rapeआयेशा खान

बेटी निकलती है घर से तो
कहते हो छोटे कपडे
पहन कर मत जाओ ….
पर बेटे से नहीं कहते
हो कि नज़रों मैं गंदगी
मत लाओ….

बेटी से कहते हो कि
कभी घर कि इज्जत
ख़राब मत करना …
बेटे से क्यों नहीं कहते
कि किसी के घर कि
इज्जत से खिलवाड़ नहीं करना …

हर वक़्त रखते हो नज़र
बेटी के फ़ोन पर …
पर ये भी तो देखो बेटा
क्या करता है इंटरनेट पर .

किसी लड़के से बात करते देखकर
जो भाई हड़काता है .
वो ही भाई अपनी गर्लफ्रेंड
के किसे घर मैं हंस हंस
कर सुनाता है .

बेटा घूमे गर्लफ्रेंड के साथ तो कहते हो अरे बेटा बड़ा हो गया .
बेटी अपने अगर दोस्त से भी
बातें करें तो कहते हो बेशर्म हो गयी
इसका दिमाग ख़राब हो गया …..

पहले शोषण घर से बंद करो
तब शिकायत करना समाज से …….

हर बेटे से कहो कि हर बेटी कि इज़ज़त करे आज से
आयशा को गलियां देने वालो
पहले आयशा को घूर घूर के देखना बंद करो
पहले खुद के अन्दर तमीज और तहजीब लाओ
फिर मुझे समझाना की मै कैसी हूँ
मैं जैसी भी हूँ , तुम सबसे अच्छी ही हूँ …

जब मैं निकलती हूँ घर से
तो कहते हो की आयशा तुम
बुरखा पहेन कर निकला करो
एक बात बताओ की अगर बुरखा पहनू
तो क्या ये गारंटी है की मेरा बलात्कार नहीं होगा |
बुरखा तो वो भी पहनती है जो
जिश्म फरोशी का धंधा करती है
क्या सिर्फ बुरखा पहनने से कोई लड़की शरीफ हो जाती है ?

बंद करो अपनी घटिया सोच
और अपनी आँख पर बुरखा पहनो
मैं तो नहीं पहन सकती इतनी चिलचिलाती धुप में बुरखा
तुम पहन सकते हो तो एक दिन सिर्फ पहन कर दिखा दो
बात कडवी है लेकिन स्वीकार करो