अफ़ज़ल ख़ान

तब्लीगी जमात मुसलमानो को नाकारा बना रही है !

Category: अफ़ज़ल ख़ान, सामाजिक 22657 views 146

tabligi-ijtema

तब्लीगी जमात जो के अल्लाह की गाय के नाम से मशहूर है. हर साल लाखों की संख्या में लोग तबलीग़ी समारोहों में भाग लेते हैं, तो यह लाखों लोग पूरे देश में फैल जाते हैं और धर्म की हिदायत करते हैं. पिछले पच्चीस से तीस वर्षों में यह संख्या कुछ हजार से बढ़कर करोडो में पहुँच गयी है और इस में इजाफा ही होता चला जा रहा है . इन का मुख्य केंद्र भारत , पाकिस्तान , बांग्लादेश है मगर अब कुछ विदेशो में भी इस का विस्तार हो चूका है . हाँ, यह एक बहुत बड़ा लेकिन है. मगर पिछले पच्चीस, तीस साल में प्रचार घटना में जितना इजाफा हुआ है, उतना ही इन देशो में मुसलमानो के अंदर में अत्याचार, उत्पीड़न, अन्याय और भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है. ऐसा क्यों है? इसका जवाब प्रचार करने वालों के पास भी नहीं है. (मासवा इसके कि इसकी वजह भी अमेरिका और इजरायल की साजिश में खोज हो).

मुझे उन प्रचार में मुख्य समस्या यह दिखती है कि उनका सारा जोर पूजा या इबादत की हिदायत पर होता है. समस्याओं का सामना करने की बजाय उनके पास हर समस्या का एक सरल सा जवाब है: “धर्म से दूरी”. और धर्म से मतलब दो, तीन बातें हैं: नमाज़ पढ़ना, कुरान की तिलावत करना, दाढ़ी रखना, सलवार टखने ऊपर बांधना आदि.उन का कहना के सब अल्लाह के सहारे छोड़ दो , जो भी हो ग अल्लाह करे गा बस हम अल्लाह की इबादत करते रहे , मगर इन को कौन समझाए के अल्लाह ने इंसान को सिर्फ इबादत के लिए पैदा नहीं किया है बल्कि अल्लाह ने सांसारिक जीवन भी बिताने को कहा है . (यहां यह सवाल भी उठता है कि पश्चिमी देशों में धर्म से दूरी के बावजूद इतनी रिश्वत सताने क्यों नहीं, वहाँ अनाथों और विधवाओं और गरीबों की संपत्तियों पर लोग कब्जे क्यों नहीं करते ?)

ये लोग आम सीधे सादे आदमी को पकड़ कर उनकी सारी उपस्थिति चीजों और अधिनियमों के बारे में तो पढ़ा / बता देंगे, लेकिन जो लोग समाज में त्रुटियाँ फैला रहे हैं उनके पास जा कर कोई प्रचार नहीं करे गे.या कभी किसी ऐसे व्यक्ति के पास प्रतिनिधिमंडल लेकर नहीं जाएंगे जो किसी अनाथ की संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रखा है, न कभी किसी अधिकारी के पास जाएगा जो भ्रष्टाचार में लिप्त हो, या किसी ऐसे व्यक्ति के पास नहीं जाएंगे जो क्षेत्र में drugs का धंधा रहा है. पता नहीं ऐसे समाज विरोधी तत्व प्रचार करने की हिम्मत ही नहीं होती या जरूरत नहीं महसूस की.

लेकिन अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि ये लोग आम आदमी “खसी” बना देते हैं यानी इसे ऐसा कर दीतेहीं कि देश व राष्ट्र के किसी काम का नहीं रहता. हर बंदे के हाथ में तस्बीह देकर मस्जिद में बिठा देते हैं. इस दुनिया में जो कुछ हो रहा है उसे छोड़ो, भविष्य की चिंता करो. भाई क्या ऐसा नहीं हो सकता कि मेरी दुनिया भी सनोवर जाए और इसके बाद भी. क्या धर्म हमें इस दुनिया में होने वाले अत्याचार और उत्पीड़न से आंखें बंद कर लेना सिखाता है. अगर नहीं तो इस देश में दैनिक आधार पर होने वाली हत्या और भंग के खिलाफ यह लाखों तबलीगयों किया (शायद बीस बीस लाख सम्मेलनों में रिक़्क़ते उच्च स्वर में भगवान से दुआ की हैं, मगर कोई उन्हें बताए समाज दुआओं से नहीं सधरतेोवरना हज़रत मोहम्मद भी गुफा हुर्रा में बैठ कर दुवा करते, वहां से नीचे आने की क्या जरूरत थी).

असल में तब्लीगियो ने आम आदमी को अपने जिम्मेदारियो सांसारिक दायित्वों से अनजान कर देश व राष्ट्र का बेड़ा गर्क कर दिया है . मगर तबलीगयों के अपने प्रचार में यह खुला विरोधाभास नजर नहीं आता. वे हर किसी को अपने साथ प्रचार में ले जाने पर ज़िद हैं.खुद तो अपनी जिम्मेदारियों से बचते है और दूसरे को भी इसी राह पे लगाने की कोशिश करते है. सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति अपना घर बार, पत्नी बच्चे छोड़कर साल भर, तीन महीने या चालीस दिन के लिए दूसरों को सीधा रास्तादिखाने निकल पड़े और इस बीच अपने घर वाले भटक जाएं तो क्या तीर मारा. पत्नी बीमार बच्चे को ले करकहाँ मारी मारी फिरे होगी जिसे पता ही नहीं कि अपने शहर अस्पताल किधर है और जिसे आप पुरुष चिकित्सक से मिलने नहीं देते कि वह नामहरम है. यह कौन समझेगा और समझाए कि जिस व्यक्ति पर चार पांच लाख रुपये का उधार हो वह अपनी दुकान बंद करके या नौकरी छोड़ कर प्रचार न निकले बल्कि पहले अपनी जिम्मेदारी पूरी करे, फिर दूसरों को सुधार करे.

तबलीगयों से आखिर में यही कहना चाहू गा के कि आप अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी करते हुए समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ संगठित तरीके से संघर्ष करे. इससे बढ़कर न तो धर्म की सेवा कर सकते हैं और न ही बढ़कर कोई अल्लाह की पूजा हो सकती है. वरना चुपचाप मस्जिद के किसी कोने में बैठकर तस्बीह घुमा घुमा कर अपनी स्वर्ग पक्की करते रहें और बाकी लोगों को नाकारा न बनाये खास तौर से समाज के नवयुको को “खसी” न करें, उन्हें समाज में अपना योगदान करने दें.

मूल लेखक — वसतुल्लाह खान

Related Articles

146 thoughts on “तब्लीगी जमात मुसलमानो को नाकारा बना रही है !

  1. सिकंदर हयात

    पिछले दिनों मेरे बड़े भाई की शादी थी तो शादी के अगले दिन सब रिलेक्स बैठे हुए थे मेने तब सभी आयु वर्ग के लोगो से सवाल पूछा की क्या आप लोगो ने कभी कही कोई बुरा बईमान मक्कार गद्दार गुंडा बदमाश मुसलमान कोई ऐसा देखा हे जो इन तब्लीगियो की संगत में आकर बदल गया हो सारी बुराइया जिसने छोड़ दी हो हे कोई एक केस भी ऐसा ? सबने सर्वसहमति से कहा नहीं हमने कभी नहीं ना देखा न सुना——————- ?

    Reply
    1. wahab chisti

      लीजिये हयात जी ये लेख और आप का कमेंट साबुत करता है के आप और अफज़ल साहब इस्लाम और मुस्लमान के दुश्मन है. आप को शायद मालूम नहीं है के अगर तब्लीगी जमात नहीं हो ग तो भारत में इस्लाम भी नहीं हो गए . आज इन्ही लोगो की वजह से लोग मुस्लमान हो रहे है . आप लोगो को यहूदियों और पश्चिम देशो से पैसा मिलता है इस्लाम को बंदनामम करने के लिए . तौबा कीजिये और इस्लाम में फिर से कलमा पद कर मुस्लमान बन जाइए नहीं तो मरने के बाद जहन्नम में जलने के लिए तैयार रहे.

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        sikander hayat
        October 24,2014 at 06:40 PM GMT+05:30
        अफज़ल भाई और पाठको कई दिन हो गए ये वहाब साहब हम पर इस्लाम और मुस्लिम विरोधी लेखन का आरोप लगा रहे हे अब में इनसे दस दफे कह चूका हु की हमारी लाखो में से कोई एक दो भी लाइने उठाओ कॉपी पेस्ट करो फिर तर्क देकर समझाओ की कैसे वो लाइने इस्लाम या मुस्लिम विरोधी हो गयी कैसे दिखाओ मगर ये दिखाते ही नहीं हे दिखा भी नहीं सकते क्योकि इन्हे पता हे की इस्लाम तो क्या हमने कभी भी किसी की भी आस्था के खिलाफ एक शब्द भी न लिखा हे कभी न लिखेंगे हम धर्म मज़हब पर नहीं इंसानी फ़ितरतो और जमीनी हालात पर लिखते हे लेकिन वहाब भाई जैसे लोग को बात समझ ही नहीं आती —– ? क्या किया जाये ऐसी मानसिकता का ?

        Reply
        1. amir

          desh k bare me b soch mgr kuch apni alhirat k baare.me b soch aur jitna piddi sa tera dimag h tu yhi soch skta h.. khne ko to mukhtar abbas nkwi aur shahnawaj hussain b khud ko musalmaan khte h… tm jaise hi h wo b

          Reply
        2. naseebur rahman

          Aap ka kehna sahi hai, jama’at mein jaana farz nahi hai, lekin apne maan baap, bhai bahan , biwi or bachhon ki jo zimmedariyan Alla ta,ala ne batai hain wo farz hain. Pehle wo zimmedariyan nibhayen jo farz hain.

          Reply
        3. Shafiq Ahmed

          you don’t anything they are spending there time and money they are not forcing you they teach us good things it’s your wish if you agree do it otherwise forget.

          Reply
      2. afzal khan

        असल में वहाब साहब जैसे बेवकूफ मुसलमानो की वजह से ही आज इस्लाम का ये हाल हो रहा है.अब मुस्लमान सिर्फ फतवा देने का ही खेल खेलते है लेकिन समाज और देश के बारे में कोई नहीं सोचता . आज इतने फिरके इस्लाम में हो गए है उतने फिरके और किसी धर्म में है ही नहीं . वहाब साहब को उन के सोच पे ही छोड़ दिया जाये तो बेहतर है —–

        Reply
    2. Mohd. Arqam

      Hazrat me aapko Kai ese logo se milwa bhi dunga or baat bhi Kara dunga personally…. Vese me bhi unhi gunaahgaaro me se ek hu…..

      Reply
    3. amir

      aur han Allah ka shuqr h k usne mje tbleeg me lagaya aur tbleeg se hi mje pdhne ka jajba b mila aur Alhamdulillah aaj MBBS kr rha hun..

      Reply
    4. amir

      wahan sb tmhare jaise hi log honge sb jo tableeg me nhi gye lekin kisi aur k khne pr tableeg walo se jaati dushmani rkhte h..

      Reply
    5. sajid

      assalamuwalaikum , janab aesi baat kahi hai aapne ki hansi ruk he nahin rahi mujh se Milo bahut se dikha dunga juari sharbi ismekiye Jo is tabkeegh ki barkat se sudhar chuke hain …..

      Reply
    6. Mohammad ismailkhan

      Tum jante kya ho ayyasi key Siva 40 din nikl kar dehko

      Reply
    7. Abrar

      Agr Apne mount everst ni dekha to iska ye mtlb to ni hua ki mount everest nhi ha ?? Wahi kuan wala medak wali bag ho gae…kbi kuen se bahir nikal kar dekho bhai uske bahir b dunya ha aur bht bari dunya ha.. Musalman uslye tabah aur barbad ho rha q ki wo apne NABI (P.B.U.H) rasta chor kr gairon ka rasta pkr lia aur ek group society m aman chain ka fqr le kr chal rhi to kuch log ab usi group ke piche pare wah bhai gandagi b failao aur koi saf karna chahe to usy saf b na krne do… ALLAH hm sb ko hidayat de AMEEN

      Reply
  2. सिकंदर हयात

    नेहाल सगीर साहब कौन हे में नहीं जानता मगर उन्हें और उनके संपादक जी से रिक्वेस्ट हे की गौर से देख ले ये पाकिस्तानी लेख हे जिन्हे अफज़ल भाई जो दुबई में रहते हे वो अनुवाद करते हे और यहाँ हिंदी में पेश करते हे इनके बीच में में कहा से आ गया ? में तो दिल्ली रहता हु मुज्जफरनगर का सुन्नी सय्यद हु और हिंदी का छूटभय्या लेखक हु लेकिन दो चार लोग पत्रकारिता लेखन में हमें भी जानते हे 20 – 25 लेख और व्यंगय हमारे भी आपकी दुआ से प्रकाशित हो चुके हे फिर आपको कौन सी आकाशवाणी सुनाई दी थी पिछली बार जो आपने झठे इलज़ाम लगाते हुए फिलीस्तीनियों का मूल हत्यारा हमास हे का ” क्रेडिट ” http://epaper.azizulhind.com/archive.php?arc=2014-08-17&newsId=7184 मुझे दे दिया था मुझे तो उर्दू आती तक नहीं हे वो तो मेरे कज़िन ने बताया की उर्दू अखबार अज़ीज़ुल हिन्द में मेरे बारे में क्या क्या छपा हे दोबारा ऐसा मत करना

    Reply
    1. abdul nasir

      Upar me Jo mazmoon likha hai mere khayal hai likhne wale ko tablighi jamat Ke bare me bahut hi adhuri jankari hai agar unko kuchh bhi maloom hota to kuchh khule zehan Se likhpate ya mujhe lagta hai ki zati ekhtelaf ki bunyad par likha gya hai warna is jamat ne Jo kaam kiya hai aaj Ke time me kisi bhi jamat ya tanzeem Se ye ummid nhi lagai jasakti

      Reply
      1. afzal khan

        जनाब आप को सब से पहले में बता दू के में फिरके में पड़ता ही नहीं और में कई बार तब्लीग में गया भी हु और इस लेख में बुराई नहीं की गयी है बल्कि बताने की कोशिश की जा रही है के तब्लीग दुनिया से आदमी को एक दम अलग थलग कर देना चाहते है . उन्हें लोगो को दुनिया की अहमियत के बारे में बताना चाहिए

        Reply
        1. nafees

          Bhai aap dunia me kitne din raheng ……to duniya k baare me samajhna ya samjhana chahiye ki baat bata rahen hain

          Reply
          1. afzal khan

            जनाब अल्लाह ने फिर दुनिया क्यों बनायीं —- दिन के साथ दुनिया को भी ले कर चलना है और सब के हक़ूक़ को भी पूरा करना है …

        2. Shakir

          Lagta he aapko is duniya hi me rehna he aur aapko tableegh jamaat ke baare me bilkul bhi maaloom nahi he mr. Warna aap itna bewaqoofana lekh nahi likhte. Lagta he Aapka talluk anti tableegh se he. Agar tableegh ke baare me janna chahte ho to bahar nikal kar survey karo phir pata chal jayega.

          Reply
          1. afzal khan

            शाकिर साहब

            में कई बार तब्लीग में गया हु – मुझे अंधभक्ति नहीं आती , तब्लीग काम सही कर रही है मगर कुछ खामिया है जो सुधारनी चाहिए . किसी को चाहने का मतलब नहीं है के आप अंधे भक्त हो कर उस की कमिया की भी तारीफ़ करे–

        3. k c khan

          ye kaunsa tarz e tahrer hai nishandehi karne ka ki ( tabligi jamat musalmano ko nakara bana rahi hai ) is andaz se lag raha hai ki koi zati dushmani hai jamat walon se

          Reply
    2. rahil khan

      Bhi. Sahib nhi. To agar tablik Jamat Nhi hotee
      To adee sae Jada saranbhi hotee.
      Mere Bhi…..

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        राहिल खान अहसान अली और इस लेख के कई नए पाठको का बहुत बहुत इस्तकबाल हे जो बाते आप लोगो ने कही उनसे हम भी गाफिल भी नहीं हे ये सब हम भी समझते हे इसलिए इस तरह के लेख भी लिखते हे http://khabarkikhabar.com/archives/1269 सही हे . लेकिन साथ साथ मज़हब या आस्था की आड़ में दुनियावी मज़े लूट रहे और फालतू के क्लेश करवा रहे लोगो के खिलाफ लेखन प्रचार हर हाल में जारी रहेगा

        Reply
  3. farhan khan

    लेख में शब्दों के चयन से काफ़ी कुछ साफ़ होता चला गया, बाक़ी कुछ कहने की ज़रूरत नहीं,, लेखक को एक मशवरा के अपने संस्कारों पे एक नज़र डाले ….

    Reply
  4. तब्लीगी

    ये कहना बिलकुल ग़लत होगा की तब्लीगी जमात लोगो को नकारा बना रही है!
    अगर ऐसा है तो साउत आफ्रिका के हाशिम आमला को अब तक सन्यास ले लेना चाहिए था, या फिर ऐसे कई पाकिस्तानी खिलाड़ी जैसे शाहिद अफ़रीदी! अगर घर बैठे कुछ दीन की बात तो दूर दुनिया का कोई हुनर भी नही सीख सकता फिर अल्लाह ने जिस दीन पर दुनिया और आख़िरत की कामयाबी रखी है वो घर बैठे या बिना मेहनत की कैसे सीख लेगा! बच्चो को स्कूल हॉस्टिल और कॉलेज भेजने मे गर्व महसूस होता है मदरसा या मस्जिद भेजने मे शरम महसूस होती है! अगर इंसान खुद अपनी औलाद को दुनिया के साथ दीन की पढ़ाई कराए तो तब्लीगी जमात वालो को कौनसी तनख़्वा मिल रही है जो तुम्हारे घरो के चक्कर लगाए!
    रही बात नकारा बनाने की तो ऐसे हज़ारो लोगो है जो तबलीग़ भी करते है और बिज़्नेस या जॉब भी करते है!
    घर को छोड़कर बोवी बच्चो को छोड़कर जाने की बात तो हज़रत इब्राहिम अलेहि सलाम ने अपने बीवी बच्चे को अकेला जंगल मे छोड़ दिया फिर तो वो भी गुनेहगार हो गये दीन के लिए अल्लाह के रसूल ने और सहबा ने हिजरत की अपने घर को छोड़ा बीवी बच्चो को छोड़ा किस के भरोसे? उनके घर छोड़ने की वजह से दीन ज़िंदा है! और कितने चोरी खून करने वाले इस मेहनत मे लगे! नोजवानो की इबादत अल्लाह को ज़्यादा पसंद है बूढ़े के मुक़ाबले!
    इसलिए वो इस मेहनत मे लग रहे है! और देश की बेरोज़गारी भ्रष्टाचार इस्लामी क़ानून से सुधरेगा काफिरो के क़ानून से नही!

    Reply
    1. afzal khan

      जनाब आप एक भी इस्लामी मुल्क का नाम बता दीजिये जहा इस्लामी क़ानून है वह मुल्क के शान्ति है और तरक्की है इस के विपरीत उरोप, इंग्लॅण्ड और अमरीका देखिये कितनी तरक्की पे है और यहाँ इंसानियत भी है और मुस्लिम देशी में मुस्लमान एक दूसरे को क़तल कर रहे है . प्लीज अब मत कहिये ग के अमरीका और इजराइल की साजिश है.

      जनाब आप को सब से पहले में बता दू के में फिरके में पड़ता ही नहीं और में कई बार तब्लीग में गया भी हु और इस लेख में बुराई नहीं की गयी है बल्कि बताने की कोशिश की जा रही है के तब्लीग दुनिया से आदमी को एक दम अलग थलग कर देना चाहते है . उन्हें लोगो को दुनिया की अहमियत के बारे में बताना चाहिए

      Reply
      1. तब्लीगी

        मैने भी इस्लामी क़ानून के बारे मे बात की है न की मुस्लिम देश के! कितने मुस्लिम देश है जो इस्लाम के मुताबिक चलते है या वहा इस्लामी क़ानून है! कई मुस्लिम देश विकसित है और वहा शांति भी है! देखने का नज़रिया है बस!
        अमेरिका और इंसानियत की तो बिल्कुल भी बात ना करे!
        जो मुस्लिम विरोधी है और मुस्लिम देशो पर और उनके संसाधन पर क़ब्ज़ा करना चाहता है उसे आप शांति पसंद बोल रहे हो!
        दुनिया की क्या अहमियत जिस पालनहार ने खुद क़ुरान मे कह दिया दुनिया की कीमत मच्छर के पर के बराबर भी नही है! उस दुनिया के पीछे क्यू भगा जाए?

        अल क़ुरान : और दुनिया की ज़िंदगी तो खेल और तमाशा है और आख़िरत का घर उन लोगों के लिए बेहतर है जो परहइज़गार हुए, क्या तुम नही समझते.
        सुराह अल-अनाम, (6) , वर्स #32

        दुनिया के मज़े तो काफिरो को लेने दो!
        अल क़ुरान : काफिरों को दुनिया की ज़िंदगी भली लगती है और वो उन लोगों का मज़ाक़ उड़ते हैं जो ईमान लाए हालाँकि जो लोग परहइज़गार हैं वो क़यामत के दिन उनसे बालतर होंगे और अल्ल्लह जिसे चाहे बे हिसाब रिज़क़ देता है
        अल क़ुरान, अल-बक़रा, चॅप्टर #2, वर्स #212

        अल क़ुरान: माल और औलाद तो दुनिया की ज़िंदगी की रोनाक़ हैं और तेरे रब के यहाँ बाक़ी रहने वाली नेकियाँ सवाब और आख़िरत की उम्मीद के लिहाज़ से बेहतर हैआल क़ुरान , सुराह अल कहफ़ (18), 46

        Reply
        1. सिकंदर हयात

          ” दुनिया के मज़े तो काफिरो को लेने दो! ” आपकी बात सही हे मगर क्या हम इस जमीनी सच्चाई से आँख मूँद ले जरा पता कर ले उपमहादीप में साठ करोड़ मुस्लिम हे हमारे धार्मिक और राज़नीतिक रहनुमाओ की जिंदगी पता कर लीजिये देख लीजिये कितने ही करोड़पति अरब पति हे हे दुनिया की ऐसी कौन सी ऐसो आराम की वस्तु हे जो इन लोगो के घरो में नहीं हे जाकर पता कर लीजिये”’ मुस्लिमो को आज आतमनिरीक्षण कि सख्त जरुरत हे भाई एक उद्धरण देखिये कि आज जब केजरीवाल कि ईमानदारी और सादगी कि चर्चा हो रही हे तो दूसरी पार्टियो के भी ईमानदार और सादगी पसंद नेताओ के बारे में यहाँ भी बताया गया जेसे कि माणिक सरकार जयोतिबासु ममता बनर्जी आदि अफ़सोस कि 1 भी मुस्लिम नेता का नाम नहीं था ————जारी ”(Hindi Jadeed को जवाब )- sikander hayat
          December 28,2013 at 01:01 AM GMT+05:30
          मुस्लिम नेताओ का ही हाल देखिये इस्लाम सादगी की बात करता है मगर अफ़ज़ल भाई उपमहाअदीप मे शायद कोई मुस्लिम नेता आएसा नही है जिसकी सादगी के किस्से मशहूर हो दूसरी तरफ ममता केजरीवाल माणिक सरकार ज्योतिबासू कुशभाऔ ठाकरे ए के आंटोनी गोविंदाचार्य ई के नयनार बुधदेव भट्टाचार्य जॉर्ज फ़र्नाडीस मधु लिमये की जीवनशेली पता करे —

          Reply
    2. Mujahid Khan

      अरे भयेी कुच्ह तो देीन क मुतालअ कर्लो आल्लह के रसोूल ने हिज्रत आल्लह के हुक्म से कि थइ और इब्रहेीम अ.स् ने अप्ने लख्ते जिगर को और अप्नि बिबि को आल्लह के हुक्म से च्होद था अप्नि मर्झि से नहि.

      Reply
    3. tauheed

      Allah hiddayT de unlogo ko no Islam mein firko ki baat karte hai…Islam Quran or hadees s jaane…islam ko nabi k zamane s failayA ja raha h….allah s mohabbat karo duniya apne aap sudhar jayegi

      Reply
  5. Rajesh Kumar

    बडिया लिखा लेकिन ईनलोगो ने दिमाग की सारी खिड़की दरवाजे हटा कर दीवार बना दी है धरम की

    Reply
    1. afzal khan

      लेख में सही बात बताने की कोशिश की गयी है मगर नहीं समझने वाले कभी भी इसे समझ नहीं सकते .लेख पसंद करने के लिए धन्यवाद.

      Reply
  6. Samir

    Tablighi Jamaat is not a Sunni (Sufi) based organization. It is a wahhabi based ideology organizaton. Sufis are wise and have more knowledge of islam than wahhabi/ deobandis. The true path of Islam is only a sufi based ideology. Therefore most of the world like sufis but not wahhabis.

    Reply
  7. jems goa

    बात तो आपने सही कही है पर आज का मुसलमान जो मदरसे से पढ़ा हुवा है वो मोलवी का कहा हुवा गलत भी आंख मिंच कर मानता है पर आपकी कही सही बात कभी नही मानेगा

    Reply
  8. इंतज़ार खान काकड़

    शायद मुसलमानों के पिछड़े होने का एक कारण ये जमाते भी है।

    Reply
    1. IRFAN MANSURI

      जि बिल्कुल नहि, तह्किक करोगे तो पता चलेगा कि ये जमात के तुफेल हि अल्लह ने इसलाम व मुस्लिम सर बुलन्दि अता कि हे.

      Reply
  9. m q alvi

    pagal pan ki baat hai yeh.deen or namaz agar zinda hai to tableegh se hai.agar aapko pasand nahi to wo alag bat hai.lekin aesa gumrah karne wala msg mat karo. pl.

    Reply
  10. sohail siddiqui

    Kis ne likha hai Yeh , uss se poocho ki namaaz ka Tariqa yaad hai Ki kis tarah Padhi Jaati hai , namaaz Ke kya faraaiz hai , Wuzu me Kitne Farz hai , ghusal kaise Hota hai , napaki , Aur napaki kaise door hoti hai … Agar usse pata bhi hai toh baaqi logon ko maaloom hai kya , kisne bola ki tabligh waale bahar jaakar islam ka prachaar karte hai … Hum uss level pai hai hi Nahi jo kisi ghair Muslim Ko jake prachaar kar sake …Jamaat mai jaakar hum apni namaaz Ko durust karte hai ,apne akhlaq ko nabi ( saw) Ke tareeqa Ke according seekhte hai , sadqa, ikrame Muslim , Ikhlase niyat Ke baare mai jaante hai …. Kaba kissi general insaan ne kitni Baar Aalim Ke pass jaakar poocha in Sab baton ko … Likhne se pehle haqeeqat mai Jamaat mai 3 din jaakar Dekho aur tab write up Likho

    Reply
    1. afzal khan

      सुहैल साहब

      में अलीगढ में पड़ता था तो कई बार तब्लीग में गया हु और मुझे पसंद भी है मगर इस में बहुत ही बदलाव की जरुरत है . अक्सर में ने देखा है के ७० % केस में तब्लीग में जाने वाले परिवार के बच्चे बिगड़े रहता है क्यों के वे तो तब्लीग में रहते है और उन के बच्चे गलत लाइन में चले जाते है .
      दूसरी बात तब्लीग वाले क़ुरान को छोड़ कर फ़ज़ाएल अमाल किताब पे पूरा जोर लगते है जैसा की हम सभी जानते है के इस में आधे से जयादा जाहिफ़ हदीस की भरमार है .

      Reply
      1. Sher Muhammad Quraishi

        अबे बद दिमाग बगैर हदीस के क़ुरान के अहकाम को तु क्या समझ पायेगा , अल्लाह ने नबी किस लिए भेजा है , हदीस के जरिये से ही हम क़ुरान के अहकाम को समझ पाएंगे , और तेरा दिमाग ज़ईफ़ है , इसलिए तुझे फ़ज़ाइले आमाल की समझ नहीं सकती , समझे क्या ?

        Reply
  11. Md. Munawwar Hashmi

    Aaj pure dunia me Islam ko badnaam karne ki sajish ho rahi hai.Har wo tariqa apnaya ja raha hai jisse Islam ko nicha dikhaya ja sake.Aise me khan sahab ne jo likha hai wo aag me ghi jaisa hai.Ek muslim hoker jab aisi baat kaenge to doosro se kiya ummid rakh sakte hai.Koi bhi tabligi apni jimmedari nibhate hue deen ke liye time nikalne ko kahti hai.Isme glat kiya hai.Jab aap apne majhab ke liye nahi kar sakte to doosra aur kaun karega.Islye aap se rquest hai ke aisi negative chees mat likhiye.

    Reply
    1. afzal khan

      मुनव्वर हाश्मी साहब

      लेख में तब्लीग की बुराई नहीं की गयी है बल्कि उन के रवैये पे की गयी है , में ऐसे हज़ारो लोगो को जानता हु जो अपने परिवार को छोड़ कर ४० से ४ महीने तक तब्लीग में चले जाते है और घर वाले परेशांन रहते है . इस का मतलब तो यही होता है के आप अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे है . जनाब सिर्फ अल्लाह -और तस्बीह ले कर मस्जिद में बैठने से कुछ नहीं होता , अल्लाह ने दुनिया को भी देखने और ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाने को कहा है . अच्छी बात है तब्लीग लोगो को दावत इस्लम्म के लिए दावत देती है मगर उन्हें अपने में तबदीली लानी हो गई.

      Reply
  12. Mohd Irshad

    sab se pahle main aap ko yah bata doon ki mera tableegi jammat se na hi koi lagao hai or na hi main aapni zindgi main kabhi zamaat main waqt lagaya. lekin maine un logon ko kafi kareeb se daikha hai…kae sare tablegi log mere room partners thai AMU main or dost bhi….mujhai un logon main or un ke kaam main koi burae nazar nahi aaye …kam se kam kuch toh fiqar hai un logon ko…..zamane ko toh ek din main woh nahi badal saktai …lekin koshish toh kar rahe hain woh log….or ainsa bhi nahi hain ki kuch kiya nahi hain in logon ne ….agar yah log kisi aadmi ko sirf namazi hi bana dai toh wahi kafi hai…….agar hum khud kuch nahi kar saktai toh kisi ko critisize bhi nahi kar sakta….

    Reply
    1. afzal khan

      इरशाद साहब

      में भी अलीगढ के रास मसूद हॉल में रहता था और में भी ४-५ बार तो जमात में गया हु और आप भी जानते है के अलीगढ में तब्लीग का अच्छा प्रबह्व है .में भी तब्लीग के खिलाफ नहीं हु बस इस में कुछ तदिली आणि चाहिए क्यों के वे एक फ़ज़ाएल अमाल को ही सब से अच्छी किताबे मानते है , जिस में जाहिफ़ हदीस का सहारा लिया जाता है . क्यों नहीं ये सही हदीस और क़ुरानं की तफ़्सीर पड़ते है.

      Reply
      1. RM hall ka (ex)resident

        R.M Hall ke pichwade ke canteen mein kuch gunde type (so called hitler ya tarik chaila ke chamche ) log hansi thitholi kr rhe the kahin se bhi wo civilised nahi lag rahe the. mein pass mein baitha samosa kha raha tha. wo gunde type log sirf tablighiyon pe comment kr rhe the kaise khate hn kaise uthte hain kaise rhte hn etc , aur khoob zor zor se hans rahe the. wahin dossri traf salim anwar bhai, fareed bhai, saquib bhai, firoz bhai etc jo deen ke kaam se jude the apni padhai mein bhi aage the aur khoob logon ki khidmat krte unka haalchaal lete. unhi kuch gunde mawali type log dubai pahunch kr bhi apni hansi thitholi jaari rkhe hue hain, unki itni jalti hai jamaat se ki pucho mat(main jamaati nhi hun )

        Reply
        1. Ayaz

          य़े सहि मे अपत्ति जनक बात है जरा लेखक अपनि जानकरि सुधार्लेन .

          Reply
      2. RM hall ka (ex)resident

        तु अपना नाम ‘मेीर सादिक्’ य मेीर जाफर क्युन नहि रख लेते ः)

        Reply
      3. Altaf

        Bhai aapki baat se me sehmat nahi hu. Isme bahot se dalail me de sakta hu per ek do me hi inshaallah baat ko khatm karunga.
        Pehla to ye ki fazaile aamal per jyada zor dene ki baat kahi Quraan e karim ke mukable me. Aap dekh lijiye ki tableeg jamat ki barkat se hi aaj hazaro madaris her jagah kayam hue he. Aur lakho ki taadad me aalim e din aur huffaz e kiram her jagah padh rahe he aur ban chuke bhi he.
        Dushri baat fazaile aamal me jyada ter jagaho per quraan ki aayat ko hi likha gaya he tarjume ke saath aur baad me uska meaning he. Balke ek chapter hi fazaile quraan ke name se he.
        ALLAH sabko sahi samaj de. Aameen

        Reply
  13. सिकंदर हयात

    sikander hayat
    October 25,2014 at 11:32 AM GMT+05:30
    अफज़ल भाई नोट कीजिये की लोग हम पर बिना किसी सबूत या तर्क के बार बार इस्लाम या मुसलमानो के खिलाफ लिखने का आरोप लगाते हे सिर्फ आरोप . और सबूत तर्क बहस कुछ नहीं अफज़ल भाई और मुस्लिम पाठको सोचे की ये लोग कौन हे और देखे की जेसे एक पि के एस खान शेरानी जी जो बाकायदा फुलत मदरसे से जुड़े आलिम हे इनसे भी हमारा कई विषयो पर मतभेद रहा तो मगर इन्होने कभी हमें भला बुरा नहीं कहा कभी इन्होने हमें इस्लाम या मुस्लिम विरोधी नहीं कहा चलिए ये तो उदारवादी इस्लामिक विद्वान हे वही देखे तो एक साहब हे वासी भाई ये महा महा महा कटटरपन्ति हे इनसे बड़ा कटटर सोच वाला आदमी मेने नहीं देखा ये गैर मुस्लिमो के साथ कोई सहअस्तित्व की सम्भावना नहीं चाहते हे आदि आदि इनसे भी हमारी सेकड़ो बहस हो चुकी होंगी लेकिन आप देखे की फिर भी वासी भाई ने कभी भी हमें भला बुरा नहीं कभी नहीं कभी हम पर कोई झूठा इलज़ाम नहीं लगाया क्यो / क्योकि वासी भाई एक आइडियोलॉजिकल कट्टरपन्ति हो सकते है ना की अपना व्यक्तिगत फायदा उठाने देखने वाले लेकिन कुछ लोग बाकायदा हमारे खिलाफ बदनाम करने की साज़िश सी रच चुके हे ये लोग कौन हे ? अफज़ल भाई और पाठको गौर करे तो इन सभी पर कुछ आर्थिक आरोप हे की ये लोग इस्लाम और मुसलमानो की बात की आड़ में पैसा कमाते हे ऐसा मेरा नहीं दूसरे लोगो का आरोप रहा हे तो मतलब साफ़ हे की असल मुद्दा धर्म इबादत होता ही नहीं हे कभी , लोग असल में इनकी आड़ में अपने आर्थिक हितो की रोटिया सेक रहे होते हे और इन्हे ही हमारे लेखन से खतरा महसूस होता हे और ये लोग तड़प कर झूठे आरोप लगाने लगते हे

    Reply
  14. सिकंदर हयात

    अपने घर का लगभग आधा सामान में ही लाता हु और में देख रहा हु की सुई से लेकर कार तक के एक एक एक सामान की कीमतों में चुनावो के बाद से बढ़ोतरी ही हुई हे फिर भी दलाल मीडिया चुप हे जबकि पिछले साल इन्ही दिनों महगाई के मुद्दे पर मीडिया ने तूफान मचा रखा था उसी तूफान में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में कब्र में पहुंची थी

    Reply
  15. SYED QAISAR MEHDI

    A very important point raised vide this article is that our duties as a human being on this earth are much more than praying to the Almighty. Allah commands in : Surah 2:177 as follows

    Righteousness is not determined by facing East or West during prayer. (True) righteousness is a part of that person who believes in God, the Day of Judgment, the Angels, the Book of God, His Prophets; who, for the love of Allah, gives wealth to relatives, orphans, the destitute, the travellers in urgent need of financial help, the ones who ask for money (beggars); freeing of slaves; to be steadfast in prayer; to pay religious tax (zakat); to fulfill one’s promises; and to exercise patience in poverty, in distress, and in times of war. Such people who do these are truly righteous and pious. (2:177)

    A true muslim is perfectly pious and obedient to Allah’s commands.

    1. Truthful, trustworthy and loyal,
    2. Always remember Allah,
    3. Offer prayers,
    4. Observe fasts,
    5. Recite Qur’an,
    6. Help neighbors,
    7. Take care of orphans,
    8. Say nothing but good of people,
    9. Act nicely towards parents,
    10. Are worthy of peoples’ trust and confidence.

    Reply
    1. afzal khan

      मेहदी साहब

      में आप से सहमत हु के घर वालो के हक़ूक़ , पडोसी के हक़ूक़ , मुल्क के लिए जिम्मेदारी , समाज के प्रति आप की जिम्मेदारी ये सब इस्लाम का एक अभिन्न अंग है . सिर्फ तस्बीह ले कर मस्जिद में बैठने के लिए नहीं है. अगर सिर्फ इबादत ही मक़सूद होता तो अल्लाह के लिए करोडो फ़रिश्ते काफी है जो दिन रात अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते है . इंसान को अल्लाह ने इस लिए पैदा किया है के दिन व दुनिया को ले कर चले.

      Reply
  16. Mohd.Rafiq Chauhan(Advocate)

    It is realty. Even educated muslims follow the tablik jamat movement. If some write and talk like you, they called him a kafar.

    Reply
  17. kashif hussain

    Tablighi jamaat koi firqaa nahi he pehle to ye baat samjhe aur phir aage kuch kahen ye koi organisation nahi he koi ngo nahi he naa iska maqsad wo he jo aapne bayaan kia.dunya ke kisi bhi mazhab kisi bhi zabaan yahan tak ki kisi insaan ke baare me aap apni raay bina use jaane bina uske bare me pade denge to shayad bewaqoof hi kehlaye jayenge islye aapse guzarish he 4 mahine 40 din 3 din ye sab baten chor ke sirf aur sirf 3 ghante ka bayaan sun le ho sake to markaz nizamuddin me.me ye nahi kahuga ki 3 ghante ka bayaan sunne ke baad aapko jannat ka certificate mil jayega ya aap pakke namazi ho jaoge bas maqsad ye he ki apko tabligh ka maqsad aur asal maqsad pata chalega ki kyu ye 1 inqilaab me tabdeel hoti ja rahi he pata chalega apko ki jamaat me jaane wala insaan kisi ko hidayat nahi de sakta hidayat sirf ALLAH ke hath me pata chalega aapko ki kese logo ki zindagi ALLAH aur uske nabi ke hukm aur tareeqe pe chalne lagi kahaan kahaan wo gumraahi me pade hue the aaj ALLAH ne unko deen ki mehnat karne ki wajah se unko kya se kya bana dia shayad apko pta nahi he ki jamaat ka kaam shuru hua tha tab musalmaan kitni gumraahi me pada hua tha bas but parasti aane wali hi thi ki ALLAH ne apna karam kar dia.aapne jitna likha he usse 10 guna zada me likh sakta hu lekin sirf bolne se ya likhne se kuch hota to shayad aaj koi musalmaan na hota kyunki islaam ke khilaaf jitna likha ya bola gaya he utna kisi ke khilaf na likha gaya na bola gaya.aakhir me guzarish he jamaat ke baare me man gadhat baaten na phelayen aur agar dil nahi manta bina man gadhat bole to please 1 bar nizamuddin ho ke aayen.

    Reply
    1. afzal khan

      काशिफ साहब

      जनाब में ने तब्लीग की कभी बुराई नहीं की है , बल्कि उन के रवैये से की है . मुझे भी मालूम है के तब्लीग और दूसरे आर्गेनाईजेशन से हैट कर है . इस में लोग अपना पैसा खर्च कर के जाते है और किसी से आर्थिक सहायता नहीं लेते . मगर जनाब फ़ज़ाएल अमाल को सब से अच्छी किताब मान लेना उस की जगह आप सही हदीस सुनाये .. उन के यहाँ भी बरेलवी हज़रात की तरह शख्सियत की पूजा होनी शुरू हो गयी है . बहुत बाते है जो लिखी नहीं जा सकती —-

      Reply
  18. Professor S M Y Saba

    The world is my play ground,
    I see the game all around.
    The deserts ruined in heaps of sand,
    Before me the oceans drown’d.
    Never think for you I’ll fade,
    Just see by me your shade.
    The world is my play ground…..
    Always ripped are two halves of myself
    Goblin pulls me and bars me the Elf.
    The world is my play ground…..
    Limbs are numb but rem is not,
    Don’t let the gush of tipple drought
    The world is my play ground

    Reply
  19. Nafish haider

    Bhai likhne wale tabligh kya hai isko samjhe fir koi comments likha karen,ye comments sayad aap ksi aur k liye likhe hote to ab tak log aap k pass pahuch gye hote lekin jinki tadad carores me hai fir v ksi ne aisi badtamiji se aap ko jawab nhi diya ye sirf tabligh ka asar hai.aur agle baar se aisi baaten na likha karen.

    Reply
    1. afzal khan

      जनाब में ने तब्लीग की कभी बुराई नहीं की है , बल्कि उन के रवैये से की है .

      Reply
  20. azeem ahmad

    TABLEEGI JAMAAT KA ISLAAM SE KUCH BHI LENA-DENA NAHI HAI, WO TO BAS ISLAAM KE NAAM PER PICNIC MNA RAHE HAIN AUR ISLSSM KO BADNAAM KAR RAHE HAIN. YE RIYAKARI KI ZINDA MISAAL HAIN. > AZEEM BANJARA .

    Reply
    1. IRFAN MANSURI

      अगर तब्लिग जमात से इस्लाम का लेना देना नहि तो क्यो मसाजिद् मदारिल ओर दिगर दिनि उमोूर मे इझाफा हो रहा हे? लोगो कि झिन्दगिया इस्लामिक क्यो होति जा रहि हे? अल्लाह रसुल कि बातें आम हो रहि हे उसे तो बद्नामि नहि केह्ते. ओरआखिरेी बात किसि के दिल को चिर के तो नहि देख सक्ते कि उस्मे रिया हे या इख्लास्.

      Reply
  21. ayaz

    Assalamualaykum

    Bhaiyon koshish kar ke qiraan ko samagh ke padhein…..dekhoye kaise doodh ka doodh air Pani ka paani hora hai. Ghaur o fikr ko hamare nabi saw ne ७२ salary nafl ibadat se afzal bataya hai… Ek bar sawab pane se oonpar uthkar sochein….. mahaz Allah ki riza ki khatir

    Reply
  22. mohammad gani

    नग्पुर मे तबिलिगि जमहत क इज्तेम हुअ थ उस इज्तेम मे शहर से कुच लोग जअते हुए अक्सिदेन्द मे चार लोगो का इन्तेकाल हुआ था क्या तब्लिगि जमात ने कुच किया इस बारे मे बताये मेहर्बानि होन्गि.

    Reply
    1. IRFAN MANSURI

      जि तब्लिग मे अपना जान, अप्ना माल् ओर अप्ना वक्त लगाना होता हे, बन्दे को अप्ने हिसाब से जो तय्यरि कर्नि होति हो उस्मे वो कसर नहि कर्ता. घर वालो का ख्यल रखा जाता हे, यहां तक के अगार नोक्रि हो तो वहां भि उस्का अप्नि ताकत के मुवाफिक इन्त्जाम कर लिया जाता हे. ओर अगर कोइ एसा हाद्स पेश आये तो भि पर्स्नलि हि निपत्ना होता हे. अस्बाब कि लऐन से जिस्कि जित्नि ताकत होति हे उत्नि हेल्प कोइ कर्ता हि हे. बाकि तब्लिग वालो को अम्रिका इस्रऐल से पेइसे तो आते नहि.

      Reply
  23. सिकंदर हयात

    ps
    October 26,2014 at 06:13 PM GMT+05:30
    तबलीघी जॅमाट को यूं नकारना पानी के साथ बच्चा भी बाहर फेंकने जैसा है…
    खालिस ईमान की दावत में तबलीघ जॅमाट सा कोई सानी नहीं..
    मैने कई शराबी, जुआरी और अंटी सोशियल लोगो को ईमान पर मज़बूत होते और काम के होते देखा है…
    पक्का ईमान (दिखावे और झूठ का नहीं) इंसान को दुनिया में भी काम का ही बनाता है… ps को जवाब )- sikander hayat
    October 27,2014 at 12:38 PM GMT+05:30
    पी के एस जी भारतीये उपमहदीप मे 60 क्रोड मुस्लिम है जिनके बीच इस कदर धर्मपर्चारक जुटे हुए हे इस कदर पैसा अरब देशो से आ रहा हे कितनी ही धार्मिक हस्तिया करोड़ो अरबो में खेल रही हे फिर भी कोई एक गाव भी ऐसा नहीं बस सका हे जहा इस्लामी आदर्शो के अनुसार चार मुस्लिम बिना किसी उंच नीच भेदभाव तेरी मेरी के रह रहो हे सिर्फ एक गाव एक मोहल्ला एक बिल्डिंग भी ऐसी नहीं हे इसमें किसकी नाकामयाबी हे ? कही तो गलती हो रही है मुसलमानो की ना आपस मे कोई एकता है ना गेर मुस्लिमो से बन पा रही है ? ना दुनिया मे कोई कमाल दिखा पा रहे है ना ही दीन पर चल कर दुनियादारी को छोड़ ही पा रहे है क्या इस पर चर्चा करना कोई ब्लासफेमी हे ? बताइये कहा लिखा हे इस्लाम में कुरान में हदीसो में की जमीनी सच्चाइयो से मुह फेर लो उन पर ध्यान मत दो – ? कही मनाही नही है जमीनी हालात से हमे आंख मिलनी ही होगी

    Reply
  24. IRFAN MANSURI

    बात ये हे कि उसि दरख्त पर पत्थर ज्यादा पड्ते हे जिस पर फल ज्यादा हो. वैसे भि तब्लिग जमात को जित्ना भि बद्नाम किया गया, जित्ना भि रोका गया अल्लाह ने उसे उत्ना हि चम्काया हे. ये तब्लिग मे जाने कि बात बोल्कर भि उस्कि मुखलिफत कर्ने वाले जो १-२ नेत पर पेइदा हुवे हे. वह जल्द जान जायेन्गे कि उन्कि इस हर्कत से इस्लम बोले तो तब्लिग को ओर ज्यदा फायदा हो गया हे. बेचारो को पेमेन्ट रुक जायेगि.

    Reply
  25. सिकंदर हयात

    रांची केस में देखे की जितना ऊपर से बात समझ आई हे की रक़ीबुल एक नार्मल भरष्ट आदमी था जैसे भारत में और लाखो करोड़ो हे सवाल ये हे की ये बात उसके दिमाग में किसने डाली होगी की वो एक हिन्दू लड़की से शादी करके उसकी जान खाए की मुस्लिम हो जाओ ? कौन हे वो लोग ? एक बार में एक भरष्ट मुस्लिम सरकारी अधिकारी से मिला जो अपने आलिशान बिल्डिंग में बैठा था उसने बड़े गर्व से बताया की वो कई हिन्दुओ को मुस्लिम कर चूका हे में सोच में पड़ गया की एक भरष्ट आदमी में ऐसा ” गर्व ” किन्होंने भरा हे कौन हे वो लोग ?

    Reply
  26. Mohd. Arqam

    Aap Rasool Sallahu Alehi Wasallam ne dua ki thi the ki meri ummat me ikhtalaf na ho magar Ye dua qubool nhi hui…… Or Agar ikhtalaf na hoga to munazara ka wujood khtm ho jaega fir haq kese saamne aayega…..maulana Saeed Ahmed khansahab ne likha h k tableeg Deen me kali ki si ahmiyat rakhti h….. Tableeg zameen ki Tarah se h jis pe darakht lagta h or darakht pe hi fal lagta h…. Agar zameen na ho to na darakht lage or na hi fal….. Tableeg Deen me dil ki Tarah se h dil zinda h to saare aaza sahi kaam karte h or Agar dil murda ho jae to sbhi aaza ki harqat bhi ruk jaati h ( I am a civil engineer who has spent enough time in tableeg or mjhe kbhi force nhi Kiya gya infact Afzal Bhai ne sawaal uthaya k koi bhi ek misaal do kisi galat admi k sudharne ki to I M the one… me ye nhi kehta ki me Bada nek hu but Haan ye zarur kahunga k mere Kai ese gunah the jo tableeg me lag kr duur hue or me aaj bhi us shaks ko dua deta hu jis ne meri tashqeel ki thi nhi to me gunaaho ki zyadati ki or badh rha tha) or Afzal Bhai Ghar ki baate Ghar me ki jaati hain na ki akhbaar me chapwa Kar unke Hal nikalwaeye jaate h or rhi baat musalmaano ko jodne ki to me Har us shaks se kahunga jis ne tableeg k haq me Bola h ki munazara jazbaato se nhi Kiya jaata balqi kehne vale ki baat ko sunkar or samajh kr hiqmat k saath uska jawab diya jaata h or aakhir me rhi baat fazaile aamaal ki to vo ye h ki tableeg ka aham maqsad Imaan par mehnat karna h or Quran or Deen ki taraf Lana h na ki kisi qitaab ko us se uncha karna…. Aapko bas ek vajah mil gyi h jis ki shayad tehqeeq bhi nhi…. ( Or aakhir me ye ki Afzal Bhai mjhe Bada afsos h ki aap Kai baar jamaat me gye magar aapko is raaste ki haqeeqat Pata nhi chli) or rhi kuch badlav laane ki baat to vo ye h ki ground me kamzori is liye h ki hum logo ne marqaz se Judna chor diya h or apni aqal ka dakhal shuru Kar diya h janab add Afzal sahab se me guzarish krna chahunga ki vo bhi kuch waqt marqaz nizamuddin me guzaar kr aaye qki unki fiqr badi h or vo smjhte h ki kya kamzoriya h or kamzori ko vo hi duur Kar sakta h jo use jaanta ho or ye bhi ki Agar vo ye keh rhe h ki hum log galat tareeqe se kaam kr rhe h to iska mtlb ye h ki unhe sahi samajh h or Hume khushi hogi ki ek samjhdaar shaks kaam se Jude (vese bhi marqaz me ek buzurg keh rhe the ki hamara maqsad bheed jama krna nhi h balqi logo k andar sifaat ka paida hona h)….

    Reply
  27. Samar Nasim

    उपरोक्त लेख लेखक के अज्ञानता को दार्शाता है, इसमे कोई दो राय नहीं के अफ़ज़ल साहब ने कभी तबलीग जमात मे जा कर इस पाकीज़े कम को समझने की कोशिश नहीं की ! कुछ बातें बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिये जिसमे यह की यह तांजिम इंसान को नकारा बना रही है ! हकीकत यह है की तबलिगी कामों की बदौलत एक इंसान अपनी ज़िम्मेदारियों को बखुभी निभा पा रहा है ! अपनी ज़िम्मेदारी, परिवार की जिम्मेदारी ,समाज की जिम्मेदारी और द्श की जिम्मेदारी ! इस दुनियाँ मे आज के दौर मे एक इंसान को इंसान बने रहने का तबलिगी जमत से बेहतर कोई रास्ता हो ही नहीं सकता !इंसान को अल्लाह ने इस दुनिया मे महज अपनी इबादत के लिये भेजा है,अल्लाह का मकसद यहाँ लोगों को दुनिया बनाना नही था ! इंसानों के लिये अल्लाह ने जन्नत का ठिकाना रखा है, अगर हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों और नबी पक सलालहू अलैहे वसललम के पाकिज़ा तरीकों पर गुजरा ! इंसान के लिये दुनिया इम्तहान की जगह है अब अगर कोई इंसान यहाँ महज 60-70 साला ज़िंदगी के लिये दुनिया संवारने मे ही लगा रहे तो यह नुकसान और खसारे के सिवा और कुछ नहीं !अल्लाह हम सभों को नेक तौफीक दे (आमीन) !!

    Reply
  28. Samar Nasim

    उपरोक्त लेख लेखक के अज्ञानता को दार्शाता है, इसमे कोई दो राय नहीं के अफ़ज़ल साहब ने कभी तबलीग जमात मे जा कर इस पाकीज़े कम को समझने की कोशिश नहीं की ! कुछ बातें बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिये जिसमे यह की यह तांजिम इंसान को नकारा बना रही है ! हकीकत यह है की तबलिगी कामों की बदौलत एक इंसान अपनी ज़िम्मेदारियों को बखुभी निभा पा रहा है ! अपनी ज़िम्मेदारी, परिवार की जिम्मेदारी ,समाज की जिम्मेदारी और द्श की जिम्मेदारी ! इस दुनियाँ मे आज के दौर मे एक इंसान को इंसान बने रहने का तबलिगी जमत से बेहतर कोई रास्ता हो ही नहीं सकता !इंसान को अल्लाह ने इस दुनिया मे महज अपनी इबादत के लिये भेजा है,अल्लाह का मकसद यहाँ लोगों को दुनिया बनाना नही था ! इंसानों के लिये अल्लाह ने जन्नत का ठिकाना रखा है, अगर हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों और नबी पक सलालहू अलैहे वसललम के पाकिज़ा तरीकों पर गुजरा ! इंसान के लिये दुनिया इम्तहान की जगह है अब अगर कोई इंसान यहाँ महज 60-70 साला ज़िंदगी के लिये दुनिया संवारने मे ही लगा रहे तो यह नुकसान और खसारे के सिवा और कुछ नहीं !अल्लाह हम सभों को नेक तौफीक दे !! (आमीन)

    Reply
    1. afzal khan

      समर नसीम साहब

      आप के कमेंट का शुक्रिया – तब्लीगी जमात की बुराई नहीं की जा रही है .बल्कि मेरा कहना है के तब्लीगी जमात दुनिया से मुसलमानो को काट कर अलग कर देना चाहती है . अल्लाह ने मुस्लमान को पैदा इस लिया किया की दिन के साथ दुनिया भी आप को देखनीं है . अगर सिर्फ इबादत ही करना मक़सद होता तो उस के लिए करोडो जिन्न्न मौजूद थे .

      अल्लाह ने मुसलमानो को रह्बानीयत अपनाने से मन किुया है हमें दिन के साथ दुनिया के भी पुरे चीज को पूरा करना है . बस तब्लीगी जमात मुसलमानो को सिर्फ दिन के लिए वक़्फ़ करने को कहता है जो इस्लाम के खिलाफ है.

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        अफज़ल भाई मेरा तजुर्बा कहता हे की चाहे वो तब्लीगी हो चाहे ये जाकिर साहब को ये कुछ भी अच्छा रिज़ल्ट देने में नाकामयाब ही रहे हे इनकी उपलब्धि सिर्फ कटट्रपंथ कटटरवाद को बढ़ाने की ही हे लोगो के अमाल बेहतर बनाने में समाज में सच्चाई ईमानदारी नेकी सादगी इन्साफ फैलाने में इन्हे कोई खास कामयाबी नहीं मिली इनकी इस नाकामयाबी की तरफ न इनका न लोगो का ध्यान गया हे क्योकि सवाल जवाब चिंतन का सिलसिला ही नहीं रहा हे ( अब अफज़ल भाई की मेहरबानी से हम बात रख पा रहे हे ) ये दावा जो करते हे की हमने लोगो को अच्छा बनाया बेहतर इंसान बनाया वो सब पूरी तरह सही नहीं हे में अफज़ल भाई के किसी अलीगढ़ के साथी से पूछना चाहूंगा की जैसे अफज़ल भाई तब्लीगियो के साथ रहे तो क्या उससे पहले अफज़ल भाई अच्छे इंसान नहीं थे ? मेरा ख्याल हे की अफज़ल भाई पहले भी अच्छे ही होंगे बाद में भी इसी तरह ये लोग जो अछाइया नेकी बढ़ाने के दावे करते हे वो इसी तरह की बात हे की दुनिया में अच्छे लोग तो होते ही हे हर जगह तो कुछ अच्छे लोग भी इनके साथ भी होंगे ही जो हमेशा से अच्छे नेक ईमानदार ही होंगे लेकिन बुरे लोगो को सुधारने में ये विफल रहे हे लेकिन हां उन बुरे लोगो को उल्टा अधिक मज़हबी बनाकर उनमे तकब्बुर इन्होने और भर दिया हे मेने कई उधारण देखे हे

        Reply
  29. सिकंदर हयात

    ये लोग को कटटरपन्ति बना रहे हे कुछ मेने ऐसा भी देखा हे की लोगो पर दबाव डाला जा रहा हे की लोग अपने हिन्दू मित्रो सहेलियों को इस्लाम की दावत जरूर दे —- ? अब बात ये हे की चलिए कटट्रपंथ से भी ऐतराज़ नहीं हे अगर की आप साथ साथ लोगो के अमाल भी बदलवा रहे हे मुसलमानो में आपसी भाई चारा बराबरी एकदूसरे के काम आना आदि भावना बढ़ा रहे हो तब भी ठीक मगर ऐसा कुछ नज़र नहीं आता हे मतलब ये की गैर मुस्लिमो से भी सम्बन्ध खराब हो रहे हे और आपस में भी कोई विशेष बात नहीं हे —– ?

    Reply
  30. KAZI MUSLEHUDDIN

    khan sahab aapne ye tableghi jamat per jo likha hai shayad aap ke A/C office me bhait kar likha honga …………………….. suniye meri kahani
    mai aik dehat me rah choka hoo waha per muslim samaj kalma tak nahi janta tha. waha ki masjid me shham ko ek zaeef muslim ek chiraag jalata tha yahi unka deen tha ek baar waha jamat ke kuch log aaye masjid saaaf ki zuhar ki namaz unhi jamat ke saathiyo ne aada ki phir woh us gaao me gasht ( ghoom kar) kar ke logo ko masjid me bolaya unhe islam ki taalim di
    aaj allahamdulillah woh masjid aabad hoi waha kaie bachche quran ke hafiz ban rahe hai
    AB AAP BAATAYE WOH JAMAT WALE PAGAL THE JINHO NE AAP KE MUTABIQ GHAR DAAR CHOD KAR DAAWATE TABLEGH KI ?
    KAASH ALLAH AAPKO BHI DAAI KA MARTABA SAMJHA DE .
    AAP SE AUR AAP JAISI SOCH RAKHNE WALE BHAIYO SE MAI MAAFI CHAHTA HOOOO
    ALLAH HAFIZ ……….. JAY HIND..

    Reply
  31. afzal khan

    kazi muslehuddin sahab

    salam

    aap ka khabar ki khabar pe swagat hai.

    Janab mai ne tabligi jamat ki buraayi nahi ki hai balke kuch cheeze jo galat hai us ki nishaandehi kiya hu. mujhe bhi malum hai ke ye log achcha kaam kar rhe hai .

    Reply
    1. मुहम्म्दअली युसुफ

      जरा अल्लाहतआला से दरो.”अमरबिल मारूफ औरनहीं अनिल मुनकर”के बारेमें…कुरआनमें 60 जगह जिक्रआया है..मुहक्किक उलमए किराम ने ये साबित किया है.हजारो लाखो डोकतर्स,इंजिनियर्स,और प्रोफेशनलतबकेके लोग अपनी इस्लाह और जिंदगीको अल्लहके हुकम औररसुलुल्लाह(सल.)की सुन्नतके मुताबिक जिम्दगी गुजारनेका तरीका सीखनेके लिये जमातमें निकलते हैं.और तजुर्बेसे ये सबित हुआ है ..उनकी जिंन्दगीमें बदलाव आया है.असबाबकी नफी नहि की गई असबाब पर महज यकीनकी नफी की जाती है.करने वाली जात अल्लहकी है.अल्लाह्के हुक्मऔर.हुजूर(सल.)के तरीकेमें कामियाबीका यकीन रखकर.सहाबा,ताबेएन,तबेताबेईन,औलिया अल्लह,मुहद्देसीन,मुफस्सेरीन,फुकहा कामियाब हुए.इस्लामकी तारीखके मुतालेसे ये बात साफ वाजे हो जाती है.अस्पतालमें जाने वाला हर मरीज अल्लहको मंजूर न हो तो शिफा नहीं पाता.अल्लाहको प्यारा हो जाता है.मगरीबी मुल्कोमें ही नहीं आज करीबन बहुतसे मुल्कोमें बच्चा अस्पतलमें ही पयदा होता है…..और अकसर लोगोंका जनाजा भी वही अस्पताल से निकलता है.अपनी आखेरत की फिकर करो.हलाल दुनिया कमानेसे मजहब कहां रोकता है?जकात फर्ज है..इसका मतलब कमाना लाजिमी है..हलाल तरीकोंसे.अगर अलीगढ में तालिम पाई है तो —तहकीकात का तरीका ये है कि..निझामुद्दीन(दिल्ही)जाकर अलीगढीप्रोफेसरों मेंसे डॉ.सनाउल्लाह,डो.नादिरअलीखां वगैरह से मिल कर राई कायम करो.जहालत के अजाब से बचो.माअस्सलाम.

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        सर जी होता यही हे की लोग आपकी बातो में हां में हां मिला देते हे आपकी जयजयकार कर देते हे आप सोचते हे की डन हो गया हमने अगले को इस्लाम सीखा दिया अगले ने सारी बुराई सारी फ़ितरते छोड़ दी उसके दिल से सारी खुदगर्ज़ी सारा मैल सारी हवस निकल गयी लेकिन अफ़सोस ऐसे कुछ भी होता नहीं दीखता हे लोग आपकी हा में हां मिलाकर दो कदम आपके साथ चलकर या दूर से आपकी तारीफ करके फिर से दुनियादारी उसकी लूट खिंच तान तेरी मेरी में जुट जाते हे ये बाते आपको नहीं पता होगी न किसी केम्पस की सुरक्षित बढ़िया लगभग जिंदगी में आपको पता चलेगी ये तो जमीन पर धक्के खाने से पता चलती हे जो हमने बहुत खाय अब भी खा रहे हे हमें अधिक जमीनी सच्चाई पता होती हे मेरा कज़िन भी अलीगढ में हे वो भी वही कहता हे जो आप कहते हे में उससे यही कहता हु की तुम कभी पुश्तैनी इलाके फिर केम्पस फिर सरकारी नौकरियों की छत्रछाया से निकले नहीं इसलिए तुम्हे प्रेक्टिकल पता नहीं और में कभी किसी सुरक्षित कम्फर्ट जोन में रहा नहीं हमें पता हे की हो क्या रहा हे हालात क्या हे

        Reply
        1. सिकंदर हयात

          अच्छा होता यही हे की इन केसो में की ये बढ़ चढ़ कर दीन ईमान की बात बताते हे तो फिर होता यही हे की बात बताकर इन्हे बड़ा अच्छा लगता हे ये सोचते हे की हम बड़े महान हे सुनने वाला सोचता हे की सुनना भी सवाब का काम हे तो वो बड़े उत्साह दिखाकर सुन लेता हे जाहिर हे की कहना सुनना कोई मुश्किल काम थोड़ा ही हे मुश्किल तो चलना हे वो कोई नहीं करता बस कहने सुनने वाले दोनों खुश हो जाते हे प्रेक्टिकल में आप देखे की पाकिस्तान में आज हज़ारो ” जाकिर नाइक साहब ” जैसे लोग सिर्फ यु ट्यूब पर ही हे जमीन पर तो जाने कितने होंगे फिर भी भारत की तरह पाकिस्तान में भी हर एक एक एक दुनियावी बुराई अपने चरम पर हे तो लब्बो लुआब ये हे की ये धर्माधिकारी समाज से एक भी बुराई खत्म या काम करने में असफल हुए हे फिर भी खुद को ज़बरदस्ती महान समझते हे और जो कोई इन्हे आइना दिखाय उसे इस्लाम का दुश्मन बता देते हे अपने अंदर झाकने को तैयार बिलकुल नहीं हे ये ये भी नहीं देख पा रहे की कुछ अच्छा करने के बजाय ये लोग कुछ बुरे लोगो में ये और ज़्यादा तककबूर भर देते हे रांची के रक़ीबुल उर्फ़ रंजीत का केस तो सामने हे ही जो दुनिया की हर गंद में लिसड़ा हुआ था उसे सुधारने के बजाय किसी मुर्ख धर्माधिकारी ने उसे एक मासूम लड़की को ज़बरदस्ती मुस्लिम बनाने पर और प्रेरित कर दिया http://tehelkahindi.com/love-jihad-victim-tara-sahdev/# ऐसे ही तककबूर के कई केस मेने देखे हे

          Reply
          1. सिकंदर हयात

            पाकिस्तानी क्रिकेट टीम का ही उदहारण देख ले एक जमाना था जब पकिस्तानी टीम पुरे क्रिकेट जगत का ज़बरदस्त आकर्षण हुआ करती थी फिर हुआ ये की शायद क्रिकेटर सईद अनवर की छोटी बेटी का इंतकाल हो गया उस दुःख के बाद ये काफी मज़हबी हो गए लम्बी दाढ़ी रख ली और खेल में तब्लीगी की भूमिका में आ गए उसके बाद पूरी पाकिस्तानी टीम का मज़हबी रुझान बढ़ने लगा कोई लारा को तो कोई दिलशान को दावत देने लगा तो ये सब हुआ लेकिन वही बात जो में कहता हु की ये केवल खेल पर से थोड़ा ध्यान हटाने में ही सफल रहे बाकी पाकिस्तानी टीम वही सब दुनियावी बुराइयो में लिथड़ी रही कोई सट्टेबाज़ी में पकड़ा गया कोई लड़की छेड़ने के विवाद में कोई आपस में बुरी तरह लड़ते रहे यह सब कुछ बुराइया खत्म करने में सईद अनवर साहब विफल रहे आपसी झगडे इतने बड़े की मुझे तो लगता हे की टीम में शिया सुन्नी देवबंदी बरेलवी विवाद भी शुरू हो गए होंगे तो ये हे

  32. सिकंदर हयात

    इसी तरह का मामला पाकिस्तानी खिलाड़ी शाहिद आफरीदी का भी लग रहा हे इनका भी प्रदर्शन गिरता गया और खेल से ज़्यादा मज़हबी रुझान बढ़ता गया लेकिन वही जो मेने ऊपर बहस में बताया की फ़ितरते जस की तस रहती हे पाकिस्तानी टीम में लफ़डो झगड़ो में ये भी फिर भी हमेशा पार्ट लेते रहे इनका एक वीडियो देख रहा था जिसमे खूब बड़ी बड़ी मज़हबी बाते बता रहे थे अंदाज़ कुछ यु था की बस इन्हे ही पता हे की मज़हब क्या हे बाकी दुनिया तो कुछ समझती नहीं और मेने देखा की बैठे हुए थे अपने घर में ( जो की सुना हे बहुत ही आलिशान हे ) अपने लाखो रूपये के सोफे पर ? अरे भाई दीन तो सादगी की बात करता हे लाओ सादगी भलाई सब्र देर किस बात की हे ? लेकिन जैसा की हो ही रहा हे बाते तो बहुत हे अमलो अमाल का कही पता नहीं हे

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      लाखो रूपये के आलिशान सोफे पर बैठ कर फिर उछल उछल कर लोगो को दीन पर चलने की सलाह देने वाले अपनी बीवी को हमेशा परदे में रखने वाले अपनी छोटी लड़की से भि हिज़ाब करवाने वाले शाहिद आफरीदी का अफेयर आजकल एक भारतीय मॉडल से चल रहा बताया जा रहा हे दुबई के आलिशान होटलों में मिल रहे हे ? और इतिहास गवाह हे की और चाहे भारतीय मिडिया की सारी बाते गलत साबित हो जाए मगर आजतक तो ऐसा नहीं हुआ की मिडिया ने किसी के ” अफेयर ” की खबर दी हो और वो पूरी तरह झूठ हो ?

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        फंडा किलयर हे की एक भी जो एक भी दीन में बताई गई अच्छाई नेकी सादगी भाईचारा बर्दाश्त ये फैला पाते हो और फैलाय भी कैसे भला ? जब अपनी ही जीवन में नहीं ला पाते हे चलो नहीं ला पाते तो ये भी झेल सकते हे यहाँ तक भी ठीक हे मगर उल्टा ये टुच्चे आफरीदी जैसे लोग पुरे उपमहादीप में मुसलमानो के बीच कटट्रपंथ फैलाते हे कटट्रपंथ का मतलब हे इंटॉलरेंस और यही इंटॉलरेंस पुरे मुस्लिम समाज में फेल रही हे हम क्योकि बहुत ही ज़्यादा जमीन पर रहते हे इसलिए अक्सर ही महसूस करते हे देखते हे सुनते हे भांपते हे

        Reply
  33. Nuzhat Nazneen Khan

    मोहतरम अफज़्ल साहेब ! मुझ को नहेी पता कि आप को देीने इसलाम से कितना लगाव है लेकिन आपका ये कहना कि ” समस्याओं का सामना करने की बजाय उनके पास हर समस्या का एक सरल सा जवाब है: “धर्म से दूरी”. और धर्म से मतलब दो, तीन बातें हैं: नमाज़ पढ़ना, कुरान की तिलावत करना, दाढ़ी रखना, सलवार टखने ऊपर बांधना आदि.उन का कहना के सब अल्लाह के सहारे छोड़ दो , जो भी हो ग अल्लाह करे गा बस हम अल्लाह की इबादत करते रहे !” बिलकुल सहेी है ! बहुत सारे उलमाये दीन की तकारीर से मैं भी फ़ैज़याब हुयी हूं मुझे भी बारहा ये महसूस हुआ है कि हमारे उलमा इसलाम की आफ़ाकियत और हमगीरी को अपनी तकारीर से बहुत् मेहनत के साथ मह्दूद या सीमित ही करते चले जारहे है ! कइ बार मैने करीबी उलमाओं से ये सवाल भी की है कि आखिर दीन है क्या इ बादत का दायेरा आप लोगों ने इतना महदूद क्यों कर रखा है ! तरह तरह के दलायल से वज़ेह करने कि कोशिश भी की है मसलन ,हम पैदल हज पर जाते तो सालों लग जाता इस में पता नही बूढे मां बाप पर क्या गुज़रती कब कब उनको हमारी खिदमत की शदीद ज़रूरत पडती !एक राइट बिरादरान ने हवाइजहाज़् की इजाद करके हमें सफ़र की कितनी सउबतों से बचालिया मां बाप अहलेखाना की खिदमत के लिये कितना सारा वक्तहमारे लिये मुहैया करा दिये क्या ये खिदमतए खल्क ’हकूकुल इबाद मे शमिल होकर इबादत के ज़ुमरे मे नही आता , इसलाम दुनिया और आखिरत दोनो को सवांरने की बात करता है ! अहादीस औअ मुकद्दस कुरान कहीं भी सिर्फ़ इल्मे दीन की बात नही करता वह सिर्फ़ ’ इल्म ’ की बात करता है जो लामहदूद है , हालात व वाकियात से आगाही और जानकारी भी इल्म है और नामुनासिब हालात का जायज़ तरीके से सद्देबाब भी इबादत और उसका ज़रिया भी इल्म ही है !

    Reply
  34. shamsuddin

    आज इन्ही लोगो की वजह से लोग मुस्लमान हो रहे है . आप लोगो को यहूदियों और पश्चिम देशो से पैसा मिलता है इस्लाम को बंदनामम करने के लिए . तौबा कीजिये और इस्लाम में फिर से कलमा पद कर मुस्लमान बन जाइए नहीं तो मरने के बाद जहन्नम में जलने के लिए तैयार रहे.

    Reply
  35. afzal khan

    शम्सुद्दीन साहब
    मेहरबानी कर यहूदियो और पश्चिम देशो से कहा से पैसा मिलता है बताये ताके मुझे भी कुछ पैसा मिल सके तो मे इस न्यूज़ पोर्टल को जिंदा रक सकु. शायेद आप को मालूम नही है के मे ने अभी तक इस पोर्टल पे 1.50 लाख से अधिक अपनी मेहनत की कमायी खर्च लर चुका हु और हर साल 40 हजार का खर्च है . अगर आप को मालूम है तो हमे भी न यहूदियो से पैसा दिलाये. आप की मेहरबानी हो गी.
    इस तरह का इल्जाम लगाना छोड़े और अपनी कमी की तरफ देखे. जहा तक फाट्वा की बात है अपने पास रखे जाये आप ही जन्नत का मजा ले.

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      अफज़ल भाई इन मूर्खो को ये भी नहीं पता की वेस्ट और यहूदियों का फायदा हम जेसो से नहीं कठमुल्लाओं से हे ये लोग ऊपर से जो चाहे कहे दिल से ये चाहते हे की मुस्लिम दुनिया में जहालत कठमुल्लवाद ही भरा रहे हे इसी में इनका फायदा हे वार्ना क्यों भला अमेरिका की पिट्ठू सऊदी सरकार जाकिर नाइक को ही सम्मानित करती हे मौलाना वहीदुद्दीन खान को क्यों नहीं .? रही बात पेसो की तो हम तो पहले ही रोना रो चुके हे की इस दुनिया में कोई ऐसी सरकार कोई व्यक्ति या सनस्था हे ही नहीं जो ”शुद्ध सेकुलर लिबरल भारतीय मुस्लिम वर्ग ” की सहायता करे ऐसा कोई भी हे ही नहीं क्योकि इस वर्ग से सभी निहित स्वार्थी ताकतों को आखिरकार खतरा ही महसूस होगा हम तो बिलकुल तनहा लोग हे

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        पैसा किसके पास हे ? अभी कुछ दिन पहले एक रिश्तेदार के यहाँ एक तब्लीगी प्रतिनिधि मंडल मुझे भी दिखा उसमे एक साहब भी दिखे जिनके घर के सिर्फ सज़ने सवारने में रिकॉर्ड डेढ़ साल का वक्त लगा होगा पैसा पानी की तरह बहा कम से कम पचास लाख लगे होंगे खेर बड़े ठसके से बता रहे थे की ”आख़िरत की तैयारी करनी चाहिए ” खेर इस बात को भी जाने दे तो इतना पैसा कहा से आया ? मेरे घर में चार चार बन्दे बढ़िया जॉब कर रहे हे फिर भी हम पचास हज़ार भी शायद टीम टाम में नहीं लगा पाएंगे क्यकि घर में सिर्फ खून पसीने के पैसे की आमद हे इन साहब के पास इतना पैसा कहा से आया रिश्तदार साहब ने बताया की पहले बहुत दलाली खाते थे

        Reply
        1. सिकंदर हयात

          जब से पाकिस्तानी टीम में सईद अनवर इंजमाम अहमद शहज़ाद जैसे तब्लीगी घुसे तभी से पाकिस्तानी टीम का डाउनफॉल स्टार्ट हो गया इसके कप्तान इंज़माम लारा जैसे अध्भुत खिलाडी से अपने खिलाड़ियों को कुछ सिखवाने की जगह लारा को दावत के बहाने दावत देने में बीजी रहते थे और जैसा की हमने कहा भी की कटट्रपंथ तो ये लोग फैला देते हे हुलिया बदलवा देते हे आदि मगर किसी बुरे को भी सुधारने में बुरी तरफ विफल रहते हे तो इधर गेम से अधिक तब्लीग पर ध्यान रहा उधर बहुत से पाकिस्तानी खिलाडी सट्टेबाज़ी लड़कीबाज़ी जुएबाज़ी में भी पकडे जाते रहे इस बार भी मोईन साहब जुएबाज़ी में धरे गए यानी रिज़ल्ट जीरो और अकड़ सौ जैसे की हमने यहाँ और जाकिर साहब पर बहस में समझया ही

          Reply
  36. ABDUL QUADAR

    BHAI AGAR TABLIG NA HOTI TO ISLAM JINDA NA RAHATA. Q KI HAMARE GAON ME NAM K MUSLIM THE KOI NAMAJ YA 5 ARKAN NAHI KARTA THA JABSE TABLIG AYI HAI ALHAMDULILLA LAG RAHA HAI GAON ME MUSALMAN HAI. RAHA SAWAL TABLIG SE INSAN BADLNE KA TO MAIN KHUD SHARAB PIYA THA AUR CURUPT BHI THA PAR AB YE SAB BAND KIYA HAI. SIRF TABLIGWALON KI WAJHA SE.

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      जैसा की हमने अभी कांधला काण्ड में देखा की किस तरह से अपने साथ हुई बदसलूकी का बदला लिया गया कैसे इन्होने अपनी राह छोड़ कर लोगो को भड़काया फिर कैसे इनके समर्थको ने बीस हज़ार लोगो को परेशान कर डाला बेगुनाह लोगो के साथ बदतमीजी की अपने साथ हुई बीस हज़ार की लूट के बदले इतना बवाल और बदतमीजी की गयी की मेरे ख्याल से एक ही दिन में इन्होने बीजी पे और संघ परिवारके खाते में दस हज़ार लोगो का इजाफा करवा दिया होगा और बता दू की में देवबंदी सैय्यद कभी आप मुझे शिया या बरेलवी बोहरा आदि कुछ और समझ ले और आपने कहा की ”इस्लाम जिन्दा ना रहता तब्लीग ना होती तो ” तो साहब इस्लाम को जिन्दा रखने की ये ठेकेदारी का दावा केवल आप ही नहीं बरेलवी शिया ये वो सभी करते रहते हे लेकिन बेहतर यही होगा की इस्लाम को बख्श ही दे अपनी ठेकेदारी से , इस्लाम को जिन्दा रहने के लिए आप ठेकेदारो की बिलकुल जरुरत नहीं हे

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        कमाल ये हे की शराब छोड़ने के लिए आपको तब्लीगियो की जरुरत क्यों पड़ी भला ? हमने तो शराब छोड़ो कभी बियर सिगरेट पन तम्बाकू गुटका आदि आदि किसी भी नशे का एक सिप तक नहीं लिया इसकलए लिए हमें किसी तबलगी या किसी धर्माधिकारी की जरुरत नहीं पड़ी इस्लाम में शराब मना हे सबको पता हे इससे सेहत और जेब जिंदगी तीनो ढीली होती हे सबको पता ही हे बाकी मेरा कज़िन हे कई दफे तब्लीग में जा चूका हे मगर ऐसा कोई सागा नहीं जिसको ठगा नहीं आजकल तो उसका सागा भाई उसके साथ भी की गई ठगी मुझे तफ्सील से बता रहा हे लोगो को सुधारना इतना आसान नहीं हे चलो नहीं सुधार पाये वो भी ठीक हे मगर उल्टा और कटट्रपंथ फैला रहे हे और खूब फैला रहे हे अच्छाई नेकी इन्साफ फैलाने में कोई उपलब्धि हे अगर होती तो जाकर कोर्ट कचहरी पुलिस थानो में पता कर ले की मुसलमानो के भी कितने मेटर दर्ज़ हे इनमे से एक % भी तब्लीगी सुलझा दे तो में आप लोगो को सेल्यूट करूँगा नहीं तो मुझे ये उमीद ना करे की में भी और कई लोगो की तरह बिना किसी रिजल्ट के ही बस सवाब के लालच में आप लोगो को चने के झाड़ पर बैठा दूंगा नहीं रही बात सवाब की तो मेने काफी सवाब के काम किये हे मुझे सस्ते में सवाब लेना नहीं हे

        Reply
        1. सिकंदर हयात

          आपने कहा की तब्लीगी जमात ने लोगो को इस्लाम सीखा दिया तो इस्लाम का तो मतलब हे बराबरी अच्छाई ईमानदारी सादगी सच्चाई नेकी आदि तो फिर मुझे बताइये की कहा हे ये गुण ? कहा किसको कितनो को इन गुणों पर लाया गया हे ऐसा होता तो जरूर सबको पता भी होता और ये बेहद साफ़ साफ़ दीखता भी मुझे बताइये कहा हे ये सब कौन से गाव शहर मोहल्ले बिल्डिंग में ? अपना उदहारण मत दीजिये अपवाद सब जगह होते हे और अच्छे बुरे लोग भी सभी जगह होते हे मगर जैसा आप बता रहे वैसा होता तो ये यूनिक बात होती हे और जरूर प्रकाश में आती अपने आस पास भी दिखाई देती साफ़ साफ़ दिखती जैसे मेरे कुछ पढ़े लिखे रिश्तेदार पैसे वाले भी मज़बूत भी हे कोई जिम्मेदारी नहीं हे वो बातो बातो में जाकिर नाइक तब्लीगी जमात का खूब उदहारण देते हे मगर उन पर उनकी बुआ फूफा ( ये भी मज़हबी लोग ) इन्होने इन पर प्रॉपर्टी हड़पने का आरोप लगाया हे जो की दो हिस्सों में एक विवादित और एक गैर विवादित यानी वो बुआ की ही हे अब तब्लीग की बड़ी बड़ी बाते करने वाले ये लोग ना विवादित सम्पत्ति छोड़ते हे ना ही ही गैर विवादित यानी वही रवैया जो गैर मुस्लिमो का भी होता हे तो साहब आप लोग कहा कौन सा बदलाव लाय हे भला ?

          Reply
          1. सिकंदर हयात

            अब्दुल भाई बदलाव की बात पर एक और किस्सा सुने शादियों में बड़े उत्साह से जिस लड़के को जाकिर नायक के पर्वचनलोगो के मोबाइल में डालते देखा और खुद भी पर्वचन करते देखा उनका भी सुने ये साहब चार भाई हे और इनके पिता एकलौते थे और पुश्तैनी सौ बीघे के मालिक थे ना जिंदगी में इन्होने कुछ किया ना इनके उत्तराधिकारियों ने और इनकी नीचता देखिये की इनकी एकलौती पुपो ( बुआ ) की आर्थिक इस्तिति हमेशा खराब रही मुजफरनगर में ये हमारे ही मोहल्ले में रहते थे इसलिए पता था की गरीब बुआ को पांच दस बीघा जमीन तो छोड़ो वो कहती हे की कभी एक चावल का बोरा तक कभी नहीं दिया जबकि किसान के लिए उपज बाटना मामूली बात होती हे बहुत ही मामूली खेर अब पिता का तो इंतकाल हो चुके हे और जाकिर साहब के फेन अब जमीन बेच बेच कर महँगी गाड़िया मोबाइल ले रहे हे मोबाइल में जाकिर साहब के वीडियो हे रोज सुनते होंगे मगर एक चवन्नी भी अब भी गरीब बुआ को देने की ज़हमत नहीं करते हे जबकि इस्लाम में बेटी को सभी हक़ देने को कहा गया हे तो साहब बात को समझिए आप लोगो का रिज्लट जीरो हे गलती चाहे जिसकी हो जिसकी भी हो मगर रिजल्ट जीरो हे ये बात आप लोग समझ ले तो बेहतर ही होगा

  37. mohd azeem

    Bhai mai sirf itna kah raha hu ki koi bhi jamat agar deen ke liye kuch kar rahi hai toh wo humse behtar hai

    Reply
  38. सिकंदर हयात

    दीन के लिए आप कर रहे हे की आपने लोगो के ”अमाल ” को छोड़ कर और बहुत कुछ बदलवा दिया हे खासकर हुलिया एक में देख रहा हु की ये बदलाव भी आप लोगो की मेहबानी से ही शायद आया हे की हमारी मासूम लड़कियों पर छोटी छोटी बच्चियों पर भारत की भयानक उमस भरी गर्मियों जो अरब की गर्मियों से अलग होती हे आपने उन पर अरबी हुलिया थोप दिया हे आपसे बेहतर तो पुराने मुल्ला ही थे जो कम से कम लड़कियों के बड़े होने पर उन्हें परदे के लिए कहते थे मगर अब बड़े होने से बहुत पहले ही उन पर अरबी हुलिया थोपा जा रहा हे जो हो रहा हे अच्छा नहीं कर रहे हे आप लोग

    Reply
    1. anam khan

      सिकन्दर हयात आप सही को भी काटते है और गलत को भी आपकी कृतिम सोच को पुरे दिन पढा कुल मिलाकर तुम नास्तिक हो। दिल से कहो अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नही मोहमद अल्लाह के आखरी रसुल है।सुरज की गरमी से तेज जहन्नम की आग से बच जायेगे जिस जहन्म का जिक्र बार्ईबिल मे भी है।ये चाँद देखा बिना इजन के कैसे हवा म रुका हुआ है।क्या तुम्हारी ब्लागर सोच ये कर सकती है।अल्लाह के हुक्म से तो ये जमीन आसमान का निजाम एक्टीवेट है।हमरा तुम्हारा वजुद मौत पर खत्म हो जायेगा

      Reply
      1. सिकंदर हयात

        ये शायद आपके पहले कॉमेंट हे अफज़ल भाई की साईट पर यहाँ आपका बहुत बहुत इस्तकबाल हे आते रहिये लिखते रहिये शुक्रिया और हमारी किस लाइन में आपको नास्तिकता दिखी या किस लाइन से आपको ऐतराज़ हे ? वो आप कॉपी पेस्ट करे तो में जरूर जवाब लिखूंगा शुक्रिया

        Reply
  39. javed

    very good efforts by afzal khan and team , very good debate, please add the ‘like or dislike ‘ option below the comment if possible

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      जावेद साहब आपका इस साइट पर बहुत बहुत इस्तकबाल हे आते रहिये और दूसरे लोगो को भी इस साइट के बारे में बताय अभी तो शुरुआत सी ही हुई हे आगे और बेहतर सामग्री आदि पेश करने की पूरी कोशिश रहेगी शुक्रिया

      Reply
  40. khalil

    पूरी दुनिया में दीन तबलीग की वजह से फैल रहा है..और फैलेगा…

    Reply
  41. khalil

    Maulana Tariq Jameel Sahab D B Farmate hai…..
    Tableegh Koi Tahreek Nahi Hai……
    Koi Esi Tahrik Kisi Ne Tayyar Nahi ki…Ke
    Jis Me
    Maal Bhi Apna Lagate…
    biwi baccho ko bhi Choro…
    Gharbaar bhi Choro…
    Dhakke bhi Khate Firo….
    Mulk Mulk Firo…
    Basti Basti Firo…
    Logo Ki Karwi kaseli Suno..
    Iske Piche Sirf Imaan Ki Taqat Hai…
    Khatme Nabuwwat Ki Taqat Hai…

    Reply
  42. Sher Muhammad Quraishi

    Afzal khan , your have not not mind your have worst and dirty mind , your have not knowledge about of islam , you are totally mentally disorder , अबे बद दिमाग दिमाग़ अफज़ल खान , तुझसे ज़्यादा अच्छा दिमाग तो कुत्ते के पास है , अगर तुम समझे तो , कमीने तु क्या जाने , क़ुरान क्या कहता है , तेरी सारी दौलत जमीन ज़ायदाद बिबी बच्चे और सारी दुनिया, तुझे और जिस कुत्ते ने यह लेख लिखा है , अल्लाह के अज़ाब से नही बचा सकती तुम लोगों को नहीं बचा सकती अगर तुम लोग , अल्लाह का हुक्म नही मान कर गए और रसूल की इताअत नही कर के गए , घटिया नालायक इंसानों , अगर इंसान हो तो ऐसे लेख मत लिखो जो अल्लाह और उसके रसूल दीन के खिलाफ हो , कारून के पास इतनी दौलत थी के वो अकेला अपनी दौलत से १० हिन्दुस्तान खरीद सकता था , तो क्या उसकी दुनिया की कामयाबी और दौलत उसे अल्लाह के अज़ाब से बचा पाई , असली कामयाबी आख़िरत की कामयाबी है , जैसी करनी वैसी भरनी , नही किया तो कर के देख जन्नत भी है दोजख भी है नही माने तो मर के देख , तुम दोनों कुत्तों नसीहत है मेरी , जिसने यह लेख लिखा और जिसने यह लेख सब के सामने share किया

    Reply
  43. zakir hussain

    ये लोग, विभिन्न क्षेत्रो के कामयाब लोगो को आकर्षित कर, अपना ब्रांड एंबेसेडर बनाना चाहते हैं.
    मुझे एक सज्जन मिले, कहते हैं कि मुसलमानो मे आज कल पढ़े लिखे लोगो की तादात बहुत कम है, अल्लाह के फ़ज़ल से आपने बहुत अच्छी तालीम हासिल की है, आपको अपनी क़ौम के कुछ करना चाहिए.

    मैने कहा, मैं अपनी क़ौम के लिए कुछ कर सकूँ, तो बहुत खुशी होगी. मुझे क्या करना चाहिए. उन्होने कहा, आपको दीन की खिदमत करनी चाहिए, आप जहाँ कहीं भी जाए, अपने आपको एक इंजीनियर ही नही, एक मुसलमान इंजीनियर बताए, जमात (तब्लीगी) से जुड़ कर, लोगो तक जागरूकता फ़ैलाएँ.

    मैने कहा कि यक़ीनन मुझे जो कुछ भी नसीब हुआ है, वो अल्लाह की रहमत से हुआ, लेकिन इसमे दीन कहाँ से आ गया? बेहतर हो कि मैं लोगो को मोटिवेट करूँ. मुझे जिन लोगो के जीवन और विचारो से प्रेरणा मिली, वो सिर्फ़ मज़हब से जुड़े नही थे, सिर्फ़ मुसलमान नही थे. अगर आप लोगो की छोटी-बड़ी कामयाबी भुनाना चाहते हैं, तो वो इस मुकाम तक कैसे पहुँचे, वो उन्हे बताना चाहिए.

    इंजमाम उल हक, सक़लैन मुश्ताक, शाहिद आफ़रीदी तब्लीगी जमात के स्टार आइकन बने हैं. लोग, उनके हुनर के कद्रदान है. उनकी इसी शोहरत को जमात भुना रही है. लेकिन उनकी कामयाबी के पीछे, जिसे ये दीन बता रहे हैं, वो तो नही.

    अब होगा क्या, अब ये लोग, जिन्होने मेहनत कर पसीना बहा कर, कामयाबी पाई, लोग इनके फ़ैन है, ये लोगो को अपने हुनर को निखारने के नुस्खे कम बता रहे हैं, बल्कि लड़कियों को क्रिकेट खेलने की बजाय, अच्छा खाना बनाना चाहिए, क्या पहनना चाहिए, क्या नही, बतला कर गुमराह कर रहे हैं.

    जिसके नतीजे मे, जो देश के क्रिकेट की हालत थी, उससे गिरती चली गयी. आज पढ़े-लिखे लोगो पे ये डोरे डाल रहे हैं, जिससे जो थोड़े बहुत अच्छे पढ़े लिखे लोग हमारी क़ौम मे मिल रहे हैं, वो भी कम हो जाएँगे. इनकी हीन भावना और बढ़ेगी, ये और कामयाब लोगो को ढूंढ़ेंगे. धीरे-धीरे इनको वो मिलने भी बंद हो जाएँगे, क्यूंकी निकम्मेपन से क़ौम की हालत खराब ही होती है.

    Reply
  44. zakir hussain

    तब्लीगी जमात का सबसे चर्चित चेहरा और नाम है, तारिक़ जमील. ये महाशय, पाकिस्तान के बेहद हुनरमंद फनकार, जुनैद जमशेद से संपर्क साधते हैं, और उसको अपनी बातो से ऐसा प्रभावित करते हैं, कि इतना अच्छा गायक, संगीतकार, संगीत से नफ़रत कर, दिन की 5 वक्त की नमाज़ पढ़ने लग जाता है.
    इंजीनियरिंग के पेशे मे भी उसका मन नही लगता. लेकिन कामयाब से नालायक बनने के ऐसी मिसालो की तब्लिगियो को ज़रूरत पड़ती है. वैसे, मुस्लिम समुदाय मे बेकार भटकते, नाकाम लोगो की कोई कमी नही है, जो नमाज़, रोजे बराबर अदा करते हैं. लेकिन वो ऐसे लोगो को भाव नही देते, उन्हे काबिल से निकम्मेपन की ओर जाते लोगो की मिसाल देनी पड़ती है.

    जो सामने आए, पहले अपनी कामयाबी के किस्से बताए, फिर बताए कि मुझे अपनी जिंदगी का मकसद ही नही पता था, और फिर अल्लाह की नेमत मुझ पे पड़ी, और ये तब्लीगी जमात के विद्वान मुझे मिले, और फिर मुझे पता चला कि मेरी जिंदगी का असली मकसद निकम्मापन करना और फैलाना है.

    ये तारिक़ जमील साहब, जब पाकिस्तान क्रिकेट टीम के संपर्क मे आए, तब ये विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीमो मे एक थी. फिर धीरे-धीरे, इन्होने क्रिकेट मे भी मज़हब घुसाना चालू किया, जनाब ड्रेसिंग रूम तक पहुँच रखते थे. टीम के खिलाड़ियों को मीठी बाते सुनाते थे, उनके साथ नमाज़ पढ़ते. उन्हे बताते, तुम क्रिकेटर नही मुस्लिम-क्रिकेटर हो. जिससे जब ये कभी मैच हारते, तो मुसलमानो से माफी माँगते. टीम मे अपनी जगह बचाने या पाने के लिए, लोग तब्लीगी जमात से जुड़ने लगे. और आज हालत यह है कि टीम का तो बंटाधार हो ही गया, और टीम के तब्लीगी सदस्यो मे भी कोई अच्छी एकता नही बची.

    एक ही पीढ़ी के, एक साथ खेले, जमात से जुड़े, शोएब, युसुफ, सक़लैन, आफ़रीदी, सार्वजनिक मंचो मे एक दूसरे के लिए ओछी बाते करते मिल जाएँगे.

    जहाँ जहाँ चरण पड़े, इन तब्लिगियो के तहाँ तहाँ बंटाधार.

    Reply
  45. सिकंदर हयात

    आगे हुआ ये की जाकिर भाई की इन जुनेद साहब की बाद में बड़ी दुर्गत हुई बिलकुल किसी राजनीति की तरह इनकी किसी हदीस की व्याख्या पर जमकर हंगामा हुआ इनके जैसे हि दूसरे ठेकेदारों जैसे आमिर लियाकत आदि ने इनके खिलाफ ऐसे ऐसे शब्द प्रयोग किये की पूछो मत बहुत गंद मच गयी बात ने देवबंदी बरेलवी क्लेश का रूप ले लिया इन साहब को देश छोड़ना पड़ा और कमाल ये हे की मुल्ला के रूप में भी ये शायद म्यूजिशन से भी अधिक ही लग्ज़री लाइफ जी रहे थे ” रंज लीडर को बहुत हे मगर आराम के साथ ”

    Reply
    1. zakir hussain

      अब ये जुनैद मियाँ, रमजान के महीने मे अपनी ब्रांड का प्रोमोशन कर रहे हैं, रमजान के महीनो मे आने वाले प्रोग्राम “शान ए शहर” मे.

      एक परफ्यूम निकाला है, इन्होने “वसीम अकरम” के नाम का. शो मे वसीम अकरम को बुला कर एलान करते हैं कि वो दुनिया के पहले क्रिकेटर हैं, जिनके नाम पे परफ्यूम मार्केट मे आया है, इस हिसाब से पाकिस्तान का नाम रोशन होगा.

      दर्शको से कह रहे हैं, ये मात्र 2985/- मे मिलेगा, और इस तरह से पाकिस्तान की शान, वसीम अकरम दिल मे ही नही, खुश्बू मे भी शामिल होंगे.

      ये तबलीग़ वाले, बाते बड़ी बड़ी और सादगी की करते हैं, लेकिन मज़हबी ज़ज्बात मे भी अपनी दुकानदारी चलाते हैं.

      सादगी और ईमानदारी से चलने वाले ढिंढोरा नही पीटते. ये मेरा निजी अनुभव रहा है.

      Reply
  46. zakir hussain

    तारिक़ जमील ने कइयों को बर्बाद किया हुआ है. आमिर ख़ान के भी पीछे पड़े थे, ये जनाब. हज मे शाहिद आफ़रीदी के पीछे पड़ गये, एक बार इससे मिला दो, मिलान हो भी गया. अपनी माँ को हज पे ले जाने वाले आमिर ने इसको भाव भी दे दिया. आमिर ख़ान ने तो इसकी बात नही की, लेकिन जमील साहब, अपने चेले-चपाटो को, आमिर ख़ान के किस्से सुनाते हैं, बड़े गुरूर से. मुझे देख के डर गया, वो मेरे से ज़्यादा फ़िल्मो के बारे मे नही जानता, वग़ैरह.

    आमिर ख़ान हज पे गया था, मक्का के बाद मदीना जा रहा था, जमील मियाँ, मदीना हो आए थे, फिर भी उसके पीछे पड़ने के लिए, दोबारा मदीने चले गये, वहाँ भी उससे टाइम लेके 5-6 घंटे उसको पकाया.
    ये कामयाब इंसान के पीछे ही भागते हैं. वो इनके लिए एक अपने ग्राहको को दिखाने का इश्तेहार होता है. वरना गली-मुहल्ले मे बहुत निठल्ले घूमते रहते हैं, उन्हे इतना भाव नही देते.
    वैसे आमिर ख़ान ने इसे ज़्यादा भाव नही दिया, बंदा समझदार है. लेकिन फिर भी उसके साथ फोटो और किस्से, माल बेचने के काम आ ही जाते हैं.
    बंदा फँस जाए तो कामयाबी से निकम्मा बनने की फेहरिस्त मे उसको भी रख कर, अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाते रहते हैं.

    Reply
  47. सिकंदर हयात

    भारतीय उपमहाद्वीप काबुल टू कोहिमा में सबसे अधिक अमीरी और सबसे अधिक गरीबी सबसे अधिक शोषण अपमान तिरस्कार हे यहाँ आम आदमी के घोर शोषण को बयान करती इस्मत चुगताई की कहानी नन्ही की नानी में इस्मत अंत में सही लिखती हे की ” क़यामत का बिगुल बजा और नानी भी अकड़ू घिसटती हुई फरिश्तो को गालिया बकती हुई लपकी — उनकी हालात और इंसानियत का इतना तिरस्कार देख कर खुदा भी खून के आंसू रोने लगा ” . और यहाँ के समृद्ध लोगो को इंसानियत से दूर करने में इन धर्मगुरुओ बाबाओ की बहुत बड़ी भूमिका रही हे ये इन लोगो को ऐसा संतुष्ट करने वाला आध्यात्मिक डोज तैयार करके दे देते हे की उसे वो संतुष्टि हासिल करने को कोई इंसानियत का काम करने में कोई खास दिलचस्पी या जरुरत महसूस ही नहीं होती हे

    Reply
  48. zakir hussain

    दलीले सुनो, इनकी सिकंदर भाई, तुम अल्लाह को जानते हो, मानते हो, पहचानते नही. सुभान-अल्लाह. इनकी बाते, कैसे भोले-भाले लोगो को ना फँसाए. पढ़े-लिखे लोग तक गुमराह हो जाए.

    https://www.youtube.com/watch?v=Fe2uvaDVTmg

    Reply
  49. सिकंदर हयात

    जिस समय पाकिस्तानी टीम का हल्का फुल्का तालिबानीकरण सा हो रहा था उस समय तो कहते हे की शोएब अख्तर ही इसका हल्का फुल्का विरोध करते थे शायद बाद में जब इनका बुरा दौर आया उम्मीद से बहुत कम इन्हे कामयाबी मिली तो फिर इनका भी झुकाव हो गया होगा मेरी जानकारी में इसी शुरुआत सईद अनवर ने की थी जिनकी नवजात बेटी मर गयी थी जिंदगी के दुःख तकलीफों से घबरा कर ये लोग इस तरह करते हे फेथ से दुनिया के दुखो का सामना करना सही हे मगर ये लोग जो मुल्लागर्दी शुरू कर देते हे उसका कोई फायदा नहीं हे बाद में इसी का नतीजा अहमद शहज़ाद जेसो ने मैदान में ही तब्लीग़ शुरू कर दी ( दिलशान को ) में इसे स्वस्थ आध्यत्मिकता नहीं कायरता मानता हु फिर वाही हुआ जो होना था पाकिस्तानी टीम का पतन खिलाड़ियों में आपस में क्लेश लड़कीबाजी सट्टेबाज़ी आदि घटनाय कहने का आशय ये हे की अगर आप बेलगाम मुल्लागर्दी करोगे तो उससे दुनियावी हवस तो लोगो की कम न होगी ऊपर से क्लेश और शुरू हो जाएगा यही बार बार साबित होता हे अभी एक साहब मुझ पर तब्लीग़ कर रहे थे मेने अपनी ”काउंटर तब्लीग़ ” शुरू की और उन्हें समझाया की आप नमाज़ रोजा हज ( एक बार ) करते रहिये बहुत अच्छी बात हे मगर अपने जीवन में किसी लोकल ” जाकिर नायकों ” को प्रवेश मत करने देना वर्ना अंजाम अच्छा नहीं होगा मेने उद्धरण भी दिए वो साहब सर हिलाते रह गए

    Reply
  50. zakir hussain

    अफ़रीदी मियाँ, जब तारिक़ जमील के संपर्क मे आए तो अफ़रीदी की बुद्धि इतनी भ्रष्ट हो गयी, कि इसने कहा कि मैं तो बेवकूफ़ था, जो क्रिकेट मे अपनी जिंदगी खराब कर रहा था, मैं अब आपके साथ मिलके आप जैसा ही काम करूँगा.
    तारिक़ जमील ने उससे कहा, अपना काम मत छोड़ो, उसमे रह कर ही ये करो. क्यूंकी, क्रिकेट मे रहते हुए, तुम्हे एक्पोज़र मिलेगा, जिससे तुम बाकी लोगो को इस्लाम की ओर झुकाने मे मदद मिलेगी.
    उस समय से आलम यह है कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के अधिकांश लोग, इस धंधे मे लग गये. नया-नया मुसलमान बना, युसुफ योहाना उर्फ मोहम्मद युसुफ, डेनियल विटोरी को मुसलमान बनाने की कोशिश करता है, अहमद शहज़ाद, दिलशान को जन्नत का लालच देता है. तारिक़ जमील ने कहा कि वो पूर्व कोच, बॉब वूमर को भी मुसलमान बनाना चाह रहा था. हालाँकि वो कोच संदेहास्पद परिस्थिति मे एक होटल मे मर गया, जहाँ पाकिस्तान की क्रिकेट टीम भी रुकी हुई थी.
    ये भी पता चला कि वोब बूमर को पाकिस्तान क्रिकेट टीम का ज़्यादातर वक्त, मज़हबी क्रिया-कलापों मे बिताना सही नही लगता था, और इस वजह से उसकी इंजमाम से कई बार, बुरी तरह बहस हुई. आम तौर मे शांत स्वाभाव का इंजमाम, मज़हब की बात आ जाने पे बहुत गुस्सा भी हो जाता था.

    खैर अब लोग बोलेंगे, कि इसमे ग़लत क्या है. मुसलमान का तो फर्ज़ ही है, इस्लाम की दावत देना, उसका प्रचार करना. हर व्यक्ति, किसी ना किसी पेशे मे तो रहेगा ही. इसका अर्थ यह तो नही कि अपने फ़र्ज़ को छोड़ दे.

    Reply
  51. zakir hussain

    मेरी नज़र मे इसका नकारात्मक प्रभाव यह है कि अगर, पेशेवर क्रिकेटर्स को इस काम के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, तो खेल मे कम और इन बातो मे ज़्यादा ध्यान देंगे. जिससे खेल का स्तर बिगड़ सकता है, जो हाल के वर्षो मे बिगड़ा भी है.

    अब लोग दलील ये भी दे सकते हैं कि कोई ट्रॉफ़ी या सिरीज़ जीतना, ज़्यादा अहम है, या दीन की खिदमत? तो बात यह है कि अगर खिलाड़ियो को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, तो लोग खेल मे अपनी स्थिति को सुधारने के लिए, इन जमातो से जुड़ेंगे. जैसे युसुफ योहाना, इसी वजह से मुसलमान बना ताकि कप्तान बन सके. पीसीबी मे तब्लिगियो का कब्जा नही हुआ था, और पीसीबी क्रिकेट मे मज़हब के बढ़ते प्रभाव से चिंतित भी थी, सो हमारे योहाना का काम नही बना.

    लेकिन सोचिय, अगर यही हाल हर पेशे मे रहा और इसी को बढ़ावा दिया गया तो लोग किसी पेशे मे अपने हुनर को निखारने की बजाय, इन कामो मे लग जाएँगे. किसी की पेशेवर काबिलियत की बजाय, दीन को फैलाने की कूवत को ज़्यादा महत्व दिया जाएगा. जिससे पक्षपात, भेदभाव फैलेगा, कुंठा बढ़ेगी, समाज गर्त की ओर जाएगा.

    गौर फरमाइए, शोएब अख़्तर मियाँ, जो हमेशा तब्लिगियो को नापसंद करते आए, अपने कैरियर की ढलान पे तब्लिगियो से जुड़ गये. कहते हैं, ये जमात नही है. ये सारे अल्लाह वाले हैं, जो दूसरे अल्लाह वालो की ख़ैरियत चाहते हैं, उनके लिए दुआ करते हैं. जबकि अपने साथी तबलीग़ से जुड़े, आफ़रीदी से ईर्ष्या करते हैं. अफ़रीदी मियाँ भी इनको सार्वजनिक मंचो मे औकात बताते रहते हैं. सक़लैन मियाँ, टीवी पे आके, बताते हैं, इसने मेरे से 200 रुपये उधार लिए नही लौटाए.
    तो जैसा कि सिकंदर भाई ने कहा कि तबलीग़ से जुड़ कर, किसी के अमाल मे कोई तब्दीली नही आई. निकम्मापन ज़रूर फैला है.
    बाकी लोगो के उल्लू भी सीधे हुए है. जुनैद मियाँ का फैशन ब्रांड थोड़ा तब्लीगी ब्रांड से बिक जाता है, जैसे अपने यहाँ बाबा रामदेव के प्रोडक्ट बिक जाते हैं. अफ़रीदी की खराब फॉर्म के बाद भी दीन की खिदमत से वो जनता मे हीरो बना रहता है, जिससे ब्रांड वेल्यू बनी रहती है.

    Reply
  52. abdur rahman

    Although a lot of the things they do are good, they keep away from learning/understanding the book of Allah and its real message [changing society as a whole] (except learning few small surahs) and they keep themselves a million miles away from current affairs/politics/injustice/controversies. All the messengers and prophets of Allah would attack the root problems of their societies, they would not focus only on those issues that were acceptable to the society. The bigger the problems you try to solve in the society, the bigger enemies you will make. I doubt if they have any enemies because the system/governments love them a lot, due to the fact that they are making their lives easier and letting them do whatever they want, and making people vegetables (doing nothing). No voice of truth, no courage. No amar bil ma’ruf nahi anil munkar (achai ka prachar, burai se rokna). They are never arrested, prosecuted or killed in fake encounters. Look at Prophet Muhammad (peace be upon him), he had to face his oppressing leaders, they tried to assassinate him several times, boycotted him, and look at Eesa (alaihis salam) – he was persecuted by the ruling power Rome, they tried to assassinate him several times, boycotted him, and look at Musa (alaihis salam), he was persecuted by Phiraun. Tablighi jamat guys don’t invite our other brothers in humanity around us like hindus etc to this beautiful gift of Islam that we have been blessed with, this is selfish! If they are really following our beloved prophet truly, they need to think about society around them and not live like monks in the forest. They should raise their voice against injustice. They should invite non believers to the truth of Islam. This is exactly what all the prophets, messengers and righteous people did. Salam

    Reply
  53. Eजै

    तबलीगी जमात लोगो को नकारा नाही बनाती बल्कि इस्लाम से रूबरू कराती है आप जैसे भटके हुए मुसलमानो को. और लोग चालीस दिन,चार महीने इसलिए जाते है की इस्लाम को समझ सके , इल्म हासिल कर सके क्योंकि अल्लाह का हुक्म है की इल्म हासिल कारो.

    Reply
  54. Abdul Qadir

    तबलीगी जमात के लोग ऐसी कौन सी तबलीग कर रहे है की मुसलमानो को ही कलमा पढ़ा रहे है
    और मुसलमानो को इस्लामी अक़ीदे से दूर कर आतंकवाद कट्टरवाद का पाठ पढ़ा रहे है

    Reply
  55. सिकंदर हयात

    जितना हम अपने आस पास रोज ही देखते हे तो चाहे वो जाकिर नायकों की फौज ही तब्लीगी हो या कोई और मुल्लाशाही ये सभी लोगो के अमाल या मिजाज बदलवाने में पूरी तरह से नाकामयाब और ”हुलिया ” बदलवाने में पूरी तरह से कामयाब हुए हे इसी को ये अपनी बहुत बड़ी उपलब्धि समझते हे अच्छा आम आदमी भी इनसे कभी भी बहस नहीं करता वो इनके ” श्राप ” से डरकर बस इनकी जयजयकार कर देता हे जिससे ये और बुरी तरह से आत्ममुग्द रहते हे हम तो आम लोगो को यही सलाह देते हे की भाई नार्मल रहो , नमाज़ रोजा करो सही हे मगर अपने जीवन में मुल्लाशाही को दखल मत लेने दो इसके नतीजे कभी अच्छे नहीं आएंगे दुनिया में कही आये हो ऐसा कोई सबुत भी नहीं हे

    Reply
  56. zakir hussain

    उपरी तौर पे दिखने मे ऐसा लगता है कि तब्लीगी लोग सिर्फ़ इबादत ही तो सीखा रहे हैं. हम भी तो यही कह रह रहे हैं कि वो सिर्फ़ इबादत ही कर रहे हैं.

    ये दुनिया, सिर्फ़ इबादत से नही चलती? अब बात रही कि समाज मे फैली बुराई और नफ़रत की तो जनाब, इसके लिए हमे बुराइयो को संजीदगी से हानिकारक मानना पड़ेगा. और यहाँ तबलीगी स्पष्टता के साथ नही आ रहे, और बहुत अंतर्विरोध है. उदाहरण के तौर पे ये वीडियो देखे, तारिक़ साहब का.

    https://www.youtube.com/watch?v=L5pNDJz4VWc

    जनाब कहते हैं, नमाज़ से इनकार, बलात्कार, हत्या से भी बड़ा जुर्म है.

    एक वीडियो मे तो वो फरमाते हैं कि बूढ़े इंसान के सारे पाप अल्लाह माफ़ कर, जन्नत मे एंट्री देता है.

    ऐसे रवैये की वजह से ना तो मुस्लिम समाज मे अपराध कम हो रहे हैं, और निकम्मेपन की वजह से समाज भी पिछड़ रहा है.

    ये तब्लीगी जमात, तो आतंकवादियो से भी बड़ी समस्या पैदा कर रहे हैं. आतंकवाद का तो धमाका होता है, तो समाज के भीतर से निंदा के तो कुछ स्वर सुनाई देते हैं, यहाँ तो मुस्लिम समाज को लोरी सुना के सुलाने की कवायद चल रही है.

    Reply
  57. सिकंदर हयात

    लीजिए रात दिन अपने टिवीटर अकाउंट पर रिलिजियस टिवीट भी करने वाले एजाज खान अश्लील मेसज भेजने में फंस गए इससे पहले भी ऐलि अवराम ने भी उनके पार्टी में पीछे पड़ने की बात कही थी ज़ाहिर हे की ये धार्मिक आदमी नहीं हे लेकिन फिर भी रिलिजियस टिवीट पे टिवीट क्यों करते थे क्योकि कुछ लोग इन जेसो को दीन धर्म की बात बताते सिखाते बड़ी ख़ुशी बड़ा फख्र महसूस करते हे ज़ाहिर हे की अगला हां हा हा हा कर देता हे ये बेहद खुश हो जाते हे सोचते हे की हमने मज़हब के झंडे गाड़ दिए और दुनिया से बुराई कम कर दी हे इसी से ये दावे करते फिरते हे की ये दुनिया को बचा रहे हे आदि मगर इंसान सुधरता कहा हे ? वो दुनियावी हवस में लगा रहते हे और चलो वो भी अपनी जगह मगर उल्टा और कटटरपंथी बनने का खतरा पैदा हो जाता हे यानि कोढ़ में खाज वाले हालात बनते हे इंसान सुधरता नहीं हे कटटरपंथ और फेल जाता हे

    Reply
  58. zakir hussain

    अपने भीतर की बुराइयों को दूर करने के लिए तब्लीगी जमात हो या इस जैसी किसी अन्य समुदाय के धार्मिक संगठन, कभी सहायक नही होते. इसका कारण यह है कि इनका पूरा ज़ोर, सिर्फ़ पूजा पद्धति पे रहता है.

    बुराई क्या है, इसको समझने के लिए, आपको किसी भी कार्य के सामाजिक प्रभाव देखने पड़ते हैं, आपको यथार्थवादी होना ही पड़ेगा. परलोक की परी-कथाओं मे डूबते समय, आप इस नज़र से दूर हो जाओगे.

    इसका सीधा असर, निकम्मेपन के रूप मे होता है.

    हम लोग, यहाँ तक कि रूढ़िवादी मुस्लिम भी, मुस्लिम क़ौम के पिछड़ेपन की बात करते हैं, लेकिन उसी समय 40 दिन, 4 महीने इज्तेमा मे गुजारने को महिमा मंडित करते हैं.

    अल्लाह ने मुसलमान को भी उतने दिन, घंटे, उमर दी है, जितनी औरो को. जिस शख्स ने जितना समय, इल्म हासिल करने मे दिया, उतनी कामयाबी हासिल करी.

    क्या अल्लाह के प्रति विनम्रता को जताने के लिए, इन बातों मे इतना वक्त बिताना सही है? आप अपनी जात पे कभी गुरूर नही करते हो, इस दुनिया से अपने अमाल के साथ अकेले रुखसत हो जाने के ख़याल के साथ, ग़रीब, दुखियारों की मदद करते हुए, जिंदगी बसर करते हो, अपने और दूसरे के इल्म और हुनर मे इज़ाफा करके इस खुदाई को और बेहतर बनाने की कोशिश करते हो, तो ये बहुत बड़ी इबादत है.

    Reply
  59. zakir hussain

    निकम्मेपन को लेके लोगो मे ये राय हो सकती है कि बेचारा किसी को परेशान तो नही कर रहा.

    लेकिन, अगर किसी समुदाय की बड़ी आबादी, निकम्मेपन की शिकार हो जाएगी, तो समाज मे समस्याए बढ़ती जाएगी. ये वैसा हाल होता जाएगा कि बीमारी बढ़ रही है, लेकिन दवा नही खाई जा रही.

    हम कितनी भी फेयरी टेल्स मे कुछ देर के लिए चले जाएँ. ख्वाबो मे जन्नत के टूर लगा आएँ, लेकिन पेट भरने के लिए, अन्न यहीं उगाना पड़ेगा, कपड़े यहीं बुनने पड़ेंगे. खुदाई को खुदा नही निखारेगा, हमे ही निखारना पड़ेगा.

    ये दलील कि हम तो कुछ पल के लिए इस दुनिया मे आए, इस दुनिया को सँवारने को क्यूँ तवज्जो दें. वो दुनिया चिर-स्थाई है,
    तो जनाब, आज इस दौर मे जो कुछ इस दुनिया मे बेहतर है, उसके पीछे हज़ारों लाखों सालो की इंसानी तारीख है. आगे भी कई सदियों तक नस्ले आएँगी. हमारी 60-70 साल की जिंदगी, उस लाखो साल की जिंदगी का हिस्सा है. इसलिए दुनिया को खूबसूरत बनाने के मकसद को कम मत आन्को.

    बर्बाद मत करो, इस वक्त को.

    Reply
  60. ayaz shaikh

    YE NAQAL HAI SAHABA RA ki aaj puri duniya mein Islam fasad ki wajah se na talwaar ki wajah se ye akhlaq ki wajhe se faila hai

    Reply
  61. ayaz shaikh

    Waqt waqt ki baat hai
    Aaj zaroorat hai logo ke aamal ki fikar karne ki
    Waqt aayega to …………..ग़ॉड POWER…

    Reply
    1. zakir hussain

      तब्लीगी जमात का मकसद अमाल है ही नही, उनका मकसद इबादत है. अमाल तो अख़लाक़ और तालीम से बनता है, और वो मुसलमान, हिंदू, काफ़िर, नास्तिक, आस्तिक किसी का भी अच्छा या बुरा हो सकता है.

      मैं कुछ इज्तेमा मे भी गया हूँ, और तारिक़ जमील और इनके जैसे उद्देश्य मे लगे लोगो के बहुत से लेक्चर भी सुने हैं. मेरा अनुभव यही है कि मुसलमानो के पिछड़ेपन और बदहाली के जो भी कारण है, उनका इन्हे अता-पता ही नही, ये किसी ओर ही दुनिया के लोग है. जो भी दलील दो, लेकिन अमाल से तो इस एलियन प्रजाति को ना ही जोड़ो.

      Reply
  62. सिकंदर हयात

    हन्नान अंसारी जी की वाल से हन्नान अंसारी -” तबलीगी जमात और उनके प्रचार में मुख्य समस्या यह दिखती है कि उनका सारा जोर पूजा या इबादत की हिदायत पर होता है.। समस्याओं का सामना करने की बजाय उनके पास हर समस्या का एक सरल सा जवाब है: “मुसलमानो का धर्म से दूरी”. और धर्म से मतलब दो, तीन बातें हैं: नमाज़ पढ़ना, कुरान की तिलावत ( बिना मतलब समझे ) करना, दाढ़ी रखना, सलवार टखने ऊपर बांधना आदि.। उन का कहना के सब अल्लाह के सहारे छोड़ दो । जो भी होगा अल्लाह करेगा बस हम अल्लाह की इबादत करते रहे । मगर इन को कौन समझाए के अल्लाह ने इंसान को सिर्फ इबादत के लिए पैदा नहीं किया है बल्कि अल्लाह ने सांसारिक जीवन भी बिताने को कहा है ।सांसरिक जीवन मेँ रह कर इस्लाम के बताए रास्ते पर चलना भी इबादत है । (यहां यह सवाल भी उठता है कि पश्चिमी देशों में धर्म से दूरी के बावजूद इतनी रिश्वत सताने क्यों नहीं, वहाँ अनाथों और विधवाओं और गरीबों की संपत्तियों पर लोग कब्जे क्यों नहीं करते ???)ये लोग आम सीधे सादे आदमी को पकड़ कर उनकी सारी उपस्थिति चीजों और अधिनियमों के बारे में तो पढ़ा / बता देंगे, लेकिन जो लोग समाज में त्रुटियाँ फैला रहे हैं उनके पास जा कर कोई प्रचार नहीं करेगे.या कभी किसी ऐसे व्यक्ति के पास प्रतिनिधिमंडल लेकर नहीं जाएंगे जो किसी अनाथ की संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रखा है, न कभी किसी अधिकारी के पास जाएगा जो भ्रष्टाचार में लिप्त हो, या किसी ऐसे व्यक्ति के पास नहीं जाएंगे जो क्षेत्र में नशे का धंधा कर रहा है.। पता नहीं ऐसे क्यूँ इनकी हिम्मत ही नहीं होती या जरूरत नहीं महसूस करते ? इस्लाम के अंदर फिरका , जातिवाद नहीं है मगर ये इसके लिए कभी अभियान नहीं चलाते ? .लेकिन अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि ये लोग आम आदमी को “खसी” बना देते हैं। यानी ऐसा कर देते हैं कि वह देश व राष्ट्र के किसी काम का नहीं रहता.। हर बंदे के हाथ में तस्बीह देकर मस्जिद में बिठा देते हैं. इस दुनिया में जो कुछ हो रहा है उसे छोड़ो, भविष्य की चिंता करो. भाई क्या ऐसा नहीं हो सकता कि मेरी दुनिया भी सँवर जाए और इसके बाद भी.। ”

    Reply
  63. Feroz

    Mere bhai kitne log poket me
    Churi ,daru ki botal ,lekar ghumte the
    Likin jab oh is tablig me Lage to unke poket
    Me tasbih ,miswak ai .
    Or kitne kitne ise bure Kam Karne wale the
    Chori ,gundagardi ,jina ,kaise ……
    Jara duniyame ghumo to pata chalenga
    Duniyame kisliye balki tablig me Ghumo
    Mere bhai duniyavi jindigi sabkuch nahi ,
    Balki hame boat sare ghatio se gujarna
    Uski yeh tayyari hai TABLIG.

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      Ghazal Lubna
      26 October at 09:47 ·
      दुनिया में हर धर्म कि उत्पत्ति का एकमात्र लक्ष्य है “इस्लाम को बदनाम करना” इस्लाम के अनुयायियों को छोड़कर दुनिया के हर शख्‍स का सबसे अहम लक्ष्य “इस्लाम को बदनाम करना है ! अब इस रेस में खुद इस्लाम को मानने वाले भी बहुत लोग उतर चुके है ! दुनिया में हर विचारधारा का जन्म ” इस्लाम को बदनाम करने”वाले लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही हुआ है ! दुनिया में हर तरक्की और विकास के जुड़ा कार्य “इस्लाम को बदनाम करने” के लिए किया जाता है ! फेसबुक पर हर वे प्रोफाईल जिसके द्वारा पोस्ट में बुर्का, तीन तलाक़, मुल्ला, चार शादी, मुस्लिम औरते, मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसे शब्दो का इस्तेमाल किया जाता है वह फेंक है और “इस्लाम को बदनाम करने के लिए ही बनाई गई है ! और तो और कुछ लोग जिनके पास रोज़गार नही था उनको तो फेसबुक पर “इस्लाम को बदनाम” करने के लिए हायर तक कर लिया गया है बाकायदा उन्हे हर महिने पोस्ट के लाईक कमेन्ट के हिसाब से चेक मिलता है ! और “इस्लाम को बदनाम” करना उनकी रोज़ी रोटी बन चुका है आज तक वैज्ञानिकों ने जो भी खोजे की है वे सब ” इस्लाम को बदनाम करने” की साज़िश के तहत की है और अब जब इस्लाम को बदनाम करने का ठेका दुनिया के हर शख्श को दिया गया है इस काम के लिए सोशल मीडिया पर लोगो को हायर कर लिया गया है ! आंतकवादी छोड़ दिए गए है तो वैज्ञानिक अब ऐसे ग्रहो की खोज में दिन रात एक कर रहे है जहां ऐलियन हो ताकि वहां जाकर भी “इस्लाम को बदनाम” किया जा सकें इन शॉर्ट पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक घट रही हर छोटी बड़ी घटना “इस्लाम को बदनाम” करने की साज़िश की ओर ईशारा करती है ! ये तो महज़ कुछ ही भले मासूम और सहिष्णु मुस्लिम है जिन्होने इस्लाम को बुर्का पहनाकर बदनामी से बचाया हुआ है वरना….Ghazal Lubna

      Reply
  64. सिकंदर हयात

    Tabish SiddiquiYesterday at 10:51 · मुझे कभी ये समझ नहीं आया कि भारत में पैदा होकर हम कैसे इस्राईल से नफ़रत कर सकते हैं.. ईरान से नफ़रत कर सकते हैं और यहूद और नासारा (ईसाई) से नफ़रत कर सकते हैं.. इन लोगों ने हम भारतीयों के साथ क्या ज़ुल्म किया है?
    फिलिस्तीन इस्राईल से नफ़रत करे, उसके आसपास के मुल्क़ राजनितिक वजहों से एक दुसरे से नफ़रत करें तो समझ आता है.. मगर हम क्यों करें? आपके पास इन लोगों से नफ़रत करने की क्या दलील हो सकती है मज़हबी फलसफों के सिवा?मैंने करीब बीस साल विदेशियों के साथ काम किया.. लगभग सारे ईसाई ही थे.. उन्होंने मुझ पर विदेशों में बैठ कर भरोसा किया और काम करवाया मुझ से और पैसे दिए.. कभी किसी एक क्लाइंट ने मुझ से मेरा धर्म नहीं पूछा.. उनको कभी मतलब ही नहीं होता है इस से कि आपकी आस्था क्या है.. मैंने जो भी कमाया आज इन्ही यहूदी और ईसाइयों की बदौलत.. आप जो सऊदी में जा के कमाते हैं वहां आपके रोज़गार के संसाधन मुल्लों ने उपलब्ध करवाए हैं? इन्ही यहूद और नासारा ने अगर अरबी बद्दुओं को पेट्रोल की क़ीमत न बताई होती तो आज ये ऊंट से चल रहे होते और आप अपने खेतों में हल चला रहे होते.. लाखों की संख्या में पाकिस्तानी freelancers से विदेशी काम करवाते हैं और पैसे देते हैं.. बिना ये सोचे कि उनका धर्म क्या है.. सऊदी ने अपने सारे प्रकृतिक संसाधन विदेशियों को सौंप रखे हैं.. उसे पता है कि नासारा और यहूद से नफ़रत का पाठ पढ़ाने वाले नाकारा मुल्ले ज़मीन खोद के पेट्रोल तो क्या ऊंट का गोबर भी नहीं निकाल सकते हैं.. आले सऊद को नहीं दुश्मनी है यहूद और नासारा से मगर आप यहाँ भारत में बैठ के ख़ुद तो पूरी उम्र कुढ़ते ही हो अपने बच्चों में भी यही नफ़रत का ज़हर बो कर चले जाते होआपकी नफ़रत ख़यालों ख़्वाब के मज़हबी फ़लसफ़े के सिवा कुछ नहीं है.. जैसे आलिमों ने बता दिया कि कुत्ते का बाल घर में गिर जाए तो फ़रिश्ते नहीं आते हैं तो आप कुत्तों से नफ़रत करने लगे.. सुवर गन्दा होता है तो आप सुवर से नफ़रत करने लगे.. गिरगिट से नफ़रत के पाठ पढ़ा दिया गया तो आपको गिरगिट से नफ़रत हो गयी.. यही हाल आपका यहूद और नासारा से नफ़रत का है.. हक़ीक़त ये है कि आप की आज की ज़िन्दगी की एक एक साँस यहूद और नासारा की कर्ज़दार हैं.. सिरदर्द से लेकर दस्त की एक एक गोली उन्ही की देन हैं वरना आप के बाप दादा पहले दस्त और ज़ुकाम से ही मर जाया करते थेयही नफ़रत आपके आलिमों ने फ़तवे दे कर शिया, अहमदिया, बोहरा, सुन्नी, बरेलवी के ख़िलाफ़ भी फैला रखी है और जहाँ आपको यहूद और नासारा नहीं मिलते हैं वहां आप एक दुसरे को आपस में मारने लगते हैंख़ुदा के वास्ते जहाँ रहते हैं आप वहीँ रहिये.. जिस देश में हैं उसके आसपास की संस्कृति और इतिहास को अपना इतिहास समझिये.. फिलिस्तीन, सीरिया, अरब, इस्राईल और ईरान से दोस्ती और दुश्मनी के हवाई फ़लसफ़े में न अपनी ज़िन्दगी ख़राब कीजिये न अपने नस्ल की.. वर्तमान में जीईये.. अपनी मिट्टी से जुड़ियेताबिश सिद्दकी

    Reply
  65. सिकंदर हयात

    Mohammed Afzal Khan
    12 hrs ·
    रोमानिया में मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री !( POST-740)
    by — अफ़ज़ल खान
    रोमानिया में पहलीबार एक महिला वह भी मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री बनने जा रही है. मालुम हो के रोमानिया में 97% ईसाइयो की आबादी है और 1% से भी कम मुस्लमान है उसके बावजूद उन्हें एक मुस्लमान प्रधानमंत्री बनने पे कोई एहतराज नहीं है ! अब आप देखिएगा के मुस्लमान इस खबर का खूब प्रचार करेगे और जब पूछा जाये गा के क्या पाकिस्तान समेत कोई भी मुस्लिम देश अल्पसंख्यक को प्रधानमंत्री , राष्ट्रपति , बादशाह बनाएगा तो खामोश हो जायेगे और अनाप शनाप बोलने लगेंगे !

    Reply
    1. brijesh yadav

      सिकंदर साहब आपको शायद याद होगा नभाटा पे एक शीराज़ सहा थे उनसे किसी ने सवाल किया था जब अब्दुल कलाम इस देश के रष्ट्रपति बन सकते है तो मुस्लिम देशो मेंकोई गैर्मुस्लिम क्यों नही बन सकता है तो उनका जवाब था गैर मुस्लिम उनके जैसे बुद्धिमान नही होते बतैये ये घटिया मानसिकता उनकी ह श्रम भी नही आती ऐसे बेशर्मी भरा झूट बोलकर फिर हमे कुरान की आयते याद आती गलती मुस्लिमो की नही ह

      Reply
  66. सिकंदर हयात

    Sheetal P Singh added 2 new photos.
    8 hrs ·
    ज़रा नज़र डालें
    कौम के रहनुमा खवातीनों के बाबत कैसे कैसे नेक ख़याल अता फ़रमाते हैं !
    यही ज़ाहिल चौबीसों घंटे सोशल मीडिया पर कुश्ती लड़ते मिलते हैं कि “इस्लाम में औरतों को सबसे ऊँचा मक़ाम हासिल है “!
    यह हमारे बेहतरीन क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बेगम के बाबत है ।
    ०http://www.bbc.com/hindi/social-38432500

    Reply
  67. afzal

    Bhai Khan Sb.,

    Maine Mana Ki Tabliquee Jammat Apne Tarike se kaam Kerti Hai Aue ye hamesha un logo ko pakadti Hai Jo Log sidhe Sadhe Hain. Per Bhai App ne ek baat kahi usper aitraj hai aur Quran Kahta Hai Ki Allah Ne inshano ko apne Ibaadat ke liye paida kiya aur Nabi ke Jariye Hume apna banaya hua her kanun bataya. To sir, Nabi ne tijarat bhi ki, nammaj bhi padha etc. aur ager koi bhi chij nabi ki sunnat per hogi to wo Allah Ki Ibaadat me aata hai.

    To Bhai pahle quran & sunnat jaan lo uske baad post kerna.

    Reply
  68. REHAN

    अस्सलामु -अलेकुम

    आप कैसे है अफ़ज़ल भाई आज इन्टरनेट मे आपकी पोस्ट तब्लीगी जमात मुसलमानो………………………………………… read किया
    मै आपकी लेख से सहमत नही हूँ यह आपका ठीक आकलन नही है मै अल्लाह पाक से दुवा करता हूँ की आप को सही इल्म मे इज़ाफ़ा करे अमीन
    जमात का काम सबसे आला दरजे का काम है अफसोस आज अपना मुसलमान भाई दीन से ही गाफिल है उनको ही जागना का काम मे लोग अपना माल टाइम खर्च करते है इंशाल्लाह मेरे ईमेल takeitlko@gmail.com पर अपना फ़ोन शेयर केरियेय
    दुवा मे याद रखेयेगा कभी आप लखनऊ आये आप से मुलाकात करना की ख़्वाहिश है
    अल्लाह हफ़ीज़
    रेहान

    Reply
  69. सिकंदर हयात

    रेहान भाई शायद आपने पूरी बहस नहीं पढ़ी हे सिर्फ लेख ही पढ़ा हे जो बात आपने लिखी हे उन पर पूरा जवाब बहस में दिया गया हे ये साइट दूसरी साइटों या सोशल मिडिया की तरह नहीं हे जहां कमेंट बॉक्स में कुछ नहीं होता हे यहाँ तो कमेंट बॉक्स में भी बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा जब भी समय हो पढ़कर जब आप चाहे तो हमारी बातो को तर्क से गलत साबित कर सकते हे शुक्रिया

    Reply
  70. Abdul Samad Siddiqui

    Ye post mere hisab e bilkul thik he Tableeg ka kaam bura nahi he par kuch Logo ne isko bura bana diya he.
    Aapko ek zinda misal deta hu Merrut city ki.
    ek Shadi shuda mazdoor aadmi jiske bachche bhi the use jamat walo ne 4 mahine ki jamat me jane ko tayyar kar liya lekin uski biwi usse mana karti rahi ke hamare Khane pine ka kharach kon karega ?

    wo bina kuch pese diye ye keh kar jamat me chala gaya ke ke Allah sab intezam kar dega.
    uski biwi ne kuch waqt udhar sudhar karke guzar liya lekin jab udhar bhi band ho gaya to khane pine or dawa se bhi behal ho gayi. to usne apne Padhosi ke saath Affair shuru kar diya wo uski sab zarurat puri karne laga or kuch waqt bad wo Bachcho ko chodh kar usi ke sath bhag gayi.

    ye bilkul sahi waqya he or is jese sekdho waqyat hai.
    mere kayi dosto ne apni achchi khasi Job bhi khatam kar di or aaj wo khud bhi pareshan hein or unke ghar wale bhi.

    Me ye baat kisi bugz ki wajha se nahi keh raha me bhi Jamat me jata tha lekin iski wajhe se mene Apna kam dham Rishtedari sab chodh diye the or zyada waqt jamat me ya masjid me rehne laga.
    Ghar wale bhi mujhse pareshan rehne lage.

    lekin Allah ka karam mene Deen or Duniya ko samjha or is kaam ko km kar diya or Aaj alhamdulillah Married bhi hu or Deen ke sath achcha kaam he or achchi zindagi guzar raha hu.

    khud ki or dusro ki deem o duniya ki islah bhi apne halke me rehte huwe karta rehta hu.

    mene dekha he kuch log tableeg ko dimag par hawi kar lete hai or apne aage kisi ko kuch nahi samjhte ese hi logo ke comment mene padhe is post me.

    mera un logo ko mashwara he ye kaam achcha he lekin isko ek had reh kar hi karna chahiye.

    hadis me he ke jab Huzoor sahaba kiram ko lekar jihad o jung se wapis lote to aapne ghar jane se pehle kaha ke Ham chote jihad se badhe jihad ki taraf lot rahe hai.

    aap khud gor kare jaha Talwaro ke samne jang ladh rahe the or jaan ki bhi guarantee nahi thi use Nabi ne chota jihad kaha or jaha Biwi bachche rishtedar Kaam rozgar Samaj ke log hai jinse koi khatra bhi nahi use Nabi ne Jihad e akbar kaha ?

    ha isliye ke Samaj me rehte huwe sabke huqooq ada karna hi Jihade akbar he.

    kayi tabligi hai jo Bahar to achche hai or ghar me bad akhlaq.
    mene kayi orto ko dekha he jinke shohar Tableegh me lage huwe hai phir bhi unki biwiya unhe bura kehti hai.

    lo beta kar lo tabligh
    or dekho Tumhare Nabi kya Farma rahe hai.
    ek hadis me he Kamil iman wala wo he jise uski Biwi achcha keh de.

    ab to ghar se hi kamil momin hone ki gawahi mil rahi he.
    or ye log ???

    janab Allah apne Deen ke liye hamara mohtaj koi he.
    wo gair muslimo se bhi deen ka kam leta he. Hazaro misale hai.

    ye tabligi sochte hai ke jo is kaam ko nahi kar raha he wo Haq par hi nahi he or iske siwa koi hidayat ki line hi nahi he.
    ye unki galat fehmi he or khud ka ek alag firka banana he.

    aaj bhi hamare ulma hai jo Nabi ke deen ke waris hai wo hi hame sahi deen batae hai.

    kash meri baat dil me utar jaye.

    bebunyad nahi
    sahi logo ka or Sahi ISLAM ka hamdard.
    Abdul Samad Siddiqui.
    whats app- 9917138041

    Reply
  71. सिकंदर हयात

    Abdul Samad Siddiqui जी ये शायद आपका इस साइट पर पहला कमेंट हे आपका स्वागत हे अपने अनुभव बयान करने के लिए शुक्रिया होता ये हे की तब्लीगी हो या कोई भी अगर दीन ईमान की बड़ी बड़ी बाते करेगा तो हर कोई ”हाँ हां ” ही करेगा . बड़े से बड़ा बईमान और भृष्ट भी हां में हां ही मिलाएगा इसी ” हां हां ” को ये लोग अपनी बहुत बड़ी कामयाबी मानकर खुश रहते हे ग्राउंड पर कोई पॉजिटिव रिजल्ट नहीं हे फ़र्ज़ कीजिये इस तरह का कोई आदमी हो ”कानपुर में जो निर्माणाधीन इमारत गिरी है और जिसके नीचे दबकर दर्जनों मारे गए हैं, उसके मालिक का नाम है माहताब आलम । आलम समाजवादी पार्टी के प्रभावशाली नेता हैं और इस इमारत को जल्द से जल्द पूरा करने में जुटे थे । चूंकि वो कानपुर विकास प्राधिकरण के सभी मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए इमारत को ऊंचा कर रहे थे इसलिए उन्हें डर था कि सत्ता परिवर्तन होते ही इमारत का काम रुकवा दिया जाएगा । आलम जी निचले तलों के सूखने से पहले ही ऊपरी तलों पर काम शुरू कर देते थे । महीने भऱ में उन्होंने तल्ले पर तल्ला खड़ा कर दिया । जबकि जाड़े में सीमेंट को सूखने में कम से कम 21 दिनों का समय लगता है । इसके अलावा ये भी साफ हो गया है कि इमारत में निहायत ही घटिय़ा सामानों का इस्तेमाल किया जा रहा था । ये सब कानपुर विकास प्राधिकरण की नाक के नीचे हो रहा था । लेकिन यूपी के विकास पुरुष चुप थे । काम बोलता है ! सो तो दिख रहा है बोलता हुआ काम । काम दिखाता भी है दिन में तारे ! ” तो ये सभी भी इनकी खूब हाँ में हां मिलाएंगे और उसके बाद फिर लग जाएंगे करप्शन जुल्म जबर में . तब्लीगी अपनी आतमुग्ध्ता में जमीनी हकीकत नहीं देख प् रहे हे मेरा भांजा भी स्कूली पढाई में पिछड़ने के बाद तबलीग में जाने लगा था मेने सिस्टर को चेताया आगे भी ध्यान रखूँगा

    Reply
    1. rajk.hyd

      हम वह गिरी इमारत देख आये है करीब १० मौत हो चुकीहै सेना वाले भी ठीक से कुछ नहीं कर पा रहेहै दोनों और गली में वह मकान बन रहा था उसमे केवल खम्बे ही बने थे और् एक पर एक छते लगातार डाली जा रही थी

      Reply
  72. hamza hayat

    बहुत दिलजले आदमेी हो सिकन्दर भैया…मुसलमान तो नहेी बनना चाह रहे हो…..इब्लेीस तो मत बनो!

    Reply
  73. ahsan ali

    सिकन्दर साहब आपकी कुछ बाते सही है लेकिन यह आप गलत कह रहे है कि तब्लीगी जमाअत कुरआन पढती है और ये बात भी आप की गलत है क इंसान को अल्लाह ने अपनी इबादत के लिए पैदा नही किया अल्लाह कुरआन मे कहता है कि मैंने जिन और इंसानो को सिर्फ अपनी इबादत के लिए पैदा किया है ये कुछ कम इल्म लोग है जो दुनिया को दीन से अलग समझकर दीन को बदनाम करते है तब्लीगी जमात के तरीक़े गलत है तो क्या पूरे दीन को गलत कहोगे कुरान हमे बताता है कि दुनिया के हर मामले मे हमे कैसे चलना है मेरा मशविर है कि आप इसलाम धर्म का सही से अध्ययन करे

    Reply
  74. Faisal

    Afzal to sale kafir ha thuje pta ne kuch tablic ke bare me kalma parhke iman dakhil hoja tablik ke bare me ab na keh diye kuch wahe maruga sale kafir

    Reply
  75. Ubaidullahkhan

    Mere bhai Tabligh jamaat mein koi kisi se Zabardasti utha ke nahi le jata hai bas uske fazail aur fayde samjhaye jaate hain baaki aapki marzi hai aap jaye ya na jaye jo bhi Tabligh se juda hai wo apni marzi se juda hai.. Aur agar is waqt Tabligh ka kaam dunia mein naa hota bhai to jo haalt iss waqt dunia ke hain usse bhi badttar hote.. Ismein sabse acchi cheez jo sikhayi jaati hai wo hai acche ikhlaak…

    Reply

Add Comment