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फ्रांस के 60 वर्षीय राष्ट्रपति ओलांद अपनी पहली पत्नी सेगोलीन से चार बच्चों के पिता हैं। पिछले काफी समय से वे महिला पत्रकार बेलेरी के साथ लिव इन रिलेशनशिप में थे। इस साल जनवरी में ओलांद ने पत्रकार से नाता तोड़ दिया और पिछले दिनों खबर आई कि अब एक तीसरी महिला, अभिनेत्री जूलिया गाएट उनके बच्चे की मां बनने वाली हैं और वे उससे शादी भी करने वाले हैं। ओलांद से पहले के राष्ट्रपति सरकोजी (उम्र 59 साल) दो पत्नियों के बाद जीवन में आई सुपर मॉडल कार्ला ब्रूनी से एक बच्चे के पिता बने थे। ओलांद और सरकोजी से पहले भी फ्रांस के अधिकतर राष्ट्रपतियों को हम रसिया राष्ट्रपति कह सकते हैं।

दो बच्चों के पिता और 62 साल के हो चुके रूसी राष्ट्रपति पुतिन एक 30 साल की जिम्मास्ट एलिना गाबाएवा के प्रेमपाश में जकड़े हुए हैं। ज्ञात रूप में मोनिका लेविंस्की और अज्ञात रूप में पता नहीं कितनी महिलाओं के साथ निकटता के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन (उम्र 68 साल) आजकल क्रिकेटर शेन वार्न से अलग हुई ब्रिटिश अभिनेत्री एलिजाबेथ हर्ले के साथ देखे जा रहे हैं। इटली समेत कई अन्य देशों के बुजुर्ग राष्ट्राध्यक्ष भी इसी प्रकार जीवन के संध्याकाल में बेकाबू होते रहे हैं और हो रहे हैं।

ये तो दुुनिया के सबसे ताकतवर लोगों की बातें हैं। उनसे नीचे के स्तर पर भी देश और विदेश में तमाम राजनीतिज्ञ, उद्योगपति, साहित्यकार और अन्य क्षेत्रों के बुजुर्ग बिस्तर पर बहुत सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसके लिए वे अपने पद की ताकत का तो इस्तेमाल कर ही रहे हैं, यदि इतने पर भी बात नहीं बन रही तो जोर जबरदस्ती पर उतर जा रहे हैं। अपने यहां बुजुर्ग न्यायाधीश तक भी इस काम में पीछेे नहीं हट रहे और यहां महिला जज तक का भी शोषण हो जा रहा है।

अब थोड़ा और नीचे यानी सामान्य बुजुर्गों की कहानी सुनिए। मेरे एक मित्र के रिटायर्ड अधिकारी और विधुर पिता ने एक दिन बेटे को बुलाकर स्पष्ट कहा कि उन्हें आगे के जीवन के लिए एक महिला की जरूरत है। वह दोबारा शादी करना चाहते हैं। प्रगतिशील मित्र ने यह सोचकर सहमति जता दी कि शायद पिता बहुत अकेलापन महसूस कर रहे हैं। बुजुर्ग पहले से ही तैयार थे, लिहाजा वे महिलाओं से मिलने लगे। अखबार में विज्ञापन देने लगे।

इस बात को आज पांच साल हो गए हैं। शादी तो नहीं की, मगर बुजुर्ग की कई महिला मित्र बन गई हैं। आसपास घरों में काम करने वाली एक-दो महिलाएं भी इनमें शामिल हैं। आगे कोई जिम्मेदारी नहीं है, अच्छी पेंशन मिलती है, लिहाजा बिना किसी काम के भी बुजुर्ग के पास तीन मोबाइल फोन हैं। पूरा दिन महिलाओं से बतियाने में बीतता है। बीच-बीच में कुछ दिन के लिए घर से गायब भी हो जाते हैं। जब कोई रिश्तेदार मिलने आता है तो बैठक में कमर झुकाकर, कुछ लंगड़े से, असहाय बनकर जाते हैं। रिश्तेदार के जाने के बाद “बुड्ढा होगा तेरा बाप” की शैली में सड़क पर चलते नजर आते हैं।

बेशक, इन उदाहरणों से हम सारे बुजुर्गों को इस श्रेणी में नहीं रख सकते, मगर फिर भी यह तो कह ही सकते हैं कि हवा कुछ बदली सी लग रही है। हो सकता है कि उच्च स्तर पर यह हवा पहले से ही बह रही हो, मगर इसे पूरी तरह नीचे आए ज्यादा समय नहीं हुआ है। हालांकि जानकार लोग पहले से ही कहते रहे हैं कि 60 साल की उम्र के आसपास आदमी का मन कुछ डांवाडोल जरूर होता है। यानी यह फितरत आदमी में पहले से मौजूद है और विदेशों में यह अजूबी चीज भी नहीं है, लेकिन अपने देश में पिछले एक-डेढ़ दशक से इस ट्रेंड का काफी विस्तार देखने को मिल रहा है। बुजुर्ग पुरुष अपने से उम्र में काफी छोटी महिलाओं से विवाह कर रहे हैं, बिना विवाह सेक्स संबंध बना रहे हैं और दुर्भाग्य से बच्चियों, महिलाओं के साथ जोर-जबरदस्ती में भी लिप्त पाए जा रहे हैं।

यह बदलाव कैसे हुआ? कुछ कारण साफ हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति का विस्तार, इंटरनेट और खासकर टेलीविजन का बढ़ता प्रभाव, जिसके सामने आज थोड़े से भी संपन्न बुजुर्ग का अधिकांश समय गुजरता है, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार, औसत आयु में वृद्धि से बुजुर्गों की संख्या में बढ़ोतरी और सबसे अंत में कुदरत और विज्ञान द्वारा भी इनकी मदद करना।

कुदरत ऐसे मदद करती है

बायोलॉजिकली एक पुरुष किसी भी उम्र में संतान पैदा करने की क्षमता रखता है। हालांकि महिलाओं में मीनोपाज के बाद यानी 45-50 की उम्र के बाद गर्भधारण नहीं हो पाता है। संतान पैदा करने की क्षमता का यह अंतर इसलिए है क्योंकि कुदरतन पुरुष में शुक्राणु जीवनभर बनते रहते हैं। उनमें कमी आ सकती है, पर उनका बनना बंद नहीं होता, जबकि एक महिला तय संख्या में अंडाणु लेकर पैदा होती है। वे अंडाणु पैदा होने के बाद उसके शरीर में नहीं बनते हैं। पुरुष में चूंकि शुक्राणु जीवनभर बनते हैं, इसलिए अगर स्वास्थ्य ठीक है तो वह किसी भी उम्र तक सेक्स का आनंद उठा सकता है। महिला भी मीनोपाज के कारण केवल गर्भधारण करने में ही विफल होती है, सेक्स का आनंद वह उसी तरह से सकती है जैसे मीनोपाज के पहले लेती रही है, लेकिन एक उम्र की एक सीमा तक ही।

वैसे जिस प्रकार महिलाओं में उनके सेक्स हार्मोन एस्ट्रोजन का स्तर घटता है, उसी तरह पुरुषों में भी उम्र के साथ उनके सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन या एंड्रोजन का स्तर घटता है, पर इससे वह महिला की तरह संतानोत्पत्ति में अक्षम नहीं बनता। इसके अलावा महिलाओं में एस्ट्रोजन एकदम से ही धोखा सा दे जाता है, जबकि पुरुषों में एंड्रोजन बहुत धीमे-धीमे कम होता है।

इसके बावजूद पुरुष में उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के मीनोपाज जैसे लक्षण दिखते हैं। जैसे मूडी होना, जल्द थकना, डिप्रेशन, सेक्स की इच्छा में कमी, वजन बढ़ना, हड्डियों का कमजोर होना आदि। लेकिन पुरुषों में ये लक्षण दिल, थायरॉयड, लिवर या किडनी में दिक्कत होने पर भी दिखाई दे सकते हैं। यानी पुरुष अगर सही जीवनशैली जी रहा हो और बीमारियों से दूर हो तो वह बुढ़ापे में भी आसानी से सेक्स का आनंद उठा सकता है।

विज्ञान ने और ज्यादा समर्थ बना दिया

कुदरत ने पुरुष को जीवनभर के लिए शुक्राणु दे दिए (स्वस्थ रहने की अवस्था में) तो विज्ञान ने उसके यौनांग में ढीलेपन की समस्या को दूर कर दिया। वियाग्रा और उसके बाद आईं इसके जैसी ही अनगिनत देशी-विदेशी दवाइयों ने पुरुषों में और ज्यादा जोश भर दिया। इन दवाइयों के साइड इफेक्ट (दिल पर असर, आंखों की रोशनी कम होना, दवा के बिना सहवास करने में विफल रहना आदि) सामने आए तो विशेषज्ञ वैक्यूम थिरेपी नाम की काफी पुरानी खोज नए ढंग से सामने आ गई।

उल्लेखनीय है कि वैक्यूम थिरेपी में एक पंप और सिलेंडर की मदद से पुरुष के यौनांग में बाहर से ही रक्त का प्रवाह भेजने में सफलता पा ली जाती है। जब रक्त से भरकर यौनांग पूरी तरह कड़ा हो जाता है तो इसके आधार वाले स्थान पर एक प्रवाहरोधी रिंग या बैंड लगा दिया जाता है, जिससे रक्त यौनांग से निकलकर शरीर में वापस नहीं जा पाता। इसके बाद पंप और सिलेंडर को हटाकर आदमी आसानी से सहवास कर लेता है। देश-विदेश में बुजुर्ग और वे पुरुष, जिनके यौनांग में ढीलेपन की शिकायत रहती है, आजकल इस थिरेपी का काफी इस्तेमाल करने लगे हैं। इस उपकरण को आदमी खुद आसानी से इस्तेमाल कर लेता है और इसका साइड इफेक्ट भी नहीं है। यानी कुदरत और विज्ञान भी पुरुषों का खूब साथ दे रहा है।

बहरहाल, बुजुर्गों के इस आनंद में बाधा डालने का लेखक का कोई इरादा नहीं है। अंत में यही कहना उचित रहेगा कि हे आधुनिक बुजुर्गो, आपको आधुनिक जीवन का यह आनंद मुबारक हो। आपको अपना जीवन आनंदमय ढंग से जीने का पूरा हक है। आप इसका आनंद उठाओ, मगर आपसे यह गुजारिश जरूर है कि कृपया, बच्चियों को बख्श दो, किसी महिला को जोर-जबरदस्ती हासिल मत करो। जगहंसाई न कराओ। बाकी आप खुद समझदार हो….