aurat

by— शाहीना बलूच

कारबान, शगर और फॉस्फेट आदि से नहीं बना है,
उसी मिट्टी से बना है जिस से पुरुष बनाये गये है
जिसमें हया, शर्म, लज्जा और सादगी जैसे
स्वयंभू करोमोसोमज़
कोट कोट कर भरी गई.!

एक आज़ाद आदमी
पैदा करती हूँ,
और वही आज़ाद आदमी
मेरी गुलामी का कारण
बनता है!
उसे बोलना सिखाती हु
चलना सिखाता हूँ,
और वही मुझे
हया, शर्म और लज्जा
का पाठ पढ़ा है!
घर से नकलों तो
मेरे पैर काट देता है.!
वही पुरुष वाली मिट्टी
बिना मेरा डी. एन. ए
एक श्रृंखला बनाता चला आता
है,

किस खुदा ने मुझे बनाया था!
एक मर्द खुदा ने
मुझे औरत (नंगी) कहा,
नंगे तो पुरुष भी थे,
लेकिन इल्जाम मुझ पर आया.!
मनहूस, शैतान, बदचलन और आवारा,
सेक्स को उभारने वाली, महिला!
जाने क्या क्या न कहा गया

कभी किसी खुदा को पसंद नहीं आई,
पसंद आई तो बस
‘माल’ की स्थिति
माल _ गनीमत में.!
किस खुदा ने मुझे भाषा दिया!?
जो मेरा आवाज भी पसंद नहीं आया!
ऐसा क्या था मेरे चेहरे पर.?
नक़ाब मे छुपाने का फरमान दिया!
मेरा खुदा, कभी मेरा न हुआ,
इस दहकता आँखों
हमेशा मुझे डरा रखा!
जब भी पुरुषो के खिलाफ कुछ शिकायत की तो मुझे जहन्नम की बसरत सुना दी गयी!
मिट्टी से बना मेरा अस्तित्व कच्चा ही रह गयी