muslims

अफ़ज़ल ख़ान

क्या सचमुच हम मुसलमान है?, क्या हम इस्लाम के बताये रास्ते पे चल रहे है? अगर आज हम अपने आप को और दुनिया के 61 इस्लामिक मुल्क के 1.50 अरब की आबादी मुसलमान को देखे तो जवाब न मे मिलता है. मुसलमान उसे कहते है जो एक अल्लाह और आखिरी रसूल हज़रत मुहम्मद( सल्ल) को माने और इस्लाम के जो अरकान है उन पर अमल करे. इस के अतिरिक्त मुसलमानो का चरित्र भी अच्छा होना चाहिये. चरित्र जब ही अच्छा हो गा जब आप मे ये खूबीया हो गी जैसे ईमानदारी, हार्दिकता, वादा निभाना, सच्चाई और इंसाफ. लेकिन बदकिस्मती से पूरे इस्लामी दुनिया मे अब नही पायी जाती.जब तक ये खूबीया मुसलमानो मे थी दुनिया ने देखा के हम कैसे पूरे विशव पे छा गये थे.

सब से पहले आप ईमानदारी को देखिये, एक समय था जब मुसलमान को सब से ज्यादा ईमानदार समझा जाता था, आज मुसलमानो से ईमानदारी खत्म हो गयी है. आप देखियेके अरब मुल्को मे खाने पीने का सामन और दवा सभी अमेरिका और युरोप से आते है. डेनमार्क की कंपनी साउदी अरब और दुबई मे डेरी प्रॉडक्ट और गोश्त सप्लाइ करती है. पूरी मुस्लिम देश जर्मनी,अमेरिका,फ्रॅन्स,स्विज़ेर्लंड से दवाये लेती है. अब आप देखिये के एक इस्लामिक मुल्क दूसरे इस्लामिक मुल्क से कोई समान नही लेती, क्यो के व़े जानते है की क्वालिटी अच्छी नही होती. मुसलमान होने के बावजूद हम मक्का मे हज और उमरे के दौरान हाजियो के जेब काटते है वहा पे भीख मांगते है और पाकिस्तानी मुसलमान को हज़ और उमरे के नाम पे जा कर चरस, अफीम, हेरोईन ले जाते है, पकड़े जाने पे सब को फांसी भी हो जाती है.

पहले मुसलमान की खासियत हार्दिकता थी अब मुसलमानो मे ये खत्म हो गयी है और हम तंगदिल हो गये है. अब मुसलमानो मे भी छोटे-बड़े, गोरे काले, अमीर-गरीब जैसे भेद भाव आ गये है. अरबी और गैर अरबी मुसलमानो मे भेद भाव जितना इस्लामिक मुल्को मे पाया जाता है पूरे दुनिया मे कही देखने को नही मिलती. दुनिया मे बहुत से ऐसे इस्लामी मुल्क है जहा लोग 30-40 साल से रह रहे है उन्हे नॅशनॅलिटी नही देते, आप मुसलमान हो कर भी अरब मुल्को की लड़कियॉ से शादी नही कर सकते. आप स्वंय अपना बय्पार नही कर सकते बगैर किसी local Sponser की सहायता से , मुसलमान 72 फिरको मे बंटी है और हर एक दूसरे को काफ़िर कहता है. सब की अपनी अपनी मस्जिदे और अपना क़ब्रिस्तान है. आज सब से ज्यादा बेचैनी इस्लामिक मुल्को मे है. 61 इस्लामिक मुल्को मे से 25 मुल्को मे बादशहत है.

इस्लाम दुनिया का पहला मज़हब है जी शिक्षा पे सब से ज्यादा जोर दिया है. क़ुरान की पहली आयत ही नाज़िल हुई के इक़रा-पडो. हदीस है के तुमे अगर शिक्षा लेने के लिये चीन भी जाना पड़े तो जाओ मगर आज शिक्षा मे इस्लामिक मुल्क और पूरे मुसलमान भारत के भी और क़ौमो से बहुत पीछे है.ईसाई दुनिया के 40% नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है जब के इस्लामी दुनिया के 2% नौजवान यूनिवर्सिटी तक पहुंचते है.इस्लमि दुनिया मे 20 लाख लोगो मे से सिर्फ 230 लोगो को विज्ञान की जानकारी है जब के अमेरिका मे 10 लाख लोगो मे 4 हज़ार विज्ञान की जानकारी है पूरे इस्लामिक मुल्क मे 35 हज़ार रिसर्च स्कॉलर है जब के सिर्फ अमरीका मे इन की सांख्या 22 लाख है.इस समय दुनिया के 200 बड़ी यूनिवर्सिटी मे एक भी यूनिवर्सिटी मुस्लिम मुल्क का नही .

इस्लाम ने सब से ज्यादा जनहित,परोपकार या समाज सेवा के लिये मुसलमानो को प्रेरित किया है. इस्लाम ही एक ऐसा धर्म है जिस मे गरीबो की मदद के लिये ज़कात देने को कहा गया है, मगर अफसोस आज मुसलमान इन कामो से दूर होता जा रहा है. अगर हम दुनिया के 50 सब से जयदा दान देने वालो की सूची देखे तो उस मे एक भी मुस्लिम का नाम नज़र नही आता है साथ मे कोई हमारे हिन्दू भई भी नही है इस कम मे सिर्फ ईसाई धर्म के लोग आयेज है. रेडक्रॉस जो दुनिया का सब से बड़ा मानवीय संगठन है. इस के बारे मे बताने की जरूरत नही है. आप को मालूम हो गा के बिल- मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन मे बिल गेट्स ने 10 बिलियन डॉलर से इस फाउंडेशन की बुनियाद रखी है. जो के पूरे विशव के 8 करोड़ बच्चो के सेहत का ख्याल रखाता है, इस के अतिरिक्त एड्स और आफ्रिका मुल्क के गरीब देशो को खाना और मानवीय सहायता पहुचता है. दुनिया इस समय दांग रह गयी जब वॉरेन बफे ने इस फाउंडेशन को 18 बिलियन डॉलर दान मे दे दी मतलब वॉरेन ने 80 % अपनी पूँजी दान मे दे दी. दुनिया के 50 सब से ज्यादा दान देने वाले मे एक भी मुसलमान नही है अरब का अमीर शहज़ादा अपना स्पेशल जहाज पर 500 मिलियन डॉलर खर्च कर सकता है मगर मानवीय सहायता के लिये आगे नही आ सकता है.

इस्लाम ने मुसलमानो को जिन बुराईयो से रोका था आज सब से ज्यादा मुसलमानो मे और इस्लामिक मुल्को मे पायी जा रही है. शराब, जुवा, ब्याज, अय्याशी से इस्लाम मे सख्त मनाही है, मगर आज मुसलमानो मे आम हो गया है.यही कारण है के आज हम अल्लाह के सब से अच्छी क़ौम होने के उपरान्त भी पूरी दुनिया मे हम बदनाम और रुसवा हो रहे है. हमारी नमाज़े और दुवाये कबूल नही हो रही है. इस लिये मुसलमानो को चाहिये के इस्लाम के बताये रास्ते पे चले, शिक्षा पे धयान दे, बुरे कामो से तौबा करे और वक़्त के साथ चले अगर ऐसा न हुआ तो वो दिन दूर नही जब मुसलमा दुनिया से पिछड़ जाये गे इसी लिये अभी भी समय है के मुसलमान जागे नही तो बहुत देर हो जाये गी. बकौल एक शाएर तुम्हारी दास्तां तक न हो गी दस्तानो मे.