by – वीर विनोद छाबड़ा

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का अगर कोई सबसे ख़राब घटना है तो वो है जावेद मियांदाद और डेनिस लिली के दरम्यान बीच पिच पर हुई मार-कुटाई। लेकिन ऐसा हुआ क्यों ये जानना भी ज़रूरी है। मियांदाद सिंगल लेने के लिए नॉन-स्ट्राइकिंग एन्ड की तरफ जा रहे थे। बीच में लिली आ गए। उन्होंने मियांदाद को गाली भी दी। मियांदाद ने उन्हें बल्ले से परे धकेला। अंपायर ने हस्तक्षेप किया। शायद यहाँ मामला ख़त्म हो जाता, लेकिन लिली ने मियांदाद के पैड पर लात मारी। मियांदाद को गुस्सा आ गया, खुद को अपमानित महसूस किया। कोई उन्हें लात मार दे और वो चुप रहें। बदला लेना ज़रूरी है। वो अपना आपा खो बैठे और बल्ला लेकर लिली को मारने दौड़े। अगर अंपायर क्राफ्टर ने बीच-बचाव नहीं किया होता तो शायद मियांदाद ने लिली को बल्ले से ठोक दिया होता।

मियांदाद का कहना था कि वो ऐसा नहीं करना चाहते थे, लेकिन लिली ने उन्हें ऐसा करने के लिए उकसाया। पहले रन लेते समय रास्ता रोकने का प्रयास करते हुए गाली दी और फिर लात मारी। सोचने वाली बात है, ऐसे में कोई बन्दा क्या करत? चुपचाप रह जाता? खून का घूँट पी लेता? अंपायर से शिकायत करता? हो सकता है कि कोई जेंटलमैन क्रिकेटर ऐसा करता। लेकिन मियांदाद जैसा बात-बात गुस्सा होने वाले बन्दे से ऐसी उम्मीद तो करनी ही नहीं चाहिए थी। सवाल ये भी उठता है कि लिली ने मियांदाद को उकसाया क्यों? दरअसल, उस समय मैच के हालात ये थे कि ऑस्ट्रेलिया की पहली इनिंग 180 के जवाब में पाकिस्तान की पारी 62 रन पर सिमट चुकी थी। इसमें एक समय उनका स्कोर 26 पर 5 विकेट था। दूसरी इनिंग में ऑस्ट्रेलिया ने 424 रन बना डाले और पाकिस्तान को 543 रन बना कर जीतने की चुनौती दी। पाकिस्तान के दो विकेट 27 पर गिर गए। मगर मियांदाद और मंसूर अख़्तर रास्ते का रोड़ा बन गए। पहली पारी में 5 विकेट चटकाने वाले लिली दूसरी पारी में भी तूफानी गेंदबाज़ी कर रहे थे, लेकिन मियांदाद थे कि आउट होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वो जल्दी जल्दी से पाकिस्तानियों को रवाना करना चाहते थे। जब काम नहीं बना तो वो हताश हो गए और इसके बाद जो कुछ हुआ शायद इसी का परिणाम था।
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में इस वाक्ये की बहुत भर्तस्ना हुई, लेकिन लिली की सबसे ज्यादा। भूतपूर्व कप्तान बॉब सिम्पसन और कीथ मिलर ने लिली को ससपेंड करने की मांग की। क्रिकेट की बाइबल विसडेन ने इसे सदी की सबसे शर्मनाक घटना बताया।

हालांकि लिली ने शाम को पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में जाकर सॉरी बोला। लेकिन पाकिस्तानी टीम इससे संतुष्ट नहीं हुई, क्योंकि लिली ने ‘बदला’ शब्द इस्तेमाल करते हुए सॉरी बोला था। लिली ने अपने बोर्ड को धमकी भी दी, अगर उन्हें ससपेंड किया गया तो वो ‘सन्यास’ ले लेंगे। बोर्ड डर गया, लिली पर 200 डॉलर जुरमाना लगाया। इधर पाकिस्तानी टीम ने भी दौरा छोड़ कर स्वदेश लौटने की ज़बरदस्त धमकी दी। अगर ऐसा हो जाता तो बहुत बड़ा संकट पैदा हो जाता, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की साख पर बट्टा लग जाता। तब बीच का रास्ता निकला। लिली पर दो मैच का प्रतिबंध लगा और जुरमाना घटा कर 120 डॉलर कर दिया गया। लेकिन ये दंड मामूली था। लिली को सिर्फ दो एकदिनी मैच मिस करने पड़े। बहरहाल, पाकिस्तान ने वो मैच 286 रन से गंवाया।
ये घटना हालांकि दफ़न हो चुकी है, लेकिन इतिहास से तो नहीं मिटाई जा सकती।