by – Mohd.zahid

तबलीगी जमात के लोग अमूमन मुस्लिम समाज में ही भ्रमण करते हैं , दीन और इस्लाम की बारीकियाँ समझाते हैं और अस्र की नमाज़ के बाद मुहल्ले की मस्जिद में होने वाली दीनी तकरीर के लिए दावत देते हैं। यह लोग अपनी यात्रा का प्रारंभ और अंत हर जिले के मरकज़ (केन्द्र) से करते हैं और अपनी ऐसी यात्राओं का खर्च भी खुद ही अपनी हलाल (जायज़) कमाई से करते हैं।

उनकी गलती यह थी कि उनको अपनी यह गतिविधियाँ मार्च के पहले हफ्ते में ही स्थगित करके विदेश से आए लोगों को वापस उनके वतन और शेष लोगों को अपने घर भेज देना चाहिए था। यह मरकज़ जैसे संगठन के लिए सबसे आसान और बेहतर तरीका था।

आप जब पूरी दुनिया में एक मिशन चलाते हैं तो आपको अधिक ज़िम्मेदार होना ही पड़ेगा और मौजूदा भारत में तो और अधिक सतर्क भी रहना पड़ेगा।

यदि आपने डाक्टर ज़ाकिर नाईक प्रकरण से अभी तक कुछ नहीं सीखा है तो अब भी सबक ले लीजिए जहाँ आप को किस छोटे से कारण से लपेट दिया जाएगा उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते जबकि बहुसंख्यक समाज तमाम ऐसे ही काम करके प्रिवलेज पाता रहेगा।

मेरा मानना है कि तबलीगी जमात ने गलती की , 4 मार्च को काबा के “मताफ़” में तवाफ रोक कर जब सेनेटाईज़ कराया जा रहा था तब ही तबलीगी जमात को कोरोना से सतर्क होकर पूरे विश्व में अपनी गतिविधियाँ बंद कर देनी चाहिए थीं , काबा से संदेश ना लेकर आखीर तक अपनी गतिविधियाँ चलाना उनकी गलती थी।

इसके बाद , 16 मार्च को सीबीएससी बोर्ड , 19 मार्च को आईसीएससी बोर्ड की परिक्षाएँ स्थगित हुईं तब भी मरकज़ ने गंभीरता को नहीं समझा। समझना चाहिए था , मरकज़ पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी होती है।

फ्लाईट से आने वाले सभी लोगों की इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग 4 मार्च से होने लगी , उनका यात्रा विवरण लिया जाने लगा और देश में सोशल डिस्टेन्सिंग का प्रचार ज़ोर शोर से होने लगा तब भी मरकज़ को अपनी गतिविधियाँ तुरंत खत्म कर देनी चाहिए थीं।

16 मार्च को दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सभी स्कूल और सिनेमा हाल 31 मार्च तक के लिए बंद करने का आदेश दे दिया। तब भी मरकज़ को सावधान होकर सबको अपने घरों को जाने का फरमान सुना देना चाहिए था। मरकज़ ने यह भी नहीं किया।

यह मरकज़ की गलती थी।

यदि आप इतनी सारी चेतावनी के बाद भी सतर्क नहीं हो सकते तो भाई आपका तो अल्लाह ही मालिक है। फिर आपको सोचना चाहिए कि आप पूरे विश्व में चलने वाले किसी मूवमेन्ट का नेतृत्व करने के योग्य हैं कि नहीं ?

मरकज़ और तबलीगी जमात ने गलती तो की , पर यह सिर्फ़ उनके ही द्वारा की गयी गलती नहीं थी , देश में ऐसी ही गलतियों के एक नहीं सैकड़ों उदाहरण अब तक आ चुके हैं।

तेरहीं से लेकर थाली-घंटा , टार्च दिया से लेकर बर्थडे पार्टी और संसद से लेकर मध्यप्रदेश की सरकार गठन तक , तमाम तीर्थ स्थलों से लेकर गुरुद्वारे तक सैकड़ो उदाहरण मौजूद हैं। इन लोगों ने भी वही मरकज़ वाली गलती की पर यह सब लोग प्रिवलेज धारी बहुसंख्यक हैं।

इन तमाम लोगों की गलतियों का मतलब यह नहीं कि सरकार ने कोई गलती नहीं की। सरकार की हर मामले में कार्यप्रणाली “सर्जिकल स्ट्राईक” टाईप की रही है। बिना सूचित किए बिना मोहलत दिए खटाक से बंदी करने का आदेश सरकार की गलती है। अचानक 8 बजे रात में आकर 12 बजे से बंदी की सूचना देने की हड़बड़ी सरकार की गलती है।

सरकार ने यदि 2-4 दिन की पूर्व सूचना दी होती तो देश में किसी से ऐसी कोई गलती नहीं होती , मरकज़ से भी नहीं होती। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा में ही ऐलान कर देते कि 25 मार्च से 21 दिन का लाकडाऊन होने जा रहा है , आप लोग अपने गृह जनपद चले जाएँ या खाने पीने की व्यवस्था कर लें तब भी इतनी गलती ना हुई होती।

और सरकार यदि मरकज की सूचना पर उनकी गाड़ियों को पास देने की व्यवस्था 24 मार्च को कर देती तब भी यह गलती नहीं होती। अचानक लाकडाऊन करके सरकार यह सोचती है कि 1500 या 2000 लोग 2000-5000 किमी दूर अपने घर चले जाएँ तो इसे आप क्या कहेंगे ?

मुर्खता

गलती सबने की , पर ठीकरा फूटा सिर्फ़ तबलीगी जमात और मरकज़ पर और फिर उनपर डाक्टर ज़ाकिर नाईक वाला ट्रीटमेन्ट अप्लाई हो गया।

बात कोरोना के संक्रमण की थी पर मरकज़ पर डीडीसीए से लेकर बैंक खाते और तमाम किताबों और कागज़ों की जाँच होने लगी।

ज़रा बताईए , किसी और कोरोना मरीज़ या संगठन के साथ ऐसा कुछ हुआ है ? कनिका कपूर से लेकर मुरैना तक ? जहाँ 28 हज़ार लोग आईसोलेशन में हैं। किस किस के बैंक खाते , आयकर रिटर्न चेक किए गये और उनके घरों को गिराने की बात की जाने लगी ?

और अफसोस तो यह कि सरकारों की तरफ से कोरोना के आँकड़ों को वर्गीकरण करके देश के सामने रखा गया। फलाँ जगह इतने कोरोना के मरीज जिसमें इतने तबलीगी जमात वाले , पूरे देश में इतने कोरोना के मरीज़ जिसमें इतने तबलीगी जमात वाले।

कितने बेशर्म हो गये हम की पूरी दुनिया में फैली महामारी का हमने धार्मिक आधार पर वर्गीकरण कर दिया , स्वास्थ मंत्रालय बयान दे रहा है कि तबलीगी जमात के कारण 4•1 दिन में कोरोना के मरीजों की संख्या दो गुनी हो गयी नहीं तो 7•4 दिन में दो गुनी होती।

स्वास्थ मंत्रालय को यह भी बताना चाहिए था कि 7•4 दिन में कौन लोग दोगुना करते ? उनके लोगों का बैंक खाता अयकर रिटर्न चेक होता ? घर गिराया जाता ?

किसी और देश में ऐसा होते देखा है ?

अमेरिका में तो 12 हजार लोग मर गये वहाँ ऐसा कुछ सुना ? इटली ? जर्मनी ? पूरे युरोप ? और तो छोड़िए इस्लाम विरोधी चीन ने ऐसे आकड़े जारी किए ? हिन्दू विरोधी पाकिस्तान ने ?

कृष्ण भक्त संगठन “इस्काॅन” तो घोषणा कर रहा है कि लंदन में उसके एक कार्यक्रम में जो 1000 लोग शामिल थे उनमें से 11 की कोरोना से मौत हो गयी। ब्रिटेन ने उनका अलग से कोई आँकड़ा प्रस्तुत किया ? नहीं।

माफ कीजिएगा , सुलगते ज्वालामुखी के मुँह पर बैठे हैं हम जिसकी आग को हवा मीडिया दे रहा है और इसी बात पर भारत को डब्लूएचओ तक नसीहत दे चुका है कि कोरोना को लेकर धार्मिक आधार पर वर्गीकरण करना बंद करे भारत।

https://www.downtoearth.org.in/…/refrain-from-religious-pro…

तबलीगी जमात के लोग भी हाँड माँस के ही हैं , वह मशीन नहीं कि उनमें संक्रमण नहीं होना चाहिए था , संक्रमित हुए तो शेष लोगों की तरह उनको भी ट्रीटमेन्ट देना चाहिए , आईसोलेशन और क्वारंटाईन में रखना चाहिए , सरकार ने रखा भी पर रायता ज्यादा फैला दिया।

दही का रायता नहीं झूठ का रायता (अगली पोस्ट देखें)

मरकज़ और धार्मिक व्यक्तियों के लिए गलत शब्दों का प्रयोग किया गया जबकि समझना चाहिए कि कौन जानबूझ कर अपने अंदर मृत्यु देने वाला वायरस आने देगा ?

जैसे 5000 को संक्रमण हुआ वैसे ही उनको भी संक्रमण हुआ। पर आज के भारत में उनका जुर्म यह है कि वह दाढी टोपी वाले हैं जिनके कंधे पर बंदूख चलाना और सरकार की कमी छुपाना आसान होता है।

हम जैसों को जितना जल्दी हो यह समझ लेना चाहिए कि आज के भारत में जिन बातों पर हम पर देशद्रोह की धारा लग जाती है वैसी ही बातों पर प्रिवलेजधारियों पर एक एफआईआर तक दर्ज नहीं होती। तो आपको चार कदम आगे जाकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। मरकज़ ने यही नहीं किया , यही उसकी गलती है।

मेरा सुझाव है कि ज़मीन के दो गज नीचे और 7 आसमान के ऊपर की दुनिया के साथ साथ तबलीग के लोग ज़मीन पर चल रही खुद के खिलाफ की साजिशों पर भी सोचें उससे बचने की तरकीब ढूढें और कौम को अपनी तबलीग से इस बारे में शिक्षित करें। पर यह लोग शायद ही ऐसा करें।

बाकी ईश्वर भारतीय मीडिया से देश को बचाए।