Satyapal Chahar

फेसबुक पर मेरी शुरुआत ही एक वामपंथी विचारक के रूप में ही हुयी थी। उसी समय बहुत सारे हिंदू संस्कृति के रक्षक मेरी मित्रता सूची में आये। मैंने अपना ट्रैंड भी बदला। लेकिन जब घुमक्कड़ी के दौरान मैं उनसे मिला, जिन्हें हिंदुत्व के रक्षक समझ रहा था, सनातन के सबसे बडे दुश्मन निकले।

शराब पीकर रात के दो दो बजे तक सडकों पर घूमने वाले, रात को मुस्लिम मित्रों के साथ मुर्गा की टांग खींच कर दिन में उनकी मां बहिन करने वाले, गोरखपुर के एक विराट हिंदू योद्घा का फौन आता है कि उसके संगठन के एक लडके ने दो तीन मुल्लों को ठिकाने लगा दिया है, उसे बचाने के लिए आप तुरंत पांच हज़ार भेज दो। ऐसे एक नहीं बल्कि अब तक दस लोग मेरी लिस्ट में है। दिन रात सैकुलर्स, वामपंथियों, कांग्रेसियों और मुसलमानों को गाली देने वाले हिंदू रक्षक अपने निजी जीवन में भी अगर खुश होते तो भी ठीक रहता पर जब मैंने निजी जीवन में झांका तो पाया कि अन्य लोगों से उनकी नफरतों ने सबसे ज्यादा उन्ही को बर्बाद किया है। जैसा हम सोचते हैं बैसा ही हमारा मन हो जाता है। नफरत किसी और का नहीं बल्कि खुद हमारा ही सबसे ज्यादा नुकसान करती है।

विज्ञान विषय पर अभूतपूर्व जानकारी रखने वाले लेखक विजय शर्मा जी की किताब आयी है , ” बैचेन बंदर” जिसमें मानव की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान तक यात्रा का वर्णन है। इसमें थोडा बहुत धर्म की उत्पत्ति का भी जिक्र है लेकिन कहीं भी किसी धर्म या उसके प्रतिपादक पर किसी प्रकार भी कोई टिपण्णी नहीं की है। किताब की रातों रात खूब विक्री हुई। इन हिंदू रक्षकों में से कुछ लोग विजय भाई जी से निजी दुश्मनी निकालने के लिए नीचता की हर हद पार कर गये। उनकी पारिवारिक मित्र शोभा पांडेय जी को भद्दी भद्दी गालियां दी गयीं। फौन पर धमकियां दी गयीं। किताब का प्रमोशन करने वाले फिल्मकार आशुतोष राणा जी को भी मामले में घसीटने की कोशिश की गयी।

अब तक बात केवल विजय शर्मा जी तक थी, ये सभी लंपट उठाईगीरे हिंदू रक्षक कभी उनकी वाल की शोभा बढाया करते थे, इसलिए मैं विजय भाई जी से बोला कि इन्हें ब्लौक कीजिए और आगे बढिये, ये तो सडक छाप लंपट हैं ही, नंगो के पास खोने को कुछ नहीं होता, हम बाल बच्चे वाले हैं, हमें इन लोगों से दूरी बना लेनी चाहिए। लेकिन बात अब शोभा पांडेय नाम की एक बेटी की है। बेटी के इसी प्रकार के अपमान पर चुप रहने का पाप मैं एक बार पहले कर चुका हूँ। दिल्ली की रहने वाली बहन गीता यादव को इसी गैंग ने आत्महत्या तक करने को मजबूर कर दिया था, ये मेरी बाल बच्चेदार होने की मजबूरी थी कि मैंने गीता जी को भी इनसे दूर रहने की सलाह दी थी पर अब मुझे अपनी गलती का प्रायश्चित करना है, मैं बहन शोभा पांडेय जी के साथ हूं। हर तरीके से साथ हूं।

आप सभी को निर्णय लेना है कि आप इनके साथ हैं या नहीं। आज गीता यादव और शोभा पांडेय हैं, कल मेरी बेटियाँ होंगी तो परसों आपकी। इंतजार कीजिये वहसी भेडिये किसी को नहीं छोडते।

सोच समझ कर इन का समर्थन कीजियेगा, आज मुझे बहुत से लोग ब्लाक मारने हैं। ————————–

शोभा पाण्डे
#थोड़ा_वक्त_निकालकर_कृपया_पोस् ट_पूरी_पढ़ें

भारत एक कुंठा प्रधान देश है,
हम भारतीय अपनी असफ़लता से उतने दुःखी नहीं होते जितना दुःख हमें दूसरों को सफल होता देखकर होता है। विजय सिंह ठकुराय उर्फ विजयराज शर्मा की विज्ञान आधारित पुस्तक बेचैन बन्दर की सफलता ने पूर्व में उनसे खार खाय कई लोगों को बेचैन कर दिया, और बिना पुस्तक पढ़े ही आलोचना करनी शुरू कर दी,खैर एक स्वस्थ आलोचना किसी भी किताब के लिये उसका पारितोषिक ही होती है, ताकि अगली किताब में सुधार किया जा सके .. लेकिन किताब की आलोचना की आड़ में लेखक की प्रेमिका के लिये निहायती घटिया अश्लील बातों का मज़मा लगाना आलोचना की नहीं छिछोरपन्ति कि श्रेणी में आता है, ज़रा इस बात पर भी गौर करे यहाँ गालियों के बारे में कोई बात नहीं की जा रही, गालियों और व्यक्तिगत अश्लील टिप्पणियों में फर्क होता है, गालियाँ हर दूसरा व्यक्ति देता है, बहुत अधिक गुस्से में होने पर मैं भी दे देती हूँ, लेकिन मेरी गाली सामने वालों की अश्लील टिप्पणी का जवाब मात्र होती है। अपनी अश्लील टिप्पणियों को गालियों का पर्दा देकर ढंकने की कोशिश मत करिए।

मैंने 19 मार्च को समयपुर बादली रोहिणी थाने में 239/18 FIR में 9 लोगों के नाम दिए हैं, इन 9 लोग में ज्यादातर वो हैं जो पूर्व में भी मेरे लिखे किसी पोस्ट या कमेंट के विरोध में मेरे लिये अश्लील टिप्पणियाँ कर चुके हैं और महीनों सालों से मेरे द्वारा ब्लॉक हैं, 1-2 लोग वो हैं जो सिर्फ मज़े लेने के लिये इन छिछोरे लोगों की पोस्ट पर इकट्ठे होते हैं, घटिया लोगों से दोस्ती की कीमत है ये..कल तक इन लोगों की पोस्ट पर यलगार हो के नारे बुलंद कर रहे थे तो आज तैयार भी रहिये। पुलिस अपना काम अपने तरीके से कर रही है, जल्द ही आप सब लोगों से कोर्ट कचहरी में दुआ सलाम होगी।

पिछली बार की बकैती में समझाने की कोशिश की तो सूर्यवंशम जी को लगा लड़की गिड़गिड़ा रही है.. उसी वक़्त समझाया था लड़की को हमेशा इतने हल्के में नहीं लेना चाहिये, समाज भले औरतों के लिये बुरा हो पर कानून मर्दों के लिये ज्यादा खराब है। तिवारी जी आपसे कसम से इतने घटियापन की उम्मीद हमने आपको ब्लॉक करने के बाद भी नही की थी,जितना घटियापन आपने दिखाया.. रितेश,बी पी सिंह, मनमोहन आनंद जैसे लोगों का तो नाम लेकर ज़ुबान को गंदा करने जैसा है। श्रवण मिश्रा और शोभित वत्स के कमेंट पढ़ने के बाद तो शर्म को भी शर्म आ जाय, इतनी घृणा कुंठा कहाँ से आती है तुम लोगों के अंदर, शर्म की बात ये है कि ये सब बेशर्म लोग सनातन हिन्दू धर्म के ध्वजवाहक बनते हैं, इन्हें ये नहीं पता हिन्दू और सनातन ऐसे ही लोगों से शर्मशार हो रहा है।

नैतिकता और संस्कार की दुहाई देने वाले ये वही लोग हैं जो मौका मिलने पर अपने घर की बच्चियों का यौन शोषण तक कर सकते हैं, जो कमैंट्स इन लोगों ने मेरे लिये किये हैं उन सबके स्क्रीनशॉट इस पोस्ट के साथ लगा रही हूँ, सारे स्क्रीनशॉट पढ़िए और खुद फैसला कीजिये की ये लोग आपकी मित्र सूची में रहने लायक हैं या नहीं, खासकर महिलाएँ क्योंकि पुरषों से मैं वैसे ही कोई खास उम्मीद नहीं रखती।

इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और बहिष्कार करें इन लोगों का अपनी मित्र सूची से..
अगर मेरी लिस्ट की कोई भी महिला इस पोस्ट के 24 घण्टे बाद भी इन लोगों की म्यूच्यूअल फ्रेंड लिस्ट में रही तो मैं उसे अपनी लिस्ट से बाहर कर दूँगी..!

यदि आप स्त्री होकर स्त्री की मान मर्यादा के प्रति संवेदनशील और जागरूक नहीं हैं, तो मैं आपसे आगे किसी भी प्रकार की आभासी मित्रता भी नहीं रखना चाहती।

ये मेरी पहली और आखिरी पोस्ट है इस मुद्दे पर।
शुक्रिय