hamas
by– मूल लेखक— मिर्जा यासिन बेग़
अनुवादक- अफ़ज़ल ख़ान

इसराइल ने मिस्र की प्रस्तावित सेज़ फायर प्रस्ताव मान ली, लेकिन हमास ने इनकार कर दिया है, कि वे इसराइल पर रॉकेट फेंक रहे हैं. आतंकवादी हमास ‘कासिम बरीगीड ने कहा,’ हमारी इसराइल के साथ लड़ाई जारी रहेगी, हम शहीदों के खून से वफादार रहेंगे. यह फिर साबित हो गया है कि हमास अस्तित्व हिंसा और खून बलात्कार पर पलता है … हमास खुद फिलिस्तीनी नागरिक के मरने पर कोई रंज नही है यह बात पहले दिन से कह रहा हूँ, कि अपराधी इसराइल नहीं हमास आतंकवादी संगठन है, जो गाजा के निर्दोष फिलिस्तीनी जनता को बंधक बना रखा है. “यह वे शब्द जो एक प्रमुख पाकिस्तानी बुद्धिजीवी, कई लोकप्रिय पुस्तकों के लेखक अरशद महमूद ने अपनी फेसबुक स्टेटस पर लिखे हैं. केवल अरशद महमूद ही नहीं अब बेशुमार पाकिस्तानियों के विचार इसराइल के हवाले से बदल रहे हैं. फ़िलिस्तीन के बेगुनाह शहीदों के लिए सभी आँखें ाशकबार और दिल गम से बोझिल हैं, लेकिन अब अधिकांश मुसलमानों का मानना ​​है कि लहू बहाने जहां इसराइल सामने है वहीं हमास भी पीछे पूरी तरह शामिल है. अपने मासूम शहीदों से अधिक अपनी राजनीतिक दकानदारी की चिंता है. यही कारण है कि अरशद महमूद ने सही लिखा है कि गाजा पट्टी फिलिस्तीनियों का ‘वज़ीरिस्तान’ और हमास तालिबान पाकिस्तान है.

अरशद महमूद ने लिखा है कि यहूदियों (इजरायल) इतिहास लगभग 3300 साल पुराना है. हज़रत इब्राहीम, हज़रत मूसा, हज़रत दाऊद और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम जैसे अपने .समय के महान राजा यहूदी थे … पवित्र पुस्तकों के अनुसार यहूदियों कनिानीों क्षेत्र में राज्य भगवान (अल्लाह) की इच्छा से मिली … कुरान भी इसकी पुष्टि करता है. यहूदियों बादशाहतों पर 63 ई.पू. में रोमनों ने कब्जा कर लिया … फिलिस्तीनियों को यदि कनानी ‘समझ लिया जाए, इस का मतलब अल्लाह ने खुद यहूदियो को वो जगह दी थी. बैतुल मुक़द्दस जो मस्जिद है, वह हज़रत सुलैमान का (मन्दिर गोमेद) यहूदी मंदिर था … यीशु भी यहूदी थे … तो हजारों साल पुरानी यहूदी मूल के बारे में आज कहा जा रहा है, उनका इस क्षेत्र से कोई संबंध नहीं … ऐसा कहना सभी पवित्र पुस्तकों (तोरात,जबूर,इंजील, कुरान) के खिलाफ है. इस्लाम और मुसलमान तो डेढ़ हजार साल बाद आया ….. हम किस हिसाब से फिलिस्तीनी मुसलमान मूल हकदार हैं .. कह रहे हैं ..?

यहूदी इस्लाम से कई सौ साल पहले आज के फिलिस्तीनी, सीरिया, इराक, जोर्डन क्षेत्र के निवासी थे, उनके जनजातियों थे, उनकी सरकारें रही. जिन पर उसी भगवान कृपा और अनुग्रह रहा, जो भगवान में मुसलमानों का विश्वास है. एक राय के अनुसार हमास मुख्य रूप से इसराइल की ही रचना है. यह चरमपंथी संगठन सोवियत संघ और अमेरिका में बीच आर्थिक प्रणालियों की लड़ाई का परिणाम है. सोवियत संघ समर्थित संगठनों का परिणाम कुछ देशों के मामले में आज भी मौजूद है. अमेरिका और उसके समर्थित देशों पैदा की तन्में बाद धर्म के आधार पर थी और और उनका काम हमेशा अपने आकाओं की खुशी और उनके हितों की रक्षा करना है कि वे करते हैं. बीबीसी ने लिखा है कि इसराइल ने ग़ज़ा में हवाई हमले बंद करने के लिए मिस्र के प्रस्ताव स्वीकार कर ली थी और हमले रोक दिए थे लेकिन इस दौरान हमास के रॉकेट हमले जारी रहे जिसके बाद इसराइली विमानों ने गाजा पर बमबारी का सिलसिला फिर शुरू कर दिया है. हमास मिस्र सुझाव आधिकारिक जवाब नहीं दिया और उसे यह कहकर खारिज कर दिया कि यह प्रस्ताव ‘हार स्वीकार करने’ के बराबर है. फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार पिछले आठ दिन से जारी इजरायली बमबारी में कम से कम 192 लोग मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि मरने वालों में तीन चौथाई से अधिक नागरिक मारे गए हैं. इसके अनुसार इन हमलों में 1400 से अधिक फिलीस्तीनी घायल हुए हैं, जबकि हमास द्वारा दागे गए रॉकेट चार इजरायली घायल हुए हैं. हजारों लोगों ने गाजा से पलायन है जबकि इजरायल ने सीमा के साथ हजारों सैनिक तैनात कर रखे और ऐसी हालांकि मीगोईाँ हो रही है कि इसराइल जमीनी हमले की योजना.

अरशद महमूद ने इसराइल के इतिहास लेखन करते हुए लिखा है कि हमारे यहां इसराइल ‘यहूदी राज्य कहकर बदनाम किया जाता है. आइए, इसराइल के बारे बुनियादी जानकारी देखते हैं. इसराइल में संविधान की जगह “बुनियादी नियमों” (Basic Laws) हैं, जिनके अनुसार इस्राइली ‘यहूदी’ राज्य है न कि सहोनिय. सभी धर्मों के मानने वालों को अपने विश्वास के अनुसार स्वतंत्र अभ्यास करने की अनुमति है. (जो पाकिस्तान में नहीं है). गैर यहूदी अल्पसंख्यकों के लिए ब्रिटिश कानूनों और तुर्क की परंपरा को सामने रखा गया है. 75% धर्म यहूदी है, लेकिन उनमें 37% तक लोग धर्म को नही मानते.यानी उन्हें यहूदी विश्वासों कोई रुचि नहीं. 20% अरब मुसलमान हैं, 5% अन्य धर्मों के लोग हैं. इसराइल हालांकि इन यहूदियों के देश के रूप में बनाया गया, जिसका दुनिया भर में ाीज़ारसानी Persecution गया. लेकिन इजरायली कानून रंग और नस्ल, पंथ, सब बराबरी के नागरिक अधिकार देते हैं. लेकिन Law of Return के तहत यहूदी आप्रवासियों को प्राथमिकता व्यवहार की गारंटी है. यहूदी धर्म के अभ्यास का यह हाल है, कि इजरायली डीमाकरीतिय ानस्टेोट ‘के सर्वेक्षण के अनुसार 27% यहूदी’ सब्त ‘मानते हैं, जबकि 53% ने कहा, वह’ दिन विश्राम की कोई परवाह नहीं करते. कंज़र्वेटिव यहूदियों की संख्या 32% से लेकर 55% तक बताई जाती है, और उदार धर्मनिरपेक्ष यहूदियों की संख्या 20% से लेकर 80% बताई जाती है. इसका मतलब यह हुआ कि इसराइल में कनज़वैटो यहूदी और उदार यहूदी फफटी फफटी हैं .. क्या ऐसा देश कट्टरपंथी हो सकता है? और दुनिया की सबसे उच्चतम शिक्षित राष्ट्र हो. गैर हलाल मांस आयात पर प्रतिबंध है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुसार राज्य सरकारों को पोर्क पर प्रतिबंध लगाने से मना कर दिया गया, क्योंकि आबादी के एक हिस्से ने उसकी मांग की थी. मूल्यांकन लगालें, जिसे यहूदी यहूदी कहकर बदनाम किया जाता है .. वह कितना यहूदी है. धर्मनिरपेक्ष कट्टर यहूदी मलाईत (रबानीों) हर समय कहीं न कहीं चुनौती करते हैं. पाकिस्तान की तरह इसराइल में यहूदी अर्थ डाकस मदरसे हैं, और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रणाली संस्थान भी. लेकिन सबसे बुनियादी पाठ्यक्रम एक ही है. इसराइल में सिकोरलर शक्तियां लगातार दबाव बढ़ रही हैं, कि राज्य और धर्म को अलग अलग किया. धर्मनिरपेक्ष इजरायल यहूदियों का कहना है कि वह यहूदी धार्मिक नियमों को नहीं मानते, इसराइल एक आधुनिक लोकतांत्रिक देश होने के नाते जनता की इच्छा के खिलाफ उन पर कोई ‘यहूदी’ कानून नहीं ठूंस जा सकता. यहां तक ​​कि शादी, तलाक और दफनाया अनुष्ठानों और नियमों को खुलेआम चुनौती दी है. 2010 इजरायल सरकारी आंकड़ों के विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 8% ने कट्टर यहूदी, 12% तक ारथोडाकस, 25% आम पारंपरिक यहूदी, और 42% खुद को धर्मनिरपेक्ष बताया. यहां तक ​​कि अरब मुस्लिम आबादी भी 18% गैर धार्मिक, 27% आम सा मुसलमान कहा. आप अनुमान, इसराइल पाकिस्तान से कहीं अधिक उदार, धर्मनिरपेक्ष और उदारवादी देश है. इस्लामी दुनिया में झूठा प्रचार और वावैलह मचा कर आम लोगों में इसराइल नफरत पीदाकी जाती है. यदि सयाोनियत यानी धार्मिक कट्टरपंथी होने का स्तर भी, तो पाकिस्तान इसराइल कानून और सामाजिक लिहाज़ से ज़्यादा ‘यहूदी’ यानी धार्मिक चरमपंथी देश है …. फिलिस्तीनी अगर इसराइल को स्वीकार, शांतिपूर्ण पड़ोस के साथ रहें .. यह भी विकास और समृद्धि की ओर जा सकते हैं और इसराइल के कट्टरपंथी नीति स्वतः समाप्त हो जाये गी!