fatwa

अफ़ज़ल ख़ान

आज कल मुस्लिम उलेमाओ द्वारा एक दूसरे को काफ़िर का फ़तवा देने का रिवाज़ है खास तौर से पाकिस्तान और मुस्लिम देशो मे जो के एक चिंता का विषय है. अभी जल्द ही कार्टून चॅनेल को भी हरम करार दिया गया है.यही उलेमा दुनिया के हर अविष्कार को हरम क़रार देते है, पेप्सी पीते है मगर उस को भी हरम बताते है. दूसरे को काफ़िर तो कहते ही है साथ मे जो मुसलमान उन के अक़ीदा का नही है उसे भी काफ़िर कह देते है. खैर मे पाकिस्तान के एक मशहूर शाएर सुलेमान हैदर की एक कविता ” मे भी काफ़िर तू भी काफ़िर” इन दिनो चर्चा का विषय बना हुआ है और पाकिस्तान मे इस कविता पे विवाद भी हो रहा है. मे पाठक के लिये इस का हिन्दी मे अनुवाद पेश कर रहा हु बिना किसी कॉमेंट के. आप के कॉमेंट का इंतजार रहे गा.(अफ़ज़ल ख़ान)

मे भी काफ़िर तू भी क़ाफ़िर फूलों की खुशबू भी काफ़िर शब्दों का जादू भी काफ़िर यह भी काफिर वह भी काफिर फ़ैज़ भी और मंटो भी काफ़िर
नूर जहां का गाना काफिर मकडोनलड का खाना काफिर बर्गर काफिर कोक भी काफ़िर हंसी गुनाह जोक भी काफ़िर
तबला काफिर ढोल भी काफ़िर प्यार भरे दो बोल भी काफ़िर सुर भी काफिर ताल भी काफ़िर भनगरा , नाच , धमाल भी काफ़िर धादरा , ठमरी , भैरो भी काफिर कॉफी और खयाल भी काफ़िर
वारिस शाह की हीर भी काफ़िर चाहत की जंजीर भी काफ़िर जिंदा मुर्दा पीर भी काफ़िर भेंट नियाज़ की खीर भी काफ़िर बेटे का बस्ता भी काफ़िर बेटी की गुड़िया भी काफ़िर
हंसना रोना कुफ़्र का सौदा गम काफिर खुशियां भी काफ़िर जींस भी और गिटार भी काफ़िर टखने के नीचे बांधो तो अपनी यह शलवार भी काफ़िर कला और कलाकार भी काफ़िर जो मेरी धमकी न छापे वह सारे अखबार भी काफ़िर
यूनिवर्सिटी के अंदर काफ़िर डार्विन भाई का बंदर काफिर फ्राइड पढ़ाने वाले काफिर मार्क्स के सबसे मतवाले काफिर
मेले ठेले कुफ़्र का धंधा गाने बाजे सारे फंदा
मंदिर में तो बुत होता है
मस्जिद का भी हाल बुरा है
कुछ मस्जिद के बाहर काफिर कुछ मस्जिद में काफिर मुस्लिम देश में अक्सर काफिर
काफ़िर काफ़िर मे भी काफ़िर काफ़िर काफ़िर तू भी काफ़िर