by – Mohd.zahid

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार 11-01-2020 अर्थात कल दोपहर कुलगाम जिले के काजीगुंड में मीर बाजार के पास एक नाका लगाया था। दक्षिणी कश्मीर के डीआईजी अतुल गोयल के नेतृत्व में टीम ने एक कार को घेरा जिसमें हिज़बुल मुजाहिद्दीन के दो वांटेड आतंकियों संग थे डिप्टी एसपी देविंदर सिंह। उनके पास से गाड़ी में अवैध 2 एके-47 रायफ़ल मिलीं।

गिरफ़्तारी के दौरान मौके पर मौजूद DIG अतुल गोयल ने देविंदर को पीटा और बाद में देविंदर सिंह के घर की जब तलाशी ली गई तो वहां से 1 अवैध एके-47 रायफ़ल और दो पिस्टल और मिलीं।

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जानते हैं डिप्टी एसपी देविंदर सिंह कौन हैं ?

संसद हमले में फाँसी पर लटके आतंकी अफ़ज़ल गुरु से जब पूछताछ की जा रही थी तो एक शख्स का नाम सामने आया था “देविंदर सिंह” जो जम्मू कश्मीर पुलिस के एक अफ़सर थे।

अफज़ल गुरू ने तिहाड़ जेल से अपने वकील को एक पत्र लिखा था , जिसमें उसने स्पष्ट लिखा था कि बडगाम के हमहमा में तैनात डीप्टी एसपी देविंदर सिंह ने एक हमलावर मोहम्मद को दिल्ली ले जाने और एक फ्लैट किराये पर दिलाने और उसके लिए कार खरीदने के लिए दबाव डाला था। अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 में हुई फांसी के बाद अफजल के परिजनों ने इस पत्र को सार्वजनिक किया था जिसमें अफ़ज़ल गुरु का कहना था कि डिप्टी देविंदर सिंह ने उसे फंसाया है।

लेकिन इस बारे में किसी ने कोई संज्ञान नहीं लिया और पुलिस और बाकी जांच एजेंसियों ने देविंदर सिंह को किसी भी तरह से इन्वेस्टिगेट नहीं किया। अब, 11 जनवरी 2020 को वही देविंदर सिंह जो कि डिप्टी सुपरिंटेंन्डेंट ऑफ़ पुलिस हैं उसके साथ हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकी और तमाम हथियार बरामद हुए।

ध्यान दीजिए कि संसद पर हमले में गिरफ़्तार अफ़ज़ल गुरु ने इन्वेस्टिगेशन में बताया था कि साल 2000 में देविंदर सिह ने उसे एक STF कैम्प में कई दिनों कैद रखा और उसे टॉर्चर किया।

फ़िर 2001 में देविंदर ने उसे 1 अनजान आदमी मोहम्मद को दिल्ली ले जाने और वहां उसे कमरा दिलाने के लिए कहा था। अफ़ज़ल गुरु ने शक ज़ाहिर किया था कि वो आदमी हिन्दुस्तानी नहीं था क्यूंकि वो कश्मीरी भी ठीक से नहीं बोल पा रहा था। लेकिन उसे मजबूर किया गया और उसे मोहम्मद को दिल्ली लाना पड़ा । मोहम्मद ने करोल बाग़ से एक कार ख़रीदी। अफ़ज़ल और मोहम्मद को लगातार देविंदर से फ़ोन कॉल्स आते रहते थे।

यही वो कॉल्स थे जिनका ज़िक्र अफ़ज़ल गुरु ने किया था और कहा था कि कॉल रिकॉर्ड्स निकालें जाएं जो कि देविंदर सिंह के संसद पर हमले में शामिल होने का सबूत दे देंगे। लेकिन उन कॉल रिकॉर्ड्स की किसी ने भी सुध नहीं ली और नाम “देविंदर सिंह” होने के कारण वह हर जाँच से बच गया। अब जब देविंदर सिंह पकड़ ही लिया गया है तो संसद हमले में उसकी संलिप्तता की जाँच होनी चाहिए।

ध्यान दीजिए कि उच्चतम न्यायालय ने “जनभावना” के आधार पर अफ़ज़ल गुरू को फाँसी की सज़ा सुनाई और 2013 में अफ़ज़ल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया था।

2019 में देविंदर सिंह को राष्ट्रपति के हाथों पुलिस मेडल मिला था।

तो समझिए कि नाम में बहुत कुछ रखा है।

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