zohra_sehgal

अक्सर लोग उन्हें बेहद चंचल और हाजिरजवाब मानते थे। जोहरा आपा एक हद ऐसी थीं भी,लेकिन ऐसा बन पाना आसान नहीं था। आपने जब अभिनय शुरु किया,तब काफी चुनौतियों का सामना था। उस दौर में स्त्रियों की दुनिया घर की चारदीवारी थी। आपने जो काम किए, एक स्त्री के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण थे। आप पूछ सकते हैं कि आपा ने इतनी हिम्मत कहां से जुटायी ? आपने जो किया, अपने लिए किया। किसी तरह से महिला समाज या किसी तहरीक की प्रतिनिधित्व करने की पहल नहीं कर रही थी। बेशक पावर व फेम की  इच्छा प्रबल थी, इसलिए सब कुछ किया। बचपन के दिनों में उन्हें डांस और अदाकारी का जुनून था। शिक्षक उन्हें हर प्ले में कास्ट करती थी, इसलिए मन में नायिका बनने का जुनून पलने लगा। उस जमाने में वो जब भी नमाज पढा करती तो अल्लाह से हमेशा यही दुआ करती कि तकदीर में विलायत लिख दो। उस दौर में विलायत का  अर्थ इंगलैंड हुआ करता था। विलायत मे ज्यादातर टीचर अंगेज ही हुआ करती थीं।  आप जैस –जैसे बडी होती गयीं तो यह इरादा और भी पक्का होने लगा कि वो इंग्लैंड जरूर जाएंगी । अभिनय सीखने।

रंगमंच में भी उनकी कामयाबी पर लोग बेहद खुश होते थे। यह सफर चुनौतियों व संघर्ष से भरा था, लेकिन सफर में कुछ शख्सियत ऐसे जरूर मिले, जिन्होंने राह की मुश्किलों का अंदाजा नहीं होने दिया। इनमे से एक थे महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर्। रंगमंच के विकास में जो योगदान उनका रहा, उसे जितनी बार याद किया जाए, हमेशा प्रेरणा मिलेगी। जोहरा आपा को भी मिली। पृथ्वी थियेटर में काम करते हुए उन्हें हमेशा एक सबल मार्गदर्शन मिलता रहा। कलाकारों को वक्त पर तनख्वाह मिलती रही। पृथ्वी थियेटर ने समूचे भारत में घूम-घूम कर नाटक किए। आपा पृथ्वी साहेब को बहुत बडा कलाकार कहती थी। आप उनके इंसानपरस्त व्यवहार की सराहना करती थी। पृथ्वी राज कंपनी के मालिक होकर कलाकरों से भेदभाव नहीं किया करते। एक कलाकार की हैसियत से आपा को कभी ऐसा नहीं लगा कि वो मालिक थे। कलाकार जो खाते, वही वो भी खाते । सोने के लिए जहां जगह मिल जाती, वहीं चादर बिछा लेते। आपा को उनमें अपने जैसा इंसान नजर आता था।

नायिका एवं नृत्यांगना होने के अलावा उन्हें खुद के स्त्री होने पर हमेशा गर्व रहा। यही वजह रही कि अपनी बेटी से बेहद प्यार करती थी। हालांकि बेटी के जन्म से पहले उनके मन में ठीक ऐसे भाव नहीं थे। जब किरण का जन्म हुआ तो वह थोडी देर के लिए बहुत निराश रहीं। बेटे की चाहत में। जन्म के तुरंत बाद आपने लडकी को तुरंत नहीं देखा। एक रात बिल्ली की आवाज सुनकर पालने की ओर जब गयीं तो उन्हें पता चला कि दरअसल बिटिया रो रही थी। किरण को रोता देख पाया कि यह लडकी तो बेहद खूबसुरत थी। इसके बाद खुदा ने उन्हें एक बेटा भी दिया। आपा को अपने बच्चों पर गर्व हुआ करता था। पति कामेश्वर बहुत सहज-सरल इंसान होने के साथ अच्छे कलाकार व डाक्टर थे। वो जब तक रहे परिवार को कभी डाक्टर की जरूरत नहीं पडी। आपा अपने अब्बा पर भी गर्व किया करती थी। जोहरा आपा हमारे बीच नहीं…लेकिन उनके जिंदगी के  बरस हमारी जिंदगियों में कहीं न कहीं जरूर मिलेंगे।