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आजकल लगातार सामने आ रहे अध्ययन और शोध लोगों को काफी भ्रम में डाल रहे हैं। एक दिन हमें पता चलता है कि कॉफी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, लेकिन कुछ ही दिन बाद खबर आती है कि कॉफी फायदा भी पहुंचाती है। एक बार चॉकलेट को फायदेमंद बताया जाता है तो अगली बार नुकसानदेह। यहां तक कि कुछ वैज्ञानिकों ने तो अब मोटापे को भी लाभदायक बता दिया है। ऐसे में आम आदमी का दिमाग चकरा जाता है। आखिर वह किस शोध को सही मानें ? क्या चीज खाएं क्या न खाएं ? क्या करें क्या न करें ? हालांकि हर शोध की परिस्थितियां और लाभ या हानि के कारक अलग-अलग होते हैं, पर एक सामान्य आदमी तो उलझन में पड़ ही जाता है। आइये देखते हैं कि किन-किन चीजों को लेकर स्वयं वैज्ञानिकों और चिकित्साविदों के ही निष्कर्ष अलग-अलग आ रहे हैं।

अंडा

काफी साल पहले विशेषज्ञों ने इन्हें दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार माना था। फिर इन्हें स्वास्थ्यवर्धक और प्रोटीन का बढ़िया जरिया कहा गया। इसके बाद अब एक नया शोध कह रहा है कि रोज एक भी अंडा खाने से डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि 20 साल के लंबे अनुसंधान के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हर दिन एक भी अंडा खाने से टाइप 2 डायबिटीज में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। महिलाओं में तो इसके 77 फीसदी तक बढ़ने की आशंका रहती है।

चॉकलेट

कहा गया कि इससे दांत तो खराब होते ही हैं, मोटापा भी बढ़ता है। माइग्रेन में चॉकलेट को नुकसानदेह बताया गया क्योंकि माइग्रेन सिर के एक हिस्से में रक्त वाहिनियों के संकरा हो जाने से होता है और चॉकलेट के प्रति रक्त वाहिनियां संवेदनशील होती हैं। बाद में इटली के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि चॉकलेट मासिक चक्र के दौरान महिला के ठंडे मूड को ठीक रखती है। प्रेम के दौरान भी चॉकलेट मूड बनाती है।

ब्रेड, बिस्कुट

इनके लिए विज्ञान में कहा और माना जाता है कि ये उच्च कार्बोहाइट्रेड युक्त पदार्थ हैं। ये स्वास्थ्यकर नहीं हैं और मोटापा बढ़ाने में सहायक हैं, लेकिन वर्जीनिया यूनिवर्सिटी का शोध कहता है कि स्टार्च और शुगरयुक्त भोजन (आलू, ब्रेड, बिस्कुट आदि) शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यह व्यक्ति को स्लिम बनाता है। इसमें रेशे, विटामिन, मिनरल और एंटी ऑक्सीडेंट होते हैं।

वनस्पति

वर्षों पहले वनस्पति तेल के इस्तेमाल को कैंसर के लिए जिम्मेदार माना गया, जबकि अब यह धारणा वैज्ञानिकों ने पूरी तरह से गलत ठहरा दी है। इसके अलावा एक जमाना था जब घी की जगह वनस्पति तेल का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। उस वक्त डालडा, रथ जैसे ब्रांड वनस्पति तेल का पर्याय बन गए। अब वनस्पति तेल को परा वसा (जो स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक मानी जा रही है) का सबसे बड़ा जरिया यानी श्रोत बताया जा रहा है।

चीनी

सभी मानते हैं और वैज्ञानिक भी कहते हैं कि चीनी यानी मीठा मोटापा बढ़ाता है। इस सोच के बाद पिछले कुछ वर्षों में शुगर फ्री उत्पादों का अरबों-खरबों का पूरा बाजार ही आबाद हो गया है। लेकिन अब अमेरिका की प्रूडे यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का शोध कह रहा है कि मिठास घोलने वाले कृत्रिम विकल्प चीनी की अपेक्षा ज्यादा मोटापा बढ़ाते हैं। वैज्ञानिकों के शोध में निश्चित अवधि में सैक्रीन खाने वाले चूहे चीनी खाने वाले चूहों से ज्यादा मोटे हो गए।

बियर

अभी तक मान्यता थी कि बियर के मुकाबले शराब ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। इसलिए लोग खूब बियर गटकते हैं। लेकिन अब मेलबर्न में हुआ शोध कहता है कि ज्यादा शराब तो नुकसानदेह है ही लेकिन बियर तो उससे भी ज्यादा हानिकारक है। शोधकर्ताओं ने तय समय में सात हजार लोगों पर अध्ययन करके पाया कि चार से अधिक बार स्टैंडर्ड ड्रिंक करने पर जहां आंखों की रोशनी पर तीन गुना नकारात्मक असर हुआ वहीं बियर पीने वालों में यह असर छह गुना तक था। यानी एक दिन में चार बियर लेने से आंखों की रोशनी जा सकती है।

पानी

अनेक विशेषज्ञ और सेलेब्रिटी भी ये टिप्स देते हैं कि पानी पीओ और वजन घटाओ। लेकिन टोक्यो की एक यूनिवर्सिटी का अध्ययन कहता है कि ज्यादा पानी पीने से व्यक्ति के वजन में कोई अंतर नहीं आता है। एक हजार लड़कियों पर शोध करने के बाद विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा है कि मोटापे और पानी के बीच कोई संबंध नहीं है। अमेरिका की पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी का अध्ययन भी टोक्यो के वैज्ञानिकों का समर्थन करता है। ये अध्ययन कहता है कि इस तरह का कोई प्रमाण नहीं है कि अधिक मात्रा में पानी पीने से किसी तरह का कोई लाभ होता है। यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि स्वस्थ लोगों को आठ गिलास पानी पीना ही चाहिए।

वसायुक्त भोजन

छरहरी काया बनाए रखने के लिए सभी विशेषज्ञ वसायुक्त भोजन से दूर रहने की सलाह देते हैं, लेकिन अमेरिका की पोषक आहार विज्ञानी इस्थर ब्लूम स्लिम-ट्रिम रहने के लिए वसायुक्त भोजन की ही सलाह देती हैं। ब्लूम का कहना है कि मक्खन और अंडे की जर्दी कहने को फैटी है, लेकिन इन्हें खाने से पेट काफी देर तक भरा रहता है। हमें जल्दी-जल्दी भूख नहीं लगती। फैट फ्री फूड खाने से बार-बार भूख लगती है। ब्लूम के अनुसार फैट फ्री फूड से हमारे शरीर में जाने वाले कार्बोहाइड्रेट्स शुगर में बदल जाते हैं और यही शुगर मोटापे का मुख्य कारण है। यदि हम ब्रेड, पास्ता या आलू खाते हैं तो हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स ही जाते हैं, जो शुगर में नहीं बदलते हैं।

मूंगफली

इंग्लैंड में विशेषज्ञ अभी तक यही सलाह देते रहे हैं कि बच्चों को कम से कम तीन साल तक मूंगफली न खाने दें। इनके सेवन से उन्हें एलर्जी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं से कहा जाता रहा है कि वे मूंगफली से दूर रहें क्योंकि इससे बाद में बच्चों को स्तनपान में कठिनाई हो सकती है। अब कोई दूसरे नहीं बल्कि मूंगफली के लिए मना करने वाले विशेषज्ञ ही कह रहे हैं कि मूंगफली खाने से कोई नुकसान नहीं है, क्योंकि उन्हें नुकसान का अभी तक कोई सुबूत नहीं मिला है। हालांकि अभी उन्होंेने मूंगफली को पूरी तरह हरी झंडी भी नहीं दी है।

कॉफी

इसके बारे में पहले कहा गया कि थोड़ी चुस्ती लाने के अलावा कॉफी किसी तरह लाभदायक नहीं है। लेकिन अब डॉक्टरों का कहना है कि इसकी संतुलित मात्रा हृदय रोग में बढ़िया काम करती है। हार्ट अटैक से भी यह बचाती है।

…तो बताइए, पड़ गए न भ्रम में। क्या खाएं और क्या न खाएं ? इन तरह-तरह के शोध निष्कर्षों को पढ़-सुनकर यही कहा जा सकता है कि बीच का रास्ता अपनाएं। यानी हर चीज खाएं पर समुचित मात्रा में ही। ये तथ्य किसी शोध में कभी नहीं बदलेगा कि अधिक मात्रा में किसी भी चीज का सेवन हानिकारक होता है। तो इसी को मूलमंत्र मानें। सब कुछ थोड़ा-थोड़ा लें और शारीरिक श्रम जरूर करें।
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जीवनशैली को लेकर भी वैज्ञानिकों के निष्कर्ष बदलते रहे हैं

शादीशुदा की सेहत बढ़िया

70 के दशक से ही वैज्ञानिक कह रहे हैं कि शादीशुदा होने का सेहत पर अच्छा असर पड़ता है। पुरुषों पर तो शादी का कुछ ज्यादा ही अच्छा असर होता है। अब मिशीगन यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता हुई लिऊ के मुताबिक कुंवारा व्यक्ति भी किसी शादीशुदा के जितना ही स्वस्थ रह सकता है। वे ये तो कहती हैं कि हालांकि कुंवारों की तुलना में शादीशुदा लोग अभी भी ज्यादा स्वस्थ हैं, मगर यह अंतर लगातार घट रहा है।

बुजुर्ग

पहले विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों की देखभाल करना बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्यवर्धक नहीं है, लेकिन अब वे कह रहे हैं कि बच्चों को बुजुर्गों द्वारा खिलाने, पालने की प्रक्रिया पूरी तरह स्वास्थ्यकारक है।