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लव कुमार सिंह

आजकल जब भी प्याज महंगाई का रुख करती है या रिकार्ड तोड़ने पर उतारु हो जाती है तो मजाक-मजाक में इस तरह की बातें चल निकलती हैं कि एक दिन ऐसा आ सकता है कि लोग प्याज उपहार में देने लगें, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पूर्व में ऐसा हो चुका है। इतिहास में एक दौर था जब प्याज उपहार में दी जाती थी।
जी हां, वह मध्यकाल का दौर था और स्थान था यूरोप। उस दौर में यूरोप में प्याज का इतना महत्व था कि उसे किराया चुकाने और उपहार में देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। ऐेसे में सवाल उठता है कि आंखों में आंसू ला देने और खाने पर मुंह में बदबू पैदा करने के बावजूद प्याज लोगों के लिए इतनी महत्वपूर्ण और प्यारी क्यों रही है? इसकी एक नहीं अनेक वजह हैं।

एक : किसी जमीन को ना नहीं कहती

प्याज की लोकप्रियता की पहली वजह तो यह कि तीखी गंध और आंखें गीली कर देने के बावजूद यह बहुत ही नरम स्वभाव की सब्जी है। यह इस बात की ज्यादा परवाह नहीं करती कि यह किस मिट्टी या किस मौसम में उगाई जा रही है। यह बड़ी आसानी से हर प्रकार की मिट्टी और मौसस में उग आती है। इसकी इस विशेषता ने इसे दुनिया के कोने-कोने में पहुंचा दिया। दुनिया की हर सभ्यता में प्याज ने अपनी उपस्थिति बना ली।

दो : ज्यादातर सब्जियों की मित्र

दूसरी बात यह कि प्याज को खाने के तरीके भी एक नहीं कई हैं। इसे कच्चे रूप में, पकाकर, भूनकर, तलकर, उबालकर, किसी चीज में भरकर, अचार बनाकर यानी अनेक तरह से खाया जा सकता है। दूसरी सब्जियों में लगाए जाने वाले तड़के या छौंक में प्याज का सबसे ज्यादा महत्व होता है। प्याज के बिना तड़का अधूरा रह जाता है। शाकाहारी हो या मांसाहारी, दोनों तरह के भोजन में प्याज बराबर का महत्व और अधिकार रखती है। प्याज की एक और विशेषता है कि इसका लंबे समय तक कुछ नहीं बिगड़ता, इसलिए इसे आगे की जरूरत के लिए भी रखा जा सकता है। इसीलिए प्राचीन काल में यात्रा के दौरान भी लोग प्याज को साथ ले जाते थे।

तीन : खेल हो या युद्ध, सबमें हुई सिद्ध

ईसा बाद पहली शताब्दी में जब ग्रीक के लोगों ने खेलों में और लड़ाई के दौरान प्याज का इस्तेमाल किया तो प्याज और लोकप्रिय हो गई। वहां एथलीट ओलंपिक खेलों की तैयारी के लिए प्याज का इस्तेमाल करते थे। प्रतियोगिता से पहले एथलीट काफी मात्रा में प्याज खाते थे, उसका जूस पीते थे और उसे अपने शरीर पर मसलते भी थे। ऐसा समझा जाता था कि प्याज के इस्तेमाल से शरीर में खून का संतुलन सही हो जाता था और एथलीट को खेल में फायदा पहुंचाता था। ग्लैडिएटर (योद्धा) भी मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए प्याज का रस शरीर पर मलते थे।

चार: दवा बनकर दूर करने लगी रोग

प्याज का महत्व तब और ज्यादा बढ़ गया जब एक बढ़िया दवा के रूप में इसकी पहचान हुई। रोम में प्राचीन काल में ही यह जान लिया गया था कि प्याज घाव, फोड़ा, फुंसी, सूजन को ठीक करती है। यह आंखों के लिए अच्छी है, दांतों के दर्द में फायदा पहुंचाती है और पेट के रोगों में बहुत फायदेमंद है। इसके अलावा यह यह नींद और कमर दर्द में भी फायदा पहुंचाती है। सिर दर्द, सांप और कुत्ते के काटने पर भी इसका इस्तेमाल किया गया। भारत में छठी शताब्दी में ही पता लग गया था कि प्याज दिल के लिए, हड्डियों के जोड़ों के लिए और पाचन क्रिया दुरुस्त रखने के लिए बहुत काम की चीज है। विक्टोरिया युग में छाले, फफोलों और बवासीर जैसे रोगों में भी प्याज को उपयोगी पाया गया। गर्मी में शरीर को लू से बचाने में भी यह कारगर है। आधुनिक समय के विशेषज्ञों ने न सिर्फ प्राचीन बातों की पुष्टि की बल्कि यह भी बताया है कि प्याज में काफी मात्रा में विटामिन सी के अलावा एंडीऑक्सीडेंट भी होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं, दिल की बीमारियों का खतरा कम करते हैं और कई प्रकार के कैंसर की रोकथाम करने का काम भी करते हैं।

पांच : पूज्यनीय भी हो गई प्याज

प्याज जब इजिप्ट पहुंची तो इसकी ख्याति में चार चांद लग गए। वहां यह पूजा की वस्तु बन गई। इजिप्ट के लोगों का विश्वास था कि प्याज अमर है, शास्वत है और ईश्वर के समान है। उन्हें ऐसा विश्वास प्याज के अंगूठी जैसे आकार और इसके अंदर गोल घेरे के अंदर घेरे और फिर घेरे जैसी रचना के कारण हुआ। इसी विश्वास के कारण वहां पूजा के वक्त वेदी पर प्याज को रखा जाता था और लोगों के मरने पर मृत शरीर के साथ प्याज को भी मिट्टी में दबाया जाता था। इजिप्ट के मशहूर पिरामिड की अंदरूनी दीवारों और राजाओं के मकबरों पर प्याज की चित्रकारी भी देखने को मिलती है। पिरामिड बनाने वाले मजदूरों को भी प्याज खिलाई जाती थी। इजिप्ट के लोगों का ऐसा विश्वास था कि प्याज की तेज गंध और इसकी जादुई शक्ति मृत व्यक्ति को इस सांसारिक जीवन में फिर से आने में मदद करती है। एक धारणा यह भी थी कि प्याज के एंटीसेप्टिक गुण और इसकी जादुई रचना मृत्यु के बाद व्यक्ति के काम आती है।
इसके अलावा इजिप्ट के कलाकारों ने हर सब्जी की छवि को कीमती धातुओं के बरअक्स रखकर देखा है। इनमें प्याज को सोने के बरअक्स रखा गया है। इससे पता चलता है कि इजिप्ट में प्याज का कितना महत्व था।
इतने गुणों के कारण ही आज भी प्याज सबकी प्रिय बनी हुई है और इसीलिए इसके महंगे होने पर हंगामा मच जाता है। प्याज की महत्ता इस बात से भी सिद्ध होती है कि महंगी होकर यह सरकार गिराने तक की क्षमता रखती है।
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सबसे पहले कहां पैदा हुई ?

प्याज का आकार छोटा होता है और इसके ऊतक (टिश्यूज) बहुत कम निशान छोड़ते हैं, इसलिए विशेषज्ञ इस बात का ठीक-ठीक पता नहीं लगा पाए हैं कि प्याज सबसे पहले कहां और कब पैदा हुई, लेकिन इस बात पर सभी एकमत हैं कि प्याज दुनिया की सबसे प्राचीन सब्जियों में से एक है। आदमी के खेती करने और लिखना शुरू करने से पहले से ही प्याज अस्तित्व में थी। मोटा-मोटा अनुमान ये है कि करीब छह हजार साल से भी ज्यादा समय से प्याज दुनिया में खाई जा रही है। प्याज सबसे पहले मध्य एशिया में पैदा हुई। संभवतः सबसे पहले यह ईरान और पश्चिमी पाकिस्तान में उगाई गई।
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दुनिया में सबसे ज्यादा प्याज कहां

दुनिया में प्याज का सबसे ज्यादा उत्पादन चीन में होता है। दूसरा स्थान भारत और तीसरा अमेरिका का है। अगर टॉप फाइव देशों की बात करें तो पहले तीन स्थान वर्षों से इन तीन देशों के ही चले आ रहे हैं। हां अंतिम दो स्थान पर फेरबदल हो जाता है। जैसे 2008 से पहले चौथे स्थान पर टर्की और पांचवें स्थान पर रूस था, मगर उसके बाद पाकिस्तान चौथे स्थान पर आ गया। टर्की का स्थान पांचवां हो गया और रूस आठवें स्थान पर खिसक गया। 2010 के आंकड़ों के अनुसार चीन में हर साल दो करोड़ आठ लाख मीट्रिक टन से ज्यादा प्याज का उत्पादन होता है। भारत में एक करोड़ 21 लाख, 56 हजार मीट्रिक टन का वार्षिक उत्पादन है।

प्याज काटने वक्त आंसू क्यों निकलते हैं?

प्याज में एक रसायन होता है, जिसका नाम “साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड” है। यह हमारी आंखों की लेक्राइमल ग्लैंड को उत्तेजित कर देता है जिससे आंखों से आंसू बहने लगते हैं। पहले वैज्ञानिक इसके प्रक्रिया के लिए “एलीनेस” नामक एंजाइम को जिम्मेदार ठहराते थे, लेकिन अब एक नया “अपराधी” एंजाइम पाया गया है जिसका नाम “लेक्राइमेट्री-फैक्टर सिंथेस” है। प्याज काटते वक्त आंसू आने की पूरी प्रक्रिया इस प्रकार से घटती है:-
1- जब हम प्याज काटते हैं तो उसमें से “लेक्राइमेटरी-फैक्टर सिंथेस” एंजाइम रिलीज होता है।
2- यह एंजाइम प्याज के सल्फॉक्साइड (अमीनो एसिड) को सल्फेनिक एसिड में बदल देता है।
3- इसके बाद सल्फेनिक एसिड, “साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड” में रूपांतरित होता है।
4- जैसे ही “साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड” हवा के जरिये आंखों के संपर्क में आता है, आंखों की लेक्राइमल ग्लैंड बहुत परेशानी महसूस करती हैं और आंसू बहाने लगती हैं।