yazidiby– अफ़ज़ल ख़ान और (बी. बी. सी. कॉम से सहायता)

मध्य पूर्व में ISISI के हमले के कारण में अल्पसंख्यक यज़ीद समुदाय के 50 हजार लोग के जान को खतरा हो गया है. एक गुमनान फिरका जिसे यजिदि कहा जाता है अचानक अंतर्राष्ट्रीय पटल पे नमूदार हो गया जिस कारण लोग अब इस फिरके के बारे मे जानने के लिये उत्सुक है.

_yazidi06इस समुदाय के बारे मे कहा जाता है के ये समुदाय शैतान को पुजता है जब के हक़ीक़त मे ऐसी कोई बात नही है.यह समुदाय तुर्की के दक्षिण पूर्वी, और सीरिया और इराक के उत्तरी पश्चिमी क्षेत्रों में परंपरागत रूप से छोटे समुदायों में रहते हैं. उनकी कुल के बारे में बताना मुश्किल है लेकिन कुछ अनुमानों के अनुसार उनकी संख्या 70 हजार से पांच लाख के बीच है और पिछली सदी के दौरान उनकी संख्या में असाधारण कमी देखने में आई है. इराकी शहर मोसुल के पश्चिम में स्थित यज़ीद समुदाय के केंद्रीय क्षेत्र कोह संजार में समुदाय के खिलाफ कार्रवाई जारी है. उनके बारे में कुछ गलतफहमी भी पायी जाती हैं. ISISI चरमपंथियों के विचार में समुदाय संबंध उम्मैया शाही परिवार है, जब अन्य बहुत अलोकप्रिय शासक यज़ीद इबने मविया से जोड़ते हैं.

_yazidi04आधुनिक अनुसंधान से पता चलता है कि इस समुदाय का यज़ीद इब्ने मुआविया या ईरान के शहर यज़्द से कोई संबंध नहीं है. हालांकि आधुनिक फारसी शब्द यज़्द है जिसका मतलब भगवान के पूजा करने वाले हैं और यज़ीद अपने समुदाय का नाम उसी तरह से वर्णित हैं. मगर दूसरी तरफ उसी समुदाय के एक धार्मिक स्कॉलर का कहना है के इस दुनिया को अल्लाह ने सात फ़रिश्ते बनाया जो इस दुनिया का मालिक है और इन सब मे सब से जयदा शक्तिशाली फरिश्ता ताऊस है जिसे अरबी मे इब्लीस और उर्दू मे शैतान कहा जाता है . इस्लामी नजरिये के अनुसार फ़रिश्ता इब्लीस अल्लाह का सब से क़रीबी फ़रिश्ता था बल्के यजिदि समुदाय उसे अल्लाह के बराबर ही समझती है. उन का कहना है के अल्लाह ने जब इंसान को बनाया और अल्लाह ने सब फ़रिशतो को हुक्म दिया के इन को सजदा करो तो सभी फ़रिश्ते ने उन का हुक्म मान कर इंसान को सजदा कर दिया मगर इब्लीस नामक फ़रिश्ते ने माना कर दिया, और इस नाफरमानी के करण इसे शैतान क़रार दिया गया. मगर याजीदी समुदाय का कहना है के इब्लीस ने इंसानो को सजदा करने के लिये इस लिये माना कर दिया क्यो के वी अल्लाह के अतिरिक्त और किसी को सजदा नही करना चाहता था, इस लिये इस फिरके का कहना है के शैतान सब से अधिक अल्लाह को माने वाला है.

यज़ीद मान्यताओं के अनुसार आत्मा एक शरीर से दूसरे में स्थानांतरित होता है और बार बार जन्म प्रक्रिया आत्मा शुद्ध बनाता है. किसी भी यज़ीद की सबसे खराब सजा उसे समुदाय से बाहर जाना है और इसका मतलब है आत्मा का शुद्ध होने की प्रक्रिया रोक है. इसलिए ीज़ीदयों किसी अन्य धर्म अपनाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. तुर्की, इराक और सीरिया की सीमा से सटे सुदूर गांवों जो एक समय वीरान पड़े थे, अब ीज़ीदयों निवास होना शुरू हो गए हैं. इन लोगों ने वहां सहायता के तहत मकान निर्माण शुरू किया है. निर्वासन जीवन बिताने वाले कई ीज़ीदयों वापस आना शुरू कर दिया है क्योंकि तुर्की सरकार ने उन्हें तंग करना बंद कर दिया है.

सदियों से बदले कार्रवाई का निशाना बनने के बावजूद यज़ीद समुदाय ने अपना विश्वास तर्क नहीं. अगर इराक और सीरिया के क्षेत्रों सेISISI के चरमपंथियों ने यज़ीद समुदाय को बेदखल कर दिया तो अधिक संभावना है कि दक्षिण पूर्वी तुर्की में बसे हो और शांति से अपने विश्वास के अनुसार जीवन गुजारे.