by — मोहम्मद जाहिद

अमित शाह के व्यवहार और भाषा से यह स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा कर्नाटक चुनाव हारने जा रही है।

दरअसल भाजपा के केन्द्रीय मंत्रियों की लफ्फाजी और धुर्त राजनैतिक बयान वहाँ की जनता भाषा के कारण समझ ही नहीं पा रही है , ऊपर से जो ट्रान्सलेटर हैं वह भाजपा के मंच से अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा और मोदी को कभी विनासकारी बता रहे हैं तो कभी भ्रष्टाचारी बता रहे हैं।

अमित शाह खुद येदुरप्पा की मौजूदगी में येदुरप्पा को भारत का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री घोषित कर चुके हैं।

जैसे जैसे चुनाव करीब आएगा वैसे वैसे इनका यह व्यवहार बढ़ता जाएगा क्युंकि कर्नाटका की ग्रामीण जनता कन्नड़ ही समझती है , इनकी हिन्दी में की गयी फेकमफाक उसके समझ से बाहर की बात है।

कर्नाटका चुनाव में मुख्यमंत्री सिद्धरमैय्या ने खुद को कर्नाटक के स्वाभिमान से वैसे ही जोड़ लिया है जैसे नरेन्द्र मोदी ने गुजरात स्वाभिमान से खुद को जोड़ लिया है। वहाँ का चुनाव सिद्धरमैय्या और अमित शाह के बीच हो गया है , अंत में मोदी भी कूदेंगे।

सिद्धरमैय्या की फेंकी गुगली में भाजपा फँस गयी है और अमित शाह की रणनीति यहाँ ध्वस्त हो गयी है , सिद्धरमेय्या के लिंगायत समुदाय को अलग धर्म की मान्यता देने और अमित शाह के द्वारा इसे इन्कार करने पर कर्नाटका के 18% लिंगायत में बिखराव आ गया है जो कि येदुरप्पा के लिंगायत होने के कारण पूरा का पूरा वोट भाजपा के साथ था।

कल लिंगायत समुदाय के 200 मठों ने अमित शाह के बयान की निंदा करते हुए कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की , यह भाजपा के लिए “बाढ़” की स्थीति होगी।

https://www.bbc.com/hindi/india-43681248…

इसी कारण अमित शाह अपने विरोधी दलों की एकजुटता को कुत्ता , बिल्ली , साँप , नेवला , चूहा इत्यादि इत्यादी के एक होने को कह रहे हैं , यह उनकी बौखलाहट का प्रतीक है जबकि भाजपा खुद इस समय 46 पार्टी के साथ गठबंधन में है।

खुद देखिए

1- शिव सेना
2- शिरोमणि अकाली दल
3- लोक जन शक्ति पार्टी
4 – अपना दल
5 – तेलगु देशम पार्टी
6 – जनता दल यूनाइटेड
7 – भारतीय समाज पार्टी
8 – जम्मू एंड कश्मीर पीपुल डेमोक्रेटिक फ्रंट
9 – राष्ट्रीय लोक समता पार्टी
10 – स्वाभिमानी पक्ष
11 – महान दल
12 – नागालैंड पीपुल्स पार्टी
13- पट्टाली मक्कल काची
14- ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस
15- सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट
16- रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया
17- बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट
18 – मिजो नेशनल फ्रंट
19 – राष्ट्रीय समाज पक्ष
20- कोनगुनडाउ मक्कल देसिया काची
21- शिव संग्राम
22 – इंडिया जनानयगा काची
23 – पुथिया निधि काची
24- जना सेना पार्टी
25 – गोरखा मुक्ति मोर्चा
26 – महाराष्ट्र वादी गोमांतक पार्टी
27 – गोवा विकास पार्टी
28- ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन
29 – इंडिजन्यस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा
30 – मणिपुर पीपुल्स पार्टी
31 – कमतपुर पीपुल्स पार्टी
32 – जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस
33- हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा
34- केरला कांग्रेस (थॉमस)
35 – भारत धर्म जन सेना
36- असम गण परिषद
37 – मणिपुर डेमोक्रेटिक पीपुल्स फ्रंट
38- प्रवासी निवासी पार्टी
39- प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
40 – केरला विकास कांग्रेस
41- जनाधीय पठाया राष्ट्रीय सभा
42 – हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी
43 – यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी(मेघालय)
44 – पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणांचल
45 – जनाठीपथिया संरक्षण समित
46 – देसिया मुरपोक्क द्रविड़ कड़गम

46 पार्टियों से खुद गठबंधन कर देश प्रदेश में सरकार चला रही भाजपा के अध्यक्ष को विरोधी पार्टियाँ जानवर लगती हैं तो समझिए कि इनकी भाषा बताती है कि इनका समयचक्र कर्नाटक चुनाव परिणाम के बाद उल्टा घूमने लगेगा।

यही नहीं , हार के डर से बौखलाहट लिए अमित शाह अपने धर्म पर सफाई दे रहे हैं , मुसलमानों को देशभक्ति का प्रमाणपत्र देने वाले गिरोह का सरदार अपने धर्म का प्रमाणपत्र कर्नाटक के मुख्यमंत्री को दे रहा है , वह भी झूठा।

अमित शाह खुद को सात पुश्तों से वैष्णव हिन्दू बता रहे हैं , यह वोट के लिए धर्म क्या अपना बाप भी बदल सकते हैं , हकीकत सारा गुजरात जानता है कि अमित शाह “जैन बनिया” हैं , उनकी चार बहनों की शादी भी जैन लोगों से ही हुई है।

और देखना है तो चुनाव आयोग को दिये उनके शपथपत्र को देखिए , इनका झूठ समझ में आ जाएगा।

कांग्रेस यदि कर्नाटक चुनाव जीतती है और उस जीत का प्रयोग करके कांग्रेस अध्यक्ष सड़क पर उतरते हैं तो मोदी जी का 2019 में पैकअप निश्चित है क्युंकि फिर पूरे विपक्ष को राहुल गाँधी के नेतृत्व को स्विकारना ही होगा , और फिर लोकसभा चुनावों के पहले राजस्थान , मध्यप्रदेश और छत्तिसगढ़ से भाजपा की निश्चित विदायी भाजपा के ताबूत के तीन अन्य कोनों में किल ठोक देंगें।

अमित शाह की बौखलाहट इसी कारण है।