अफ़ज़ल ख़ान

इस्लामी देशो को शर्म से डूब मरना चाहिये !

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अफ़ज़ल ख़ान

अमेरिका की जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों डॉ. शीरज़ादे रहमान और हुसैन असकरी ने बहुत दिलचस्प शोध है. उन्होंने एक इस्लामी सूचकांक (Islamicity Index) विन्यास दिया है जिसके तहत उन देशों की सूची तैयार की गई है जहां अर्थव्यवस्था, प्रशासन, मानव और राजनीतिक अधिकार और विदेश मामलों मानव नियमों के क़रीब हैं. इस संबंध में ‘आर्थिक इस्लामी सूचकांक’ और ‘सामान्य इस्लामी सूचकांक’ विन्यास दिए गए हैं. आपको यह जानकर गंभीर आश्चर्य होगा कि उपरोक्त विचार सामने रखते हुए जो सूचियाँ विन्यास दी गई हैं उनमें इस्लामी देशों प्रदर्शन बेहद खराब नजर आती है. ‘आर्थिक इस्लामी सूचकांक’ में आयरलैंड ने पहला स्थान हासिल किया है जबकि इसके बाद ‘डेनमार्क, लकसम बर्ग, स्वीडन, अमेरिका, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, फिनलैंड और बीलजयम नंबर आता है. मुस्लिम देशों में शीर्ष मलेशिया 33 वें स्थान पर जबकि सऊदी अरब 91 वें और व्यास 111 वें नंबर पर आए हैं.

दूसरी ओर, सामान्य इस्लामी सूचकांक में भी स्थिति कुछ ज्यादा अलग नहीं, इस न्यूज़ीलैंड पहले नंबर पर और उसके बाद लकसम बर्ग, आयरलैंड, आइसलैंड, फिनलैंड, डेनमार्क, कनाडा, ब्रिटेन और फिर ऑस्ट्रेलिया को रखा गया है. मुस्लिम देशों में मलेशिया नंबर 38 जबकि कुवैत के 48 और टॉप 50 में दो इस्लामी देशों जगह बनाने में सफल हो सके हैं. अनुसंधान विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अगर किसी देश में भ्रष्टाचार हो, गैर न्यायाधीश शासक हूँ, कानून सभी के लिए बराबर न हो, वोट देने का अधिकार की स्वतंत्रता न,प्रेस की आजादी न हो, आप को अपनी बात कहने का हक न हो ,आप के अधिकार को दबाया जा रहा हो, स्वतन्त्रता न हो तो ऐसे मुल्क को गैर इस्लामी कहा जाएगा. उनके अनुसार दुखद बात यह है कि आजकल के दौर में जो देशों मुस्लिम कहलाते हैं उनके हां चालू प्रणाली बिल्कुल भी इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार नहीं है.

विशव मे 52 से अधिक इस्लामी देश है मगर अफसोस है के कोई भी देश इस्लाम के बताये हुए रास्ते पे नही चल रहा है. अफसोस इस बात है के जो मुसलमान यूरॉप, इंग्लेंड और अमरीका को गाली देते है वे देखे के यही मुल्क इस्लामी सूचांक के सब से करीब है. अभी आप देखिये के कुछ लोग इस रिपोर्ट को भी गलत क़रार देगे के इसे अमरीका की यूनिवर्सिटी ने बनाया है. असल मे हम हक़ीक़त सुनने के लिये तैयार नही है और सच से अपना मुंह मोड लेते है——- लीजिये एक शेर—–

सच बात मान लीजिये चेहरे पे धूल है
इल्जाम आइनो पे लगाना फजूल है.

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52 thoughts on “इस्लामी देशो को शर्म से डूब मरना चाहिये !

  1. Raj

    अल्फ़ाज़ व मानी में तफावात नहीं लेकिन
    मुल्ला की अज़ान और है मुज़ाहिद की अजान और
    परवाज है दोनों की इसी इक फ़िज़ां में
    क़र्क़स का जहां और है शाहीन का जहां और.
    एक ही खबर को देखने और लिखने का अपना अपना नज़रिया अलग अलग हो जाता है यदि लिखने वाले के अंदर सचाई और ईमानदारी ना हो. आपने अपने लेख का हवाला जिस व्यक्ति से लिया वो शीया समुदाए से है अब शीया और सुन्नी कब एक होने वाले हैं. कहीं आप भी मॉडर्न मुसलमान तो नहीं हो रहे हैं जो अपने को सर्वोत्तम दिखाने के लिये अपने ही धर्म के अच्छे कामों को नीचा और घटिया दर्शाने में लगे हुवे हैं. याद रखो हर समय हर परिस्थिति में सत्य बोना ही असल जिहाद है चाहे उसके लिये तुम्हारी मौत ही क्यों ना आ जाए.
    कोई उमीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती,
    मौत का दिन मोताय्यन है मगर नींद क्यों रात भर नहीं आती.

    Reply
    1. Rajesh kumar

      गिरते हैं सहसवार ही मैदान ए जंग में वो तिफ्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले. एक बात आपने अनजाने में क़ुरान के अनुसार सत्य लिखा है के मुस्लिम समाज अंत में डूबने जा रहा है (क्योंकि क़यामत तभी आएगी जब इस धरती से मुस्लिम अर्थात इस्लाम को मानने वाला खत्म हो जाएगा) परंतु तेज़ी से मुस्लिम धर्म में धर्मांतरण कर आने वालों को देख कर ऐसा लग नहीं रहा के इतने जल्दी अंत/ क़यामत का समय आएगा.

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    2. afzal khan

      राज जी शिया मुसलमान आप की नजर मे मुसलमान आनहि तो शिया की नजर मे भी सुन्नी मुसलमान नही है. इस तरह कोई मुसलमान नही है—— बात ही खतम– दूसरी बात आप मुझे एक भी इस्लामी मुल्क का नाम बतादे जहा इस्लाम के अनुसार हुकूमत ह रही है, लोगो को बोलने तक का अधिकार नही है, अपना लीडर चुनने का अधिकार नही है…. जो इस्लाम के शिक्षा के विरुद्ध है. अफ़ज़ल ख़ान

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        1. afzal khan

          ali askari sahab

          Mera apna manna hai ke ke Iran me bhi puri tarah se Islami hukumat nahi hai, waha bhi logo ko bolne ki ijaazat nahi hai aur na hi puri tarah islami rule chal raha hai, magar personaly mai is se pahle president ka bahut bara fan hu.

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    3. HARAMI RAM

      कहते है की हिन्दू धर्म सब से
      पुराना धर्म
      है, जबकि ये आज तक

      पता नही इनको की
      1) हिन्दू शब्द न किसी वेद में है,
      हिँदू शब्द ना पुराण, में ना
      महाभारत में, न रामायण में। जबकि हिन्दू
      नाम फारसियो का दिया हुआ नाम है,
      जिसका अर्थ है, काला, चोर,कायर।
      2) कहते है की वेद सब से पुराने
      है,जबकि ये
      तक पता नही वेद कब आये किसने
      लिखे,
      किसने सुने, वेद
      की असली पाण्डुलिपि कहा है.
      अगर कोई
      कहे
      की असली पाण्डुलिपि कहा है
      तो कहते
      है की वो तो अंग्रेज चुरा के ले गए।
      3) अगर कहो की वेदों में
      अवेज्ञानिक तथ्य
      है, और टकराव है वेदों की शिक्षा में
      जैसे
      की कही मूर्ती पूजा को मना किया गया है
      तो कही सही बताया गया है
      कही एक
      इश्वर को बताया गया है तो कही ३३
      करोड़ बताया गया है, कही मॉस खाने
      को कहा गया है
      तो कही मना किया गया है, इन
      ग्रंथो में
      जात पात उच्च
      नीच ,सती प्रथा आदि अनेक
      कुरीतिया है ,
      तो ये जवाब देते है
      की असली वेद
      तो अंग्रेज
      चुरा के ले गए। अंग्रेजो ने वेदों और
      पुराणों और मनुस्मृति और दुसरे ग्रंथो में
      मिलावट कर दी।
      4) अगर कहो की हिन्दू धर्म केवल
      भारत में
      ही क्यों है, तो जवाब देते है
      की हिन्दुओ ने
      कभी हिंसा नही की और
      अपने धर्म
      को दुसरे देशो में प्रचार नही किया।
      अगर
      हिन्दू इतने ही अहिंसक है
      तो वेदों पुराणों, रामायण, महाभारत, में
      केवल लड़ाई और खून
      ख़राबा क्यों भरा पड़ा है।
      5) यहाँ तक की हर भगवान् और
      देवी देवता के पास तरह तरह के
      हथियार
      है। और सब ही हिन्दू ग्रंथो में
      केवल लड़ाई
      ही लड़ाई है। यहाँ तक
      की सब से बड़े
      भगवान ब्रम्हा विष्णु और महेश
      भी लड़ाई
      करते हुए मिलेंगे।
      6) इतिहास अगर आप पढेंगे तो जानेंगे
      की न
      जाने कितने हिन्दू राजाओ हिन्दू धर्म
      छोड़ दिया। जैसे की चन्द्रगुप्त मोर्य
      ने
      जैन धर्म अपना लिया और उसके बच्चो ने
      भी। हर्षवर्धन ने जैन धर्म
      अपना लिया।
      अशोक ने बुद्ध धर्म अपनाया और बुद्ध धर्म
      का प्रचार किया आज बुद्ध धर्म को हिन्दू
      धर्म से ज्यादा माना जाता है, विश्व में
      सैकड़ो देश बुद्ध धर्म को मानते है। लेकिन
      हिन्दू धर्म केवल भारत में
      ही बचा हुआ है।
      गुरु नानक देव दे इस हिन्दू धर्म को छोड़
      दिया और सिख धर्म
      की नीव
      रखी।
      7) अगर हिन्दू इतने ही अहिंसक
      है
      तो भारत में अन्य धर्मो को मानने
      वालो का क़त्ल अ आम क्यों किया जाता है,
      और दंगे करके उनको मारा काटा जाता है।
      जैसे कर्नाटक में इसाई का क़त्ल अ आम ,
      गोधरा आसाम और भारत के कोने कोने में
      मुस्लिमो का कत्ल अ आम। १९८४ में
      सीखो का क़त्ल अ आम। सिक्किम
      मडिपुर में
      इसाई का क़त्ल अ आम। जबकि विश्व में
      कही भी हिन्दुओ के
      खिलाफ दंगे या क़त्ल अ

      Reply
      1. Vidhya Bharti

        Jaisa ki tumne kaha………
        To
        Ved kabhi badle nahi, ve uchcharan vidhiyon,gaan vidhyaon se surakshit hain.Ved matra Ishwar aadesh hain,unme kisi ka itihas nahin hai, vahan tak hi ved mool roop mein hain.Baaki Opnishad aadi vedon ke hi vistar hain.Dhyan rakhiye…..Ved Sanskrit mein hai aur sanskrit ke ek shabd ke 25 kam se kam arth hote hainn.Vedon ke arth ka vistar anant hai.
        Aapki Kuran,jo ki Muhammad ke dehant ke ke kareeb 100 sal baad puri kitab bankar aayi.Usse pahle kuran tukdo mein thi.Kya garantee hai ki kuran apne mool roop mein hai?Apke hi phirke shayad Kadiyani phirka iljam lagata hai ki pahle kuran mein Ali ka naam hi Allah ke liye ata tha,lekin use Sunnion ne badal diya.

        Reply
      2. Vidhya Bharti

        Yadi tumko hindu dharm ki itni chinta hai to pahle apne dharm ki chinta karo.Yadi himmat ho,to Pandit Chamupatiji ka “Chaudahanwin ka Chand ” kitab KA JAWAB DO, Kitab padhke tumhe pata chal jayega ki Tum kitne paani mein ho.
        Swami Dayanand Saraswati ji ne ‘Sathyarth Prakash Likhi”.Phir Maulavi Sanaulla Khaan ne “Haq prakash” likhi.Tab “Pandit Chamupatiji’ ne “Chaudahanwin ka Chand “,jiska aaj tak koi Jawaab nahin Aya,
        JAWAB DE SAKOGE?

        Reply
      3. sunil

        bhai kabhi apna dharam bhi dekho, terriost banana shikhata hai aapka dharam..
        or apne jo naam rakha hai HARAMI RAM us par mai action jarur lunga. .
        wait nd watch

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      4. hindu

        अपराधी को सजा दी जाती है ,आर्य पहले समझाते है फिर डराते है तब भी नही सुधरे तब अस्त्र उठाते है
        हिन्दू सत्य है और सत्य का अंत कभी नही होता इसलिए हमे अपना विस्तार करने की जरूरत नही है

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      5. Pankaj Sharma

        हिंदू शब्द की उत्पत्ति का सच और झूठ
        अक्सर हम हिन्दू लोगों को बरगलाने के लिए…. हमें यह सिखाया जाता है कि… “हिन्दू” शब्द….. हमें… मुस्लिमों या फिर कहा जाए तो… अरब वासियों ने दिया है…!
        दरअसल… ऐसी बातें करने के पीछे कुछ स्वार्थी तत्वों का मकसद यह रहा होगा कि… हिन्दू… अपने लिए “हिन्दू” शब्द सुनकर… खुद में ही अपमानित महसूस करें… और, हिन्दुओं में आत्मविश्वास नहीं आ पाए… फिर… हिन्दुओं को खुद पर गर्व करने या… दुश्मनों के विरोध की क्षमता जाती रहेगी …!
        और, बहुत दुखद है कि…. समुचित ज्ञान के अभाव में… बहुत सारे हिन्दू भी… उसकी ऐसी … बिना सर-पैर कि बातों को सच मान बैठे हैं… और, खुद को हिन्दू कहलाना पसंद नहीं करते हैं… जबकि, सच्चाई इसके बिल्कुल ही उलट है…!
        हिन्दू शब्द… हमारे लिए… अपमान का नहीं बल्कि… गौरव की बात है… और, हमारे प्राचीन ग्रंथों एक बार नहीं… बल्कि, बार-बार “हिन्दू शब्द” गौरव के साथ प्रयोग हुआ हुआ है….!
        वेदों और पुराणों में हिन्दू शब्द का सीधे -सीधे उल्लेख इसीलिए नहीं पाया जाता है कि… वे बेहद प्राचीन ग्रन्थ हैं… और, उस समय हिन्दू सनातन धर्म के अलावा और कोई भी धर्म नहीं था… जिस कारण… उन ग्रंथों में .. सीधे -सीधे … हिन्दू शब्द का उपयोग बेमानी था..!
        साथ ही… वेद .. पुराण जैसे ग्रन्थ… मानव कल्याण के लिए हैं… हिन्दू-मुस्लिम-ईसाई … जैसे क्षुद्र सोच उस समय नहीं थे…. इसीलिए … उन ग्रंथों में ….हिन्दू शब्द पर ज्यादा दवाब नहीं दिया है… लेकिन प्रसंगवश ..हिन्दू और हिन्दुस्थान शब्द का उल्लेख वेदों में भी है..!
        @@ ऋग्वेद में एक ऋषि का नाम “सैन्धव” था जो बाद में “हैन्दाव/ हिन्दव” नाम से प्रचलित हुए… जो बाद में अपभ्रंश होकर “”हिन्दू”” बन गया..!
        @@ साथ ही…. ऋग्वेद के ही ब्रहस्पति अग्यम में हिन्दू शब्द इस प्रकार आया है…
        हिमालयं समारभ्य यावत इन्दुसरोवरं ।तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते ।।
        ( अर्थात….हिमाल य से इंदु सरोवर तक देव निर्मित देश को हिन्दुस्थान कहते हैं )
        @@ सिर्फ वेद ही नहीं … बल्कि.. मेरु तंत्र ( शैव ग्रन्थ ) में हिन्दू शब्द का उल्लेख इस प्रकार किया गया है….
        ‘हीनं च दूष्यत्येव हिन्दुरित्युच्चते प्रिये’
        ( अर्थात… जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं )
        @@ इतना ही नहीं…. लगभग यही मंत्र यही मन्त्र शब्द कल्पद्रुम में भी दोहराई गयी है…..
        ‘हीनं दूषयति इति हिन्दू ‘( अर्थात… जो अज्ञानता और हीनता का त्याग करे उसे हिन्दू कहते हैं )
        @@ पारिजात हरण में “हिन्दू” को कुछ इस प्रकार कहा गया है |
        हिनस्ति तपसा पापां दैहिकां दुष्टम ¡हेतिभिः शत्रुवर्गं च स हिंदुरभिधियते ।।
        @@ माधव दिग्विजय में हिन्दू शब्द इस प्रकार उल्लेखित है ….
        ओंकारमंत्रमूलाढ्य पुनर्जन्म दृढाशयः ।गोभक्तो भारतगुरू र्हिन्दुर्हिंसनदूषकः ॥
        ( अर्थात … वो जो ओमकार को ईश्वरीय ध्वनि माने… कर्मो पर विश्वास करे, गौ पालक रहे… तथा…. बुराइयों को दूर रखे…. वो हिन्दू है )
        @@ और तो और…. हमारे ऋग्वेद (८:२:४१) में ‘विवहिंदु’ नाम केराजा का वर्णन है…. जिसने 46000 गाएँ दान में दी थी….. विवहिंदु बहुत पराक्रमी और दानीराजा था….. और, ऋग वेद मंडल 8 में भी उसका वर्णन है|
        ## सिर्फ इतना ही नहीं…. हमारे धार्मिक ग्रंथों के अलावा भी अनेक जगह पर हिन्दू शब्द उल्लेखित है….
        ** (656 -661 ) इस्लाम के चतुर्थ खलीफ़ा अली बिन अबी तालिब लिखते हैं कि… वह भूमि जहां पुस्तकें सर्वप्रथम लिखी गईं, और जहां से विवेक तथा ज्ञान की‌ नदियां प्रवाहित हुईं, वह भूमि हिन्दुस्तान है। ( स्रोत : ‘हिन्दू मुस्लिम कल्चरल अवार्ड ‘- सैयद मोहमुद. बाम्बे 1949.)
        ** नौवीं सदी के मुस्लिम इतिहासकार अल जहीज़ लिखते हैं….. “हिन्दू ज्योतिष शास्त्र में, गणित, औषधि विज्ञान, तथा विभिन्न विज्ञानों में श्रेष्ठ हैं।मूर्ति कला, चित्रकला और वास्तुकला का उऩ्होंने पूर्णता तक विकास किया है। उनके पास कविताओं, दर्शन, साहित्य और नीति विज्ञान के संग्रह हैं।भारत से हमने कलीलाह वा दिम्नाह नामक पुस्तक प्राप्त की है।इन लोगों में निर्णायक शक्ति है, ये बहादुर हैं। उनमें शुचिता, एवं शुद्धता के सद्गुण हैं। मनन वहीं से शुरु हुआ है।
        @@ इस तरह हम देखते हैं कि…. इस्लाम के जन्म से हजारों-लाखों साल पूर्व से हिन्दू शब्द प्रचलन में था…. और, हिन्दू तथा हिन्दुस्थान शब्द … पूरी दुनिया में आदर सूचक एवं सम्मानीय शब्द था…!
        साथ ही इन प्रमाणों से बिल्कुल ही स्पष्ट है कि…. हिन्दू शब्द ना सिर्फ हमारे प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित है … बल्कि… हिन्दू धर्म और संस्कृति हर क्षेत्र में उन्नत था…. साथ ही , हमारे पूर्वज काफी बहादुर थे और उनमे निर्णायक शक्ति थी… जिस कारण विधर्मियों की….. हिन्दू और हमारे हिंदुस्तान के नाम से ही फट जाती थी….. जिस कारण उन्होंने ये अरब वाली कहानी फैला रखी है…!

        Reply
      6. प्रदीप

        8785028128 इस पर काल करो,,, सारे प्रश्नों का उत्तर दे दिया जायेगा।।

        Reply
  2. Rajesh kumar

    ईस्लामी या मुस्लिम समाज मे कूछ लोग आतक्वादी बनने के लिये उकसाते है मुस्लिम समाज की गरीबी , अशिक्षा , बेरोजगारी के लिये कूच नही करते जिससे मुस्लिम समाज अंतमे डूबने जा रहा है.

    Reply
  3. Raj

    जब कोई मुल्क इस्लामी नहीं है तो फिर किस बात के लिये हाय तौबा बात यहीं खत्म हो नहीं गई. इस्लामी मुल्क का मतलब है खिलाफत की हुक़ुमत (Caliphate), जब तालिबानी लोग शरिया क़ानून अथवा खलीफ़ा हुक़ुमत लागू करते हैं तब आप जैसे लोग ही सबसे पहले चिल्लाना शूरू कर देते हैं के ए आतन्कवाद है. मुसलमान को तो बहुत पहले ही बता दिया गया है के कब कौनसा दौर आएगा और उस दौर में कैसे रहना है. अब कोई दज्जाल के समय में कहेगा के दुनियाँ में कोई देश अथवा कोई मुसलमान नहीं दिखता तो ए तो उसके दिमागी दिवालियापन की बात है.

    Reply
  4. gayasuddin khan

    चेहरा अगर बुलंद है और चेहरे पे धूल है.आयन में जो देखो आईना फ़ुजूल है आईना उसका चेहरा है और उसपे धूल है सच मान लीजिए यही सबको कुबूल है गर झांक कर देखोगे तुम अपने आयन में इल्जाम दूसरों पे लगाना फ़ुजूल है.

    Reply
  5. Jim O'Donnell

    Do we have a feel for the reliability of numbers like this, given the social and legal penalties for saying things like “I am an atheist” in many of these countries

    Reply
  6. Tejraj Kumawat

    एक सही ओर सच्चा लेख लिखा कुछ भी गलत नही लिखा लेकिन कुछ लोगो को बुरा लगेगा

    Reply
  7. Alok Mishra

    मई जायदा नही जनता हु लेकिन भारतीये मुस्लिम दुनिया मे सबसे अच्छे मुस्लिम है इंडिया मे हिन्दू धर्म मुस्लिम धरम और अदर्स सब खुले रूप मे स्वीकार है और हम फ्रीडम हो के मानते है

    Reply
    1. NAGESH

      HISTORY PADO AL0K JI. MUSLIM DHARM KA UDAY INDIA ME NAHI HUO. YE SAB CONVERTED MUSLIMS HAI JO PAHLE HINDU THE. SACCHAI KO FACE KARNA HAR DHARM NAHI SIKHATA. HA FOLLOW KARNA JARUR SIKHATA HAI. RIGHT?

      Reply
  8. Deepak Saxena

    आपकी बात में सच्चाई ने झकझोर दिया,

    Reply
  9. hari

    बहुत मस्त लेख लिखे है बिहारी बाबू , लेकिन इस्लाम मे सिर्फ सिया सुन्नी मे ही आपस मे नही कटते मरते रहते है बल्कि दूसरे कास्ट भी है जहा मुस्लिम आपस मे ही दंगे कर के मर जाते है दूसरा आज पाकिस्तान ने भी बज्रिस्तान मे बहुत सारे आतंकवादी को मारा जिसमे कुछ अच्छे परिवार बच्चे भी उसमे सामिल थे यानी की सारे के सारे मुसलमान ही मरे; अमेरिका वाले भी द्रोन से कितने मुसलमानो का रोज़ हत्या हो रहा है इराक ईरान मे भी दंगा शुरु हो गया है इज़िप्त मे भी कितने लोग आपस मे ही मर रहे है यानी की पूरी की पूरी इस्लामिक देश अशांत है और मर भी सबसे तेज़ी मुसलमान ही रहा है जबकि हिन्दू शांत है जैन शांत है शिक्ख शांत है बोध शांत है और इनके देशो मे भी शान्ती है ईसाई देश भी शांत है वहा मरने वालो की सांख्या भी कम है हा वो कुछ जगहो पे वो मार जरूर रहे है फिर आज तक हमलोग को ये समझ मे नही आता है की इस्लाम को लोग शान्ती का धर्म कैसे कहते है लेकिन ये मरने वाला खेल इस्लाम मे अगला 200 साल तक भी चलता रहेगा या जब तक इस्लाम है तब तक चलता ही रहेगा

    Reply
  10. Dr S Shankar Singh

    आपकी बात में असलियत हो सकती है कि इस्लामिक देश इस्लामिक नियनों के अनुसार नहीं चलाये जा रहे र्हे में समझता हूँ सार्वजनिक जीवन और प्रशासन में मजहब की कोई भूमिका नहीं होमी चाहिये. मजहब एक व्यक्तिगत आस्था का विषय है. उसको वहीं तक सीमित रखना चाहिये. इक कोई मजहब ऐसा भी चलाया जाये. इंसान को इंसान बनाया जाये.

    Reply
  11. wasi

    पहले तो यह बताएं की इस्लामी सूचकांक क्या चीज है? और कौन सी हदीसो और आयतो की बुनियाद पे है? दूसरी बत है, इस्लामी क्रांति दस्तक दे चुकी है. आपको जल्द ही आदर्श इस्लामी मुल्क नजर आयेंगे. ईमान की ताकत क्या होती है, इसका मुजाहरा तो आपने देख ही लिया होगा की इराक मे 800 जिहादियो के आगे 30,000 मुनाफीको की हथियार बंद फ़ौज कैसे हार गयी? अभी इस्लामी चेतना का धीरे धीरे प्रसार हो रहा है, इस क्रांति को रोक पाना अब मुमकिन नही.

    Reply
    1. afzal khan

      1700 लोगो का क़त्ल कर दिया गया- आखिर इंसानियत कहा गयी. इस्लाम मे तो एक निर्दोष आदमी की हत्या को पूरे इंसानियत का क़त्ल बताया जाता है.

      अफ़ज़ल ख़ान

      Reply
    2. सिकंदर हयात

      इराक़ तो क्या दुनिया मे कही भी कभी भी केसा भी कोई भी ( मरहूम साज़िद रशीद के शब्दो मे ) व्यक्ति या संघटन अपने नाम के साथ बस इस्लामी लगा ले तो हम उसका बढ चढ कर सपोर्ट ही करेंगे ( वासी भाई को तो कभी कासमीर मे तो कभी काबुल अब बग़दाद मे कोई आदर्श इस्लामी समाज बनता दिखता ही रहता है ) क्योकि हम सोचते है की इनका सपोर्ट करना भी सवाब का काम है .जबानी सपोर्ट मे क्या जाता है तो हम बिना देर किया बिना अम्लो अमाल चेक किये य कर देते है और सोचते है की सवाब कमा लिया ? इसलिये हर जगह ढाका से लेकर अल्जीरिया तक सत्ता के लिये लड रहे है सभी मुस्लिम रहनुमा अपने मफ़ाद के लिये इस्लाम का इस्तमाल करने से बाज़ नही आते है

      Reply
      1. afzal khan

        हयत साहब

        आप सही कह रहे है, आज देखिये इराक़ मे जिस तरह 1500 लोगो की हत्या कर दी गयी है सिर्फ सत्ता की ललच मे, मगर कुछ मुसलमान इस लिये खुश है के सुन्नी ने शिया को मारा है, आखिर इंसानियत कहा है. सत्ता का ललच के अतिरिक्त और कुछ नही है.

        Reply
        1. सिकंदर हयात

          दुनिया में तो हमारी जिंदगी झंड ही हुई पड़ी हे ऐसे में हम कुछ जबानी जमा खर्च करके हम सोचते हे की जबानी जमा खर्च की गंगा में डुबकी लगाकर जन्नत में इससे हमारी सीट रिजर्व हो जायेगी सवाब ( पुण्य ) की लूट हे और हम जम कर लूटना चाहते हे

          Reply
      2. सिकंदर हयात

        sikander hayat को जवाब )- wasi
        June 17,2014 at 11:00 PM GMT+05:30
        सत्ता के लिये तो वो सैनिक लड रहे थे. उनके पास जूझने का आत्मबल नही था, क्यूंकि वो सत्य के साथ नही थे. उन 800 जिहादियो को आप सत्ता के लिये लड़ने वाला कह रहे हो, लेकिन जब वो 30 हजार पे टूटे थे, तो उनकी जान पूरी तरह जोखिम मे थी, जब जान ही चली जायेगी, तो सत्ता क्या ख़ाक मिलेगी. दो कोडी की सत्ता और ताकत बेईमानो को ही ललचाती है, जो सच और ईमान के साथ खड़ा है, उसे नही ललचाएगी. सच के लिये जान भी चली जाये, तो कोई गम नही. सच का साथ देने वालो के लिये ही आखिरत है, याद रखियेगा, ये उल जलूल के सूचकांको मे बढत बनाने से कोई हासिल नही होगा.
        जिन मुल्को को आप तथाकथित इस्लामी सूचकांको मे अग्रणी बता रहे हो, वो जहालत मे डूबी कौमे हैं, और इनकी जहालत को अल्लाह माफ नही करेगा. मैने हमेशा से कहा है की मिलावटी खाना एक इंसान की जान लेगा, जो वैसे भी 1 दिन जानी ही है, लेकिन ये जो मुनाफिक दीन मे मिलावट कर रहे हैं, उसके फलस्वरूप आखिरत मे मिलने वाली यातना और सजा की कोई मिसाल नही दी जा सकती. और लोगो को ऐसी मिलावट करने वालो से बचाना इस्लाम ही नही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है. इन मिलावट करने वालो से लड़ना एक मजबूरी है, नही तो आने वाली नसलो की दूसरी जिंदगी ना सुधरने वाले नर्क मे तब्दील हो जायेगी, और उससे निकलने का फिर जरिया भी नही है. आप इस दुनिया के किसी भी जुर्म को मुनाफीको की मिलावतखोरी के आगे तौलोगे तो वो छोटा ही होगा.
        आपको इस जहर की मिलावट से कोई दिक्कत नही तो, इन जहर मिलाने वालो से हमदर्दी भी तो ना जताओ. शैतान से हमदर्दी जताने से शैतान मजबूत ही होगा. उम्मीद है, आप इस विषय की गंभीरता को समझेंगे.

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    3. Ali Askari Naqvi

      jis tathakathit islami chetna ka sanchar 1400 sal pahle YAZEED Lanatullah lana chahta tha, aslahe ke zor per kuchh usi andaz me iraq ki sarzami per Lanati Jehadi bhi Barbariyat per aamada hain. inshaallah jald hi ye kutte ki maut marenge to Allah ke yahaan bhi panaah na milegi.

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    4. shikhar

      क्या आप लोगों को पता हे इस्लाम को अमानवीय धर्म कयो कहां
      जाता है । आप इन मुसलमानों के कमेंट पढ़ो । वाशी साहब
      साहब का कमेंट पढलो । कहते हे 800 लोगों ने 30000
      लोगों को मार दिया । ये ईसलामी काती हे । ईरान व सीरिया मे
      लाखों लोगों को मारा जा रहाहै । औरतों की ईजजत लूटी जाता रही हे
      और ये सब ईसलामी चेतना हे।

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    5. Sarvashwar

      आप लोग जिन ८०० लोगो से ३०००० लोगो को मारने पर दबी जुबान में isis का गुणगान कर रहे हो उस isis ने इंसानियत का शर्मशार कर दिया हे । वेसे मुस्लमानो ने यू तो isis के खिलाफ फतवा जारी किया हे पर आप खुस हो रहे हो । होंगे भी क्योकि वह rap कर रहा हे बच्चो को मार रहा हे। शियाओ को अपने घर छोड़ने पर मजबूर कर रहा हे। युद्ध में दूसरे धर्म के लोगो के साथ कत्लेआम मचा रखा हे । पर आप अपने भाइयो से खुस हो। ऐसे लोग और जिन्दा रहे तो इस संसार में बचेगा ही क्या । अरे इसे धर्म कहोगे तो फिर अधर्म किसे कहोगे ?

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  12. सिकंदर हयात

    मेसोपोटामिया इराक बगदाद सीरिया दमिश्क जैसे महान नगरो स्थानो जिन्हे ”सभ्यता का पालना ” कहा जाता था जहा कई कसबे वैसे ही हे जैसे हज़ार साल पहले थे इनकी दुदर्शा देख कर दिल खून के आंसू रो रहा हे

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  13. wasi

    मुल्क तो क्या उम्मा कायम हो जाये, लेकिन जब भी कोई आदर्श इस्लामी समाज के लिये आन्दोलन करता है, तो आप जैसे लोग ही उन सच के लिये मरने मिटने वाले आन्दोलनकारियो को दहशतगर्द करार दे देते हो. इस दोगलेपन से बाहर निकल कर अपने दीन और ईमान को जानो अफजल साहब. दुनिया इस्लाम की इज्जत करती है, या नही. पहले आप इसकी इज्जत करो. दुनिया के मुताबिक दीन नही, दीन के मुताबिक दुनिया को ढालो. आपको लगता है ना की इन गैर मुस्लिम पश्चिमी मुल्को मे इस्लाम का पालन बेहतर हो रहा है, तो आखिरत पे इसका फैसला हो जायेगा की आपकी नजर मे जाहिल मुस्लिम मुमलिको से सबसे ज्यादा लोग जन्नत नशी है, या इन ईसाई बहुल देशो के. इन इस्लामी सूचकांको से जनता को गुमराह करने वाले बुद्धिजीवी ये भी बतला दें की उनके अनुमान के मुताबिक कितने प्रतिशत लोग किस किस मुल्क मे आखिरत मे कामयाब होंगे क्यूंकि मेरी नजर मे तो आखिरत ही इस्लाम के पालन या जहालत का सटीक पैमाना है. ईमान वाला कामयाब होगा, और झूठ का साथ देने वाला नाकामयाब.

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  14. सिकंदर हयात

    खेर एक अच्छी खबर हे ईरान तो हार गया लेकिन अल्जीरिया फीफा वर्ल्ड कप में दूसरे दौर में पहुंच गया उन्हें बहुत बहुत बधाई उमीद करनी चाहिए की आने वाले सालो में भारत और कई मुस्लिम देश फीफा में खेर्लेंगे

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  15. Faizal Siddiqui

    Dunia ka sabse behtreen dharma Islam h.
    Islaam na mita h n hi mite ga
    Aur hamare Nabi ke nafarmani karne wale ek din tum sab zahannam ke àag me hoge

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  16. zakir hussain

    इस्लाम, सिर्फ़ मुसलमानो मे से मिट रहा है, बाकी समाज मे फैल रहा है.

    और ऐसा लग रहा है कि अपने को मुसलमान कहने वाले अधिकांश लोग, ईमान के रास्ते से इतने भटक गये हैं कि कयामत के दिन शायद अपने को गैर-मुस्लिम समझने वाले लोगो के दिलो मे शायद ईमान ज़्यादा निकलेगा और मुसलमान कहने वाले लोगो के दिलो मे कम.

    ऐसे लेखो से भी मुसलमानो को जो कम अकल मौलनाओ ने जो नींद सुलाई है, उससे नही जगा पाओगे. ये सिर्फ़ आख़िरत मे ही जागेंगे.

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  17. nafees malik

    इस्लाम को आंतकवादी बोलते हो। जापान मे तो अमेरिका ने परमाणु बम गिराया लाखो बेगुनाह मारे गये तो क्या अमेरिका आंतकवादी नही है। प्रथम विश्व युध्द मे करोडो लोग मारे गये इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या अब भी मुस्लिम आंतकवादी है। दूसरे विश्व युध्द मे भी लाखो करोडो निर्दोषो की जान गयी इनको मारने मे भी कोई मुस्लिम नही था। तो क्या मुस्लिम अब भी आंतकवादी हुए अगर नही तो फिर तुम इस्लाम को आंतकवादी बोलते कैसे हो। बेशक इस्लाम शान्ति का मज़हब है।और हाॅ कुछ हदीस ज़ईफ होती है।ज़ईफ हदीस उनको कहते है जो ईसाइ और यहूदियो ने गढी है। जैसे मुहम्मद साहब ने 9 साल की लडकी से निकाह किया ये ज़ईफ हदीस है। आयशा की उम्र 19 साल थी। ये उलमाओ ने साबित कर दिया है। क्योकि आयशा की बडी बहन आसमा आयशा से 10 साल बडी थी और आसमा का इंतकाल 100 वर्ष की आयु मे 73 हिज़री को हुआ। 100 मे से 73 घटाओ तो 27 साल हुए।आसमा से आयशा 10 साल छोटी थी तो 27-10=17 साल की हुई आयशा और आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम ने आयशा से 2 हिज़री को निकाह किया।अब 17+2=19 साल हुए। इस तरह शादी के वक्त आयशा की उम्र 19 आप सल्ललाहु अलैही वसल्लम की 40 साल थी।हमे कहते हो मांस क्यो खाते हो लेकिन ऐसे जानवर जिनका कुरान मे खाना का जिक्र है खा सकते है क्योकि मुर्गे बकरे नही खाऐगे तो इनकी जनसख्या इतनी हो जायेगी बाढ आ जायेगी इन जानवरो की। सारा जंगल का चारा ये खा जाया करेगे फिर इन्सान के लिए क्या बचेगा। हर घर मे बकरे होगे। बताओ अगर हर घर मे भैंसे मुर्गे होगे तो दुनिया कैसे चल पाऐगी। आए दिन सिर्फ हिन्दुस्तान मे लाखो मुर्गे और हजारो कटडे काटे जाते है । 70% लोग मांस खाकर पेट भरते है । सब को शाकाहारी भोजन दिया जाये तो महॅगाई कितनी हो जाएगी। समुद्री तट पर 90% लोग मछली खाकर पेट भरते है। समझ मे आया कुछ शाकाहारी भोजन खाने वालो मांस को गलत कहने वाले हिन्दुओ अक्ल का इस्तमाल करो ।

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  18. सनातन शक्ति

    तो ये हरामी राम लिखने वाला पाकिस्तानी मुसलमान ह या हिंदुस्तानी

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  19. आम आदमी

    भाई किसी के धर्म और महापुरुषों को बुरा नकहो
    अल्लाह हर इंसान के दिल में मौजूद है बस उसे हर किसी को महसूस करने की जरूरत है नकहो

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  20. rishad raza

    hindu tumko pta nhi jab apna des azad hua to 90 hzar musalman sheed hue the aaz jo tum ais ke jindgi gee rhe ho to sirf muslman ke bajay se

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    1. rajk.hyd

      उसके बदले मुस्लिम पाकिस्तान ले चुके है उसमे भी करीब १०लाख इंसानों कि हत्या
      हुयी थी

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  21. Alla tala and chabi

    Madarse band kar do …sab gandagi dimaag me yahi se AAti hai.

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