by —  सिकंदर हयात   
उपमहाद्वीप में भले लोगो की कोई कमी नहीं हे बहुत हे यहाँ तक की जो लोग पाकिस्तान जाते हे वो कहते हे की पाकिस्तानी तो बहुत अच्छे लोग हे जो लोग विदेशो में पकिस्तानयो से मिलते हे वो कहते हे की पाकिस्तानी तो बहुत सभ्य और भले हे भारत में तो खेर कोई कमी ही नहीं हे भले लोगो की , बांग्लादेश आजकल उस ट्रेक पर आ गया जिस ट्रेक पर से मोदी और भाजपा ने भारत की ट्रेन लुढ़का दी हे तो बहुत भले लोग हे चारो तरफ बहुत हे मगर रिज़ल्ट नहीं निकलता हे क्यों नहीं निकलता हे क्योकि उपमहाद्वीप को एक शुद्ध सेकुलर मुस्लिम विचारधारा चाहिए वो ही नहीं हे क्यो नहीं हे — ? इसलिए नहीं हे की इंसान की एक बेसिक फितरत होती हे की वो अपना पैसा तवज़्ज़ो वही इन्वेस्ट करता हे जहा उसे रिजल्ट रिटर्न या तो मिलता हे या तो दीखता हे इसलिए कोई भी उस विचारधारा में इन्वेस्ट नहीं करता हे जिसकी भारतीय उपमहाद्वीप को सबसे अधिक जरुरत हे एक ” शुद्ध सेकुलर मुस्लिम विचारधारा ” सब हे यही मिसिंग हे . उपमहादीप में साठ करोड़ मुस्लिमो के बीच एक शुद्ध सेकुलर मुस्लिम विचारधारा के पनपने में अड़ंगे बाज़ी देखिये किस कदर हे इसलिए उपमहादीप का कोई एक कोना एक गली एकगांव एक कॉलिज एक कुनबा हद तो ये की एक wtsup ग्रुप तक भी ऐसा नहीं हे जहा इस विचारधारा के बीज में से पौधा पनप सके ना खाद हे न धुप न हवापानी ये तो हे ही , फिर कुचलने के लिए बुटो की भरमार हे .
जैसे देखिये तारिक फ़तेह जब तक कनाडा में थे कितने शांत सौम्य प्यारे ” शुद्ध सेकुलर मुस्लिम भारतीय उपमहादीप विचार ” लगते थे ना . फिर क्या हुआ भारत आते ही एक खबीस एक चुगद बनकर रह गए हे — ? कारण ये हे की यहाँ आते ही उन्होंने देखा की सपोर्ट तो कुछ नहीं हे उन्होंने क्या किया की एक शुद्ध सेकुलर भारतीय मुस्लिम विचारधारा में से शुद्ध शब्द का ” शुद्ध ” का कत्ल कर दिया और जाकर भाजपा और सरकार और ट्रोल की गोद में बैठ गए ताकि सपोर्ट सिस्टम काम करने लगे- लगा हो गया . अब ठीक वो चाहे जो करे जो बन जाए मगर अब तारिक फ़तेह अब ये वो विचारधारा नहीं रही ” शुद्ध सेकुलर भारतीय मुस्लिम ” इन्वेस्टर ना होने से ही भारतीय उपमहाद्वीप में ये विचारधारा का पनप पाना कितनी मुश्किल जटिल और सर का दर्द हे  भारतीय उपमहाद्वीप को तक़रीबन सौ सालो से लगातार एक मिसिंग विचारधारा की जरुरत रही हे वो हे शुद्ध बिलकुल शुद्ध मुस्लिम सेकुलर विचारधारा शुद्ध हो सेकुलर हो मुस्लिम हो कॉन्क्रीट विचारधारा हो जो कहे की हमे कोई क्लेश नहीं चाहिए . हमे शोषण मुक्त समाज चाहिए जिसके लिए हिन्दू मुस्लिम एकता अनिवार्य हे ये चाहिए ही चाहिए . मगर ये विचारधारा 170 करोड़ आबादी के साउथ एशिया में एक गाँव एक गली एक कोने एक युनिवेर्सिटी एक ग्रुप तक में नहीं हे इसलिए भी भयंकर क्लेश हे , इसलिए इतना शोषण इतनी गरीबी इतना अपमान हे जनता का , जैसे इसी की उपज की दो दो बार बहुमत की भाजपा सरकार हे जो जनता को इतना अपमानित करती हे तो ये सब हे और ये विचारधारा शुद्ध सेकुलर भारतीय ( उपमहादीप भी ) मुस्लिम विचार और विचारधारा कही नहीं हे , कही भी नहीं हे जहा पनप रही हो नहीं कही नहीं हे इसलिए ये शरजील जैसे इकबाल जैसे हादसे होते हे   !
ट्रेजिडी हे इस विचारधारा की की इसमें किसी को अपने लिए रिटर्न नहीं दिखाई देता हे . जैसे फ़र्ज़ कीजिये जिन पैसे वाले बिड़ला बजाज आदि ने गाँधी जी को सपोर्ट दिया था उनके क्या रिटर्न मिला———— ? तत्काल रिटर्न गाँधी एक संत भी थे एक संत की सेवा का सुख . फिर गाँधी जी ने पूना पेक्ट करके उनके धर्म की रक्षा की, फिर गाँधी जी ने एक महान देश भारत का निर्माण करके दिया जहा ये घराने और फलफुले अरबपति हुए कर लो दुनिया मुट्ठी में हुए तो रिटर्न ही रिटर्न .जिन मुस्लिम जमींदारों बिज़्नेस्मेनो अलीगढ़ के पढ़े लिखे छात्रों ने जिन्ना और मुस्लिम लीग में निवेश किया उन्होंने अपनी जमीने बचाई आज तक पाकिस्तान में जमींदारा कायम हे पढ़े लिखो को नौकरी मिली बिज़्नेस्मेनो ने तो पैसा कमाया ही जिन लोगो ने कम्युनिस्ट विचारधारा में निवेश किया उन्हें केरल बंगाल त्रिपुरा के महान प्रदेश मिले केरल तो पुरे उपमहाद्वीप की सबसे बेहतरीन जगह हे . जिन्होंने हिंदुत्व में निवेश किया उन्हें तो रिटर्न मिलता ही रहा. खेर तो सबको अपने अपने निवेश पर रिटर्न मिलता या दूर दीखता रहता हे. उपमहाद्वीप में सिर्फ शुद्ध सेकुलर मुस्लिम विचारधारा ही ऐसी हे की जिसमे कोई रिटर्न किसी को नहीं दीखता हे जबकि उपमहाद्वीप को जरुरत इसकी ही सबसे अधिक हे .जादू देखिये की विचारधारा ” शुद्ध सेकुलर भारतीय मुस्लिम कांक्रीट विचारधारा ” के लिए तो सपोर्ट नहीं हे मगर जैसे ही आप इसे अलग अलग करेंगे आपको सपोर्ट मिलने लगेगा किसी ना किस ताकत का शब्दों पर गौर कीजिये उपमहाद्वीप में ” शुद्ध ” ” सेकुलर ” ” मुस्लिम ” ” विचारधारा ” इसके लिए सपोर्ट नहीं हे . सपोर्ट तब हे जब आप इसमें मिलावट शुरू कर देंगे तब सपोर्ट सिस्टम काम करने लगेगा. ये आप सोशल मिडिया के माध्यम से भी समझ सकते हे या शुरू करते हे रश्दी तस्लीमा से शुद्ध सेकुलर वैचारिक लोग लेकिन जैसे ही कहा की वो मुस्लिम नहीं हे बस सपोर्ट शुरू. आगे शुद्ध मुस्लिम जाकिर नायक ओवेसी अजमल एन्ड पार्टी तो फिर तो नोटों सपोर्टो की बारिश शुरू ,
भले इंसान मगर वो भी अपनी तवज़्ज़ो वही निवेश करते हे जहा से रिटर्न आये या दूर क्षितिज पे सही मगर आता दिखाई दे. इंसान वही निवेश करता हे जहा उसे रिटर्न दीखता हे निवेश समर्थन सपोर्ट रिटर्न इनके हज़ारो रूप होते हे अब ये जो उपमहाद्वीप की जरुरी विचारधारा हे ” शुद्ध सेकुलर भारतीय मुस्लिम विचारधारा कांक्रीट ” . कांक्रीट से मेरा आशय हे मज़बूत , ये ना हो की कल को भाजपाई आपको पाकिस्तानी कहे या कही आपको हिन्दू कटटरपंथ से बुरा वयवहार मिले आदि तो आपके आंसू निकल जाए .कांक्रीट मतलब कांक्रीट की चाहिए ही चाहिए जैसे गाँधी नेहरू मुस्लिम लीग महसभा वगैरह बगैरह के लाख दबाव के बाद कांक्रीट रहे वैसे ही कांक्रीट विचारधारा . यही विचारधारा उपमहाद्वीप के कश्मीर समस्या युद्ध दंगे पंगे पलायन वगैरह की समस्या खत्म कर एक महासंघ बनवाकर उपमहाद्वीप के सौ करोड़ लोगो को दुनिया में सबसे अधिक गरीबी शोषण असमानता से मुक्त करवा सकती हे मगर इसमें निवेश कौन करेगा ——– ? कोई नहीं करेगा बुरे आदमी क्यों निवेश करके अपने पेरो पे कुल्हाड़ी चलवाएंगे, भले आदमी इंसानी फितरत से मज़बूर की रिटर्न नहीं दीखता इसमें उन्हें अपने लिए———- ? किसी भी रूप में नहीं दीखता जो की सच हे यहाँ ये समझ सकते हे की गाँधी कितने महान दूरंदेश आदमी थे गाँधी एक अंग्रेजी बाबू थे, मगर बाना उन्होंने एक बेहद गरीब का एक संत का धरा, ताकि गरीब जनता कनेक्ट करे ताकि पैसे वाले निवेश करे पैसा तो चाहिए ही चाहिए . उन्होंने संत का रूप किया बिड़ला बजाज आदि ने निवेश किया तत्काल रिटर्न में पैसे वालो को एक संत की सेवा का संगत पंगत का आध्यतमिक सुख मिला. गाँधी ने पूना पेक्ट करके उनके हिन्दू धर्म की रक्षा की. गाँधी कांग्रेस को गाँव गाँव तक ले गए गाँधी ने नेहरू को गढ़ा गाँधी नेहरू ने इन बिड़ला बजाज आदि को महान कांक्रीट सिस्टम वाला देश बाजार बनाकर दिया जहा इनका बिज़नेस फला फुला दुनिया में इज़्ज़त मिली जिन्होंने गाँधी जी को निवेश दिया था उन्हें सब रिटर्न साफ़ साफ़ दिख रहा था शीशे की तरह साफ़, इसलिए वो करते रहे तभी एक दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र वज़ूद में आया गाँधी जी की महानता चतुराई दूरंदेशी जैसा की मेने विस्तार से बताया की हालात ही कुछ ऐसे उलझे हुए हे की भारतीय उपमहादीप में इतनी विशाल मुस्लिम आबादी के बीच शुद्ध सेकुलर विचारधारा का वज़ूद नहीं हे इसलिए नहीं हे की सपोर्ट ही नहीं हे निवेश ही नहीं हे इनके बिना कुछ नहीं हो सकता हे होना छोड़ो ये बात ही आज तक जनता के सामने नहीं आ पायी हे की भाई ऐसा ऐसा हे ये तक आज तक कोई नहीं रख पाया हे .