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by– अरशद महमूद

पाकिस्तान के मशहूर पत्रकार अरशद महमूद का लेख गाँधी जी के बारे मे जो दैनिक जंग मे प्रकाशित हुआ था उस का हिन्दी अनुवाद आप के लिये—–

पाकिस्तानी हुकूमत अपनी जनता को पूर्वाग्रह और नफरत का ज़हर देकर पालती है. इसी लिये वहा की जनता धर्मों, जातियों, कबीला मे बंटी हुई है और उन्हे एक दूसरे से नफरत सिखाई जाती है यही करण है के आज पाकिस्तान मे शान्ति और अमन नही है और आपस मे ही लड रहे है. महात्मा गांधी उपमहाद्वीप की ऐसी व्यक्ति है, जिसे पाकिस्तान के अलावा दुनिया के सभी महाद्वीपों में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, और मानव इतिहास की एक महान व्यक्ति करार दिया जाता है. यह सिद्धांत ‘अहिंसा’ दुनिया की शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाता है. कायदे आजम अली जिन्नाह ने उसकी हत्या होने पर जो संदेश भेजा था, उसके शब्दों यूं थे, “” one of the greatest men produced by the Hindu community “.

पाकिस्तान की जनता को पता नहीं कि उसने अपनी जान पाकिस्तान और मुसलमानों की समर्थन में बलिदान किया. विभाजन के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के हिस्से का पैसा रोक लिया, यह कह कर कि पाकिस्तान इस धन से हथियार खरीद युद्ध करेगा, तो महात्मा गांधी आमरण अनशन पर बैठ गये जिस के करण नेहरू और पटेल मजबूर हो गये और पाकिस्तान को किये गये वादा पूरा करना पड़ा. विभाजन के समय भारत में हिंदू मुस्लिम दंगों छिड़ने पर गांधी ने मुसलमानों के समर्थन और हिंदुओं को कहा कि किसी मुसलमान को कोई नुकसान पहुँचायाजाए, यही कारण है कि एक हिंदू अतिवादी कट्टरपंथियों गोडसे उन्हे मुसलमानों और पाकिस्तान एजेंट कहकर गांधी की हत्या कर दी. उसका कहना था, गांधी ने हिंदू होते हुए हिंदुस्तान से विश्वासघात किया है. पाकिस्तान और मुसलमान खुशकिस्मत रहे के उन्हे गाँधी जी जैसा एक ऐसा नेता मिला जो उन के अधिकार का ख्याल रखा और इंसानियत को भी जिंदा रखा.

किसी भी दृष्टिकोण से किसी भी ऐतिहासिक महान व्यक्तित्व में कई त्रुटियाँ हो सकती हैं. आदमी आदमी होता है, अपने काल मे जी रहा होता है तो उस की भी कई मजबूरिया हो सकती है.दूसरों की अच्छाइयों की प्रशंसा मतलब अपने खुद अच्छा होना होता है. गाँधी जी का अहिंसा का सिद्दांत आज भी शांतिपूर्ण और मानवता का पाठ्यक्रम है. गांधी ने धर्म और बुराई की अनन्त लड़ाई में फंसे आदमी को प्यार और अहिंसा की शक्ति से परिचित किया. 1908 में टालसटाई ने हिंदू अखबार ‘एक पत्र में लिखा था कि भारत प्यार और अहिंसा जैसे हथियार से अपने ग़ुलामी से छुटकारा पा सकते है. इसके बाद गांधी और टालसटाई के बीच पत्र व्यवहार रहा और उनका आपस में दोस्ताना संबंध रहा. गांधी खुद टालसटाई का अनुयायी कहलाता था. अहिंसा का मतलब किसी दूसरे से नफरत बिना अपने अधिकारों के लिये कोशिश करना. गाँधी जीयूनिवर्सल love का ध्वजवाहक था. काश पाकिस्तान की जनता नफरतों को छोड़कर यूनिवर्सल शांति, दोस्ती और प्यार की भावनाओं से परिचित हो. नफरत के बदले में नफरत और प्यार के बदले प्यार ही मिलती है. नफरत के बदले प्यार कभी नहीं मिल सकता