By– mohd.zahid

CAA और NRC को लेकर अब सब कुछ स्पष्ट है , सरकार कुछ भी भ्रम फैलाए , लोग भ्रम में आने वाले नहीं हैं , लोग तो छोड़िए सरकार के चापलूस टीवी ऐंकर और खुद भाजपा के 10 करोड़ सदस्य भी सरकार द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम में नहीं आ रहे हैं।

यही कारण है कि अंजना ओम कश्यप अब CAA और NRC का वही अर्थ लोगों को समझा रही हैं जो CAA और NRC के विरुद्ध आंदोलनकारी समझा रहे हैं , यही कारण है कि देश के गृहमंत्री अमित शाह के मिस काल अभियान को उनकी पार्टी के ही 10 करोड़ कार्यकर्ताओं में 9•5 करोड़ कार्यकर्ताओं ने खारिज कर दिया , यही कारण है कि देश के शक्तिशाली प्रधानमंत्री द्वारा प्रचारित हैसटैग , ट्विटर पर फुस्स हो गया।

यह कुछ उदाहरण समझने के लिए काफी है कि देश ही नहीं , चाटुकारिता करते ऐंकर और भाजपा के ही 95% लोग सरकार द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम के झाँसे में नहीं आए , अन्यथा 10 करोड़ सदस्यों वाली पार्टी के शक्तिशाली चाणक्य अमित शाह की अपील पर मात्र 52 लाख से अधिक लोग CAA के समर्थन में मिसकाल करते।

सरकार के CAA और NRC में फँस जाने के और भी बहुत से उदाहरण हैं , चाणक्य जी के भड़काऊ बयान , एक इंच पीछे ना हटने की घोषणा और अपने ही देश में अपनी ही डबल इंजन सरकार वाले राज्य में विरोध के डर से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की लगातार कैन्सिल होती यात्राएँ और कार्यक्रम।

दरअसल , सरकार द्वारा CAA और NRC पर उठाए कदम से सरकार की स्थीति भी “खाया पिया कुछ नहीं , गिलास तोड़ा 12 आना” वाली हो गयी है , इस मुद्दे से ध्रुविकरण पैदा करके झारखंड और दिल्ली चुनाव जीतने की आस लगाए पार्टी , झारखंड चुनाव हार चुकी है और तमाम सर्वे के अनुसार दिल्ली भी बुरी तरह हारने जा रही है। तो उसको भी समझ में आ चुका है कि धार्मिक संप्रदायिकता का खेल अब बहुत दिनों तक नहीं चलने वाला है।

सरकार ने ऐसा करके देश में अपना जनाधार खोया है , इसका स्पष्ट उदाहरण है कि पिछले 6 साल तक मोदी के डर से चूँ ना बोलने वाले तमाम गैर राजनैतिक लोग , फिल्म कलाकार और क्रिकेटर अब सड़कों पर हैं।

सरकार ने सिर्फ़ देश में ही अपना नुकसान नहीं किया , विदेशों में भी लगभग हर देश में CAA और NRC के विरुद्ध ना सिर्फ़ प्रदर्शन हुए बल्कि वहाँ की प्रमुख मीडिया ने भी प्रमुखता से धार्मिक भेदभाव वाले इस बिल का विरोध किया जिससे भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को धक्का लगा। अब विदेशों में जाकर महात्मा गाँधी के सामने सर झुकाने का ड्रामा करना देश के प्रधानमंत्री के लिए आसान नहीं होगा क्युँकि दुनिया उनको समझ चुकी है कि उनका गाँधी जी के सिद्धांतों से कोई लेना देना नहीं।

दरअसल , पिछले 6 वर्षों में देश के मुसलमानों ने देश ही नहीं विदेश के लोगों का भी अपने व्यवहार से दिल जीता है , श्रीराम और गाय के नाम पर सौ से अधिक माॅबलिंचिंग में मारे गये मुसलमानों पर देश के मुसलमानों का किया गया सब्र , ट्रिपल तलाक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले और संसद से पारित बिल के माध्यम से शरियत में हुए दखल के बावजूद देश के मुसलमानों का किया सब्र , बाबरी मस्जिद पर आए उच्चतम न्यायालय के फैसले पर मुसलमानों का किया सब्र देश और दुनिया की जनता देख रही है।

यही कारण है कि जब CAA और NRC का मुसलमानों ने विरोध किया तो देश और दुनिया के तमाम धर्म के लोग साथ खड़े हो गये क्युँकि यह हक की लड़ाई है , अपने देश में रहने और यहीं मर कर भारत की मिट्टी में दफ्न हो जाने की लड़ाई है।

शाहीन बाग़ , जामिया और एएमयू की बहन बेटियों आपको सलाम , हौसला बनाए रखना , ज़हरीली चट्टान दरक रही है।