jamia-masjid-delhi

सिकंदर हयात

भारत में कुछ लोग ये आशंका जाहिर करने लगे हे की भारत और सारी दुनिया के मुस्लिम आतंकवाद और या कट्टरपंथ के ढके छुपे समर्थक हे खासतोर पर भारतीय मुस्लिमो पर ये आरोप लगता हे की वो पाकिस्तान के पर्ती कोई नरम रुख रखते हे आतंकवाद या अतिवाद की खुल कर निंदा नहीं करते हे

वेगारह वेगारह .खासतोर पर आतंकवादी कार्यवहियो के बाद ये बहस बहुत बढ जाती हे कुछ लेखक या लोगो की मानसिकता ये हे की इनकी नज़र में भारत और बाकि दुनिया के सारे मुसलमान तो शायद बुरे हे जो सामान्य व्यक्ति की तरह अपने परिवार चलाने और काम धंधा छोड़ कर आतंकवाद की – लव जिहाद की और या नॉन मुस्लिम्स को ख़तम करने की भागदौड़ कर रहे और अब इन्हें चीन अमेरिका यरोप सब अच्छे और इस्लामिक आतंकवाद से घायल लग रहे हे इन्हें शायद नहीं पता की ये इस्लामिक उग्र वाद इन्ही ‘महान देशो’ ने समाजवाद और सोवियत संघ ( जो सारी दुनिया के शोषितों गरीबो का थोडा बहुत हितेषी था ) की सुपारी देने के लिये तेयार संघटित और प्रोत्साहित किया गया था जो अब ‘भस्मासुर’ बन गया हे था सवाल ये हे क्यों नहीं कुछ लोगो की नज़र में ये भोले भले अमेरिका यरोप चीन आदि देश कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग घोषित कर देते ताकि इन अफजलो और इनके देशी विदेशी साथियों का मनो बल टूटे और कश्मीर समस्या हल हो लेकिन ये सारे ‘महान’ देश कश्मीर को विवादित इलाका ही मानते हे और दोनों देशो से मज़े लेते हे हथियार बचते हे और अँधा मुनाफा लेते हे और आजकल भी विकसित देशो की जनता आतंकवाद या सुरक्षा या इस्लामिक आतंकवाद के मुद्दे पर नहीं बल्कि असमानता और बेलगाम पूंजीवाद के मसले पर सडको पर हे . ये बात हमेशा ही ध्यान में रखनी चाहिए की ये बम विस्फोट और मुंबई जेसे हमले कराये ही इसलिये जाते हे ताकि सम्पर्दायिक तनाव में इजाफा हो इसके आलावा भारत पाक शांति परक्रिया भी कभी ठीक से परवान ही ना चढ़ सके याद रखना चाहिए की किसी का नुक्सान हमेशा किसी का फायदा भी होता हे सच ये हे की ऐसी ताकतों की दुनिया और भारतीय उप महाद्वीप में कोई कमी नहीं हे जो तनाव और असुरक्षा के माहोल में ही अपना हित साधते हे . कुछ लोग कहते हे की इस्लाम दुनिया में कहा शांति का पाठ पड़ा रह हे ?में ये पूछना चाहूगा की बाकि दुनिया में ही फिर कौन हे जो शांति का पाठ पढ़ा रहा हे पाकिस्तान का संरक्षक और तिब्बत पर कब्ज़ा करके वहा की महान सभ्यता को नष्ट करने वाला भारत के नोर्थ ईस्ट पर नज़र गड़ाने वाला चीन या दुनिया में सर्वाधिक हथियार बचने वाला अमेरिका लाखो फिलिस्तींयो को मार और लाखो को बेघर कर चूका इस्राएल दुनिया में सबसे ज्यादा अमीर और सबसे ज्यादा गरीब पैदा करने वाला हमारा देश ज़हा इसी कारण से पैदा हुई नक्स्सल समस्या का कोई हल नहीं देख रहा हे या इसाई मिशनरी, भला कोन हे फिर जो शांति फेला रहे हे ? बोध धरम वाले श्रीलंका में ही पिछले ३० सालो में क्या कुछ नहीं हुआ हे एक सवाल ये भी हे की इराक फिलिस्तीन आदि जगहों में जो तेल क चक्कर में 20 30लाख लोग मारे गए क्या वो मुस्लिम विरोधी लोगो की नज़र में सव्भाविक हे या किसी एक आदमी या सरकार की गलती हे और इधर जो इन इस्लामिक आतंवादेयो के हाथो १ – २ लाख लोग मारे गए तो उसके लिये क्यों वे भारत सहित 6o 70 देशो के मुस्लिमो को कटघरे में खड़ा कर रहे हे .दुनिया में डेढ़ अरब मुस्लिम हे 57 मुस्लिम देश हे सभी तरह के लोग हे कई तरह की समस्याए हे आखिर क्यों हर बात का जवाब इस्लाम से या सारे मुसलमानों से क्यों माँगा जाये ? वेसे मुस्लिम देशो में कई समस्याए हे मगर हाल इतना भी बुरा बिलकुल नहीं हे एक देश हे तुर्की जहा 95 % से बी अधिक मुस्लिम हे और ये एक सेकुलर घोषित देश हे मलेशिया यरोप जेसा देश हे यु ऐ इ इंडोनेशिया भी ठीक ठाक देश हे बाकि देश भी बहुत बुरे नहीं हे सभी में नॉन मुस्लिम और हिन्दुस्तानी भी रह रहे हे काम कर रहे हे बल्कि भारतीयों को तो अतिरिक्त सम्मान की नज़र से देखा जाता हे वेसे दुनिया के सभी देशो और समाजो में हमेशा अच्छे से अच्छे और बुरे से बुरे लोग होते ही आये हे और अगर हे भी तो 1 या 2 या हद से हद 5 करोड़ लोगो की सजा या ताने आप 150 करोड़ को नहीं दे सकते क्या २ -२ विशव युधो में 6 करोड़ लोगो की हत्या के लिए आम जेर्मन वासी को दोषी ठहराया गया था ? नहीं ना .आज की आतंकवाद की समस्या का हल भी उदारवादी लोगो से अधिक से अधिक सवांद करके उनके पीछे पूरी ताकत से डटकर और कुछ समस्याओ का न्यायोचित हल ढून्ढ कर ही होगा जली कटी बातो से और लोगो के बटने से केवल शोशंकारी ताकतो ही का फायदा होता हे मुस्लिम विरोधी लेखक अफ्रीकी देशो में फेली अराजकता को भी इस्लाम से जोड़ देते हे जबकि ये देश पिछली शताब्दी में यरोपिए देशो के भयानक शोषण के बाद फिर शीत युद्ध के दोरान से ही अराजकता के शिकार हे ये अराजकता मुस्लिम और गेर मुस्लिम दोनों ही इलाको में फेली हे इसके पीछे कई कारण बताये जाते हे लेकिन जरा सोचिये क्या योरोपिये समराजय्वाद की कूरतम हिंसा और और उसकी विरासत में छोड़ी समस्याओ के कारण होने वाली हिंसा के लिए इसाई धरम जिम्मेदार हे ? नहीं न . मुस्लिम विरोधी तत्व यहाँ तक कह जाते हे की भारत पर भी पाक या अफगानिस्तान की तरह मुस्लिम अतिवादी तत्व छा जायेगे कहते हे की केरल और आसाम भी अगले कश्मीर बनने की राह पर हे.लेकिन हम दावा करते हे की कश्मीर या केरल या असाम में भारी मुस्लिम आबादी होने और कुछ समस्याए होने के बावजूद वेसे कुछ नहीं होने वाला जेसे हिन्दू मुस्लिम अतिवादी तत्व या आईसआई वाले सोचते हे या चाहते हे . इसका कारण ये ही की ’ कोई कुछ भी सोचे सच यही हे की की आम मुस्लिम वेसे ही हे जेसे आम हिन्दू या दुसरे लोग उन्हें भी अपने बच्चो को बड़ा होता देखना हे उनकी शादीया होते देखना हे उन्हें भी खाड़ी देशो या यरोप अमेरिका में बढिया नौकरी की चाहत हे न की बन्दूक उठा कर या बम उठाकर घुमने की, उन्हें भी शिद्दत से तलाश न केवल अपने धरम बल्कि अपनी जाती अपने वर्ग की सुन्दर सुशील लड़की की ना की लव जिहाद की भागा दौड़ी की उन्हें भी सामान्य और शांतिपूर्ण जीवन की ही चाहत हे . और कुल मिला कर भी भारत क्यों करके भला पाकिस्तान अफगानिस्तान या लेबनान बनेगा भारत तो गाँधी नेहरु मौलाना आजाद प्रेमचंद अमिर खुसरो कबीर ग़ालिब कलाम आदि का देश हे ये भला क्यों कोई भयंकर समस्या बनेगा उम्मीद यही हे की ये तो समस्या का समाधान बनेगा तमाम दिक्कतों के बाद भी भारत में लोकतंतर और धरमनिर्पेक्षता की जड़े बेहद गहरी हे भारत के मुस्लिम आज दुनिया में सर्वाधिक जाने पहचाने और माने जाते हे पाकिस्तान के कुछ मुर्ख कट्टरपंथी 1947 से ही सपना देखते आ रहे हे की भारत के सारे के सारे मुस्लिम उनके मददगार बनेगे जो कश्मीर अलग करने में फिर दिल्ली जितने में उनका सहयोग करेंगे मगर क्या एसा कुछ 47 62 65 71 99 में कुछ भी हुआ . वेसे सच ये हे की आजकल पाकिस्तान में भी कुछ कुछ उदारवादी ताकते उभर रही हे हमें उनकी पहचान करके उन्हें हर परकार से बढावा देना चाहिए एक सुझाव ये भी हे की आतंक वाद ख़तम करने का एक तरीका ये भी हो सकता हे की हम सब ये कसम खा ले की अगले पांच सालो तक हम किसी भी ब्लास्ट के बाद कोई बयानबाज़ी जली कटी बाते नहीं करेगे सुरक्षा ऐजेंसियो कोर्ट और मानवाधिकार संस्थाओ को अपना कामकाज करने देंगे विभिन परकार के अतिवादी कुछ भी बोले तो हम ही ऐसे हो जाये जेसे कुछ सुना ही न हो बड़े ब्लास्ट के बाद भी हम पाकिस्तान को भी कुछ नहीं कहेंगे चाहे ISI का हाथ हो या न हो अधिक से अधिक पाकिस्तानी आम लोगो लेखको पतरकारो कलाकारों को भारतीय वीसा देंगे चाहे कुछ भी हो जाए हम बातचीत नहीं तोड़ेंगे तो आतकवाद धीरे धीरे ठंडा पड़ सकता हे