प्रदीप दुबे

क्या बहरा हुआ खुदा …????????

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मुरादाबाद के कांठ में शुक्रवार २७ जून २०१४ को जो कुछ घटा , धार्मिक स्थलों से जिस प्रकार लाउडस्पीकर हटाने को लेकर बवाल हुआ, ग्रामीणों एवमं पुलिस के बीच जिस तरह का संघर्ष देखने को मिला, किसी एक धर्म के साथ होकर प्रदेश के मुखिया ने अन्य धर्मो के साथ जो राजनितिक छेड़ – छाड़ किया ! जनता की भावनाओ को जिस प्रकार आघात पहुचाया , धारा १४४ की स्थिति को जिस प्रकार उत्पन्न किया गया, वह एक दिन में किया गया फैसला नहीं था बल्कि रमज़ान के मद्दे नज़र राजनीतिक रोटी सेकने की के लिए सोची समझी नीति के तहत तैयार किया गया एक पुख्ता एजेंडा है ! प्रदेश सरकार क्या चाहती है नहीं पता, किन्तु जबसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सत्ता सम्हाली है जनता परेशानियों, दंगे – फसाद की वज़ह से कराह रही है ! आम चुनाव में इतनी बड़ी सिकस्त पाने के बाद भी नहीं समझ आता यह समाजवादी पार्टी आखिर चाहती क्या है, आखिर अखिलेश यादव जी किसके हाथ की कठपुतली बने है की आये दिन एक के बाद एक जघंन्य और हिंसक घटनाएं प्रदेश में हो रही है और उसपर मुख्यमंत्री जी का कोई बस नहीं है ! हद्द तो अब हो गई है की मुख्यमंत्री जी के आदेश,फरमान, या यों कहे की गलत फैसलों की वज़ह से उत्तर प्रदेश का पश्चिमी वेल्ट दंगा -फसाद का घर हो गया है ! हिन्दू मुस्लिम को आपस में लड़ा कर अपनी कौन सी दूरदर्शी नीति का परिचय दे रहे है मुख्यमंत्री जी २७ जून को मुरादाबाद में हिंसा की आग लगी वह आग विभत्स रूप अख्तियार कर चुकी है आज की डेट में ! तो वही दूसरी हिंसा भड़क उठी है मेरठ में ! मेरठ शहर में सांप्रदायिक झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लालकुर्ती के जामुन मोहल्ले में हुई वारदात में अभी समझौते का दौर चल ही रहा था कि पूर्वा इलाही बख्श में शुक्रवार को दो समुदायों में जमकर पत्थर और तेजाब की बोतलें चलीं। छतों पर मोर्चाबंद लोगों के जबर्दस्त पथराव में दोनों समुदाय के पांच लोग घायल हो गए। हवाई फायरिंग की भी सूचनाएं हैं। मौके पर पहुंची कई थानों की पुलिस ने लाठी चार्ज कर लोगों को तितर-बितर कर हालात संभाले। बवाल के बाद पूरे इलाकों को फोर्स ने सील कर दिया है। पुलिस ने देर रात तीन युवकों को हिरासत में ले लिया है। मेरठ की स्थिति आज की जो है उसे देखकर यही कहा जा सकता है मुख्यमंत्री जी पर कही ना कही तो जरूर आतंरिक दबाव है आज जिसके चलते वह प्रदेश को सेना की छावनी बनाने पर आमादा है ! मित्रो मै राजनितिक सोच से अपने को अलग रखकर दूर रखकर आज इस दंगो की वज़ह और दंगो पर मानवता की भाषा में आप को अपने विचारो से कुछ कहना और समझाना चाहता हूँ ! हो सकता है मेरा विचार कुछ लोगो को नागवार गुज़ारे पर मित्रो इस दंगे फसाद से हमारे प्रदेश को बचाने के लिए यह विचार व्यक्त करना आज मुझे सही लगा तो मै व्यक्त कर रहा हूँ ………………………………………….

रमजान के मद्दे नज़र मंदिरो के उपर से साउंड सिस्टम और माइक हटवाने के पीछे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी की मंसा चाहे जो भी हो किन्तु मैं तो इसपर इतना ही कहूँगा की मंदिरो से माईक साउंड हटवाकर मुख्यमंत्री जी ने यह प्रूफ कर दिया की की हिदुओ के देवी देवता कान के बहरे नहीं है न ही अपने भक्तो की परेसानी और भक्ति जानने के लिए ऊँची आवाज़ में बजने वाले साउंड सिस्टम की ही ज़रूरत है उन्हें !

वह अल्लाह की तरह थोड़े है जिनको अपनी परेसानी अपनी भक्ति बताने और दिखाने के लिए हमारे मुस्लिम भाई सदियों से मस्जिद के उपर माइक बांधकर चिल्लाते आ रहे है ! मित्रो चिल्लाता वो है जिसकी आवाज नहीं सुनी जाती , चिल्लाता वो है जिसका कोई माई – बाप न हो ! चिल्लाता वो है जिसका मुखिया , जिसका रहनुमा, जिसका खुदा बहरा हो गया हो !

साउंड माईक की जरुरत उसे पड़ती है जिसके सुनाने की क्षमता कमजोर पड़ गई हो ! इस लिए मंदिरो से साउंड सिस्टम हटाने के लिए प्रदेश के आलाकमान के फरमान पर हिन्दू भाई आक्रोशित ना हो अपने बुद्धि कौशल का परिचय दे, अपनी हिन्दू संस्कृति और सभ्यता का परिचय दें और पीड़ित मुस्लिम भाईयों को रमजान के महीने में मस्जिद पर बधे माईक साउंड से चिल्ला चिल्ला कर अपना दर्द अपने खुदा तक पहुचाने दें !

यकीन मानिए मित्रों उनके बहरे खुदा ने सदियों से ना उनका दुःख दर्द सुना है ना ही इस रमज़ान में ही सुनने वाला है क्यू की जिन्हे अपने खुदा के कान.पर भरोसा नहीं, जो अपने खुदा को बहरा मानकर अपनी आवाज़ चिल्लाकर माईक साउंड से उसतक पहुचाते है उस खुदा को भी ऐसे ढोंगियों के ढोंग पर यकीन नहीं ना ही इनकी कोई परवाह है, इसका प्रमाण है की लाख इनके चिल्लाने पर भी सदियों से खुदा इनकी आवाज़ ठुकरा रहा है और इन्हे बताने की कोशिश कर रहा है की –
मैं बहरा नहीं हूँ, न ही तुम लोगो से दूर हूँ, मैं तो तुम सबके दिल में हूँ, अपना दिल.बड़ा करो मेरे नेक बन्दों मैं तुम्हारी आवाज़ तुम्हारे दुःख दर्द तुम्हारे खामोश रहने पर भी सुन लूंगा समझ लूँगा ! जबतक माईक साउंड लगाते रहोगे मुझे बहरा समझकर चिल्लाते रहोगे मैं कुछ नहीं सुन पाउँगा और आप दुनिया में सबसे पीड़ित, दुखी,परेसान, अशांत रहोगे ! सदियों पहले किसी संत ने क्या खूब कहा था मुस्लिमो की इस ढोंग विधा की भक्ति पर ! –

((कांकर- पाथर जोड़ कर मस्जिद दिया बनाई ता चढ़ मुल्ला बाग़ दें क्या बहरा हुआ खुदा …??? ))

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70 thoughts on “क्या बहरा हुआ खुदा …????????

  1. सिकंदर हयात

    मस्जिद में लाउडस्पीकर का इस्तमाल बहुत ही सीमित समय के लिए होता हे पांचो वक्त की अज़ान महज़ कुछ मिनटों में हो जाती हे इसके अलावा कोई शोर कभी भी नहीं इसी कारण अधिकांश हिन्दुओ ने इसको कभी भी मुद्दा नहीं बनाया जबकि मंदिरो और दूसरे धार्मिक क्रियाकलापों में जो घंटो और असीमित समय के लिए शोर होता हे उससे मुस्लिम तो क्या हिन्दुओ का बड़ा वर्ग भी परेशान हे और उनकी परेशानिया बढ़ने वाली हे मोदी सरकार बनने के बाद से ही हिन्दू कठमुल्लाओं के हौसले बुलंद हे और कठमुल्ला कही के भी हो वो दूसरे से ज़्यादा अपनों को ही मुश्किलो में डाल देते हे

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    1. shishir singh

      सिकंदर भाई, नमस्कार. आपने बिल्कुल सही की मंदिर के लाउद्स्पीकर से आम हिंदु भी परेशान है और मैं भी उनमे से ही एक हु. परंतु आपका ये कह्ना की मंदिर मे स्पीकर असीमित समय के लिये बजते हैं और मस्जिद मे सिर्फ ५ वक़्त, पूरा सच नहीं है. मस्जिद मे भी घंटो तकरीरे चलती हैं और मंदिर मे भी भगवान के आराम का समय निर्धारित होता है.
      =================
      भाई असली मसला ये है की क्या हमें अपनी प्रार्थना इश्वर तक पहुंचाने के लिये सच मे इन लाउड्स्पीकर जैसे साधनो की जरूरत है?
      =================
      एक और बात, किसी व्यक्तिगत अनुरोध पर किसी मंदिर के लाउड्स्पीकर को खामोश होते तो देखा है मैने पर मस्जिद के लाउड्स्पीकर को नहीं (ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है जो पुर्ण सत्य हो ये जरूरी नहीं, ये बात मेरे सामने घटी एक घटना के संदर्भ मे कही गयी है).

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      1. सिकंदर हयात

        शिशिर भाई में 15 साल मस्जिदो के पास ही रहा हु मेने कभी कोई तकरीर नहीं सुनी लेकिन मस्जिद के लाउडस्पीकर से अगर तकरीरें होती हे तो में इसका भी कड़ा विरोध करता हु मेरा सिर्फ ये कहना था की ज़बरदस्ती अज़ान को तो मुद्दा मत बनाइये जैसे दुबे जी बना रहे हे आप्ने लिख ” एक और बात, किसी व्यक्तिगत अनुरोध पर किसी मंदिर के लाउड्स्पीकर को खामोश होते तो देखा है मैने पर मस्जिद के लाउड्स्पीकर को नहीं (ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है जो ” ये बात भी निश्चित रूप से अज़ान के सन्दर्भ में नही होगी महज़ कुछ मिनटों की अज़ान को बंद करने को भला कोई भी भला आदमी क्यों कहेगा ? पंडित भीमसेन जोशी जैसा महानतम कलाकार कहते थे की बचपन में ही वो अज़ान की आवाज़ सुनकर खिचे चले जाते थे कोई भी असली महान कलाकार किसी ” शोर ” की और आकर्षित नहीं होता हे

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      2. Aabid husain

        सब से पहले में आपकी जानकारी के लिए बता दू के मस्जिद में अज़ान और नमाज़ इ जो लाउड स्पीकर इस्तेमाल होता है,वह अल्लाह के लिया नहीं है।
        अल्लाह इन सब से पाक ह। यह तो मस्जिद में आने वाले लोगो के लिए
        है ,के भाई अज़ान हो रही है ,नमाज़ का टाइम हो गया।मस्जिद में लाउड स्पीकर लोगो के लिए है के उनको साफ़ आवाज़ आये। और इस्की आवाज़ इतनी होती है के मस्जिद के बहार भोत कम जाती है।
        मीनारो के लाउड स्पीकर का इस्तेमाल सिर्फ अज़ान के लिए होता है ,
        जो सिर्फ 5 मिनट की होती है।

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  2. सिकंदर हयात

    अगर अज़ान के समय की तरह ही मंदिरो में भी एक सीमित समय के लिए यानी कुछ मिनट के लिए तो किसी को भी यानी किसी को भी भला क्या ऐतराज़ होगा बजाइए जितना चाहे

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    1. सिकंदर हयात

      मुझे बहुत दुःख हे ये में बहुत ही मज़बूरी में लिख रहा हु दुबे जी ने मज़बूर कर दिया हे वार्ना नेट पर अपनी लाखो लाइनो में से किसी एक में भी मेने कभी किसी की भी आस्था पर कुछ भी नहीं लिखा हे

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      1. shishir singh

        भाई आप दुखी ना हो, आप आस्था के बारे में नहीं बल्की एक गलत परम्परा के विरुद्ध बोल रहे हैं और मैं एक हिंदु आपकी बात का समर्थन करता हूँ. परंतु आपसे अनुरोध करूंगा की मस्जिद के लाउड्स्पीकर को या तो जायज ना कहे या उसके पीछे का जायज तर्क को भी सामने रखे.
        ================
        रोटी की हो या हीरे की, चोरी तो चोरी ही है.

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        1. सिकंदर हयात

          में आपके कहने सुंनने से दुखी नहीं हु मुझे खुद एक दो हलकी सी कड़वी बात लिखनी पड़ी इसलिए में दुखी हु में .क्योकि फरवरी 2011 से चालु हिंदी नेट लेखन में मेने कभी भी किसी की भी आस्था पर कोई टिप्पणी कभी भी नहीं की आज एक बात लिखने पर में दुखी हु

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    2. सिकंदर हयात

      मुझे बहुत दुःख हे ये बाते में बहुत ही मज़बूरी में लिख रहा हु दुबे जी ने मज़बूर कर दिया हे वार्ना नेट पर अपनी लाखो लाइनो में से किसी एक में भी मेने कभी किसी की भी आस्था पर कुछ भी नहीं लिखा हे

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    3. shishir singh

      भाई असली मसला ये है की क्या हमें अपनी प्रार्थना इश्वर तक पहुंचाने के लिये सच मे इन लाउड्स्पीकर जैसे साधनो की जरूरत है?

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      1. सिकंदर हयात

        अगर पड़ती भी हे तो 24 घंटे में यानी 10 मिनट वो भी हलके ही साउंड में तो कोई मुद्दा नहीं हे बेहिसाब समय के लिए भारी साउंड में कहा बज़ता हे में तो इस विषय पर भी चुप ही रहूँगा आप जानिये

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  3. सिकंदर हयात

    बात ये हे की मोदी जी का बुलबुला फूटने ही वाला हे शुरुआत हो चुकी हे उस पर से ध्यान हटवाने के लिए मोदी जी की फ़ौज़ ये सब कर रही हे बाकी पुलिस को भी जूते पहनकर मंदिर में नहीं जाना चाहिए था लेकिन बात यही हे की यु पि में सपा भाजपा की मिलीभगत तो हे ही ये दोनों मिलकर बाकी पार्टियो खासकर बसपा की जड़ो में मट्ठा डाल रहे हे

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  4. सिकंदर हयात

    यु पि के सभी मुसलमानो से अपील हे की सिर्फ आप या बसपा को ही वोट दे ये लोग 2017 – 19 तक यही करते रहेंगे भाजपा के छुटभय्ये नेता भड़काऊ गतिविधिया करते रहेंगे इनके सपोटर नेट पर जहर उगलते रहेंगे मोदी जी ऐसे बने रहेंगे जैसे उन्हें कुछ पता ही न हो राज़नाथ जी रिपोर्ट तालाब करते रहेंगे सपा इनके नेताओ को रिहा करती रहेगी ( इनके सपोटरो पर लाठी बरसाती रहेगी ताकि मुस्लिम खुश हो ) यु पि में चारो तरफ कहते हे की यादवराज़ हो गया हे यानी यादव मुस्लिम सपा के पाले में बाकी भाजपा के लिए इस तरह कर कर के बाकी पार्टियो की कमर तोड़ी जायेगी में सभी से अपील करता हु की आप और बसपा को मज़बूत करके इस” नूरा कुश्ती ” की कमर तोड़ दे

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    1. सिकंदर हयात

      ”इनके सपोटर नेट पर जहर उगलते रहेंगे ” लगता हे आप इस लाइन का बुरा मान गए दुबे जी ये लाइन आपके लिए बिलकुल नहीं थी में सोशल मिडिया पर मौजूद ” मोदीफ़ौज़ ” की बात कर रहा था

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  5. Pradeep dubey

    सिकंदर जी आपने तो बीच में से एक लाईन
    उठाई और मुझे गलत ठहरा दिया, बेहतर होता की आप सुरु से मेरा पूरा लेख पढ़ते ! मैंने तो उत्तर प्रदेश में जो कुछ हो रहा है वर्तमान में उसके लिए साशन, प्रसाशन की कमियों से अपनी बात सुरु की है और सदियों से चली आ रही कुरीति पर, अंधविस्वास पर कुठाराघात मात्र किया है अपने इस लेख से ! कृपया पहले पूरा लेख पढ़े वाद विवाद में पड़े बिना, साथ ही इस बात का ख़याल रखे अबतक मैंने आपकी बेबसाईट पर अपना स्वस्थ लेख ही भेजा है और मेरी सदैव कोसिस रही है सामाजिक विसमता को, कुरीति को समाज से कैसे ख़त्म करे इस पर प्रकाश डालने की ! मैंने कभी लेखक होने का ढोंग करने के लिए लेख नहीं लिखे अतः मेरे इस लेख पर भी कुछ उटपटांग कहने से पहले मेरे ब्यक्तित्वा और अबतक के पब्लिश हुए ढेरों लेख पर गौर गरे ! सिकंदर जी बहुत दुःख हुआ आज आप का विचार जानकार आपकी मानसिकता पढ़ कर क्यू की मैंने कई लेख भारत के किसानो , भारत की राजनितिक उथल-पुथल , घरेलु हिंसा, महिलाओ पर हिंसा, धारा ३७० , घोटालो आदि पर लिखा,आप कह सकते है मैंने लगभग हर सामाजिक मुद्दो पर लिखा कह ही क्यों अपनी बेबसाईट पर देख भी सकते है किन्तु आपने कभी उसपर कोई प्रतिक्रिया ब्यक्त नहीं किया ना ही मेरी हौशला आफजाई ही की ! आज ऐसा क्या हुआ की आप एक नहीं कई बेबुनियाद विचार रख दिए मेरे इस लेख पर क्या मैंने खुदा को लेकर मुस्लिम भाईयों के बीच सदियों से फैले अंधविस्वास पर कुछ लिख दिया है इस लिए …???
    सिकंदर भाई सायद यही वज़ह है की आप लोगो ने इस लेख के साथ लगे मेरे इस नोट note :—( यह मेरी अपनी निजी सोच है इसे अन्यथा न ले बस समाज से कुरीतियों और अंध विश्वासो को उखाड़ फेंकने के लिए ये मेरा विचार है )) ! सादर – प्रदीपदुबे………………………………….
    को भी पब्लिश नहीं किया जो इस लेख में जोड़ कर मैंने भेजा था पब्लिश होने को ! कही ऐसा तो नहीं की आप अपनी वेबसाईट पर मेरे खिलाफ कुछ अराजक फैलाने के मूड में है ! अगर ऐसा है तो याद रखियेगा सिकंदर भाई मै सिर्फ आपकी बेबसाईट पर ही नहीं आर्टिकल लिखता हूँ ,मै पिछले ७ साल से इस कार्य में हूँ, और स्वस्थ छवि वाले लेखक की मेरी छवि रही है !इस लिए कृपया मेरे इस स्वस्थ लेख पर उटपटांग विचार व्यक्त करके अस्वस्थ मैसेज ना फैलाये ! बल्कि मै इस लेख के माध्यम से समाज को जो मैसेज देना चाहता हूँ उसमे मेरा सहयोग करे !
    कबीर दास जी ने सही कहा था …………
    (( आपस में दोउ लरी-लरी मूये
    मरम काहू ने ना जाना …))

    कृपया मेरे इस लेख को गलत ढंग से व्याख्यायित कर के आपस में दो कौमो को लड़ाइये मत ना खुद लड़िये ! मेरे इस स्वस्थ लेख को स्वस्थ रूप में लीजिये आग्रह है आप सब से !
    सादर –
    प्रदीप दुबे

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    1. afzal khan

      कुछ बातो पे मुझे भी आपत्ती है. जहा तक मस्जिद और मंदिर मे स्पीकर के इस्तमाल की बात है, मेरे समझ मे अगर कानून बने तो सभी धार्मिक स्थलो पे पूरी तरह से स्पीकर पे पाबंदी होनी चाहिये. मेरा अपना सोचना है के मस्जिद मे पांच समय सिर्फ 5-10 मिनट ही स्पीकर का इस्तमाल होता है बाकी कभी कुछ खास वक़्त पे मस्जिद का स्पीकर कुछ ज्यादा देर तक इस्तमाल होता हो गा. आप भी जानते है के स्पीकर का सब से ज्यादा इस्तमाल मंदिर मे ही होता है.
      मेरे समझ से सभी धार्मिक स्थलो पे स्पीकर की पाबंदी होनी चाहिई और इसे धार्मिक विशेष पे हमला नही होना चाहिये.

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      1. सिकंदर हयात

        पूछिये मत अफज़ल भाई आप और मेरे अपने भाई तो गल्फ में शान्ति की जिंदगी जी रहे हे हमारी हालात मत पूछिये मंदिरो के आलावा भी कही भी सड़क घेर कर इस कदर शोर किया जाता हे कोई टाइम लिमिट नहीं अंलिमिटिड पूछिये मत में जहा से आलू प्याज़ लेता हु वहां कभी कभी पूरी सड़क घेर कर इस कदर साउंड किया जा रहा होता हे की बस मेरे जैसे हट्टे कट्टे जवान का भी 5 मिनट खड़ा होना कठिन होता हे जबकि प्रोग्राम पूरी रात या घंटो का होता हे

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      2. shishir singh

        अफजल भाई, नमस्कार. मैं आपकी बात से पुरी तरह सहमत हूँ कि मेरे समझ से सभी धार्मिक स्थलो पे स्पीकर की पाबंदी होनी चाहिये और इसे धार्मिक विशेष पे हमला नही होना चाहिये.

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  6. सिकंदर हयात

    दुबे जी ये साइट मेरी सिर्फ उतनी ही हे जितनी आपकी में तो कभी भी किसी से भी न मिला हु न कभी किसी से भी बात हुई हे हमें कुरूतियों अंधविश्वासों के खिलाफ जिहाद छेड़नी हे ना की धर्म के ही खिलाफ . अज़ान की आवाज़ से कभी किसी को परेशानी नहीं होती हे जो कह रहे हे वो ज़बरदस्ती मुद्दा बना रहे हे इसी ज़बरदस्ती के खिलाफ मेने लिखा अज़ान तो कई बार ठीक से सुनाई दे उससे पहले ही पूरी भी हो जाती हे मेरी मदर पिछले 50 साल से पांचो वक्त की नमाज़ पढ़ रही हे 15 साल हम मस्जिदो के बिलकुल बगल में रहे फिर भी कई बार मेरी मदर ही पूछती हे अज़ान हो गयी क्या ? तो भला किसी को क्या परेशानी होगी ? हां अज़ान के अलावा अगर कोई और टाइम फ्री शोर हो रहा हे जिससे किसी को परेशानी हो तो वो गलत हे हम कह रहे हे मगर कानफोड़ू टाइम फ्री शोर कहा कहा होता हे और बढ़ता ही जा रहा हे आप अच्छे से जानते हे उस पर आप ही लिखिए में तो उस पर भी चुप ही रहूँगा

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  7. सिकंदर हयात

    बाकी आपने कहा की मेने हौसला अफ़ज़ाई नहीं की तो आपने अभी अच्छा लिखा हे जब बहुत अच्छा लिखेंगे तो ही में हौसल अफ़ज़ाई करूँगा रविश जी कितने बड़े नाम हे में उनकी साइट पर भी कॉमेंट लिखता हु कभी उनकी ” हौसला अफ़ज़ाई ” नहीं की ( उल्टा अंग्रेजी के मुद्दे पर उनकी खिचाई की ) क्योकि वो अच्छा लिखते हे लेकिन जब बहुत अच्छा लिखेंगे तभी तारीफ करूँगा में पिछले साढ़े ३ साल से लिख रहा हु लगभग सभी हिंदी साइटों के बॉक्स में . बहुत ही कम मेने लेखको की तारीफे की हे इसकी वजह ये हे की में बहुत ही ज़यादा पढ़ने वाला आदमी हु बचपन से ही बुरी तरह पढ़ने की लत पड़ गयी थी कोई नयी बात मुझे दिखेगी तभी में तारीफ़ करता हु बताइये अंसारी जी की मेने कौन सी तारीफ़ की ? बाकी इख्तलाफ पर आप इस कदर नाराज़ क्यों हो गए ? यहाँ तक की अफज़ल भाई के नवभारत ब्लॉग देखे तो शुरू में मेरे उनके भी इख्तलाफ रहे हे अपनी बात कहिये इतना नाराज़ मत होइए

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  8. सिकंदर हयात

    लाउडस्पीकर की जहां तक बात हे मनुष्य में कष्ट सहने की अपार क्षमता होती हे शोर अगर एक लिमिटिड समय के लिए हो तो लोगो को कोई परेशानी नहीं होती हे जैसे देखे में दिल्ली में जहा रह रहा हु मेरी बगल में खिड़की के नीचे बड़ा मैदान हे जहां शादिया होती हे मुस्लिम शादियों में कोई शोर नहीं होता गैर मुस्लिम शादियों में जम कर होता हे खेर कोई बात नहीं लोगो की ख़ुशी हे फिर दिल्ली में इतने हाल भी नहीं हे पिछले दिनों बड़े भाई के वलीमे के लिए हमें भी काका नगर ( इंडिया गेट ) हाल नहीं मिल पाया था तो ठीक हे ग्राउंड में शादियों की खुशिया होती हे जमकर शोर होता हे हमें भी आदत हो गयी हे क्योकि हमें पता हे की 10 बजे तक का ही काम हे यही कानून हे तो ठीक लेकिन दिक्कत तब होती हे जब कुछ दबंग लोग कुछ शराबी १२ – एक -दो बजे तक शोर करते हेतब सर फटने लगता हे तो ये हे असल बात

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  9. ajit pratab singh

    सिकंदर हयात
    RAJK.HYD
    afzal khan

    yaha mudda kya hai aap log thoda sa bhatak gaye hai Pradeep dubey ney kahani up may huey ak kand say suru ki aur kabeer ke dohey par khtm kar deya muzey yahi samaz may aa raha hai ki yaha ak hindu honey ke natey Pradeep dubey ney apni bat kahi hai aur kabeer ko yaad kartey huey unkey ak dohey ko likha kar apni bat spast kar di
    ((कांकर- पाथर जोड़ कर मस्जिद दिया बनाई ता चढ़ मुल्ला बाग़ दें क्या बहरा हुआ खुदा …??? ))
    ager mandir say prasasan ney mike nikalwaya tou usi ilakey say majid say bhe mike nikalna chaiya tha
    khuda ya bhagwaan ki ibadat ya pooja ke leya shore sharabey ki zaroorat nai hai hamey yahi lagta hai baki aap sabhi ney ak sur may Pradeep dubey ki galat kaha lakin unkey dwara uthaya gaya mudda par bhe dhayan de tou sarthak he lagey ga aap sabhi ko

    kuch din pahley ak ansari ki kuch article yahi padney ko mil gaya tha padh kar sharm aayi insaniyyat ke uper waha sikender ji ki tarif karo ga unho ney khul kar virod keya

    sath he pradeep dubey ney bhe unko samzaney ki kosis ki sath may bahoot sarey comment bhe padhney ko miley jo sahi bhe they aur galat bhe

    tab afzal shaab ya sampadak pannel ney waha kisi ko rokney ki kosis nai ki

    muzey lagta hai ya ya khabarkikhabar.com dharmik website sabit ho gai hai kyu ki suru may iska jo star tha wo ab nai rah gaya hai kuch galat logo ke galat article ki wajh say

    ansari ki soch aur usko publish karney walo may aap sabhi samil hai

    afzal
    pradeep
    sikander

    filhaal aap teno ko koi haq nai ki kisi ke uper ungali uthaye comment aur article ko ager sencer nai kar paa rahey hai tou publish he na karey aap log

    kabeer ney sadiyo pahley jo kaha us par aap log apni raiu de
    ya
    jo kuch bhe hua up may 27 june ko us par .
    mamla spast ho jaye ga
    kisi ko kisi ke uper arop karney ka koi adhikar nai nai kyu ki sabhi ka dharma accha aur bahoot accha hai chahey aap ka ho ya hamera ….?

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      अरे भाई प्लीज़ यार प्लीज़ नागरी में ही लिखा करो भाई ऐसे कुछ पल्ले नहीं पड़ता भाई प्लीज़ यहाँ से लिख लो http://www.easyhindityping.com/

      Reply
    2. afzal khan

      अजित जी
      आप आंसारी साहब के लेख के बारे मे लिख रहे है के उसे क्यो नही हटाया गया, जनाब मे ने दुबे साहब का लेख भी प्रकाशित किया. कम से कम आप को इस बात की तारीफ करनी चाह्ये के खबर की खबर .कॉम हर चीज प्रकाशित करती है ताके उस पर एक अच्छी बहस हो और होनी भी चाहिये. उमीद है आप भी इस बहस मे अपना योगदान दे.
      आप शायेद सिकंदर हयत साहब को अच्छी तरह नही जानते है मेरे समझ से इंटरनेट पे जितने न्यूज़ पोर्टल है उन का कॉमेंट प्रकाशित होता रहता है और हर तरह की कट्टरता के खिलाफ लिखते है. आप शायेद मेरा लेख नही पड रहे है देखिये के मे ने मुस्लिम समाज के खिलाफ कितना लिख रहा हु.

      मुझे उस तरह का लेख भी नही छापना है जो सिर्फ राजनीति पे लिखी जाये, हमारा मक़सद समाज सुधार पे भी लिखना है. आंसारी साहब के लेख मे इतना कुछ ब्राह्मणो के खिलाफ नही है जितना के आप दलित के साइट पे जाये तो उस से ज्यादा उल्टी पलटी बाते लिखी मिले गी. दूसरी बात मे इतिहास के छात्र रहा हु और उस पर ज्यादा लिखना चाहु गा.

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      1. सिकंदर हयात

        ”मुझे उस तरह का लेख भी नही छापना है जो सिर्फ राजनीति पे लिखी जाये, हमारा मक़सद समाज सुधार पे भी लिखना है. ”सही कहा अफज़ल भाई समाज सुधार मानसिकतामनोजगत सुधार विचार साहित्य कला संस्कर्ति ही अधिक होनी चाहिए मनोरंजन भी कम होना चाहिए क्योकि चारो तरफ आज मनोरंजन हे सिंपल राज़नीतिक लेख भी कम होने चाहिए राज़नीति और मनोरंजन तो पहले ही बहुत हे

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  10. Ravi Shukla

    आप चाहे तो मुझे कट्टर कह सकते हैं मगर ये लिखना जरुरी है। ये मुलायम अखिलेश यादव और मुरादाबाद के एक पक्ष के स्थानीय लोग पाकिस्तान के प्रतिनिधि की तरह व्यवहार कर रहे हैं।।मुरादाबाद में इस पक्ष ने सभी हिन्दुओं के लिए निर्णय सुनाया है।।
    1 हिन्दू रमजान तक कोई भी लाउडस्पिकर मंदिर पर नहीं लगायेंगे
    2 रमजान के बाद लाउड स्पीकर लगा सकते हैं मगर आवाज इतनी धीमी होनी चाहिए की अल्लाह की इबादत में खलल न पड़े।
    3 सिर्फ सुबह 15 मिनट और शाम को 15 मिनट मंदिर में लाउडस्पीकर आन रहेगा।
    4 मंदिर में कोई भी निर्माण मुस्लिम समुदाय की सहमति के बिना नहीं होगा।।
    साला ये मुरादाबाद है या पाकिस्तानजो गैर इश्लामिक लोगो पर प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है।।तुम लोग कौन होते हो हमे बताने वाले की हमारे मंदिरों में लाउड स्पीकर की आवाज कितनी हो और कितने समय तक चलाया जाये?? अगर हमने आपत्ति की तो बहुत जगहों से लाउड स्पीकर उतरेंगे।। जियो और जीने दो।। हमारा विद्वेष किसी के प्रेयर,अरदास या नमाज से नहीं है फिर हमारे मंत्रोच्चार से आप का रमजान कैसे हराम हो जायेगा !

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    1. सिकंदर हयात

      अगर कोई मुस्लिम नेता जोरदारी कर रहेहे तो वो भी गलत हे हम उसकी कड़ी निंदा करते हे लेकिन बात फिर वाही हे की जब से ये सरकार आई हे तभी से ये सब क्यों हो रहा हे मायावती के राज़ में क्यों कोई चू भी नहीं कर रहा था ? हो सकता हे की यही सपा भाजपा की मिलीभगत हो ?

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  11. Archita Pathak

    फिर तो अफज़ल जी और सिकंदर जी होना ये चाहिए की औरंगज़ेब की तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी उत्तर प्रदेश में सिर्फ मंदिरो से माईक ही ना उतरवाए बल्कि मंदिरो को बिध्वंश भी कर दे है ना ! अरे अफज़ल भाई , सिकंदर भाई ये क्यों भूल जाते हो आप लोग की खुदा या ईश्वर जो भी है उसका रिस्ता दिल से है , आत्मा से है ! प्रदीप जी ने जो बात कही है उसपर आपलोग ध्यान नहीं दे रहे हो न ही उसकेसही अर्थ को समझ रहे हो और बेकार का मुद्दा बना रहे हो ! प्रदीप जी ने तो सिर्फ बुराईयों पर ब्यंग किया है वो भी मर्यादा में रह कर , प्रदीप जी ने तो उत्तरप्रदेश की तत्तकालीन समस्या उजागर की और महान संत महान समाजसुधारक कबीर दास की पक्तियों पर ही सबकुछ आधारित है ! प्रदीप जी के इस लेख का सार कबीर दास की सोच से जुड़ा है प्लीज इसे भी ध्यान में रखिये ! मुझे तो खुसी हुई की जिस तरह के परिवेश में कबीर दास ने समाज को सच का आईना दिखाया था आज उत्तर प्रदेश में जब उसी तरह का परिवेश पैदा हुआ , कायम किया गया तो प्रदीप जी ने अपनी कलम उसपर चलाई और हम सुधि पाठको को आईना दिखाने का काम किया ! अफज़ल जी , हयात जी जहा तक मुझे पता है खबर की खबर बेबसाईट के आप दोनों संपादक है आपकी भाषा आपके विचार का असर बहुत दूर तक होगा इस लिए संपादक की गरिमा का ध्यान रखते हुए इस लेख को ठीक से पढ़े इसके अर्थ को समझे फिर कोई टिका टिप्पणी करे बेहतर होगा ! मेरा मोह भांग आपकी बेबसाइट से तभी हो गया था जब लॉयन्स हन्नान अंसारी साहब के बेतुके लेख को आप लोगो ने अपनी बेबसाईट पर जगह दी और समाज में हिंसा भड़काने की कोसिस की ! मैंने जब उसका विरोध किया था तो सिकंदर भाई सैकड़ो तरह की सफाई और दुहाई देकर उस लेख को इस बेबसाईट पर बने रहने देना चाह था ! आज तो प्रदीप दुबे जी ने कबीर दास की सोच को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश की वर्तमान समस्या दिखाई है ! तो सबसे ज्यादे परेसान सिकंदर भाई ही लग रहे है सुबह से देख रही हूँ जैसे वो ऐसा क्या पा गए है इस लेख में की बहुत कुछ कह देने को बेताब दिख रहे है ! मई आप दोनों लोगो से पूछती हु किस भारतीय ने मदीना की मस्जिद से माईक उतरवाया कभी मुझे बताये ? मई पूछती हूँ किस भारतीय ने आप लोगो को परेसान किया है मुझे बताये ..? मई पूछती हूँ आप सब चाहे मंदिर हो या मस्जिद चाहे ५ मिनट का हो या १५ घंटे का क्यों लगाते है माइक अपने दिल में खुदा को क्यों नहीं ढूंढ रहे हो आप सब जवाब दो मुझे और अगर ज़िम्मेदार काम सुरु किये हो तो अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से निभाने की कोसिस भी करो वार्ना बंद कर दो इस भेद भाव वाली बेबसाईट को क्यों की जहा स्वस्थ चीज उभरकर न आये वह कुछ भी बने रहना मूर्खता है !

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    1. सिकंदर हयात

      अरे अर्चिता मेने अपनी बात ही तो कही हे मेने कब कहा की दुबे साहब का लेख हटा लिया जाए ? आपने लिखा ” जब लॉयन्स हन्नान अंसारी साहब के बेतुके लेख को आप लोगो ने अपनी बेबसाईट पर जगह दी और समाज में हिंसा भड़काने की कोसिस की ! मैंने जब उसका विरोध किया था तो सिकंदर भाई सैकड़ो तरह की सफाई और दुहाई देकर उस लेख को इस बेबसाईट पर बने रहने देना चाह था ” तुम भूल रही हो अंसारी जी के विरोध में सबसे ज़्यादा कॉमेंट मेने ही लिखे थे और मेरे लगभग सभी कॉमेंट का अंसारी जी कोई उत्तर भी नहीं दे पाये थे हमने हर जगह हमेशा निष्पक्ष ही बात की हे वहां भी जहा निष्पक्ष होना बिलकुल आसान नहीं होता हे http://mohallalive.com/2012/03/22/a-thanks-letter-to-vishwadeepak/

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    2. सिकंदर हयात

      बाकी अर्चिता फिलहाल में कोई संपादक भी नहीं हु मेरी तो अपनी हालात वही हे की ”नंगा नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या ” में मूल रूप से एक हास्य व्यंगकार हु लगभग 25 व्यंगय प्रकाशित हो चुके हे में तो यहाँ सिर्फ लेख और कॉमेंट लिखता हु बाकी सब अफज़ल भाई ही जानते हे उन्होंने कहा तो मेने अपना फोटो दे दिया न में कोई खास पढ़ा लिखा हु न मेरा कोई खास प्रोफाइल हे ना में साइट का कर्ता धर्ता हु जीवन की पाठ शाला से जो सीखा उसी से थोड़ा बहुत लिखना आ गया बस

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  12. Archita Pathak

    नहीं सिकंदर भाई आपने अभी कुछ देर पहले अपने एक कमेंट में कहा है की अफज़ल भाई (( आप पूछिये मत अफज़ल भाई आप और मेरे अपने भाई तो गल्फ में शान्ति की जिंदगी जी रहे हे हमारी हालात मत पूछिये मंदिरो के आलावा भी कही भी सड़क घेर कर इस कदर शोर किया जाता हे कोई टाइम लिमिट नहीं अंलिमिटिड पूछिये मत में जहा से आलू प्याज़ लेता हु वहां कभी कभी पूरी सड़क घेर कर इस कदर साउंड किया जा रहा होता हे की बस मेरे जैसे हट्टे कट्टे जवान का भी 5 मिनट खड़ा होना कठिन होता हे जबकि प्रोग्राम पूरी रात या घंटो का होता हेमै ))
    तो सिकंदर भाई आपको याद होगा खाड़ी देश में आज़कल कितने सुकून से है लोग आप देख प् रहे होंगे कोई काफ़िर मेरा मतलब हिन्दू नहीं मिला तो अशांति फैलाने के लिए सिया – सुन्नी के नाम पर आपस में ज़ंग क्षेण दिया ! और रही बात सोर गुल की जहतक तो ज़रा आप याद करिये ताज़िया के वो ३-४ दिन जब पूरी रात मुस्लिम भाई के साथ हिन्दू भाई तासा बजाता है ! गाँव के दरवाज़े दरवाज़े ताज़िया ले जाय जाता है हिन्दू घरो की महिलाओ द्वारा ताज़िया पर इत्र , अगरबत्ती , और पानी चढ़ाया जाता है ! याद करिये पूरी रात ईद की चहल पहल जब कोई हिन्दू आप पर कोई आपत्ति नहीं करता बल्कि आपके साथ आपकी ख़ुशी में रात रात भर जाग कर आपका साथ देता है ! याद करिये सिकंदर भाई जब किसी हिन्दूके अंतिम संस्कार के समय श्मशान पर उस गाँव का मुस्लिम
    भी जाता है और याद करिये की जब किसी मुस्लिम भाई की मिटटी में कोई पूरा हिन्दू समाज शामिल होता है ! आपको दसह्रॅ के शोर सराबे से परहेज़ है किन्तु हमे ईद की पूरी रात ईद के मेले को एन्जॉय करने से कोई गुरेज़ नहीं ! आप कम पढ़े-लिखे है कबीर दास जिनकी पक्तियों का उद्दहरण देकर प्रदीप जी ने अपना लेख लिखा है वह कबीर दास जी अनपढ़ थे और आँखिन की देखि बयान करते थे ऐसी आँखिन की देखि की अगर कबीर के दर्शन पर अमल किया जाए तो भारत ही क्या पूरा विश्व सुधर जाए ! फिर आप अपने कम पढ़े लिखे की दुहाई देकर उस सत्य को खारिज मत करिये जिसे आप रोज़ अपनी आँखों से देख रहे है और महसूस कर रहे है ! सिकंदर भाई आप बहुत दूर और अलग परिवेश के नहीं है आप भी बिहार , उत्तर प्रदेश , से ही होंगे फिर आप आंतरिक सच क्यों नहीं बयान कर पा रहे है ! हमे बताइये विहार और उत्तर प्रदेश में आपके लिए आपके किस हिन्दू भाई ने तलवार उठाई है बताइये ज़रा ! मै खुद एक सम्मानित बड़े अखबार में हूँ अगर एक लाइन गलत न्यूज़ चली जाए तो हमारे पाठक का विस्वास आहात हो जाता है फिर आप अपना दायित्व कैसे भूल गए !

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    1. सिकंदर हयात

      में मुजफरनगर ( मेरठ से अगला जिला ) का हु अब दिल्ली में रहते हे और अर्चिता बात हो रही हे धर्म के नाम पर धवनि प्रदूषण की तो भला किसी को भी हलकी सी अज़ान की आवाज़ कोई भी मेला कोई भी बाजार मतलब बाजार की रौनक से भला क्या ऐतराज़ होगा ? क्या ईद के बाज़ार में लोग शराब पीकर उत्पात करते हे क्या ? मुहर्रम पर भी हमारे यहाँ तो किसी भी तरह का शोरशराबा नहीं होता हे हिन्दू और शिया ( 10 % आबादी ) साहबान क्या करते हे वो आप जानो मस्जिदो में लाउडस्पीकर से तकरीरें होती हे तो वो गलत हे कह तो दिया गल्फ में इराक और सीरिया को छोड़ कर बाकी जगह शान्ति और विकास हे कटट्रपंथ भी अब कोई खास नहीं हे तभी तो लाखो हिन्दू मुस्लिम आ जा रहे हे हमें भी मुफलिसी से गल्फ ने ही निकाला ईरान तो बेहद शांत और सुकून वाली जगह हे भारत में हिन्दू मुस्लिम एकता सदभाव तो हे ही ये बात तुम मुझे क्यों जता रही हो भला ? हमारे तो लिखने का मकसद ही केवल भारत में हिन्दू मुस्लिम एकता नहीं बल्कि मध्य एशिया ताशकंद टू कोहिमा महासंघ हे ताकि यहाँ की रोटी कपडा मकान दूकान की समस्या हल हो जो मेने भी बहुत ज़्यादा झेली हे में समझ नहीं पा रहा हु तुम्हे मुझसे क्या शिकायत हे ? खेर दुबे जी लक्की हे जो इतनी जल्दी तुम्हारे जैसा फेन मिल गया उन्हें बधाई जहा तक हमारा सवाल हे हमारा काम बहुत ही मुश्किल है एक शुध सेकुलर भारतीये मुस्लिम का काम दुनिया मे सबसे ज़्यादा काठिंन और बोझिल है हमे दुनिया की ”सबसे बारीक रस्सी ” पर चलना संतुलन साधना होता है ज़रा इधर हुए तो हिन्दू कठमुल्ला जरा उधर हुए तो मुस्लिम कठमुल्ला हमारी जान को आ जाते है इसके अलावा भी हमे कोई कॉंग्रेसी बी जे पी वाँ म सपा बसपा कम्युनिस्ट केपिटलिस्ट आदि कोई ” हमे ” पसंद नही करता है हम किसी के ” काम ” के नही होते है जनसत्ता मे यदा कदा छापने वाले एक कम्युनिस्ट कुमार लेखक मुझे व्यंगय मे कहू तो मेरे विचारो से नाराज़ सा होकर धक्के से मार कर अपनी पत्रिका के ओफ़िस से निकाल चुके है वो साम्प्रदायिकता के लिए केवल हिन्दुओ को दोषी बता रहे थे मेने विरोध किया था खेर बहुत ही तनाव और मुश्किलो से भरा है हमारा कामऔर आपका फेवरिट कबीर का दर्शन हो या इस्लाम का दर्शन हो समाजवाद का दर्शन हो गांधीवाद का दर्शन हो ईसाइयत का दर्शन हो आदि किसी भी दर्शन के आदर्श पर आदमी चले तो सही तो दिक्कत ही क्या हो ? मगर इंसान नहीं चलता और शायद चलेगा भी नहीं इसलिए हमें कुछ व्यवहारिक बाते भी बताने होती हे अज़ान तो बंद नहीं होगी लोग कबूल नहीं करेंगे तो इसलिए कह रहे हे की मस्जिदो से अज़ान के अलावा लाउडस्पीकर लगाकर कोई तकरीरें न हो और जितना समय अज़ान होती हे यानी दिन में १० मिनट उसका दुगना समय लेकर लोग मंदिरो में भजन कीर्तन कर ले यही सुझाव दे रहे हे जिस पर आप इस कदर नाराज़ हो रहे हे

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  13. Vinay Tripathi

    मंदिर प्राचीन समय से हिन्दुस्तान में था इसका उद्दाहरण सोमनाथ पर आक्रमण से पता चलता हैं !
    सोमनाथ का मंदिर था तभी तो उसपर आक्रमण हुआ मुस्लिम आक्रान्ताओं द्वारा ! प्राचीन समय से भारत में मंदिर था और मुस्लिम आक्रंताओ ने लुटेरो ने सबसे पहले हिन्दू आस्था पर प्रहार करने के लिए मंदिरो को लूटा और तोडा ! महमूद गज़नी ने भारत में प्रवेश करते ही मंदिरो को अपना निशाना बनाया पहले उन्हें लूटा फिर नेस्तनाबूत किया ! औरंगज़ेब ने हमारे प्राचीन मंदिरो को तोडा और उनपर मस्जिद का निर्माण कराया ! आप विश्वनाथ मंदिर बनारस , मथुरा , अयोध्या , को उद्दाहरण स्वरुप देख सकते हैं ! भारत का भूभाग बहुत बड़ा था , भारत का परिक्षेत्र बहुत बड़ा था फिर हमारे प्राचीन मंदिरो को तोड़ कर या ऊके बगल में ही मस्जिद का निर्माण क्यू कराया औरंगज़ेब ने ! किसी को मंदिरो की प्राचीनता पर अध्ययन करना हो या जानकारी लेनी हो तो मथुरा , अयोध्या और द्वारिका में मिले अवषेसो पर शोध करा ले सत्य पता चल जाएगा ! की पहले मुर्गी आई या पहले आया अंडा !

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  14. dr muzaffar

    इस्लाम मे शोर शराबे की कोई जगह नहीं है. मशहूर क़िस्सा है की हुज़ूर (स.व.) हज़रत उमर के पास से गुज़रे जो की तहाज्जुद की नमाज़ मे बुलंद आवाज़ से तिलावत कर रहे थे. आप(स.व.)ने उन से पूछा की वो बुलंद आवाज़ से तिलावत क्यों करते हैं तो उन्हों ने कहा की में सोते को जगाता हूँ और शैतान को भगाता हूँ. आप (स.व.) ने कहा अपनी आवाज़ को थोड़ा पस्त कर दो…..
    हज़रत आयेशा ( र.अ.) फरमाती हैं हुज़ूर (स.व.) जब तहज्जुद के लिये बेदार होते तो बिस्तर से बड़े आहिस्ता उठते की किसी की नींद ना खराब हो..
    ””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
    लाउड स्पीकर पर अज़ान बंदे के लिये दी जाती है ना की खुदा के लिये इस लिये खुदा के बहरे होने की बात करना कोई अक़लमंदी की बात नहीं यही बात तक़रीर को ले कर है की ए भी बंदे को सुनने के लिये है. जहाँ अज़ान चन्द मिनट मे खत्म हो जाती है उसके लिये लाउड स्पीकर का स्तेमाल कोई बेजा नहीं. अज़्ज़न होने से ही नमाज़ का वक़्त का पता चलता है .हर कोई मोबाइल या घड़ी से नमाज़ का सही वक़्त तो पता नही कर सकता या कर भी सकता है तो मसरूफियत मे नमाज़ का वक़्त भूल सकता है एक अज़ान ही है जो मुस्लिमो को मस्जिद तक खींच लाती है. 24 घंटो मे चन्द मिनट लाउड स्पीकर पर अगर अज़ान हो जाये तो किसी को कोई आपत्ती नहीं होनी चाहिये…
    ””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
    परेशानी वाली बात तब है जब तक़रीर और तरावीह मस्जिद के बाहरी लाउडस्पिकर से हो रही है इससे लोगों को घरों मे बात करना मुश्किल हो जाता है और कोई अगर बीमार हो तो वो चैन और सुकून से सो नहीं सकता. यही हाल मंदिरों का है..में जहाँ रहता हूँ वहां सामने ही रविदास मंदिर है मत पूछिये सुबह और शाम रोज़ 2-3 घंटे यहाँ हम पर क्या बीतती है .खुद हमारे मकान मलिक ( जो की हिन्दू ही हैं) परेशान रहते हैं .अभी में कॉमेंट लिख रहा हूँ और उधर ए सिलसिला कान को फोड़ रहा है रहा अज़ान का सवाल तो वो तो सुनाई ही नहीं दी .जबकि मस्जिद पास ही है…सिकंदर भाई की मा की तरह पूछ रहा हूँ ?????.अरे क्या अज़ान हो गयी.??
    ””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””’
    मेरा तो मानना है की मस्जिद या मंदिर पर लाउड स्पीकर का स्तेमाल जितना कम हो उतना अच्छा. मुस्लिमो के लिये यह अज़ान तक और मंदिरों के लिये थोड़ी देर की प्रार्थना तक ही रहे .इतना ना शोर मचाया जाये की सामने वाले का जीना दूभर हो जाये.
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    चलते चलते एक बात और…में ने कहीं पढ़ा था की कांकर पाथर वाला दोहा कबीर का लिखा है ही नहीं इसे ज़बर्दस्ती कबीर से जोड़ दिया गया है. हमारे हिन्दी के उस्ताद कहा करते थे की यह दोहा ही गलत है की बहरा होइ खुदाय…क्यों की अज़ान तो बंदे को नमाज़ की तरफ बुलाने के लिये दी जाती है ना की खुदा को सुनाना मक़सद होता है…वा कहते थे की इस से साबित होता है की कबीर दास बहुत बड़े जाहिल थे….

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    1. सिकंदर हयात

      में समझता हु आपको कितनी परेशानी हो रही होगी बेहतर होगा अपने मकान मालिक के साथ ही मिलजुल कर कोई हल सोचे इसके आलावा मस्जिदो से भी अज़ान के अलावा कोई और एक दो मिनट से ज़्यादा कालाउडस्पीकर इस्तमाल हो रहा हो तो उसका भी विरोध करे लेकिन डॉक्टर साहब ये तो तय हे की हिन्दू धार्मिक क्रिया कलापो में जो घंटो घंटो लाउडस्पीकर का इस्तेमाल हो रहा हे सोचिये उसे कौन भुगत रहे हे ? ज़ाहिर हे मुस्लिम तो बहुत कम 90 % तो हिन्दू ही ना ? बात यही सिद्ध हो गयी की किसी भी तरह का कटटरपंत हो कठमुल्लवाद हो वो दुसरो को काम खुद अपनों को ही सबसे अधिक नुक्सान पहुँचाता हे अब जब इस बेइंतहा शोर की बात की जाती हे तो कुछ लोग कहते हे जाओ पहले मस्जिदो के लाउडस्पीकर के साइन लेकर आओ ये सरासर मक्कारी हे इसी मक्कारी के खिलाफ लिखना दुबे जी का फ़र्ज़ था मगर वो कबीरदास जी का फ़र्ज़ी दोहा लेकर बैठ गए साथ में फेसबुक के बुड़बकीयो का प्रचार भी लगा दिया बस उनसे यही शिकायत थी याद रहे जब हम मुस्लिम कटट्रपंथ के खिलाफ बोलते लिखते हे तो हमसे भी यही कहा जाता हे जाओ पहले अमेरिका इज़राइल संघ कश्मीर 6 दिसम्बर गुजरात ये वो इसके उसके साइन लेकर आओ लेकिन हम किसी दबाव में नहीं आते और गलत को गलत कहते हे हाथ कंगन को आरसी क्या नवभारत पर अफज़ल भाई सैफुल्लाह भाई के सारे ब्लॉग देख लीजिये इसके आलावा भी बेहिसाब से लिखा हे और बोला भी हे

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  15. indo pak

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    ACCHA LAGA AAB SABHI KE VICHAR JAAN KAR ASHA KARO GA SARTHAK JAWAAB DE KAAR SNTUST KAREY GEY STH HE AAP KO KO ALLAHA KI NEK SALAH AUR BHAGWAAAN KA PYAR AUR ASHIRWAAD MILEY KYU KI DOJAK MAY JANEY KE BAAD ALLAHA AUR BHAGWAAN AP KO AK SATH HE MILEGEY HUM NEY BATA HAI INKO IINHONEY HAMEY NAI KHOON LALA AUR HUM SAN INSAAN HE PAIDA HUEY KARMO KE ADHAR PAR AAJ ALAG THALAG HO GAYE HAI BAKI AAP KI APNA BUDHI VIVEK ISHWAR AAP SABHI KO SAD BUDDHI DE

    ((कांकर- पाथर जोड़ कर मस्जिद दिया बनाई ता चढ़ मुल्ला बाग़ दें क्या बहरा हुआ खुदा …??? ))

    SIKANDAR
    AFZAL
    KYA IS AK LINE KA MATLAB SAMJA SHAKTEY HAI JO MR DUBEY NEY SAMJANAEY KI KOSIS KI HAI CURRENT TOPIC SAY JODE KAR ACCHA ARTICLE SAMAJ SUDHAR KE LEYA JO HO SAMAN ROOP SAY HO KISI KO HEEN BHAWAN KE LEYA NAI ASHA KARTA HO LOG ISEY SARTHAK ROOP MAY LE AUR KHUD KO SAMAJ KO AUR DHARM KO SAHI RASTEY PAR LAA KAR YA SAB ROKO YA HP RAHA HAI KYU KI KHONE SAB KA AK HE SANASAR MAY AK STRI AK PURUSH HE AAYE THEY PAHLEY PATA KAREY KI WO KAUN THEY WO MURGI THEY YA ANDA YA ZAROORI HAI AAP KE LEYA BHE HAMEREY LEYA BHE AUR SAMAJ KE LEYA BHE ………………….?

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    1. सिकंदर हयात

      भाई जो भी कहना हो प्लीज़ नागरी में लिखो प्लीज़

      Reply
  16. neha vyas

    सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि मुस्लिम समुदाय की शरीयत अदालत को कोई कानूनी मान्यता हासिल नहीं है। बहरहाल, कोर्ट ने ऐसी अदालतों पर किसी तरह की पाबंदी लगाने से इनकार करते हुए कहा है कि ये आम लोगों पर है कि वे शरीयत कोर्ट के आदेश या फतवे को मानें या ना मानें। साथ ही कोर्ट ने शरीयत कोर्ट को बेहतर बनाने की नसीहत भी दी है। शरीयत कोर्ट से कई बार अटपटे फैसले आ जाते हैं। ऐसा ही एक फैसला उत्तर प्रदेश की एक महिला का था। महिला के ससुर ने उसके साथ बलात्कार किया। एक पत्रकार ने दारुल इफ्ता से फतवा मांगा कि ऐसे मामले में क्या होना चाहिए। जवाब मिला कि ससुर और बहू की शादी करा देनी चाहिए। इसी मामले को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई। मांग की गई कि शरीयत कोर्ट पर पाबंदी लगानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कोई पाबंदी तो नहीं लगाई लेकिन साफ किया कि शरीयत अदालतों की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।

    Reply
  17. ratat srivastava

    mr pradeep dubey and mr afzal khan both are currect but some more suggesation
    plz do consider as well as possible in your website because some misunderstaning our community and your thought so be carefull

    अफ़ज़ल ख़ान

    अमेरिका की जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों डॉ. शीरज़ादे रहमान और हुसैन असकरी ने बहुत दिलचस्प शोध है. उन्होंने एक इस्लामी सूचकांक (Islamicity Index) विन्यास दिया है जिसके तहत उन देशों की सूची तैयार की गई है जहां अर्थव्यवस्था, प्रशासन, मानव और राजनीतिक अधिकार और विदेश मामलों मानव नियमों के क़रीब हैं. इस संबंध में ‘आर्थिक इस्लामी सूचकांक’ और ‘सामान्य इस्लामी सूचकांक’ विन्यास दिए गए हैं. आपको यह जानकर गंभीर आश्चर्य होगा कि उपरोक्त विचार सामने रखते हुए जो सूचियाँ विन्यास दी गई हैं उनमें इस्लामी देशों प्रदर्शन बेहद खराब नजर आती है. ‘आर्थिक इस्लामी सूचकांक’ में आयरलैंड ने पहला स्थान हासिल किया है जबकि इसके बाद ‘डेनमार्क, लकसम बर्ग, स्वीडन, अमेरिका, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, फिनलैंड और बीलजयम नंबर आता है. मुस्लिम देशों में शीर्ष मलेशिया 33 वें स्थान पर जबकि सऊदी अरब 91 वें और व्यास 111 वें नंबर पर आए हैं.

    दूसरी ओर, सामान्य इस्लामी सूचकांक में भी स्थिति कुछ ज्यादा अलग नहीं, इस न्यूज़ीलैंड पहले नंबर पर और उसके बाद लकसम बर्ग, आयरलैंड, आइसलैंड, फिनलैंड, डेनमार्क, कनाडा, ब्रिटेन और फिर ऑस्ट्रेलिया को रखा गया है. मुस्लिम देशों में मलेशिया नंबर 38 जबकि कुवैत के 48 और टॉप 50 में दो इस्लामी देशों जगह बनाने में सफल हो सके हैं. अनुसंधान विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अगर किसी देश में भ्रष्टाचार हो, गैर न्यायाधीश शासक हूँ, कानून सभी के लिए बराबर न हो, वोट देने का अधिकार की स्वतंत्रता न,प्रेस की आजादी न हो, आप को अपनी बात कहने का हक न हो ,आप के अधिकार को दबाया जा रहा हो, स्वतन्त्रता न हो तो ऐसे मुल्क को गैर इस्लामी कहा जाएगा. उनके अनुसार दुखद बात यह है कि आजकल के दौर में जो देशों मुस्लिम कहलाते हैं उनके हां चालू प्रणाली बिल्कुल भी इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार नहीं है.

    विशव मे 52 से अधिक इस्लामी देश है मगर अफसोस है के कोई भी देश इस्लाम के बताये हुए रास्ते पे नही चल रहा है. अफसोस इस बात है के जो मुसलमान यूरॉप, इंग्लेंड और अमरीका को गाली देते है वे देखे के यही मुल्क इस्लामी सूचांक के सब से करीब है. अभी आप देखिये के कुछ लोग इस रिपोर्ट को भी गलत क़रार देगे के इसे अमरीका की यूनिवर्सिटी ने बनाया है. असल मे हम हक़ीक़त सुनने के लिये तैयार नही है और सच से अपना मुंह मोड लेते है——- लीजिये एक शेर—–

    सच बात मान लीजिये चेहरे पे धूल है
    इल्जाम आइनो पे लगाना फजूल है.

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  18. rahul vasist

    लायंस हन्नान अंसारी

    शूद्र महर्षि शम्बूक की ह्त्या किसने की थी? एकलव्य का अंगूठा किसने काटा? विधटनकारीचार वर्ण किसने बनाये? मगध राज्य पर हमला के लिए सिकन्दर को किसने बुलाया था? भारतिय इतिहास का स्वर्णिम प्रुष्ठ लिखने वाले ब्रहद्रथ मौर्य की हत्या, बौध्धो का नरसंहार व विश्वविध्यालयो पुस्तकालयो को किसने ध्वस्त किया? हिटलर को भी बौना व फ़ीका बनाने वाली काले कानूनो की किताब मनुस्मुति का लेखक कौन था? ब्रह्मा सत्या जगत मिथ्या के मिथ्यावाद की आड में गुप्तकाल के स्वर्ण युग की विनाश लीला किसने की? प्रुथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय विहीन किसने किया? सोमनाथ के मंदिर का झण्डा झुकाकर मोहम्मद बिन कासिम की विजय किसने सुनिश्चित की? सोमनाथ के मंदिर का जो फ़ाटक हाथियो से भी नहीटूट्ता उसे मोहम्मद गजनी के लिए किस गद्दारव लालची ने खोला? मोहम्मद गोरी को जयचन्द की चिठ्ठी ले जाने वाला कौन था? बंगाल का वह गद्दार राजा कौन था जो मोहम्मदबख्तियार के डर से महल के पीछे के दरवाजे भाग गया था? अकबर की भंडैती किसने की, तथा भारतिय बहू बेटियो के मीना बाजार किसने लगवाया?

    महाराजा रणजीत सिन्ह व दयानंद सरस्वती को भोजन के साथ जहर किसने दिया? सतगुरु रैदास की वाणी को किसने जलाया तथा उनकी हत्या किसने की? शिवाजी का राज्याभिषेक बगैर नहाये बाये पैर के अंगूठे से किसने किया? तथा उनकी व उनके पुत्र की हत्या किसने की? पेशवा बाजीराव कौन था,जिसके डर से सुन्दर महिलाये जहर खाकर आत्म हत्या कर लेती थी? स्वामी विवेकानंद को शूद्र कहकर विश्व्धर्म परिषद मे जाने का विरोध किसने किया था? महात्मा ज्योतराव फ़ूले की हत्या के लिए हत्यारे किसने भेजे थे? भारत का बटवारा किसने और क्यो करवाये थे? गांधी की हत्या किसने की? बाबा साहेब अम्बेडकर को किसकी साजिश से जहर दिया गया? इन्दिरा गांधी को अकाल तख्त उडाने व हजारो सिक्खो की हत्या करने के लिए किसने उकसाया था? इन्दिरा गांधी को किस पन्डे ने मन्दिर परिसर मे नही घुसने नही दिया था? वो जनरल कौन थे जो दवा कराने के बहाने भारत चीन युध्ध का मैदान छोडकर दिल्ली भाग आया था? बीस साल तक विभिन्न मन्त्रालयो के अति गोपनिय दस्तावेजो की मोटी रकम लेकर विदेशो को बेचने वाला कुमार नरायन अययर कौन था? राजीव गांधी की हत्या किसने कराई?

    ये सभी लोग मुस्लिम नही बल्कि हिन्दू (ब्राहमण) थे विदेशी आर्य-ब्रह्मणवादियोने न सिर्फ भारत के आक्रमणकारी रहे है बल्कि उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए हर किसी को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण दिया है.

    ■ब्रह्मणवादियोने अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए हुन, ग्रीक, पोर्तुगीज, मुस्लिम, अंग्रेज, और फ्रेंच इ. को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया है. (pg.14, Who is Ruling India, 1982).

    ■ ब्राह्मणवादी राजा हेमू ने और राणासांगा क्षत्रिय ने अपनी मंत्री लालचंद ब्रह्मण के कहने पर बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए निमंत्रण दिया. सम्राट बाबर का सलाहगार भी हिमुशी नामक हिन्दू था.

    ■मुहम्मद गौरी को भारत पर हमला करने के लिए जयचंद ने बुलाया था.

    ■नन्दवंश के सम्राट महा परमनन्द का सर्वनाश करने के लिए चाणक्य ब्राह्मन ने सिकन्दर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था.

    ■वल्लभी नामक गुजरात के एक धनपति सेठ ने मोहम्मद बिन कासिम के संपर्क करके उसे गुजरात के शहरों पर आक्रमण करने का निमंत्रण दिया था.

    ■जमोरिन ब्रह्मण ने पुर्तगालियों को, अभिचंद वैश्य ने अंग्रेजों को, राजा दहीर (ब्रह्मण) ने मुहम्मद बिन कासिम को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किये था.

    ■ब्रह्मणवादियोने हिटलर को अवतार तक कहा और उसे भारत पर हमला करने की दावत दी. [PG.18,80 Dialogue Of The Bhoodevtas]
    इसलिए इनसे कोई उम्मीद रखना यानि खुद को धोखा

    क्य बक्वास है कौन है य अन्सरि जिस्कि खुद कि कोइ औकर हि नहि बतये कह गय गन्द इसान जवाब क्यु नै देता अगेर इस कल्युग मै पर्सोरम ाये तो अन्सरि कि हे बरि है लिख्नेय के पह्लेय सोच यार चुत्तियप न करो……….!

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    1. सिकंदर हयात

      हमने कई कॉमेंट लिख वही अंसारी जी का कड़ा विरोध कर दिया था आप देख सकते हे

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  19. सिकंदर हयात

    दुबे जी मेरी आपको एक सलाह हे देखिये आपके इस लेख में मुझे हलकी सी साम्प्रदायिकता की बू आई खेर कोई बात नहीं मेरा सुझाव ये हे की अगर अगर अगर आपको एक बड़ा लेखक बनना हे तो एक इंच भी नहीं एक सेकण्ड के लिए भी नहीं आपने सांपदारयिकता से दूर ही रहना हे चाहे कुछ भी हो जाए मुसलमान चाहे जो करे जो करे जैसा नेहरू जी ने कहा था की चाहे पाकिस्तान में एक भी हिन्दू न बचे तब भी में भारत को सेकुलर ही रखूँगा हर हाल में खुद को साम्प्रदायिकता से दूर रखना हे ऐसा नहीं करेंगे तो देखिये इतना बड़ा संघ परिवार आज तक एक भी बड़ा लेखक नहीं दे सका हे क्यों ? पाकिस्तान के बारे में भी मेने यहाँ कॉमेंट दिया ही हे ” बंजर भूमि
    विभाजन से पूर्व पाकिस्तान में इतनी प्रतिभाएं भरी पड़ी थीं कि जो यहां आता था बड़ा कलाकार, कवि, लेखक और संगीतकार बन जाता था। लेकिन पाकिस्तान बनते ही पता नहीं इस बौद्धिक कौशल को कौन-सा सांप सूंघ गया? जो भाग विविध कलाओं का सर्जक था वह अचानक ही बंजर भूमि में बदल गया। दस-बीस नुसरत फतेह अली जैसे पैदा भी हुए तो उन्हें बहुत जल्द ग्रहण लग गया। केवल इतना ही नहीं, पाकिस्तान बन जाने के पश्चात मजहबी जुनून में पागल होकर अथवा अपनी सुरक्षा की चिंता करके जो पाकिस्तान पलायन कर गए उनके भविष्य के आगे प्रश्नवाचक चिन्ह लग गया। भारत में अपनी आवाज से लोगों को दीवाना बनाने वाली नूरजहां के जीवन का नूर ही उतर गया। पाकिस्तान में उनकी बनी फिल्म दुपट्टे में वे लिपट कर रह गईं। उनके पति शौकत, जो सफल निदेशक थे, गुमनामी के गर्त्त में चले गए। जुगुनू फिल्म के संगीत निदेशक फिरोज निजामी कहां लुप्त हो गए? चर्चित कमेडियन नूर मोहम्मद चार्ली, चरित्र अभिनेता शाह नवाज, एस. नजीर पाकिस्तान की धरती में कहां समा गए, इसका उत्तर देने वाला कोई नहीं है। बेगम पारा से पूछिए कि वे पाकिस्तान से पुन: भारत क्यों लौट आईंप्रसिद्ध उर्दू कवि जोश मलीहाबादी, महान कहानीकार हसन मंटो और नियाज फतेहपुरी को कौन से नाग ने डंस लिया, इसका उत्तर पाकिस्तान के पास नहीं है। प्रसिद्ध कवि फैज अहमद फैज का इन दिनों शताब्दी समारोह चल रहा है। लेकिन पाकिस्तान में नहीं, भारत में। 17 दिसम्बर को फैज की याद में एक विशाल मुशायरा मुम्बई के नेहरू सेंटर में आयोजित किया गया।” दुबे भाई साम्पर्दयिकता का कला और क्रांति साहित्य से छत्तीस का आंकड़ा होता हे हम भी हमेशा आपका साथ देंगे जैसे यहाँ आपने विभिन हिन्दू धार्मिक कार्यकर्मो हो रहे लाउडस्पीकर का बेहिसाब इस्तेमाल का मुद्दा उठाना था मस्जिदो का तो आप जिकर ही न करते जब आप ऐसा लेख लिखते तो फ़ौरन हम भी आते और साफ लिखते की मस्जिदो से अज़ान और किसी की मौत जिंदगी की सूचना देने के अलावा यानी 10 – 15 मिनट से अधिक लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए उमीद हे आप मेरा मर्म समझेंगे

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  20. mohhamad yusuf

    dr muzaffar
    Jul 08, 2014 – 08:21 PM

    चलते चलते एक बात और…में ने कहीं पढ़ा था की कांकर पाथर वाला दोहा कबीर का लिखा है ही नहीं इसे ज़बर्दस्ती कबीर से जोड़ दिया गया है. हमारे हिन्दी के उस्ताद कहा करते थे की यह दोहा ही गलत है की बहरा होइ खुदाय…क्यों की अज़ान तो बंदे को नमाज़ की तरफ बुलाने के लिये दी जाती है ना की खुदा को सुनाना मक़सद होता है…वा कहते थे की इस से साबित होता है की कबीर दास बहुत बड़े जाहिल थे….

    यह कथन बिल्कुल गलत है सुधर करे

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  21. vijay tyagi

    इन सब्दो पर कोइ मुल्ला क्यु कुच नहि बोल पा रह जो हो रह है क्य वो गलत नहि है बतये

    मुरादाबाद के कांठ में शुक्रवार २७ जून २०१४ को जो कुछ घटा , धार्मिक स्थलों से जिस प्रकार लाउडस्पीकर हटाने को लेकर बवाल हुआ, ग्रामीणों एवमं पुलिस के बीच जिस तरह का संघर्ष देखने को मिला, किसी एक धर्म के साथ होकर प्रदेश के मुखिया ने अन्य धर्मो के साथ जो राजनितिक छेड़ – छाड़ किया ! जनता की भावनाओ को जिस प्रकार आघात पहुचाया , धारा १४४ की स्थिति को जिस प्रकार उत्पन्न किया गया, वह एक दिन में किया गया फैसला नहीं था बल्कि रमज़ान के मद्दे नज़र राजनीतिक रोटी सेकने की के लिए सोची समझी नीति के तहत तैयार किया गया एक पुख्ता एजेंडा है ! प्रदेश सरकार क्या चाहती है नहीं पता, किन्तु जबसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सत्ता सम्हाली है जनता परेशानियों, दंगे – फसाद की वज़ह से कराह रही है ! आम चुनाव में इतनी बड़ी सिकस्त पाने के बाद भी नहीं समझ आता यह समाजवादी पार्टी आखिर चाहती क्या है, आखिर अखिलेश यादव जी किसके हाथ की कठपुतली बने है की आये दिन एक के बाद एक जघंन्य और हिंसक घटनाएं प्रदेश में हो रही है और उसपर मुख्यमंत्री जी का कोई बस नहीं है ! हद्द तो अब हो गई है की मुख्यमंत्री जी के आदेश,फरमान, या यों कहे की गलत फैसलों की वज़ह से उत्तर प्रदेश का पश्चिमी वेल्ट दंगा -फसाद का घर हो गया है ! हिन्दू मुस्लिम को आपस में लड़ा कर अपनी कौन सी दूरदर्शी नीति का परिचय दे रहे है मुख्यमंत्री जी २७ जून को मुरादाबाद में हिंसा की आग लगी वह आग विभत्स रूप अख्तियार कर चुकी है आज की डेट में ! तो वही दूसरी हिंसा भड़क उठी है मेरठ में ! मेरठ शहर में सांप्रदायिक झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लालकुर्ती के जामुन मोहल्ले में हुई वारदात में अभी समझौते का दौर चल ही रहा था कि पूर्वा इलाही बख्श में शुक्रवार को दो समुदायों में जमकर पत्थर और तेजाब की बोतलें चलीं। छतों पर मोर्चाबंद लोगों के जबर्दस्त पथराव में दोनों समुदाय के पांच लोग घायल हो गए। हवाई फायरिंग की भी सूचनाएं हैं। मौके पर पहुंची कई थानों की पुलिस ने लाठी चार्ज कर लोगों को तितर-बितर कर हालात संभाले। बवाल के बाद पूरे इलाकों को फोर्स ने सील कर दिया है। पुलिस ने देर रात तीन युवकों को हिरासत में ले लिया है। मेरठ की स्थिति आज की जो है उसे देखकर यही कहा जा सकता है मुख्यमंत्री जी पर कही ना कही तो जरूर आतंरिक दबाव है आज जिसके चलते वह प्रदेश को सेना की छावनी बनाने पर आमादा है !

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  22. Pradeep dubey

    अगर यहाँ एक विशेष कौम के लोगो द्वारा कबीर को झूठा ठहरा दिया गया तो निश्चित रूप से मानवता को भी गलत और झूठा ठहरा दिया गया ! सिकंदर आपको बता दे यहाँ आप लोगो के द्वारा आलोचना मेरे
    लेख की होनी थी ! समझना मेरे लेख के मरम को था किन्तु इसे दिशा ही कुछ और दे दी गई ढेरों मनगढंत बाते जोड़कर ! सेकुलर के नाम का कार्ड खेलने के लिए कुछ भी कह देने से किसी ने परहेज़ नहीं किया ! अप्रत्यक्ष रूप से ही सही किन्तु मुझपर हिन्दू होने का भी तोहमत लगाया गया ! ऐसा लगा खुदा का, अपने मुस्लिम भाईयो का, नाम लेकर मैंने दुनिया भर के मुस्लिम के प्रति कोई जघन्य हिंसा कर दी हो कोई जिहाद छेड़ दिया हो, कोई फतवा ज़ारी कर दिया हो ! सिकंदर आप अगर नहीं समझ पाये मेरे आर्टिकल को तो बेजा टिप्पड़ी भी मत करिये ! नेहरू के नाम की दुहाई देकर तो विल्कुल नहीं क्यों की पर्दे की आड़ में नेहरू ने देश के साथ क्या किया इससे ना ही आप अनजान है ना ही हम ! अगर जिन्ना को प्रधानमन्त्री बना दिया जाता तो सायद आज भारत – पाकिस्तान जैसा मुद्दा ही नहीं होता दुनिया में ! जिन्ना जी कैंसर से पीड़ित थे, कुछ दिन के मेहमान थे, अगर नेहरू अपनी झूठी ज़िद प्रधानमन्त्री पद पाने की ज़िद छोड़ देते तो सायद वर्तमान के हज़ार विवाद दिखाई ना देते हमे ! आप कहते हो नेहरू ने महानता का काम किया मैं कहता हूँ नेहरू ने प्रधानमन्त्री पद पाने के लिए देश की आत्मा को बेच दिया आज जितने भी विवाद है देश के भीतर उनकी जड़े नेहरू के स्वार्थ से ही जुडी है इसे इतिहास उठकर देखा जा सकता है, और एक साहित्य भी जिसका नाम है ((पिंजर)) ! एक बड़ी और विविधता भरी समृद्ध संस्कृति जो उत्तर प्रदेश से कराची तक फैली थी उसे नेहरू के स्वार्थ ने छिन्न भिन्न कर दिया ! एक समृद्ध ब्यवसाय का केंद्र करांची जो कभी व्यवसाय और दुनिया के बाज़ार से तन कर बात करता था वह बर्बाद क्यों हुआ १९ ४७ में वज़ह एक है नेहरू के स्वार्थ के चलते ! नेहरू प्रधामंत्री की कुर्शी पर बैठे और सेकुलरिज्म की बात करते रहे किन्तु ! भारत से पाकिस्तान और पाकिस्तान से भारत पलायन करने वाले लोगो के साथ क्या – क्या जुर्म हुआ…? उनपर क्या – क्या कहर बरपाया गया ..? हज़ारो निर्दोष लोगो का कत्लेआम हुआ नेहरू के सत्ता सुख पाने की लालच के चलते यह किसी से छुपा नहीं है ! हज़ारो बेगुनाहो की चिता पर नेहरू ने अपनी प्रधानमन्त्री की कुर्शी रख कर राज्य किया और झूठे सेकुलरिज्म की बात की ! गांधी के ऊपर अंग्रेज़ो की लाठी पड़ते देखा होगा लोगो ने किन्तु नेहरू कभी लाठी नहीं खाए सिर्फ जेल जाते थे ! क्यों की चाटुकारिता और सत्ता उनके जीवन का हिस्सा था ! मैं लेखक हु किसी वाद से ग्रषित या किसी पार्टी से जुड़ा व्यक्ति नहीं ना ही आई० एस० आई० का कोई एजेंट ही फिर भी हास्यास्पद टिप्पड़ी की गई मेरे लेख पर और बीजेपी तक का नाम ले लिया गया ! सिकंदर आपको बता दे आपने मोदी का भी नाम लिया इस आर्टिकल के लिए दी गई अपनी ऊपर की टिप्पड़ी में और मोदी के साथ सपा की मिलीभगत से हो रहा है उत्तर प्रदेश में दंगा यह भी कहा ! जब प्रदीप दुबे कुछ लिखे मुस्लिमो या हिन्दुओ की धर्मान्धता पर तो वह लेखक नहीं कट्टर हो गए आपकी नज़र में और जब आपलोगो ने लिखा तो वह अकाट्य सत्य क्यों ..?? आप मुझे कलम पकड़ना सीखा रहे है मैं चुप हूँ , आप मुझे किस पर क्या लिखना है बता रहे है मैं चुप हूँ , इसका ये मतलब नहीं की अब मैं कुछ लोगो की तानासाही हूकूमत के साये में लिखूंगा और समाज के सच को बयान करने से पीछे हटूंगा या अपनी कलम को कुछ लोगो की बेज़ा बातो में आकर बेचने का काम करूँगा ! अफज़ल जी सिकंदर जी मैं लेखक हूँ नेता नहीं जो पार्टी बदलता चलू , विचार बदलता चलू ,! अपना ज़मीर और अपनी कलम गिरवी रख दूँ किसी के हूकूमत के आगे या किसी के कदमो में ! सच्चे लेखक की हैसियत से मुझे जहां गलत दिखेगा लिखूंगा क्योंकि लेखक देशकाल और सीमा के दायरे से निकलकर पूरी दुनिया को अपना लेखन क्षेत्र बनाता है मैं भी यही कर रहा हूँ ! ना ही किसी की हूकूमत में लिखूंगा, ना ही किसी के खौफ के साये में यह तय है, बाकी जिसको जो सही लगे मेरे बारे में बोले ! मैं देश काल की सीमा से निकल कर लिखूंगा समाज के हित में लिखूंगा ! मैं सामंत काल का गवैया या भाँट नहीं जो सिर्फ अपने राजा के लिए लिखता था , राजा के डर के साये में लिखता था , अपने राजा की झूठी प्रसंसा के लिए लिखता था, या सोने की मोहरे पाने के लिए लिखता था ! मैं समझ रहा हूँ मैंने क्या लिखा है, क्यों की मेरे लेख के लिए कुछ विशेष प्रकार के लोगो के विरोध के स्वर तेज़ हुए है ! और मुझे अच्छी तरह पता है विरोध उसी का होता है जो कड़वा होता है, सच होता है , और समाज को दिशा देने के लिए बिना डर, बिना भय के बुराइयों के विरोध में समाज की अगुआई करता है, समाज को सही दिशा देता है ! सिकंदर जी आपको धन्यवाद की आपने विरोध करके ही सही , मुझे लेखक ना ठहराकर हिन्दू ठहरा कर ही सही यह समझने में मेरी सहायता तो किया की मैंने उत्तर प्रदेश की तत्त्काल स्थिति और सदियों से चली आ रही समाज में धर्म की ढकोशलेबाजी का सच ब्यान किया है ! उसपर कटु प्रहार किया है अपनी कलम के साथ न्याय किया है ! सिकंदर जी ये कैसे सम्भव है की रोटी घी में अच्छी तरह चुपड़ी भी हो और इतनी ठंडी हो की मुह ना जले , लेखक दो में से एक ही कर सकता है या तो समाज का कटु सच लिखे या मक्खनबाजी करे तो मैं मक्खनबाजी नहीं कर पाउँगा मैं सिर्फ सच लिखूंगा और उस सच के पात्र हिन्दू , मुस्लिम , सिख , ईसाई, सब होने उस सच की रोशनी समाज की हर बुराई पर पड़ेगी चाहे वो किसी जाती – धरम अथवा समाज की हो !
    सिकंदर आप ने मुझपर यह भी तोहमत लगाया है की दुबे जी मुझे आपके लेख में थोड़ी सी साम्प्रदायिकता की बू आ गई है तो इसके लिए मैं इतना ही कहूँगा की साम्प्रदायिकता मेरे लेख में नहीं है सिकंदर जी ना ही साम्प्रदायिकता की बू आने के लिए मैंने इसे लिखा है ! हो सकता है इसे पढ़ते वक्त आपकी नज़र में साम्प्रदायिकता ज़रूर आ गई हो और जब नज़र में साम्प्रदायिकता आ जाती है फिर तो क्या अच्छा क्या बुरा सब एक सामान ! साभार – प्रदीप दुबे

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  23. raju tripathi

    ISIS के चंगुल से इतनी आसानी से 46
    नर्स कैसे छूटी यह बात गौर करने के
    काबिल है।
    आई एस आई एस के आतंकियों से रॉ के
    वरिष्ठ अधिकारियों ने बातचीत
    की और
    कहा कि नर्सों को छोड़ो वरना भारत
    तुम्हारे ठिकानों पर हवाई
    हमला करेगा।
    और जब एक एक करके गुप्त ठिकानों के
    पते बताये गए तो आतंकियों के पैरों तले
    जमीन खिसक गयी और आनन फानन में
    नर्सों को रिहा किया।
    जो आतंकी संगठन पूरे भारत
    को कब्ज़ा करने की बात कर
    रहा हो वो भला अपने
    द्वारा अपहरण
    की गयीं नर्सों को इतनी आसानी से
    छोड़ेगा क्या।
    कोंग्रेस ने हमारे देश
    की खुफिया एजेंसी रॉ पर
    ज्यादा ध्यान नहीं दिया और
    मोदी जी ने आते ही रॉ को खूब मजबूत
    किया है।
    क्या आप सोच भी सकते थे कि मनमोहन
    सिंह अपने दो युद्धपोत लगा सकते थे
    ईराक की खाड़ियों में?

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  24. rana singh rajpoot

    उप्र सरकार से मेरा निवेदन है की ठीक है हम उस जगह माइक साउंड नही चलायंगे जहा 80% मुस्लिम है पर क्या उप्र सरकार उन मस्जिदों से भी लाउडस्पीकर हटाएगी जहा 80% हिन्दू है।
    हमारी भी भावनाए आहत होती है जब सुबह उठत्ते ही नमाज की आवाज कानो में जाती है। अगर ये सरकार सामान भाव नहीं दे सकती समाज को तो मोरादाबाद जैसी घटना और जगह भी

    Reply
    1. सिकंदर हयात

      आप लोग बेमतलब में अज़ान को मुद्दा बना रहे हे अज़ान से किसी को दिक्कत नहीं होती हे अभी मेने हिसाब लगाकर देखा 5 32 पर शुरू हुई और 5 34 से भी पहले ही पूरी भी हो गयी डेढ़ मिनट में भला केसी दिक्कत ? सुबह सवेरे की भी बात करे तो में लगभग 15 साल मस्जिदो के बिलकुल बगल के घरो में रहा हु इस दौरान 15 बार भी ऐसा नहीं हुआ 5 बार भी नहीं की अज़ान की आवाज़ से मेरी नींद टूट गयी हो हा अज़ान के अलावा कोई और साउंड होता हे तो वो गलत हे नहीं होना चाहिए और होता भी नहीं हेया काम ही होता हे आप लोग जानबूझ कर ये सब कर रहे हे क्योकि ये तय हे की मोदी जी के नाम पर जो उमीदो के पहाड़ खड़े किये गए उसमे से चूहे ही बाहर आने हे उसी पर ध्यान हटवाने के लिए ये सब किया जाएगा

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      1. rishab mishra

        re murkh sikendar hyat
        kyu bhool gaye ki akabhi kisi hindu ney aaj tak iska virod nai keya aaj ager aisa hua tou us par tou nai bol paaye tum

        mandir say loud speaker tum ney he utarwaya aur majid may loud speaker ke himyati baney ghoom rahey ho

        bhool mat ki kafir he ho tum aap bhe pakistan tumheyt kafir he kahta hai aur har saccha mushalmaan hindustaniyo ko kafir he kahta hai

        kyu ki na tum hindustaan ke huey na pakistaan ke

        kyu hindustaan ko bhe pakistaan bananey par tuley ho jab hum ney tumhey pyar deya apna banaya kabhi virod nai keya ak thali may sath khilaya apney pass sulaya bar bar tumhari hifajat ki

        tou mandir say speakar kyu utarwaya bolo do is bat ka jawaab yaha kisi ney ajan ka virod nai keya tumhari manshikata ka virod ho raha hai samzo mano aur sudhar jaooo

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  25. narendar shah

    मित्रों दो दिन पहले समाचार चैनेलो ने एक छोटी सी खबर नीचे की पट्टी में चलायी थी की मोदी ने आईएनएस मैसूर को ईराक में फसे लोगो के लिए रवाना किया।।

    चूकी दलाल मिडिया ने इस पर कोई डिबेट नहीं की अतः हमने इसे छोटी सी खबर मान लिया।
    मगर क्या आप ने सोचा है सिर्फ चंद भारतियों के लिए नेवी का वारशिप भेजने की क्या आवश्यकता थी??
    ये सिर्फ इराक में फसे भारतियों को निकालने के लिए नहीं है।।

    ख़ुफ़िया स्तर पर इसके क्या मायने हैं ये तो खबर बाहर नहीं आ पायेगी मगर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये एक बड़ा सामरिक सन्देश है अमरीका समेत विश्व के अन्य देशो को भी।।
    इससे पहले जब कोई अंतर्राष्ट्रीय संकट आता था तो सिर्फ अमरीका, रूस या एक दो अन्य देश अपने वारशिप भेजते थे।अमरीका इस मुद्दे को लटका रहा था क्युकी ISIS के आतंकियों को ट्रेनिंग अमरीका ने ही दिया है।।
    मगर अमरीका से अलग जाते हुए अबकी बार मोदी ने तुरंत निर्णय लेते हुए इस वारशिप को रवाना कर दिया।। दूसरी और रूस के विमान ISIS की कमर तोड़ रहे हैं।
    अन्तरराष्ट्री बिरादरी में ये सन्देश गया की भारतीयों की जान अब सस्ती नहीं ।भारत अपने नागरिको की रक्षा हेतु कभी भी कहीं भी आपरेशन कर सकता है एवं भारत में भी मजबूत निर्णय लेने वाला एक नेतृत्त्व है। आतंकियों में भी ये सन्देश गया की एक तरफ रुसी विमान है तो दूसरी और जरुरत पड़ने पर भारत भी आपरेशन शुरू कर सकता है।।
    इस प्रकार भारत सरकार और नरेन्द्र मोदी ने अपने एक निर्णय से सेनाओ का मनोबल बढाते हुए अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी को भी भारत में एक रीढ़ वाले राजनितिक नेतृत्त्व का संकेत दे दिया है जो जरुरत पड़ने पर अमरीका जैसी महाशक्ति से इतर भी निर्णय ले सकता है।।

    ऐसे जानदार निर्णय का तहे दिल से स्वागत होना चाहिए और देश के लोगो को जानकारी होनी चाहिए….
    शाबाश देश वासियों…. आपके एक एक वोट से देश गोरान्वित हुआ है… नमो का शाशन आया है

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  26. abhisek gupta

    जम्मू से कटरा रेल का किराया 20 रुपया हे ।
    टेक्सी वाले 2500 से 3000 रुपया लेते हैं|
    यही तो अच्छे दिन हे
    कांग्रेस 10 साल मे एक “सरबजीत सिह” को वापिस हिन्दुस्तान नही ला सकी और मोदी सरकार 15 दिन मे ही “ईराक मे फसे 174 भारतीयो” को खुंखार आतंकवादीयो से छुडाकर ले आयी ।
    सब्र रखो अच्छे दिन आयेंगे ।

    Reply
  27. Ravi Shukla

    अच्छा तो हयात जी आपको परेशानी मोदी जी से है !
    अमा मिया तो यही पहले बता दिए होते इसपर प्रदीप भाई के आर्टिकल को क्यू गलत बताने लगे ! अरे पहले बता देते की हम कटुओ को बसपा या सपा ही अपनी ससुराल लगती है और दंगा फसाद अपनी जोरू ! मिया जात दिखा दिए अपनी, ये खबर की खबर तो हमे पहले से ही मुस्लिमो की साम्प्रदाइक साइट लग रही थी , हयात जब आप अपनी ज़ात पर उत्तर ही आये हो तो सुन लो मेरी भी एक बात अगर इस साइट को बंद नहीं किये तो वह दिन दूर नहीं जब तुम्हारा ही कोई भाई तुम लोगो के साइट के नाम फतवा ज़ारी करेगा क्यों की इस दो कौड़ी की मोहम्डन साईट पर पढने को है क्या हम सब के लिए खुदा ख़ुदा मुस्लिम मुस्लिम चिढ हो गई है इस साईट से ये प्रदीप दुबे कौन है इनका नंबर हमें दिलवा दो आप हयात भाई मै इन्हे भी बोलना चाहता हु की इन तुर्को के बीच आकर कौन सा महानता का काम कर रहे है दुबे जी …….
    इनके अपनों को गरियाया जा रहा है रोज़ और ये तुर्को के जमात में शामिल हो गए है क्यों भाई भारत के साथ वफादारी नहीं कर सकते तो गद्दारी तो ना ही करो दुबे भाई !

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  28. vimal sing

    RAJK.HYD जवाब दे

    मुस्लिम शासकों ने हिजड़े बनाये
    अरब लोगों में गिलमा यानी Salve Boys रखने की पहुत पुरानी परम्परा है .इसे इज्जतदार होने की निशानी समझा जाता था .अमीर उन गिलमा लड़कों के साथ कुकर्म किया करते थे .कुरान में गिलमा के बारे में सुन्दर लडके कहा गया है .लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गिलमा लडके हिजड़े होते हैं ,जिन्हें कम आयु में ही Castrated करके हिजड़ा बना दिया जाता है .इसके बारे में प्रमाणिक और विस्तृत जानकारी खलीफा अल रशीद और खलीफा अल अमीन के इतिहास से मिलती है .जिसे सन 1948 में लन्दन से प्रकाशित किया गया था किताब का नाम “Hitti PK (1948) The Arabs : A Short History, Macmillan, London, p. 99उसी से यह अंश लिए जा रहे हैं .दसवीं सदी ने खलीफा अल मुकतदिर (908 -937 ) ने बगदाद में अपने हरम में रखने के लिए 11 हजार लड़कों को हिजड़ा बनवाया ,जिनमे 7 हजार हब्शी और 4 हजार लडके ईसाई थे .( पेज 174 -175 ) इसका एक उद्देश्य तो उनके साथ कुकर्म करना था .और दूसरा उदेश्य पराजित लोगों को अपमानित करना भी था .
    बाद में यही काम भारत में आनेवाले हमलावर मुस्लिम शासकों ने भी किया ,जैसे जब बख्तियार खिलजी ने बंगाल पर हमला किया था ,तो उसने बड़े पैमाने पर 8 से 10 साल के हिन्दू बच्चों को हिजड़ा बना दिया था .बाद में मुगलों कि हुकूमत में (1526 -1799 ) में भी हिजड़े बनाए जाते रहे .इसका वर्णन “आईने अकबरी : में भी मिलता है .इसमे लिखा है अकबर ने 1659 में करीब 22 हजार राजपूत बच्चों को हिजड़ा बनवाया .बाद में जहाँगीर ने और औरंगजेब ने भी इस परंपरा को चालू रखा .ताकि हिन्दू वंशहीन हो जाएँ .इस से पहले सुल्तान अला उद्दीन खिलजी ने 50 हजार और मुहम्मद तुगकक ने 20 हजार और इतने ही फिरिज तुगलक ने भी हिजड़े बनवाये थे .
    यहांतक कुछ ऐसे भी हिजड़े थे जो दिल्ली के बादशाह के सेनापति भी बने ,जैसे अल उद्दीन का सेनापति “मालिक काफूर ” हिजड़ा था .और कुतुबुद्दीन का सेनापति “खुसरू खान ” भी हिजड़ा ही था .महमूद गजनवी और उसके हिजड़े गुलाम के “गिलमा बाजी” (homo sexual ) प्रेम यानि कुकर्म (Sodomy ) को इकबाल जैसे शायर ने भी आदर्श बताया है .क्योंकि यह कुरान और इस्लाम के अनुकूल है .(नोट -लेख का अंतिम भाग सारांश रूप में है ,पूरा विवरण अंग्रेजी में दी गयी साईट में देखें )
    भारत सभी देशभक्त और धर्मप्रेमी लोगों से अनुरोध है कि ,किसी प्रकार के झूठे प्रचार में नहीं फंसें .इस्लाम को ठीक से समझें .आने वाले खतरों से सचेत होकर देश धर्म की रक्षा के लिए कटिबद्ध हो .और जिनको किसी ने हिजड़ा बना दिया हो वह हमें क्षमा करें . भैई ईस्का तु जवब दे प्रोूफ क सथ्
    http://islamic-slavery.blogspot.com/
    http://www.faithfreedom.org/articles/islamic-jihad-articles/islamic-slavery-part-10-sex-slavery-concubinage-and-ghilman/

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  29. सिकंदर हयात

    यहाँ मेने 3 कॉमेंट का जवाब नहीं दिया एक का इसलिए नहीं की उसमे गाली गलोच थी एक रोमन में था और दुबे जी का जवाब इसलिए नहीं की फिर बहुत लम्बा लिखना पड़ता और जहा कम्प्यूटर रखा हे में लिख रहा हु वहा ना कूलर हे और ना ए सी और दिल्ली में बहुत ही भयावह गर्मी पड़ रही हे मेरी हिम्मत नहीं हुई बाद में नेहरू जी पर बहुत कुछ लिखने ही वाला हु

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    1. सिकंदर हयात

      लेख के आखिर में दुबे जी जिस पंक्ति पर मुग्द हुए जा रहे हे उस पर विचार करे ” काँकर पत्थर जोड़ के ” भला बताइये की क्या होगया जो कंकर पत्थर जोड़ के कोई स्टरक्चर खड़ा कर भी लिया तो ? हां अगर संगमरमर में सोना चाँदी हीरा पन्ना जोड़ लिए होता तो उस पर ऐतराज़ करते जोड़ के जो बनाया गया उसमे किसी जाती विशेष का आना मना होता तो ऐतराज़ करते उसमे अगर इमाम साहब के साथ कोई देवदासी भी दिखती अगर तो उस पर ऐतराज़ करते . कंकर पत्थर जोड़ के जो बनाया गया था वो केवल इबादतगाह ही नहीं बल्कि एक समुदाय भवन जैसा ही था भला उस पर कबीर दास जी को क्या ऐतराज़ होगा ? मेरा ख़याल हे या तो दोहा उनका नहीं होगा या फिर उन्होंने महज़ ” स्कोर सेटल ” करने को ये कहा होगा दुबे जी ने भी यहाँ बहुत सी बाते स्कोर सेटल्मेंट के लिए कही हे

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      1. anshu garg

        यार सिकंदर क्यों नरक फैलाये हो तुम यहाँ खुद तो कुछ लिखते नै तुसेरो की पोस्ट पर टट्टी पेशाब करते नज़र आते हो हर गजह या तो गलत है मुल्ला भाई और आखिर आप की क्या दुशमनी है मोदी जी से जो जहर भी आग भी सब उगल रहे हो जिसे बार बार तुम्हारा he मुह कला होता नज़र आ रहा है
        खुद भी सुधर जाओ और अपने औ मुल्ला भाई को भी समज़ऊ की अब कोंग्रस का जमाना नहीं है क्यों की नेहरू को पंडित तू कहो हम नहीं मानते या एक परिवार हिन्दू नहीं है बाकि सभी धर्म मे शामिल हो चुकी है जिसका सबूत देने की ज़रुरत फिलहाल मुज़े नहीं है
        अब आ जाओ सवालो के जवाब मे तुम ने किसी तर्क सांगत बात का जवाब नहीं दिया बस ज़बर्ज़स्ती की बात कर रहे हो लगातार जिस मुद्दे पर या आर्टिकल है वो मुद्दा ही खा गए और लगातार बकवास करते नज़र आ रहे हो क्यों बताओ साथ हे जिसने लिखा है या आर्टिकल उसकी किसी भी बात का जवाब कही नै दे पाये तुम क्यों बड़ी बड़ी बड़ी काम कुछ नहीं

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  30. abc

    Is it correct that there was a Fatwa before —– Loudspeaker should not be used at masjid——–I remember, read this in this blog only.

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  31. Manzar

    दुबे जी तनिक अपने ज्ञान चक्षुओं को प्रजलवित कीजिये क्यूंकि अज़ान ख़ुदा को सुनाने के लिए नहीं बल्कि नमाज़ियों को नमाज़ के समय एकत्रित करने के तातपर्य से दी जाने वाली मुनादी भर होती है , इसीलिए जितना दूर तक ये आवाज़ जाये उतना अच्छा माना जाता है. खुद से दुआ तो मन्न ही मन्न मांगी जाती है।

    मगर मंदिरो मैं लॉउडस्पीकर के प्रोयोग पर प्रतिबंद लगाने का सोचना भर भी घोर निंदनीय है। और सारे मुस्लिम भाई आपके साथ है इस अत्याचार के खिलाफ.

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  32. Pradeep Dubey

    MANZAR …माईक अल्लाह ने नहीं सम्राट अकबर ने लगवाया था मस्जिदों पर अपने साशन काल में ! और अज़ान के लिए नहीं लगवाया था बल्कि यह बात जनता के बीच प्रमाणित करने के लिए लगवाया था की अकबर ही आपका भगवान ( अल्लाह ) है ! और जब जब आप मस्जिद में जाओगे यह बात आपको ज़ोर देकर जनता को बतानी है ! एक मुस्लिम सम्राट ने अपने को जनता का भगवान प्रमाणित करने के लिए मस्जिदों पर माईक लगवा कर अज़ान के साथ खुद को जोड़ दिया था जो अब परंपरा के रूप में जारी है !

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  33. Ravi Shukla

    सिकंदर हयात तुम्हे तो ज़ामा मस्जिद का इमाम होना चाहिए या आई० एस०आई० का एजेंट, जबरजस्त मुसलमान हो आप तो और ये दुबे जी भी कमाल के इंसान है पाकिस्तान – पाकिस्तान खेल रहे है कटुओं की साईट पर आकर क्या दुबे जी कही धर्म तो नहीं बदल………………….

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  34. Ankur thakur

    प्रदीप दुबे सर बधाई हो आपका आर्टिकल आखिर रंग लाया ! आपकी जिन बातो को लोग गलत मोड़ दे रहे थे, गलत मतलब निकाल रहे थे उन बातो का असर कुछ यों हुआ की ः=

    (( मस्जिदों पर लगे गैरकानूनी लाउडस्पीकर हटाएं: हाई कोर्ट
    मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस को मुंबई और नवी मुंबई में
    इजाजत के बिना मस्जिद के ऊपर लगाए गए
    लाउडस्पीकरों को हटाने का निर्देश दिया है। जस्टिस वीएम
    कनाडे और जस्टिस पीडी कोडे की डिविजन बेंच ने एक
    जनहित याचिक पर अपने फैसले में कहा कि चाहे गणेशोत्सव
    हो, नवरात्रि या मस्जिद जहां कहीं भी गैरकानूनी तरीके से
    लाउडस्पीकर लगे हैं जब्त कर लिए जाएं। कोर्ट ने
    सभी नागरिकों से ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ एक साथ आने
    का आह्वान किया है।
    हाल में एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, इस
    इलाके में 49 में से 45 मस्जिदों पर लाउडस्पीकर अनाधिकृत
    तरीके से लगाए गए हैं। जनहित याचिका में नवी मुंबई के
    निवासी संतोष पचालाग मस्जिदों द्वार लाउडस्पीकर के
    गैरकानूनी इस्तेमाल का मुद्दा उठाया था।
    आरटीआई से मिली जानकारी के हवाले से
    दावा किया गया कि 92% मस्जिदों पर इजाजत नहीं होने के
    बावजूद लाउडस्पीकर लगे हुए हैं। ये मस्जिद साइलेंस जोन में
    हैं यानी आसपास स्कूल और हॉस्पिटल हैं। याचिका में
    कहा गया है कि अक्सर इन लाउडस्पीकरों से निकलने
    वाली तेज आवाज ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण एवं नियमन)
    कानून-2000 के तहत मान्य डेसिबल की सीमा से
    ज्यादा होती है।
    कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह पता लगाए
    कि क्या मस्जिदों ने लाउडस्पीकर लगाने से पहले इजाजत
    ली थी। जस्टिस कनाडे ने पूछा, ‘अगर ये इजाजत के
    बिना लगाए गए हैं, तो क्या कार्रवाई की गई है? ऐसा चलने
    नहीं दिया जा सकता है।’
    पचालाग के वकील डीजी धनुरे ने कहा कि अगर लाउडस्पीकर
    बिना उचित इजाजत के लगाए जा रहे हैं तो पुलिस इन्हें जब्त
    कर सकती है। उन्होंने कोर्ट के सामने आरटीआई के आंकड़े
    भी जमा कराए जिसके मुताबिक गणपति और नवरात्रि मंडल
    ने लाउडस्पीकर लगाने के लिए प्रशासन से इजाजत ली थी।
    जस्टिस कनाडे ने कहा कि रोगी और
    बुजुर्गों को लाउडस्पीकर की आवाज से परेशानी होती है।
    देखा गया है कि नवरात्रि और गणेशोत्व के दौरान
    भी काफी शोर हो सकता है। ये सब लगातार ध्वनि प्रदूषण
    फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी अनाधिकृत
    लाउडस्पीकर लगाए गए हैं, जब्त कर लिए जाएं।))

    सर आप से एक बात कहनी है मुझे कृपया कुछ और भी ऐसे लेख लिखिए
    हमे आपके अगले लेख का इंतज़ार है !

    पटना से आपका एक अनजान मित्र
    अंकूर ठाकुर !

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  35. zakir hussain

    दूबे जी, आप से ज़्यादा मुस्लिम कट्टरपंथियो की गाली हम लोग खाते हैं. जबकि मैं तो शायद मुसलमान घर मे बस पैदा ही हुआ हूँ. बात यह हो रही है की पूरे दिन मे 8-10 मिनट की अज़ान की बात करते समय, लंबे लंबे समय तक चलने वाले कान्फोड़ू भजन-कीर्तन की भी बात करो.
    मैं जयपुर मे जिस जगह रहता हूँ, वहाँ पास के दो मंदिरो मे महीने मे 2-3 बार रात को कीर्तन होता है. मंगलवार या शनिवार के दिन. 3-4 घंटे का कान्फोड़ू. रात को 10 बजे की समय सीमा के बाद भी 11 साढ़े 11 बजे तक.
    वहाँ रहने वाले हिंदुओं को भी इससे दिक्कत होती होगी. लेकिन अगर मैं अपनी रात की नींद मे इस कीर्तन से खलल की बात कहूँ तो मैं मुसलमान हो जाता हूँ.
    जबकि पुलिस स्टेशन मंदिर से महज 100 मीटर दूर है.
    ऐसा देश के हर हिस्से मे है. इंसान हर विषय पे नही लिखता. किसी ने क्या नही कहा, क्या नही लिखा, उससे उसपे पूर्वाग्रह का आरोप नही लगाया जा सकता. लेकिन जब आप धार्मिक शोर-गुल पे लेख लिख रहे हैं तो संतुलित रवैये की आशा थी.

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  36. सिकंदर हयात

    Tabish SiddiquiYesterday at 13:31 · समझ देखिये ज़रा पढ़े लिखे क़ाबिल लोगों की
    वो पडोसी जिसकी बूढी माँ रात भर पड़ोस में होने वाले जगराते की वजह से सो नहीं पायी, उसके सामने अगर मैं भी कह दूं कि मुझे भी सर दर्द होने लगा है जगराते की वजह से तो वो फ़ौरन मुझे सवालिया निगाह से देखने लगते है.. मैं उसकी निगाह भांप कर जब बात को आगे बढ़ाते हुवे ये कहता हूँ कि “अज़ान का भी वही हाल है.. बुजुर्गों और बीमारों का लिहाज़ उन्हें भी नहीं रहता है”.. तब जा के पडोसी के चेहरे पर मुस्कान दिखती है.. और अब वो अपनी माँ की तकलीफ़ खुल कर बताते हैं कि कैसे जगराते की वजह से उन्हें डॉक्टर के पास भेजना पड़ गया
    एक अजीब सा ट्रेंड है ये.. और ये पडोसी का ही नहीं लगभग अब हर पढ़े लिखे, बुद्धिजीवी, लेखक और पत्रकार का है.. ऐसी समझ के इन लोगों को देख कर मैं सिर्फ मुस्कुराता हूँ और सोचता हूँ कि इनका जीवन तो व्यर्थ ही गया.. क्या सीखा इन्होंने और कैसे ये कवितायें और कहानियां लिखते हैं.. किस सोच के साथ? और लोग इन्हें फॉलो करते हैं? अगर मेरे जैसे अरबी या उर्दू के नाम वाला इंसान इन्ही के दर्द की बात कर दे तो इन्हें लगने लगता है कि मैं इनके धर्म को नीचा दिखा के इस्लाम की बड़ाई कर रहा हूँ.. जबकि न तो मैंने इस्लाम का नाम लिया और न ये कहा कि आपका सारा धर्म बेकार है..मैंने सिर्फ एक कुरीति उठायी और उस पर वार किया मगर सैकड़ों की तादात में ये मुझ से पूछेंगे “अच्छा.. गौ रक्षा वाले मार रहे हैं तो तालिबान क्या कर रहे हैं उनको क्या कहिएगा आप?”.. फिर जब कहो कि वो भी ग़लत हैं तब जा के ये लोग संतुष्ट होते हैं.. मतलब जब तक कोई तालिबान को ग़लत न कह दे इनके सामने तब तक इनके गौ रक्षक सही हैं इनके हिसाब से.. ये पैमाना है बड़े से बड़े बुद्धिजीवियों का यहाँ
    पोस्ट लिखी मैंने भारतीय संगठनों के तालिबानीकरण पर और सवाल करेंगे मुझ से “ये बताईये कि मुहम्मद ने नौ साल की आयशा से निकाह क्यूँ किया?”.. “तीन तलाक़ पर आप क्या कहेंगे ताबिश जी?”.. फिर एक नहीं दस आ जाएंगे “ताबिश जी जवाब दीजिये न.. बच क्यों रहे हैं”.. और इस कमेंट को अच्छे से अच्छा लेखक और इंसानियत का पुजारी लाइक करके जाएगा.. बताईये गौ रक्षकों का मुहम्मद साहब की शादी से क्या लेना देना है? तीन तलाक़ का मसला हल हो जायेगा तो गौ रक्षक रुक जाएंगे?
    हिन्दू धर्म की कुरीतियों की बात करने का मतलब है इस्लाम की बड़ाई करना? ये किस समझ का देश है जहाँ हर एक घटना और हर एक बात की तुलना सिर्फ इस्लाम और अरब से होती है भाई? अज़ान लाऊड स्पीकर में दी जायेगी तो तुम रात भर जाग जाग कर अपने ही लोगों को अस्पताल पहुंचा दोगे? और कोई मुसलमान लाऊड स्पीकर की बुराई न करे तो तुम अपनी पीढ़ियों को बहरा बना दोगे? वो दो मिनट में अज़ान दे कर हट जाएंगे और तुम पूरी रात चिल्ला कर अपनी ही क़ौम को मानसिक रोगी बना दोगे.. अपने धर्म की हर कुरीतियों के लिए पहले मुसलमानो का समर्थन चाहिए आपको? कहाँ जा रहे हो भाई?आप बहुसंख्यक है.. इसलिए हर अफ़रातफ़री और हर हुड़दंग का सबसे बड़ा खामियाज़ा आपकी क़ौम को भोगना पड़ेगा.. समझिये इसे
    ~ताबिश Siddiqui

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  37. prasad joshi

    सिकंदरजी,
    कुछ एहेसास हुवा है आज, जिंदगी मे पहली बार, और आपका शुक्रीया ईसके लिये.

    कही आपने कमेंट मे लिखाथा, “अफज़ल भाई (( आप पूछिये मत अफज़ल भाई आप और मेरे अपने भाई तो गल्फ में शान्ति की जिंदगी जी रहे हे हमारी हालात मत पूछिये”. जिंदगी का बहोत अहम ग्यान दे गयी ये कमेंट.

    मेरी मा बुढी होगई है, ऊसके बाल सफेद हुवे है, बुढापेने शरीर की सुंदरता तो कही नही रही. पर फिरभी वो मेरे लिये पुजनीय है, और वो मेरे लिये दुनीयाकि सर्वाधीक सुंदर स्त्री है, ऐश्वर्या राय या दिपीका पदुकोन या आलिया भट से भी जादा.

    यहा भारत देश मेरी बुढी मा की जगह है, और गल्फ कंट्रीज ऐश्वर्या राय, दिपिका पादुकोन या आलिया भट कि जगह है. ये भारत वर्ष जैसा है वैसा है, धुल, मिट्टी, पत्थर, भिड, भ्रष्ट, गरीब, विवाद, दंगे, फसाद जैसा है वैसा है पर मेरे लिये ये न्युयॉर्क, लंडन, दुबई, मस्कत, पँरीस ईन सबसे खुबसुरत है. मेरी बुढी मा….

    यहा लायन्स हन्नान अन्सारी जी को भी जवाब है. मेरा हिंदु धर्म ठिक वैसा है जैसी मेरी बुढी मा. और ईस्लाम दुनीया का सर्वाधीक सुंदर धर्म, ईस्लाम से महान दुसरा कोई धर्म नही. पर फिरभी मेरे लिये पुजनीय है मेरी बुढी मा, मेरा ये बुढी मात्रृभुमी भारतवर्ष, और मेरा ये बुढा हिंदु धर्म.

    आपकी महानता आपहीको मुबारक. हम हमारे साधे पनमे ही स्वर्ग सुख, जन्नत कि जिंदही जिरहे है. हमे कभी तकलिफ नही होती मंदीरो और मत्जीदो के आवाजो से. और नाही कभी कोई अशांती महसुस होती है. हम हिंदु ईस्लाम से पिछडे है, हम खुष है हमारे पिछडेपन मे. हम भारतिय पिछडे है सौदी या यु.ए.ई. से, पर हम खुष है हमारे पिछडेपन मे.

    शुक्रीया सिकंदर जी, शुक्रीया लायन्स हन्नान अन्सारी जी…
    शुक्रिया खबर कि खबर…

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