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मुरादाबाद के कांठ में शुक्रवार २७ जून २०१४ को जो कुछ घटा , धार्मिक स्थलों से जिस प्रकार लाउडस्पीकर हटाने को लेकर बवाल हुआ, ग्रामीणों एवमं पुलिस के बीच जिस तरह का संघर्ष देखने को मिला, किसी एक धर्म के साथ होकर प्रदेश के मुखिया ने अन्य धर्मो के साथ जो राजनितिक छेड़ – छाड़ किया ! जनता की भावनाओ को जिस प्रकार आघात पहुचाया , धारा १४४ की स्थिति को जिस प्रकार उत्पन्न किया गया, वह एक दिन में किया गया फैसला नहीं था बल्कि रमज़ान के मद्दे नज़र राजनीतिक रोटी सेकने की के लिए सोची समझी नीति के तहत तैयार किया गया एक पुख्ता एजेंडा है ! प्रदेश सरकार क्या चाहती है नहीं पता, किन्तु जबसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में सत्ता सम्हाली है जनता परेशानियों, दंगे – फसाद की वज़ह से कराह रही है ! आम चुनाव में इतनी बड़ी सिकस्त पाने के बाद भी नहीं समझ आता यह समाजवादी पार्टी आखिर चाहती क्या है, आखिर अखिलेश यादव जी किसके हाथ की कठपुतली बने है की आये दिन एक के बाद एक जघंन्य और हिंसक घटनाएं प्रदेश में हो रही है और उसपर मुख्यमंत्री जी का कोई बस नहीं है ! हद्द तो अब हो गई है की मुख्यमंत्री जी के आदेश,फरमान, या यों कहे की गलत फैसलों की वज़ह से उत्तर प्रदेश का पश्चिमी वेल्ट दंगा -फसाद का घर हो गया है ! हिन्दू मुस्लिम को आपस में लड़ा कर अपनी कौन सी दूरदर्शी नीति का परिचय दे रहे है मुख्यमंत्री जी २७ जून को मुरादाबाद में हिंसा की आग लगी वह आग विभत्स रूप अख्तियार कर चुकी है आज की डेट में ! तो वही दूसरी हिंसा भड़क उठी है मेरठ में ! मेरठ शहर में सांप्रदायिक झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। लालकुर्ती के जामुन मोहल्ले में हुई वारदात में अभी समझौते का दौर चल ही रहा था कि पूर्वा इलाही बख्श में शुक्रवार को दो समुदायों में जमकर पत्थर और तेजाब की बोतलें चलीं। छतों पर मोर्चाबंद लोगों के जबर्दस्त पथराव में दोनों समुदाय के पांच लोग घायल हो गए। हवाई फायरिंग की भी सूचनाएं हैं। मौके पर पहुंची कई थानों की पुलिस ने लाठी चार्ज कर लोगों को तितर-बितर कर हालात संभाले। बवाल के बाद पूरे इलाकों को फोर्स ने सील कर दिया है। पुलिस ने देर रात तीन युवकों को हिरासत में ले लिया है। मेरठ की स्थिति आज की जो है उसे देखकर यही कहा जा सकता है मुख्यमंत्री जी पर कही ना कही तो जरूर आतंरिक दबाव है आज जिसके चलते वह प्रदेश को सेना की छावनी बनाने पर आमादा है ! मित्रो मै राजनितिक सोच से अपने को अलग रखकर दूर रखकर आज इस दंगो की वज़ह और दंगो पर मानवता की भाषा में आप को अपने विचारो से कुछ कहना और समझाना चाहता हूँ ! हो सकता है मेरा विचार कुछ लोगो को नागवार गुज़ारे पर मित्रो इस दंगे फसाद से हमारे प्रदेश को बचाने के लिए यह विचार व्यक्त करना आज मुझे सही लगा तो मै व्यक्त कर रहा हूँ ………………………………………….

रमजान के मद्दे नज़र मंदिरो के उपर से साउंड सिस्टम और माइक हटवाने के पीछे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी की मंसा चाहे जो भी हो किन्तु मैं तो इसपर इतना ही कहूँगा की मंदिरो से माईक साउंड हटवाकर मुख्यमंत्री जी ने यह प्रूफ कर दिया की की हिदुओ के देवी देवता कान के बहरे नहीं है न ही अपने भक्तो की परेसानी और भक्ति जानने के लिए ऊँची आवाज़ में बजने वाले साउंड सिस्टम की ही ज़रूरत है उन्हें !

वह अल्लाह की तरह थोड़े है जिनको अपनी परेसानी अपनी भक्ति बताने और दिखाने के लिए हमारे मुस्लिम भाई सदियों से मस्जिद के उपर माइक बांधकर चिल्लाते आ रहे है ! मित्रो चिल्लाता वो है जिसकी आवाज नहीं सुनी जाती , चिल्लाता वो है जिसका कोई माई – बाप न हो ! चिल्लाता वो है जिसका मुखिया , जिसका रहनुमा, जिसका खुदा बहरा हो गया हो !

साउंड माईक की जरुरत उसे पड़ती है जिसके सुनाने की क्षमता कमजोर पड़ गई हो ! इस लिए मंदिरो से साउंड सिस्टम हटाने के लिए प्रदेश के आलाकमान के फरमान पर हिन्दू भाई आक्रोशित ना हो अपने बुद्धि कौशल का परिचय दे, अपनी हिन्दू संस्कृति और सभ्यता का परिचय दें और पीड़ित मुस्लिम भाईयों को रमजान के महीने में मस्जिद पर बधे माईक साउंड से चिल्ला चिल्ला कर अपना दर्द अपने खुदा तक पहुचाने दें !

यकीन मानिए मित्रों उनके बहरे खुदा ने सदियों से ना उनका दुःख दर्द सुना है ना ही इस रमज़ान में ही सुनने वाला है क्यू की जिन्हे अपने खुदा के कान.पर भरोसा नहीं, जो अपने खुदा को बहरा मानकर अपनी आवाज़ चिल्लाकर माईक साउंड से उसतक पहुचाते है उस खुदा को भी ऐसे ढोंगियों के ढोंग पर यकीन नहीं ना ही इनकी कोई परवाह है, इसका प्रमाण है की लाख इनके चिल्लाने पर भी सदियों से खुदा इनकी आवाज़ ठुकरा रहा है और इन्हे बताने की कोशिश कर रहा है की –
मैं बहरा नहीं हूँ, न ही तुम लोगो से दूर हूँ, मैं तो तुम सबके दिल में हूँ, अपना दिल.बड़ा करो मेरे नेक बन्दों मैं तुम्हारी आवाज़ तुम्हारे दुःख दर्द तुम्हारे खामोश रहने पर भी सुन लूंगा समझ लूँगा ! जबतक माईक साउंड लगाते रहोगे मुझे बहरा समझकर चिल्लाते रहोगे मैं कुछ नहीं सुन पाउँगा और आप दुनिया में सबसे पीड़ित, दुखी,परेसान, अशांत रहोगे ! सदियों पहले किसी संत ने क्या खूब कहा था मुस्लिमो की इस ढोंग विधा की भक्ति पर ! –

((कांकर- पाथर जोड़ कर मस्जिद दिया बनाई ता चढ़ मुल्ला बाग़ दें क्या बहरा हुआ खुदा …??? ))