Khajuraho

अपने मुल्क मे मुस्लिम शासकों के द्वारा मंदिरो के विध्वंस की बहुत मिसाले दी जाती है जिस मे कुछ सत्य पे आधारित है और बाकी झूठ, अफवाह और बेबुनियाद है. देश के कुछ संप्रदायिक शक्तियो द्वारा इस को फैलाया जाता रहा है और फैलाया जा रहा है ताकि हिन्दू और मुसलमान के दरम्यान विवाद पैदा किया जा सके. ऐसे मानसिकता वाले इतिहास का सिर्फ काला अध्याय पढ़ते है या पढ़ना चाहते है, वे इतिहास की उन किताबों को पड़ने की कोशिश ही नही करते जिन मे असीमित उदाहरण है के मुस्लिम शासको ने हिन्दुओ के मंदिरो का रक्षा किया है. बहुत से मंदिरो को अनुदान दिये और हिन्दुओ के प्राचीन धार्मिक पांडुलिपियो का अनुवाद कराया या अनुवाद करने के लिये अनुदान दिया. ऐसे मुस्लिम शासको के काम को भुलाया नही जा सकता.

मुग़ल शासक अकबर, जहाँगीर और शाहजहां के दौर मे हुकूमत के बहुत से द्स्तावेज़ मिलते है जिन मे मंदिरो के लिये पॉलिसी बनी थी. अभी भी आप ए दस्तावेज़ इंडियन रिसर्च इन्स्टिट्यूट मे देख सकते है और बहुत दस्तावेज़ उन मंदिरो मे अब भी रखा गया है जिन मंदिरो को मुग़ल राजाओ ने अनुदान और जमीने दी. मशहूर इतिहासकार तारापद मुखर्जी और इरफान हबीब के अनुसार अकबर ने मंदिरो को दी जाने वाली सभी अनुदान मे इजाफा कर दिया बल्के शाही फरमान 27 अगुस्त-1598 और 11 सितेम्बेर-1598 के अनुसार मथुरा के सभी मंदिरो और उन के पुरिहितो को दी गयी सभी जागीरो की घेराबंदी करा दी गयी. लगभग 1000 बीघा से भी ज्यादा जमीन मथुरा और वृन्दावन के आस पास 25 मंदिरो को दिये गये. जहाँगीर ने न सिर्फ इसे जारी रखा बल्के उस ने 25 मंदिरो से बड़ा कर इस की सांख्या 28 कर दी. जहाँगीर ने मथुरा मे ही 121 बीघा जमीन मंदिरो के सेवको को भी प्रदान की ताके वे अपने परिवार के साथ रह सके. जहाँगीर 1620 मे खुद वृन्दावन जा कर मंदिरो को देखा. मंदिरो के समस्या को सुलझाने के लिये अलग विभाग था.

मंदिरो के रक्षा और दूसरे खर्चो के लिये अनुदान देने का सिलसिला औरंगज़ेब की हुकूमत मे भी जारी रहा. औरंगज़ेब के समय के ऐसे बहुत दास्तवेज़ है जिन से पता चलता है के ऑरज़र्ब ने इलाहाबाद, बनारस, उज्जैन, चित्रकूट के मंदिरो के अलावा और भी बहुत से मंदिरो को भी अनुदान दिया. आप को विशम्भरनाथ पांडे की किताब को देखना हो गा जिस मे दस्तावेज़ की कॉपी भी मिलेगी. टीपू सुल्तान जिसे मैसूर का शेर भी कहा जाता है उस ने भी बहुत से मंदिरो को जागीरे दी.पत्रिका यंग इंडिया जिस के संपादक महात्मा गाँधी थे उन्हो ने लिखा है के टीपू सुल्तान ने हिन्दू मंदिरो को बड़ी बड़ी जागीरे दी, इस के अलावा और भी मदद कि. श्री वेन्केत्रमन. श्री विश्वनाथ, श्री रघुनाथ, श्री निवास आदि जैसे मंदिरो को जागीरे दी. सब से बड़ी बात तो ये है के टीपू सुल्तान के महल के अंदर भी मंदिर थे,इस से ज्यादा और क्या सबूत ह सकता है के वो कितना धर्मनिरपेक्ष था.

अवध के नवाबो ने भी अयोध्या के बहुत से मंदिरो को जागीरे दी थिं अवब सफदर जंग के दीवान ने अयोध्या मे कई मंदिर बनवाये थे और बहुत से मंदिरो की मरम्मत कराए थे. नवाब सफदर जंग ने मदवाण अखाडा को हनुमान गाड़ी मंदिर बनाने के लिये जमीने दी थी. आसिफउद्दौला के वज़ीर ने इस मंदिर को लाखो रुपये की सहायता की थी. इसी मंदिर के सिलसिले मे जब हिन्दू और मुस्लिम के बीच विवाद हुआ था तो नॉवब वाजिद अली शह ने हिन्दुओ का पक्ष लिया था. विजय नगर, बहमनी हुकूमत और कई छोटे छोटे मुस्लिम राज्यो के बादशाहो और नवाबो ने बहुत से मंदिर बनवाने मे सहायता की जिस का दस्तावेज़ मौजूद है. मुस्लिम शासको के द्वारा मंदिरो को जमीने, आर्थिक मदद, मंदिर के निर्माण व मरम्मत और उन के धार्मिक पुस्तको के प्रचार व प्रसार अगर विस्तार से लिखी जाये तो उस के लिये एक अलग से मोटी पुस्तक लिखनी पड़े गी. उपर जो उदाहरण दिये गये है उन के सभी दस्तावेज़ इंडियन रिसर्च इन्स्टिट्यूट मे है उन्हे जा कर देखा जा सकता है.

मुसलमानो पे मंदिर तोड़ने और लूटने का इल्जाम लगाया जाता है,पर ए कहना के मंदिर को सिर्फ धार्मिक करण से तोडा गया कहना गलत हो गा. मे इंकार नही करता के मंदिर तोड़ने मे धार्मिक करण नही है मगर उस से भी ज्यादा मंदिर मे अकूत धन- संपत्ती इस का मुख्य कारण है. उस समय भारत के मंदिरो मे अपार धन-संपत्ती होती थी बल्के यूं काहे के उस समय मंदिरो के पुरोहित या ब्राह्मण शक्तिशाली होते थे , हिन्दू राजा और महाराजा को भी इन के अधीन ही रहना पड़ता था. उन्हे मंदिरो को दान देना पड़ता था और साथ ही जनता को भी मंदिरो मे चडवा करना पड़ता था.आप अभी देखिये के केरला के श्री पद्मणेश्वर मंदिर से 120000 कारोड का धन और संपत्ती मिली है. हम सभी जानते है के भारत के मंदिरो मे कितने संपत्ती है. भारत पे जो इतने आक्रमण हुए उस का मुख्य करण ए मंदिर ही थे. जैसा कहा जाता है के महमूद ग़ज़नवी ने 17 आक्रमण किये तो आप तो बताता चालू के ग़ज़नवी भारत मे इस्लाम फैलाने या प्रचार करने नही आया था, वो यहा सिर्फ दौलत के लालच मे आता था और मंदिरो को लुट कर चला जाता था, आप को ए भी मालूम होना चाहिये के 2 बार भारत से बुरी तरह प्रराजय भी हो कर गया है.वो छोटे-छोटे मंदिरो को लूटता भी नही था सिर्फ बड़े मंदिरो को निशाना बनाता था. अगर उस का मक़सद मंदिर तोड़ना होता या इस्लाम फैलाना होता तो यहा रुकता.