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जैसा कहा जाता है कि पुलिस की न दोस्ती अच्छी और न ही दुश्मनी अच्छी। ये बात आज के विश्व की पुलिस (अमेरिका) पर भी लागू होती है। अमेरिका ने समय पर कभी भी अपने दोस्त मुल्कों का साथ नही दिया है, बल्कि वक़्त पर धोखा ही दिया है। ये मैं नही अमेरिका का इतिहास बताता है।

आइये हम आप को अमेरिका का इतिहास बताते है कि अपना मतलब निकालने के बाद कभी भी वक़्त पर साथ नही दिया है। ईरान का बादशाह रज़ा शाह पहेलवी अमेरिका का सब से वफादार दोस्त था। यूरोप का मीडिया उसे अमेरिकन गवर्नर कहता था। उसने अमेरिका के कहने पर ईरान में पर्दे पर पाबंदी लगा दी थी। अगर कोई महिला परदे मे निकलती थी तो पुलिस बुर्का फाड़ देती थी। शाह ईरान ने लड़कियों के स्कूलों मे स्कर्ट को यूनिफॉर्म बना दिया था। शराब, नाच खुले आम होने लगा था। ईरान पूरे विश्व मे अकेला मुल्क था जहा स्कूलों मे भी शराब की दुकानें थी। उसके बाद जब ईरान मे इंकलाब आया और शाह ईरान मुल्क से भागा और अमेरिका से मदद मांगी तो अमेरिका ने आंखे फेर ली और अमेरिका मे घुसाने से भी मना कर दिया। अमेरिका ने उस के अकाउंट भी सीज़ कर दिए, इस तरह 2 साल तक इधर-उधर भागा फिरता रहा और मिस्र में मारा गया।

अनास-तसिसु निकरागुआ (NICARAGUA) मे AMERICIN एजेंट था, अमेरिका ने उसे डॉलर और हथियार दे कर कम्यूनिज़्म के खिलाफ खड़ा किया और अमेरिका के युद्ध को अपना युद्ध समझ कर लड़ता रहा, मगर जब उस को वहा से भागना पड़ा तो अमेरिका ने उसे पहचानने से इंकार कर दिया और उसके अमेरिका आने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। इस तरह जंगलो और पहाड़ों मे छुप-छुप कर 1980 में जंगल मे उस की मौत हो गयी।

चिली ( CHILLI) के फ़ौजी चीफ जनरल अगुस्तो पनुशे ने 1973 अमेरिका की मदद से अपनी चुनी हुई हुकूमत को हटा कर गद्दी पर क़ब्ज़ा कर लिया। पानुषे ने अमेरिका के कहने पर हज़ारों नागरिकों की हत्या कराई। अमेरिका के कहने पर कई संगठनो पर पाबंदियां लगा दी और जनता पर बहुत जुल्म किया, मगर जब हुकूमत बदली और पानुषे वहां से भागा तो अमेरिका ने उस की कोई मदद नही की, आखिर मे जब वो इंग्लैंड पहुंचा तो वहां की पुलिस ने उसे पकड़ कर चिली हुकूमत को सौंप दिया, जहां 2006 मे उस की मौत हो गयी।

अंगोला ( ANGOLA) का विद्रोही सरदार जूनास सुमोनी भी अमेरिका के सहारे ही हुकूमत संभाला और अपने मुल्क मे अमेरिका के हित के लिये काम करता रहा, लेकिन 1992 मे अमेरिका ने उसे कम्यूनिस्ट के साथ समझौता करने के लिये कहा जिस के कारण उसे मुल्क छोड़ना पड़ा और छुप-छुप कर अपनी जिंदगी बचता रहा मगर अमेरिका ने पहचानने से इंकार कर दिया।

पनामा (PANAMA) का जेनरल नुरीगा भी अमेरिका के लिये काम करता रहा और अमेरिका ने उसे कम्यूनिस्टों के खिलाफ इस्तमाल किया, मगर हुकूमत बदली और उसे जेल मे डाल दिया उस ने अपने बचाव के लिये अमेरिका से गुहार लगाई मगर अमेरिका ने मदद से इंकार कर दिया।

फिलिपीन्स का राष्ट्रपति मार्कोस 22 साल तक अमेरिका के हित मे अपने मुल्क में अमेरिका के लिये काम करता रहा। उस ने अमेरिका के इशारे पर ही अपने मुल्क मे कम्यूनिस्टों को चुन-चुन कर खत्म कर दिया, लेकिन 1986 मे अमेरिका ने ही उस की हुकूमत खतम करा दी, जिस के बाद मार्कोस ने अपनी पूरी ज़िंदगी एक छोटे मकान मे गुजार दी, मगर अमेरिक ने उसे पूछा तक नही।

सद्दाम हुसैन की कहानी तो पूरा दुनिया जानती है, अमेरिका के कहने पर ईरान पर हमला किया और 8 वर्ष तक जंग लड़ा जिस मे 10 लाख से अधिक लोग मारे गये। 1990 तक अमेरिका दोस्त रहा, मगर अमेरिका ने तेल की लालच मे इराक पर हमला कर दिया और फिर पूरी दुनिया ने देखा कि अमेरिका के इशारे पर 2006 मे उसे फांसी दे दी गयी। अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन की मदद से अल-कायदा को बनाया और रूस के खिलाफ उस का इस्तेमाल किया, जब रूस बर्बाद हो गया और अल-कायदा से कोई मतलब नही रहा तो अये आतंकी संगठन घोषित कर दिया, जिस के फलस्वरूप अल-कायदा ने किस तरह अमेरिका से बदला लिया पूरी दुनिया ने देखा।

अमेरिका के henry kisenger ने एक बार कहा था कि “अगर आप अमेरिका के दुश्मन है तो आप के बचने के मौके हैं लेकिन बदकिस्मती से आप उस के दोस्त बन गये तो कोई भी आप को अमेरिका से नही बच सकता।”
हमे शह ईरान से सद्दाम हूसेन तक का अंजाम देखना होगा कि अमेरिका अपने दोस्तों को किस तरह धोखा देता है।
इसलिये हमारे सरकार को चाहिये कि हम अमेरिका से अधिक रूस को दोस्त बनाये रखे और चीन से भी अपनी दोस्ती बनाने की कोशिश करें क्योंकि अगला सुपर पावर चीन को ही बनना है। हमे इतिहास से सबक लेना चाहिये और अमेरिका से दूरी बनाने में ही लाभ है।