by — नकीबुल हक

आंजेला मर्कल १२ साल हुकूमत करने के बाद एक बार फिर जर्मनी की चांसलर चुनी गयी | अपने प्रथम जनता के संबोधन मे आंजेला मर्कल ने कहा कि इस्लाम ईसाई, यहूदी समेत इस्लाम जर्मन समाज का अभिन्न हिस्सा है जो सदियो से लोग अपनाए हुए है | इस्लाम कभी भी जर्मनी का बाहरी धर्म नही है | हॉर्स्ट सीहोफेर नामक व्यक्ति ने कुछ दिन पहले ही कहा था इस्लाम बाहरी है जिसके जवाब मे आंजेला मर्कल ने यह बात कही |समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार जर्मनी के दौरे पर आए स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के साथ शुक्रवार को एक संयुक्त प्रेस सम्मेलन में मर्केल ने कहा कि इस्लाम देश की संस्कृति और इतिहास का वैसे ही हिस्सा है, जैसे ईसाई और यहूदी धर्म।

जर्मन में मुसलमानों की संख्या बढ़ रही है। जर्मन की दैनिक पत्रिका दा फेल्ट के अनुसार इस्लाम धर्म जर्मन में अच्छी संख्या में फैल रहा है।

फ्रांस के गृह मंत्रालय द्वारा किये गये अध्ययन ने इस बात की पुष्टी की है, प्रति वर्ष 3600 सदस्य इस्लाम धर्म स्वीकार करते हैं। इसी प्रकार इस अध्ययन में यह संकेत भी दिया गया कि फ्रांस में 2300 मस्जिद, और 70 लाख मुसलमान है। बल्कि इस बात की भी आशा की जा रही है कि वर्ष 2025 के आने तक मुसलमान फ्रांस की आबादी का एक चौथाई हो जायेंगे। जब कि वर्ष 2050 तक मुसलमानों की दर पश्चिम की आबादी में 20% होगी। अन्य कुछ आंकडों से यह भी मालूम होता है कि वर्ष 2040 तक मुसलमान पश्चिम की बहुमत रखने वाली जाति हो जायेगी।

आंकडे बताते हैं कि दस साल बाद हालैण्ड की प्रजा का एक तिहायी इस्लाम स्वीकार कर लेगा। एक अध्ययन इस बात की पुष्टी करता है कि स्वीडन की प्रजा में आश्चर्य रूप से इस्लाम फैल रहा है। किन्तु सरकारी आंकडे इस बात का संकेत देते हैं कि मुसलमानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और आज कल स्वीडन में मुसलमानों की संख्या 1,20,000 से अधिक है। मस्जिदों के निर्माण की अधिक संख्या भी मुसलमानों के फैलने का संकेत देती है, विशेष रूप से उन मुसलमानों के बढने की जो अपने धर्म का संपूर्ण रूप से पालन करते हैं। किन्तु आंकडे यह बताते हैं कि यूरोप में 25000 से अधिक मस्जिदें हैं, जिससे मुसलमानों का लगाव अधिक है।

जर्मनी मे इस्लाम के बारे मे रोचक जानकरी आ रही है | इस्लामिक साइन्स (इस्लामिक धर्म शास्त्र) के पढ़ाई का ट्रेंड तेज़ी के साथ बढ़ रहा है | 2010 और 2011 में मुंसटर/ओस्नाब्रुक, ट्युबिंगेन, फ्रैंकफर्ट/गीसेन और न्यूरेनब्रग/एरलांगेन में इस्लामी धर्मशास्त्र केंद्र बने | जर्मनी में कई साल पहले शुरू हुई इस्लामी धर्मशास्त्र की पढ़ाई बहुत सफल रही है. मूल्यांकन करने पर पता चला है कि यह इतनी कामयाब है कि पूरे यूरोप के लिए मिसाल बन सकती है | इस्लामी धर्मशास्त्र विषय जर्मन विश्वविद्यालयों में लगातार जड़ें जमा रहा है. जर्मन शिक्षाशास्त्री इसे दूसरे यूरोपीय देशों के लिए आकर्षण बता रहे हैं. स्विट्जरलैंड के बैर्न यूनिवर्सिटी में इस्लाम शास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफेसर राइनहार्ड शुल्से कहते हैं, “इस तरह का कोर्स अभी यूरोपीय विश्वविद्यालयों में नहीं है.” जर्मन संसद के शिक्षा आयोग में जर्मनी की दूसरी यूनिवर्सिटियों के प्रोफेसरों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस्लाम की पढ़ाई का विस्तार होगा |केंद्र सरकार का मानना है कि स्कूलों में इस्लाम की शिक्षा शुरू करने पर 2,200 नए शिक्षकों की जरूरत होगी.इसके अलावा जर्मनी में 1,000 से ज्यादा इमाम हैं जिन्होंने कभी कोई ट्रेनिंग नहीं ली है. उन्हें भी प्रशिक्षित किए जाने की जरूरत है |
जर्मन के डॉ विलफराइड हॉफमेन ने 1980 में जब इस्लाम कबूल किया तो जर्मनी में हलचल मच गई! उनके इस फैसले का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ! उन्होने अपना नाम मुराद हॉफमेन रखा! जर्मनी के दूत और नाटो के सूचना निदेशक रह चुके डॉ मुराद हॉफमेन ने इस्लाम पर कई किताबें लिखी हैं |जिस शख्स की इस्लाम से सच्ची नफरत होती हैं उसकी नफरत को मुहब्बत में बदलने में देर नहीं लगती |

इस्लाम की तारीख में ऐसे कई वाकयात मौजूद हैं जिनमे लोगों ने इस्लाम धर्म से नफरत की इन्तेहा तक पहुँच गए लेकिन इस्लाम धर्म ने उन्हें अपने आगोश में लेकर उनका मार्गदर्शन किया | ऐसा ही एक वाकया जर्मनी में पेश आया जहाँ एक शख्स इस्लाम धर्म से बे इंतेहा नफरत करता था लेकिन जैसे ही उसके सामने इस्लाम की हकीकत पेश आई उसने इस्लाम कबूल कर उसकी खिदमत में लग गया | जैसे की पूरे विश्व में देखा जा सकता हैं कि इस्लाम के मन्नो वालो पर किस-किस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन इस सब के बावजूद, अमेरिकी रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस्लाम दुनिया में सबसे तेज़ी से फैलने वाला धर्म हैं. ऐसा क्यों हैं? ऐसा इसलिए हैं क्योकि अल्लाह ने पवित्र क़ुरान में कहा हैं कि “ईश्वर जिसको चाहता है उसका मार्ग दर्शन करता है”. जिसका जीता जागता सबूत जर्मनी का एक नागरिक हैं | जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफ़डी) के नेता ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है। इस्लाम विरोधी अभियान चलाने वाली इस पार्टी ने एक बयान जारी करके कहा है कि २०१६ मे आर्थर वैगनर के इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया है |
इस्लाम की छवि खराब करने का प्रयास, और मुसलमानों को परेशान करने का भी उलटा असर हो रहा है, जिससे इस धर्म के प्रति ज्ञान प्राप्त करने कि ओर लोग इच्छुक हो रहे हैं। इसी प्रकार इस्लाम धर्म फैलने में अल्लाह की ओर बुलाने वाले समूह का भी प्रयास एक कारण है। इन प्रयासों में से एक यह कि इस्लाम धर्म के वैज्ञानिकों के बीच होने वाली बहस है….. जिस से पश्चिम और अन्य धर्मो के अधिकतर लोगों को वास्तविक रूप में इस्लाम का ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।संयुक्त राष्ट्र की आंकडे बताते हैः इस जगत में मुसलमानों की संख्या बढने का वार्षिक दर 6.4% है, जब कि ईसाइयों के पास यह दर 1% से अधिक नही है।
सदा विभिन्न संस्कृतियों को स्वीकार करने वाला धर्म वाला धर्म इस्लाम है | इस्लाम धर्म के व्यक्तिपरक कारण, उसी उन विशेषताओं में प्रकट होते हैं, जो इस्लाम धर्म को फैलने का योग्य बनाते हैं। वह विशेषताएँ निम्न लिखे जा रहे हैः

१-इस्लाम धर्म के स्तंभ साधारण है। उसका अर्थ बडा गहरा है। उसकी परिभाषा स्पष्ट है। उसकी विधि व्यापक है, और उसकी शिक्षायें सरल है। उसको समझने के लिए अधिक मानसिक क्षमता और निपुण होने की आवश्यकता नही है। इस में न कोई रहस्य है, न कोई अस्पष्टता है, और न जटिलता इस में उपलब्ध है।

२-यह एक मानवीय धर्म है, जो मानव के स्वभाव का ध्यान रखता है। उसकी समस्याओं के अनुसार व्यवहार करता है। इच्छाओं को पूरा करता है। समस्याओं का समाधान देता है। प्रश्नों का उत्तर देता है। वास्तविक जीवन और तत्वों के बीच सद्भाव के रूप में संबंध पैदा करता है। इसी प्रकार सामाजिक अन्याय के हर रूप को अवैध ठहराता है, और मानवता के बीच, अलग-अलग वंशज, भाषा, जाति, और विभिन्न सामाजिक स्थिति के होते हुए भी संपूर्ण रूप से समानता पैदा करता है।

३-वास्तविक धर्म है, जो मानव की वास्तविकता पर निर्भर होता है, और वास्तविक जीवन में घुल-मिल नही जाता है, और न रूप बदलता है। इसी वास्तविकता के कारण इस्लाम वह धर्म है, जो संसार और परलोक को इकट्ठा करता है। इन दोनों के बीच कोई टकराव नही रखता।

४-यह वह धर्म है, जो मानवीय बुद्धि को सम्मान देता है। विचारों को मान देता है, और आपसी समझौता व लाभदायक वाद-विवाद के लिए मानसिक प्रमाण और तार्किक तरीक़े उपलब्ध बनाता है।

५-यह धर्म ज्ञान और उन्नति का विरोधी नही है, बल्कि उसकी ओर प्रेरित करता है। आधुनिक काल में ज्ञान के द्वारा जिन वैज्ञानिक तत्वों की खोज की गयी, यह सारे तत्व 1400 वर्ष पहले पवित्र ख़ुरआन में वर्णन किये हुए बातों के साथ समान है।

६-यह धर्म प्रगति के आंदोलन के साथ-साथ चलता है। निश्चित रूप से समय और स्थान में परिवर्तन के कारण जीवन पर प्रभावी होने वाले सामाजिक परिवर्तन, और विकास के साथ व्यवहार करने की अपनी क्षमता को इस्लाम धर्म ने साबित किया।

७-यह धर्म वास्तविक रूप से मानवीय स्वतंत्रता प्रधान करता है, जो कि उसी समय उपलब्ध हो सकती है, जब कि मानव अपने ईशवर की सच्ची प्रार्थना में एकाग्रचित्त हो जाये। क्योंकि इसी से वह किसी मानव का, या संसार के किसी अन्य जीव का भक्त नही रहेगा।

८-अल्लाह का धर्म एक है, अनेक नही। एक इसलिए है कि उसका स्त्रोत एक है, वह स्त्रोत अल्लाह है जिस ने ब्रह्माण्ड की सृष्टि की। लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी होती है, जिसका ध्यान रखते हुए एक ही धर्म इन परिस्थितियों या जातियों के अनुसार विशेष नियम कि उपलब्धी का अनिवार्य होता है। इसी प्रकार कभी ईश देवत्व के स्त्रोत से दूरी होने का कारण, इस धर्म से लोग फिर जाते हैं, और इस बात की आवश्यकता होती है, किसी नये रसूल को भेजने के द्वारा इस धर्म का पुनर्निर्माण हो। वह रसूल इस धर्म के स्थिर नियमों और क़ानून की पुष्टी करें। इसी कि ओर इस्लाम धर्म के रसूल मुहम्मद की वाणी संकेत देती हैः सारे नबी और रसूल आपस में पैतृक भाई हैं। उनका धर्म एक है, और उनकी माताएँ अनेक हैं। यानी इनका समय और उनके नियम विभिन्न और अलग-अलग है…. इस्लाम धर्म के रसूल मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम के युग में मानवता मार्गदर्शनी प्राप्त करली है। क्योंकि इस रसूल का संदेश कुछ ऐसे व्यक्तिपरक कारक अपने अंदर रखता है, जो इस धर्म को नष्ट होने से सुरक्षित रखते हैं, और आवश्यकता के समय इस धर्म का पुनर्निर्माण करते हैं। इसीलिए इस धर्म का सिलसिला कभी नही टूटेगा, और मानवता के अंत तक यह ऐतिहासिक धर्म स्थिर रहेगा।

जर्मनी के प्रथम कवि गोतह कहता हैः मैं ने इतिहास में मानव के उच्च नैतिकता की खोज की, तो मुझे यह नैतिकता अरब के रसूल मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम में मिली। स्विट्जरलैंड के धर्म शास्त्र वैज्ञानिक डाक्टर हैन्स क्विंग कहता हैः मुहम्मद समग्र रूप से सच्चे नबी हैं। आज तक हमारे लिए यह असंभव है कि हम मुहम्मद को मार्गदर्शक न माने, और मुक्ति के मार्ग की और ले जाने वाला नेता होने का इंकार करे।रूस के प्रसिद्ध दार्शनिक व आलोचक लियो टालस्टय कहता हैः मैं उन लोगों में से एक हूँ, जो मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम के व्यक्तित्व से उत्तेजित हूँ, जिनको अल्लाह ने इसलिए चुना कि अंतिम देवत्व संदेश उनके द्वारा भेजा जाये, और अंतिम रसूल भी वही हो।फ्रेंच कवि लामार्टिन कहता हैः किस पुरुष ने उस प्रकार की मानवीय महानता प्राप्त की है, जिस प्रकार मुहम्मद ने प्राप्त की ?। किस मानव ने अद्भुतता के उच्च स्थान को प्राप्त किया, जिस प्रकार मुहम्मद ने प्राप्त किया ?। निस्संदेह मुहम्मद प्रजापति और प्राणियों के बीच मध्यवर्ती की भूमिका निभाने वाले ग़लत सिद्धांतों को समाप्त कर दिया।ऐरलान्ड का लेखक व आलोचक (साहित्य में नोबल पुरस्कार का तिरस्कार करनेवाला प्रसिद्ध व्यक्ति) जार्ज बर्नार्डशाह कहता हैः मै इस्लाम के रसूल मुहम्मद की जीवन चर्या कई बार गहराई के साथ पढा। मैं ने उनके जीवन में केवल वही नैतिकता पायी, जैसी होना चाहिए। कितनी बार मैं ने यह आशा की इस्लाम धर्म इस जगत का मार्ग बन जाये। मै ने मुहम्मद को एक अद्भुत पुरुष के रूप में पढा है, तो मैं ने उसको ईसा मसीह के साथ विरोध करने से बहुत दूर पाया। किन्तु मुहम्मद को मानवता को मुक्ति दिलाने वाला कहना आवश्यक है।

डाक्टर माइकल हार्ट इसके लेखक है। जो खगोल वैज्ञानिक और गणितज्ञ है, और अमेरिकी अंतरिक्ष विभाग में काम किया करते थे।इस लेखक ने इतिहास में शाश्वत रहने वाले 100 व्यक्तियों के नाम चुने, इनमें से सबसे पहले व्यक्ति इस्लाम धर्म के रसूल मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम है। लेखक ने इसके कुछ कारण विवरण किये हैं, जो यह है….

उन्होंने इस्लाम का प्रचार किया। सारे धर्मों में प्रमुख धर्म के रूप में इस्लाम को प्रस्तुत किया। वह राजनीतिक नेता, कमांडर और धार्मिक महात्मा बन गये…. उनकी मृत्यु के 13 शताब्दों के बाद भी आज तक मुहम्मद का प्रभाव सर्व व्याप्त और नवीकृत है।

फिर अमेरिकी लेखक यह कहता हैः…. हो सकता है कि इस सूची के प्रथम अंक में मुहम्मद का होना आश्चर्यचकित लगे, क्योंकि ईसाइयों की संख्या मुसलमानों से दुगना है। हो सकता है कि इस सूची में मुहम्मद का प्रथम होना अधिकतर लोगों को भ्रम में रख दिया भी हो, जब कि ईसा अलैहिसलाम नंबर 3 पर, और मूसा अलैहिसलाम नंबर 16 पर हैं।

लेकिन इसके कई कारण है। इनमें से एक कारण यह है कि इस्लाम का प्रचार करने में, उसको मज़बूत बनाने में, और उसके नियमों की स्थाप्ना करने में, मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम की भूमिका ईसा अलैहिसलाम से बहुत बडी और महान थी। हालांकि ईसाई धर्म में नैतिक नियमों के ज़िम्मेदार ईसा तो हैं लेकिन सेंट पॉल ने ईसाई धर्म के नियमों की स्थाप्ना की है, और बाईबल में लिखी हुई कई बातों का ज़िम्मेदार वह भी है।

जब कि मुहम्मद सल्लेल्लाहु अलैहि व सल्लम इस्लामिक नियम, धार्मिक क़ानून, सामाजिक व नैतिक व्यवहार, और संसारिक व धार्मिक जीवन में लोगों के बीच होने वाले व्यवहारिक नियम की स्थाप्ना करने के ज़िम्मेदार इस्लाम धर्म के रसूल ही है। इसी प्रकार पवित्र खुरआन केवल उन्ही पर अवतरित हुवा है, और पवित्र क़ुरआन में मुसलमानों ने अपने संसार और परलोक की प्रत्येक आवश्यकता को उपलब्ध पाया है।…. क्या तुम इस बात से आश्चर्यचकित हो रहे हो ?

धर्म पवित्र वाणी पर विश्वास रखने और उसकी सारी बातों को संपूर्ण रूप से मानने पर निर्भर होता है। लेकिन इस्लाम ने बुद्धि, तर्क, सोंच-विचार से पैदा होने वाला ज्ञान, जीव और प्रकृति में प्रयोग को अल्लाह पर ईमान (विश्वास) रखने, मुसलमानों की पवित्र पुस्तक खुरआन और इस्लाम के रसूल मुहम्मद पर विश्वास करने का मार्ग बनाया है…. इस्लामी इतिहास में आज तक धर्म और ज्ञान या बुद्धि के बीच कोई टकराऊ या विरोधाभासी देखने में नही आयी है |

भारतीय समाज मे एक पॉज़िटिव सोच का संचार करने का समय आ गया है | लोगो द्वारा दूसरे धर्मो के ग्यान को भ्रमित अंदाज मे पेश करने वालो को नकेल कसने की जरूरत है ताकि आपसी भाईचारा और शान्ती बनाये जा सके औए समाज विकास के पथ पर तेजी के साथ दौड़ सके |

वह शक्ति हमें दो दया निधे, कर्तव्य मार्ग पर डट जावें।
पर सेवा पर उपकार में हम, निज जीवन सफल बना जावें॥

हम दीन- दुःखी निबलों- विकलों, के सेवक बन सन्ताप हरें।
जो हों भूले, भटके, बिछुड़े, उनको तारें खुद तर जावें॥
वह शक्ति हमें दो दयानिधे….॥

छल, द्वेष, दम्भ, पाखण्ड, झूठ, अन्याय से निशिदिन दूर रहें।
जीवन हो शुद्ध, सरल अपना, शुचि प्रेम सुधारस बरसावें॥
वह शक्ति हमें दो दयानिधे….॥

निज आन- मान, मर्यादा का, प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे।
जिस देश, जाति में जन्म लिया, बलिदान उसी पर हो जावें॥
वह शक्ति हमें दो दयानिधे….॥