sai

सांई तो फ़कीर थे ,
वक्त रहते किसी ने फ़कीर को तरजीह ना दी !
आज लोग जाने क्या-क्या मांगने जाते है शिरडी और फ़कीर से कहते है
साई संवार दो मेरी तकदीर !!
= साईं तब भी चुप थे जब ससरीर थे दुनिया में और दुनिया ने उनका विरोध किया था !!
= साई तब भी चुप रहते है जब धनाढ्य वर्ग उनकी मूर्ति पर हीरा, मोती ,
सोना , रुपया पैसा अर्पण करता है और आडम्बर पूर्ण पूजा का दिखावा करता है!
= साई तब भी चुप है जब कुछ मठाधीश उनके स्तित्वा को सिरे से नकार रहे है !
क्योंकि साई फ़कीर थे जिसे ना मान की चिंता थी ना अपमान का डर !
साईं ससरीर थे तब भी कहते थे सबका मालिक एक है लेकिन उस मालिक का नाम
लेकर कभी किसी को ठगते नहीं थे उनका वह मालिक निश्चित रूप से राम ही था
जो जीवन पर्यन्त उनके नाम के साथ जुड़ा रहेगा !
साईं दुनियां में आज ससरीर नहीं है तब भी उनकी पहचान सबका मालिक एक है से ही है !
पता नहीं क्यों अचानक धरती के आधुनिक इंद्र यानी फ़लाने-फ़लाने टाईप के
संकराचार्य लोगो का सिंघासन डोल उठा है इस फ़कीर के नाम पर !
जाने क्यों धरती के इंद्र कराह उठे है जनता की साई भक्ति देखकर !
साईं के नाम के साथ भी राम जुड़ा है यानी साई राम जिसका मतलब ही है की
पूरा संसार राम का है और साई भी राम के ही है ! फिर अचानक धरती के इंद्र
राम को लेकर इतने छुद्र कैसे हो गए और क्यों हो गए…?
ऐसा क्या नागवार गुज़रा उनको जिसके चलते फ़कीर से भी रार ठान दिए, ऐसे फ़कीर
से जिसने कभी राम को लेकर कोई विभेद ही नहीं किया और हमेसा कहता रहा सबका
मालिक एक है !
ऐसा फ़कीर जिसने सारी दुनिया के लोगो के बीच से आपसी वैर समाप्त करके राम
के प्रति एकनिष्ठ होने की राह दिखाया ! राम के बृहद स्वरुप का सही मर्म
समझाया !
एक ऐसा फ़कीर जिसने ज़िंदा रहते हुए कभी अपना मठ नहीं स्थापित किया !
एक ऐसा फ़कीर जिसने कभी सरस्वती ,कभी आचार्य, कभी संकराचार्य, जैसा तमगा
नहीं धारण किया, ना ही आस्था और इंसानियत का शोषण किया !
एक ऐसा फ़कीर जिसने किसी मठ में बैठकर खुद की पूजा नहीं करवाया ! बल्कि
गरीबो के आंसू पोछे, उनका दर्द मिटाया उनके बीच जाकर !
और यह सर्व विदित है कि जो गरीबो के लिए लड़ता है, उनके दुःख दर्द मिटाता
है, वह गरीबो का मसीहा कहलाता है ! ऐसा मसीहा जो आसमानी मसीहा नहीं होता
फिर भी लोगो के दिलो में अपने अच्छे और नेक कर्म से यह स्थान बना लेता है
!

जिस राम की बात करके समाज में हिंसा भड़काने की स्थिति उत्पन्न कर रहे है
धरती के वर्तमान इंद्र यानी संकराचार्य टाईप के लोग उनको अपने राम की एक
बात सदैव स्मरण रखनी होगी .!

(( निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल-छिद्र न भावा’ ))

यानी जो मनुष्य निर्मल मन का होता है वही मुझे पाता है। मुझे कपट और छल
छिद्र नहीं सुहाते इसलिए पहले मन शुद्ध होना चाहिए, क्योंकि मन ही
मूलाधार है और उसके ऊपर है चरित्र।
मेरे कहने का मतलब है मठाधीश टाईप के धरती के इंद्र लोगो से की महाराज
धरती के इंद्र जी आप सब का सिंघासन साई के नाम पर बेवज़ह डगमगा रहा है !आप
लोगो को भय फ़कीर से नहीं है,आपको अपने आप से ही भयभीत होना चाहिए क्यों
की मठ बनाकर, मठाधीश बनकर, जनता से खुद की आडम्बरपूर्ण पूजा करवा कर आप
समाज का कुछ भला नहीं कर रहे है, बल्कि मठाधीश के नाम पर जनता की आस्था
के साथ खिलवाड़ कर रहे है ! अतः आपको डर जनता से होना चाहिए ! क्यों की
हिन्दुस्तान में निवास करने वाला हर ब्यक्ति हिन्दू है , और हर हिन्दू
राम का ही है ! जबतक हिन्दुस्तान है दुनिया के नक़्शे में यकीन मानिए राम
का स्तित्व खतरे में नहीं है आप जैसे मठाधीशो के प्रलाप कर देने मात्र से
अथवा जनता के बीच साई को लेकर विवादित बयान दे देने से ! भारत के सभी
मठाधीशी से आज एक आम नागरिक का सादर अनुरोध है की कृपया एक दिन, एक रात,
सिर्फ राम के लिए समर्पित कर दीजिये खुद को और फिर से विचार, चिंतन, मनन
, अध्ययन करिये वेद पुराणो के श्लोकों और मन्त्रों का फिर से सत्यता
जानने की कोशिस करिये की –
= सच्चा राम कौन
= सच्चा राम किसका
= सच्चा राम मठ में बैठ कर मिल सकता है या
अनाथ , दबे – कुचले लोगो की सेवा करके ..?
= क्या सच में एक फ़कीर की वज़ह से हिन्दुओ के राम का स्तित्व खतरे में है …….?
= क्या फ़कीर साई स्वतः भी राम के भक्त नहीं थे ?
एक बार जरूर चिंतन करिये यकीन मानिये आप को राम का मर्म समझ में आ जाएगा
साथ ही जितने दिन ढकोसलेबाजी वाले आडम्बर पूर्ण आवरण में खुद को लपेट कर
रखा आप सब ने और खुद को राम का सगा , सच्चा बताते रहे उस ढोंग पर आपको
घोर ग्लानि भी होगी !
आप अपना संत कर्म भूल गए मठाधीश बनकर खुदको पुजवाने के चलते साथ ही समाज
के प्रति अपना संत का दाईत्वा भी भूल गए ! सादर अनुरोध है की
इतिहास में झांकिए, राम को समझने के लिए जनता की पीड़ा को समझाना जरुरी है
,न की मठाधीश बनकर आग बोना समाज में ! राम के स्तित्व को बनाये रखने के
लिए हिन्दू और हिन्दू धर्म को बचाये रखने के लिए , हिन्दुस्तान की एकता
अखंडता को बनाये रखना होगा इसके लिए संकराचार्य या सरस्वती की उपाधि नहीं
बल्कि विवेकानंद जैसा दार्शनिक बनना होगा आप सब को ! सम्पूर्ण भारत को
जोड़ने की पहल करनी होगी आप सबको !आदि गुरु संकराचार्य के दिखाए मार्ग पर
चलना होगा अक्षुण भारत के लिए, अक्षुण हिन्दू धर्म के लिए, अक्षुण सनातन
धर्म के लिए ! न की आधुनिक युग के कुंठित संकराचार्य बनकर जनता को गुमराह
करने से बचेगा हिन्दू धर्म या हिन्दुस्तान !
फ़कीर से मत खौफ खाईये साई नाम का वह फ़कीर भी राम का ही है बस इस बात का
कभी उसने दिखावा नहीं किया ! और आप सब ने मठाधीश होकर राम आपके है आप की
ही जागीर है इस बात का दिखावा किया है ! डर आपको फ़कीर से नहीं है, न ही
फ़कीर के भक्तो से ! डर आपको आपके अंतर मन में ब्याप्त असंख्य कुत्सित और
दुसित सोच से है !