by — लव कुमार सिंह

कथित हैकर शैयद शुजा के भारत में चुनावी मशीन ‘ईवीएम’ को हैक करने संबंधी अनेक दावे एबीपी न्यूज की प्रारंभिक पड़ताल में हवा हो गए। मंगलवार 22 जनवरी की रात नौ बजे प्रसारित कार्यक्रम ‘मास्टर स्ट्रोक’ के मुताबिक-

  • शुजा ने दावा किया है कि वह ईवीएम बनाने वाली कंपनी ईसीआईएल (ECIL) का पूर्व कर्मचारी है। लेकिन ईवीएम बनाने वाली कंपनी ने उसके इस दावे को गलत ठहरा दिया है। हैदराबाद स्थित इस कंपनी ने चुनाव आयोग को लिखकर सूचित किया है कि इस नाम का कोई कर्मचारी कभी उसके यहां नहीं रहा और न ही ऐसे किसी व्यक्ति की सेवा कभी कंपनी ने ली।
  • अमेरिका में शुजा का बताया गया पता भी गलत निकला। चैनल की अमेरिका स्थित संवाददाता ने उसके बताए पते की खोजबीन की थी।
  • शुजा ने 2014 के चुनाव परिणामों से अगले दिन हैदराबाद के एक गेस्ट हाउस में अपने साथी रहे 11 लोगों की हत्या होना बताया। लेकिन चैनल को हैदराबाद में शुजा द्बारा बताए गए उप्पल नामक इलाके में कथित गेस्ट हाउस नहीं मिला। यह भी नहीं पाया गया कि वहां पूर्व के वर्षों में ऐसा कोई गेस्ट हाउस रहा भी था।
  • शुजा ने कहा कि 11 लोगों की हत्या को छुपाने के लिए आरोपियों ने इलाके में सांप्रदायिक दंगा कराया, लेकिन उसकी बताई गई तारीख के आसपास हैदराबाद के उस इलाके में कोई दंगा नहीं हुआ। न ही इतने बड़े कथित हत्याकांड के बाद कथित रूप से मारे गए लोगों के परिजनों ने कोई शिकायत ही दर्ज कराई। न ही इतने बड़े पैमाने पर हुई कथित हत्याओं को लेकर हैदराबाद में उस अवधि में या बाद में भी कोई खबर कहीं छपी।
  • शुजा का दावा है कि गेस्ट हाउस के उस हत्याकांड में उसे भी गोली लगी, लेकिन वह अस्तपाल न जाकर गोली लगी अवस्था में ही एक दिन बाद शिकागो रवाना हो गया, जबकि गोली लगे व्यक्ति का घायल अवस्था में हवाई यात्रा करना असंभव है।
    शुजा की लंदन में वीडियो प्रेस कॉन्फ्रेंस कराने वाले आशीष रे कांग्रेस से निकट से जुड़े हैं। लंदन में राहुल गांधी का कार्यक्रम भी आशीष रे ने ही आयोजित कराया था।

कुल मिलाकर कथित हैकर शुजा के दावे कांग्रेस द्वारा प्रायोजित राजनीतिक स्टंटबाजी ही लगते हैं। भाजपा भी इसी प्रकार के आरोप कांग्रेस पर लगा रही है। जब तक कोई अन्य तथ्यात्मक और विश्वसनीय जानकारी सामने नहीं आ जाती तब तक तो ऐसा ही लगता है कि राफेल के झूठ में फेल होने पर कपिल सिब्बल, राहुल गांधी के लिए एक और झूठ का जुगाड़ करने लंदन गए थे, लेकिन नया झूठ तो दो-चार दिन भी ठीक से टिकता नहीं लग रहा है।

कांग्रेसी कह सकते हैं कि एबीपी न्यूज, भाजपा का पिट्ठू बन गया या उसका कार्यक्रम देखकर इस पोस्ट को लिखने वाला मैं भाजपा का पिट्ठू हूं। लेकिन कोई किसी का पिट्ठू भी क्यों न हो, तथ्य तो किसी के पिट्ठू नहीं होते और जो तथ्य 22 जनवरी की रात एबीपी न्यूज ने पेश किए, उनकी काट फिलहाल नहीं दिखती। अगर काट है तो हमें भी उसका इंतजार रहेगा।

एबीपी न्यूज से अलग हटकर बात करें तो–

  • शुजा महोदय हैकिंग में रिलायंस जियो द्वारा मदद की बात कह रहे हैं, लेकिन रिलायंस जियो 2014 में अस्तित्व में ही नहीं थी।
  • शुजा अगर 2014 या 2015 में ही इस बारे में कुछ बोलता तो वह आज से भी बड़ा खुलासा होता, लेकिन इतने दिन तक वह चुप रहा।
  • शुजा महोदय बड़ी चालाकी से ऐसे लोगों (मुंडे, गौरी लंकेश आदि) का नाम ले रहे हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। यानी आरोप भी लगा दिया जाए और कोई खंडन करने वाला भी न हो।
  • लंदन में हुए आयोजन के सहआयोजक ने भी कह दिया है कि शैयद सुजा के दावे विश्वास योग्य नहीं हैं।
  • शैयद शुजा ने अपने बहुत ही गंभीर आरोपों सत्यता के लिए सुई के बराबर भी सुबूत प्रस्तुत नहीं किए हैं।
  • चारों तरफ से घिरता देख कपिल सिब्बल भी कह रहे हैं कि उन्हें तो यह कहानी की साइंस फिक्शन जैसी लग रही है। यानी कोरी काल्पनिक कथा।

एबीपी न्यूज ने तो अपनी स्टोरी में शैयद सुजा को एक नहीं कई बार सिरफिरा भी कह दिया है।

अब मोदी समर्थक नहीं माने जाने वाले कुछ पत्रकारों की राय पर भी गौर कर लेते हैं-

निखिल वागले लिखते हैं-
एक बात स्पष्ट हो जानी चाहिए कि 2014 में मोदी इसलिए चुनाव जीते, क्योंकि जनता संप्रग के दूसरे कार्यकाल में उससे उकता गई थी। ईवीएम को लेकर मैं मूर्खतापूर्ण साजिशों पर यकीन नहीं करता। कांग्रेस और विपक्ष को जनादेश का अपमान नहीं करना चाहिए।

अजित अंजुम का कहना है-
ये शुजा नाम के नकाबपोश ने जो प्लॉट तैयार करके पेश किया है, उसकी तस्दीक और तहकीकात जेम्स बांड और शरलॉक होम्स भी नहीं कर पाएंगे। ईवीएम हैकिंग थ्रिलर कहानी सुनाने वाले इस ‘कलाकार’ पर जो यकीन कर रहे हैं, उन्होंने आंख, कान और नाक बंद कर रखे हैं।

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अंत में एक और दिलचस्प बात-

राहुल गांधी ने कहा- “मेरे पास सुबूत नहीं, लेकिन राफेल में चोरी हुई है।”

कथित हैकर शैयद शुजा ने कहा- “2014 के आम चुनावों के साथ कुछ और चुनावों में ईवीएम को हैक करके चुनाव नतीजे प्रभावित किए गए, लेकिन मेरे पास इसके कोई सुबूत नहीं है।”

दोनों बयानों की समानता हैरान करने वाली है।