by — सिकंदर हयात
एक तरफ एक अंतर्जातीय विवाह का मुद्दा छाया हुआ हे दूसरी तरफ भारत एक के बाद एक लोगो दुआरा आर्थिक और दूसरे दबावों से तंग आकर अपनी पूरी पूरी और प्यारी फैमली को ही मौत के घाट उतार कर खुद आत्महत्या करने की दिल दहला देने वाली घटनाएं हो रही हे गलत शादियों और गलत रिश्तो से लोग परेशान हे मनोरोगी हो रहे हे आज जरुरी हे की अब शादी के मुद्दे पर धर्म जाती वर्ग से थोड़ा सा हटकर इंसानी फ़ितरतो से विचार करते हे तो खेर पहले एक ताना की वैसे तो हिन्दू एकता को समर्पित दो सुप्रसिद्ध सोशल संघीयो ने इस विवाह हादसे के बाद एक ने जहा दुखी होकर व्यंगय में कहे तो जहा खाट पकड़ ली हे वही दूसरे ने ने फेमनिज्म के खिलाफ फरसा उठा लिया हे और शायद लिखा की आजकल तो सारी लड़कियों की पसंद गलत होती हे कुछ ने तो घिनौनापन दिखाते हुए कन्या भूर्ण हत्या ऑनर किलिंग के इशारे से किया कुछ इस टाइप बात कही ,खैर असल मुद्दा कुछ और हे बात ये हे की अब समय आ गया हे की हम शादी से इतर भी समाज के खासकर लड़कियों के विशेष तौर पर जीवन के महत्व को पहचाने लड़किया भी पहचाने और उनके घर वाले भी वर्ना बहुत तबाही होगी में सख्त चेतावनी दे रहा हु आज हम डेढ़ सौ करोड़ होने वाले हे भीड़ से जीना हराम हे हर जगह फिर दूसरा की आज हर कोई अपना जीवन जीना चाहता हे कुछ करना चाहता हे अब समय आ गया हे की शादी का दबाव हटवाओ समाज पर से , खासकर लड़कियों पर से , लोगो को जीने दो परिवार शादी के पागलपन में आबादी इतनी ना बढ़ाओ लोगो को मारो मत , लोग अपनी फेमली को मारकर आत्म हत्या कर रहे हे रोज की बात हे लोगो को जीने दो खासकर लड़कियों पर तो शादी का इतना दबाव रहता हे की जहा जहा लड़कियों को अपना जीवन अपनी मर्जी से जीने की छूट भी दे भी दी गयी हे वहा तक भी वो जल्द से जल्द एक अच्छा लड़का सेट कर जल्दी से सेट होना चाहती हे बाद में भले ही घर उनसे चले न चले अंदाज़ा लगाइये की शादी कितना बड़ा स्यापा हे भारत में । वही सोचिये की जहा लड़कियों की बागडोर उनके बड़ो के हाथो में हे वहा जल्द से जल्द शादी की कितनी जल्दी रहती होगी आबादी रॉकेट की स्पीड से बढ़ा रहा हे जीना मुहाल कर रहा हे लोगो को मार रहा हे ये प्रेशर , मेने सोशल मिडिया और रियल लाइफ में कितनी लड़किया देखी हे जिन्होंने फिर भी अपनीउ मेहनत से संघर्ष करके फिर अच्छी कामयाबी हासिल कर ली हे पर वो कुछ उदास लगती हे चिढ चिढ़ी हो रही हे बहुत तो डिप्रेशन में हे एक जीनियस साइकाइट्रिस्ट के पास में लड़कियों की बढ़ती संख्या देख रहा हु इनकी वही प्रॉब्लम हे की इन्होने बड़ी मेहनत से कुछ ना कुछ अच्छी कामयाबी हासिल कर ली हे मगर समाज इनकी कामयाबी पर कोई खुश होने पीठ थपथपाने की जगह इन्हे लगातार ताने मारता रहता हे अरे 25 की हो गयी अरे 30 की हो गयी हाय राम 35 की हो गयी शादी नहीं हुई अल्लाह तौबा अल्लाह तौबा कब होगी , इसकी शादी ना हुई तो जलजला आ जाएगा बल्कि आ चूका हे समाज बताता हे की शादी ना हुई तंग आकर ये समाज से कट कर भी रहने लगती हे और समाज से कट कर कोई खुश नहीं रह सकता हे मनुष्य आख़िरकार एक सामाजिक प्राणी हे लेकिन फिर खाली शादी से बेफिक्र न हो फिर रिज़ल्ट यानी बच्चे भी जरुरी हे जल्द से जल्द ये ना किये तो खासकर लड़कियों की जिंदगी बिलकुल झंड होने का दबाव बनाया जाता हे लड़कियों की एक बायोजिकल क्लाक भी होती हे जिससे ये लड़किया भारी प्रेशर में आकर ज़ल्दबाज़ी में गलत साथी का भी चुनाव कर लेती हे यानी न करो तो समाज जीने नहीं देगा और गलत साथी का चुनाव हो गया तो तिल तिल के घुट घुट के जीना होगा इससे ये डिप्रेस्ड होती हे अपनी कामयाबी का आनद लेने की जगह तनाव में रहती हे झुंझलाती रहती हे और जल्द से जल्द लड़का पसंद करती हे इस विषय में बहुत जल्दबाज़ी करती हे फिर कुछ यु शिकायत करते हे की सारी लड़किया उलजुलूल लड़को को पसंद कर रही हे ———- ? ,

फिर शादी को भारत में इतना ज़्यादा रोमांटिसाइज़्ड किया जाता हे की प्रेम विवाह हो या अरेंज मैरिज । लड़को और खासकर लड़कियों के -शादी को लेकर इतने सपने इतनी फ़ितरते होती हे की ज़ाहिर हे फिर यथार्थ का कठोर धरातल पर आते ही कोहराम मच जाता हे ये कोहराम आप चारो तरफ देख रहे होंगे सयाने इंसान जो होते हे वो क्या करते हे की इंसानी फ़ितरतो से अरबो कमाते हे इसी तरह देखिये भारत में विवाह और प्रेम से जुडी दो सबसे अधिक लोगो महिलाओ द्वारा देखि गयी फिल्मे ( ddlj हम आपके हे कौन ) जिनमे विवाह को लेकर लोगो के रोमांस को पीक तक ले जाकर उसे सेल किया गया और अरबो रूपये कमाए गए इन्होने क्या दिखाया की एक मध्यमवर्गीय लड़की का रिश्ता और रोमांस फिर अरबपति परिवार से आएगा फिर उस परिवार में ना कोई सास होगी न ननद फिर ये की सोशल सर्किल बड़ा होगा फिर ये की घर में सिर्फ बाबू जी ही जिन्दा होंगे ताकि वो लड़की को आते ही गीता कुरान और घर की चाबियां ( सत्ता ) सौंप देंगे और खुद गमलो में पानी देते रहेंगे बड़ा भाई बिना जायदाद हड़पे बिज़नेस की सारी मुसीबते संभालेगा ताकि छोटा आराम से रोमांस कर सके सोशल सर्किल बड़ा होगा तकि रौनक रहे और जब यूरोप के टूर से आये तो बाबू जी घर को साफ़ रखेंगे नौकरो की सुपरवाइज़री करते रहेंगे फिर यही फितरत एकता कपूर और दूसरे सीरियल निर्माता ने खूब कैश की की हर दूसरे सीरियल की यही कहानी होती थी की आम सी लड़की का रिश्ता हमेशा सुपर रिच घर से आता दिखाया जाता था हर सीरियल की यही कहानी , मतलब विवाह को लेकर इस कदर बड़ा सपना सेल किया गया यहाँ विवाह को इसी तरह रोमांटिसाइज़्ड करा जाता हे कम या ज़्यादा पर मोटा मोटा यही रहता हे । इन सब दबावों ने लड़का लड़की पति पत्नी परिवार सभी का जीना हराम किया हुआ वक्त आ गया हे की समाज लोगो पर से शादी विवाह परिवार बच्चो के होने का दबाव हटाए लोगो को जीने दो घूमने दो काम करने दो खासकर दुनिया को बेहतर बनाने में लगने दो होनी होगी शादी बच्चे जब होंगे तब होंगे बीस में नहीं तो चालीस पचास में हो जाएंगे जिन्दा रहेंगे खुश रहेंगे फिट होंगे तो कल को सब ठीक हो जाएगा मगर आज जीने दो शादी की ज़ल्दबाज़ी दबाव क्लेश घरेलू दबाव शादी जो तब भी न हो तब भी से लोगो को मारो मतपहले इस दबाव को हटवाया जाए वेस्ट में भी यही हुआ तभी वो बेहतर दुनिया बना पाए ध्यान रहे की भारत की सबसे बड़ी शोषणकारी ताकते हे जो हे उनमे से भी कुछ लोग जनसँख्या नियत्रण की बात कर रहे हे दो बच्चो के कानून की बात कर रहे हे बहुत से उग्र राइटिस्ट लेकिन ध्यान दे की वो भी समाज पर से शादी और बच्चो का दबाव हटाने की बात नहीं कर रहे हे वो भी जल्द शादी और बच्चे ही चाहते हे आपसे , बस सिर्फ वो बच्चे दो से अधिक नहीं चाहते हे वो भी इसलिए की दूसरे धर्म की आबादी ना बढे , सिर्फ इसलिए , आपसे तो वो भी जल्द अपनी ज़ात में शादी और बच्चे चाहते हे ताकि वो और उनके आका आपको गुलाम बनाये रखे और गुलामी की जंजीर काटने वाले विचारो की भूर्ण हत्या उसी तरह होती रहे जैसे ये अभी गैर ज़ात में शादी से नाराज़ होकर इनडाइटरेक्टली कन्या भ्रूण हत्या की बात कर रहे हे सिकंदर हयात 9971712174