाजिक ताने-बाने में तोड़-फोड़ और आगे किसी भारी विस्फोट के जरिये पूरे समाज को चिंदी-चिंदी करके उड़ा देने के लिये जीवन के तमाम क्षेत्रों में बारूद बिछाने का काम । यह शासन विध्वंसों के प्रयोग का शासन बन कर रह गया है । जीवन का हर स्वरूप हमेशा अनेक तत्वों के एकीकृत रूप से ही तैयार होता है, जिसे unified multiplicity कहते हैं । यह ‘विविधता में एकता’ वाली भारत की अपनी कोई खास विशेषता...

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मुस्लिम महिलाओं के मसीहा मोदी!

by – संजय तिवारी आधुनिक युग में इस्लाम के इतिहास में ऐसा कोई मसीहा पैदा नहीं हुआ है जिसने एक झटके में मुस्लिम महिलाओं को इतनी बड़ी राहत दे दिया, जितनी भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया है। तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक और अमानवीय करार दिये जाने के बाद मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के लिए नया कानून बनाया है जिसे लोकसभा पारित कर चुकी है। इस नये कानून के मुताबिक अगर कोई मुसलमान अपनी पत्नी को तीन तलाक देता है तो उसे तीन साल की सजा हो सकती है और महिला को हक होगा...

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