रफाल का भूत मोदी का पीछा नहीं छोड़ रहा है, न कभी छोड़ सकता है, यह हम सब जानते हैं।‘चौकीदार चोर है’ की गूंज-अनुगूंज आगामी चुनाव में छाई रहेगी। मोदी चाहते थे इसे युद्ध के ढोल-नगाड़ों के शोर में डुबो दें, लेकिन अब वह भी संभव नहीं रहा है। खुद मोदी के सिर पर वह जिस प्रकार नाचने लगा है, इसका नमूना कल नई दिल्ली में ‘इंडिया कनक्लेव’ की सभा में देखने को मिला जब उन्होंने रफाल को याद करते हुए कहा कि -‘अभी रफाल होता तो बात कुछ और होती।’ यह बात वह व्यक्ति कह रहा है, जिसने अपने एक दोस्त को लाभ पहुंचाने के लिये 126 रफाल के सौदे में कतर-ब्यौंत करके मनमाने ढंग से उसे 36 विमानों के सौदे में बदल दिया और हमारे देश में इन विमानों के उत्पादन की संभावनाओं को नष्ट कर दिया।

रफाल सौदे में की गई चोरी, अनिल अंबानी की जेब में सीधे तीस हजार करोड़ पहुंचाने के अपराध पर पर्दा डालने के चक्कर में मोदी ने यह कह कर हमारी वायु सेना के शौर्य पर भी मिट्टी डालने से परहेज नहीं किया है। अपने उपलब्ध साधनों से वायु सेना ने पाकिस्तानी हमले का जिस प्रकार मुकाबला किया, उसे और छोटा कर दिया है। और मोदी कहते हैं कि अब ‘अभिनंदन’ शब्द का अर्थ बदल गया है!

कोई उनसे पूछे कि इस शब्द का अर्थ बदल कर अब क्या हो गया है? अभिनंदन उस विंग कमांडर का नाम है जिसे पाकिस्तान ने बंदी बना कर छोड़ दिया है। इस पूरी घटना से अभिनंदन शब्द को कौन सा नया अर्थ मिल गया है? जब तुम खुद कह रहे हो कि इस लड़ाई में रफाल के अभाव के कारण हमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो फिर ‘अभिनंदन’ शब्द को नया अर्थ कैसे मिल गया?

मोदी को तब भी शर्म नहीं आई थी जब उन्होंने भारत के एक लड़ाकू विमान का गिराया जाना, पायलट अभिनंदन की पाकिस्तान के द्वारा गिरफ्तारी और फिर पाकिस्तान के द्वारा उसकी रिहाई को अपना ‘पायलट प्रोजेक्ट’ कहा था! उनके जैसा हाल ही उनके पालतू मीडिया का है। जिस समय हमारे विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी की कार्यवाही चल रही है, उसी समय भारत का मीडिया पाकिस्तान की सरकार और वहां के समाज को सौ-सौ गालियां देकर राष्ट्र की सेवा कर रहा था!

अब कम से कम इतना तो साफ है कि पुलवामा, बालाकोट और अभिनंदन प्रसंग पर भारत के चुनावों की पृष्ठभूमि को छोड़ कर कोई भी चर्चा कोरी बकवास के अलावा कुछ नहीं है।अन्य सारी सामरिक रणनीति आदि की चर्चाएं चुनाव के वक्त चैनलों के समय को बर्बाद करने की मोदी कंपनी की एक खास चाल के अलावा कुछ नहीं रह गई है।

बालाकोट के सच को अब खुद केंद्रीय मंत्री एसएस आहलूवालिया ने भी यह कह कर साफ कर दिया है कि –

“ मैंने भारतीय मीडिया की रिपोर्ट देखी है, और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भी । …मैंने मोदीजी को भी देखा है। (हवाई हमले की) घटना के बाद चुरू (राजस्थान) की एक जनसभा में वे बोल रहे थे। क्या उन्होंने कहा कि 300 लोग मार गिराये गये हैं? क्या भाजपा के किसी प्रवक्ता ने ऐसा कहा? क्या अमित शाह ने कहीं भी ऐसा कहा ? ”

उन्हीं के शब्दों में -“किसी प्रकार की कोई क्षति नहीं हुई है क्योंकि हमने तुम्हारे घर के बगल में बम गिरा कर यह साबित किया है कि हम इस प्रकार ध्वस्त कर सकते हैं। …यह संदेश देना जरूरी था। तुम्हारी निगरानी और सुरक्षा के बावजूद हम तुम्हारे घर में घुस सकते हैं, जगह की सिनाख्त करके उसे उड़ा सकते हैं। हम किसी प्रकार की मानवीय क्षति नहीं चाहते थे।”

यह बात आहलूवालिया ने खुद 1 फरवरी को फेसबुक पर जारी किये गये अपने वीडियो में कही है।

(“There has been no damage because I have dropped a bomb next to your house to prove that I can destroy in this manner…. It was necessary to send out this message. Despite your surveillance and security, I can reach your house, identify the location and can destroy it. We did not want to have any human casualty,” Ahluwalia says in a video he himself had uploaded on Facebook on Friday night.

In the video. Ahluwalia asks: “I have seen the reports of the Indian media as well as those of the international media…. I have also seen Modiji. After that incident (air strikes), he was speaking at a public meeting in Churu (Rajasthan). Did he say that 300 people got killed? Have any of the spokespersons of the BJP said so? Has Amit Shah said so, anywhere?”—The Telegraph, 3rd March 2019)

केंद्रीय मंत्री आहलूवालिया कहते हैं कि वायु सेना ने बालाकोट में सांकेतिक हमला भर किया था। उसने किन्हीं लोगों को निशाना नहीं बनाया था। अर्थात्, ‘बूथबली’ मोदी ने अपने चुनावी प्रचार के लिये वायु सेना के प्रवक्ता से भी चैनलों के सामने झूठी बातें कहलाई हैं! कहना न होगा, इस प्रकार खुद मोदी और उनके मंत्री आहलूवालिया ने वायु सेना के प्रवक्ता और उन सारे न्यूज चैनलों के मुंह पर कालिख पोत दी है जो बालाकोट में पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाने और तीन सौ से अधिक आतंकवादियों के मारे जाने का दावा कर रहे थे।

सचमुच मोदी की सेवा के चक्कर में अब तक सुप्रीम कोर्ट राफेल जैसे मामले में झूठे तथ्यों के आधार पर फैसला देकर अपनी नाक कटा चुका है; सीएजी ने रफाल सौदे के सच पर पर्दादारी का अपराध किया है; सीबीआई का तो अस्तित्व ही डोल चुका है। और अब, सेना के सारे प्रवक्ता भी झूठ बोलने लगे हैं! रक्षा मंत्री को तो गुमशुदा मंत्री कहा जाने लगा है। मोदी राष्ट्र की सभी संवैधानिक और पवित्र मानी जाने वाली संस्थाओं को नष्ट करके ही विदा होंगे, ऐसा लगता है।

मोदी ने अपनी परम अज्ञता के कारण अब कश्मीर को एक अन्तरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। जिस प्रकार इस बालाकोट संकट के समाधान में अमेरिकी राष्ट्रपति दखलंदाजी करके अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, उससे हमने दुनिया को यही दिखाया है कि हममें अपने पड़ोसी के साथ समस्या को निपटाने की खुद की सामर्थ्य नहीं है। इतने सालों से भारत जिस कश्मीर के मुद्दे पर किसी बाहरी शक्ति की भूमिका से इंकार करता रहा है, मोदी ने इसे नाभिकीय खतरे का बिंदु बना कर बाहरी ताकतों को यहां आमंत्रित कर लिया है। अब अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को यहां दखलंदाजी करने का जैसे अपने आप एक अधिकार मिल गया है, जैसा कि ट्रंप ने कहा भी है कि हम इस क्षेत्र और पूरी दुनिया के लिये पैदा हुए अस्थिरता और विध्वंस के इस खतरे से आंख मूंद कर नहीं रह सकते हैं।

और अब भी मोदी और उनका पालतू मीडिया अश्लील मुद्राओं के साथ नाच रहा है! आरएसएस इस पूरे प्रकरण पर अभी तक चुप्पी साधे हुए है। लेकिन मोदी सरकार के इस चरम बचकानेपन और राष्ट्रीय शर्म की जिम्मेदारी से वह अपने को अलग नहीं कर सकता है।

(अरुण माहेश्वरी लेखक-टिप्पणीकार हैं और कोलकाता में रहते हैं।)

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