रामदेव के जीवन पर बना एक टीवी सीरियल रामदेव एक संघर्ष झूठ का पुलिंदा है जिसमें सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए रामदेव ने न सिर्फ ब्राह्मणों पर निशाना साधा है बल्कि यादवों के कुल को भी कलंकित किया है। रामदेव के गांव में दौरा करके डॉ ईश्वर सिंह यादव ने सच्चाई जानने की कोशिश तो आश्चर्यजनक सत्य सामने आया कि सीरियल में रामदेव सिर्फ झूठ बोल रहे हैं और पाखंड कर रहे हैं, जबकि सच्चाई कुछ और है।

दिनांक 18 फरवरी 2018 के रोज़ इस षडयंत्र की सत्यता जानने के लिए अहीरवाल के भाईचारे के हिमाती व समाजसेवीयों का एक दल रामदेव की जन्मभूमि व पैतृक गाँव “अली सैदपुर” गया और लोगों से मिल कर सच्चाई जानने हेतु तफ्तीश की। इस दल में आर्य समाज के सन्यासी 88 वर्षीय स्वामी हरीश मुनि जी खवासपुर , प्रख्यात समाजसेवी राधेश्याम गोमला जी, फौजी रामफूल राव जी बास पदम का, नौजवान पियूष अहीर जी बुडीन शामिल थे। जो हैरतअंगेज सच्चाई सामने आई वो आप के समक्ष पेश है —

1. सबसे पहले गाँव का निरिक्षण किया और पाया की गाँव खुशहाल है, हाँ गाँव में खेती-लायक पानी की जरुर कमी है। गाँव अहीरवाल क्षेत्र यानी अहीर बाहुल्य क्षेत्र का हिस्सा है। रामदेव के दादा पूसा जी गाँव में “बोहरा जी” यानी “धनाढ्य” कहलाते थे और उनके बुजुर्ग किसी दौर में गाँव की कुल खेतिहर ज़मीन के करीब चौथाई हिस्से के मालिक थे। यानी रामदेव का परिवार पैतृक रूप से बड़े बिस्वेदार/जमींदार थे और इनके परिवार का बहुत सम्मान था।

2. गाँव में रामदेव के परिवार के ही बुजुर्ग जगदीश आर्य जी ने अपने पिता राव उमराव सिंह जी की याद में एक बहुत ही शानदार धर्मशाला सन 1972 में बनवाई थी जिससे रामदेव के परिवार की खुशहाली का पता चलता है।

3. एक ग्रामीण के मुताबिक किसी दौर में इनका कुटुम्ब इतना बड़ा था कि परिवार में घर के बाहर जूती ही जूतियाँ दिखाई देती थी , यानी इस परिवार के पास बहुत बड़ा संख्या बल था और ऐसे बड़े और धनाढ्य परिवार को गाँव में कोई दबा नहीं सकता।

4. रामदेव ने 8वि कक्षा तक पढाई यहीं रह कर करी और फिर इनके बड़े जगदीश जी आर्य ने इन का दाखिला गुरुकुल खानपुर(अहीरवाल) में करवा दिया जहाँ इनके गुरु थे आचार्य प्रद्युम्न ,जखराना वाले, जो समस्त हिन्द में संस्कृत व्याकरण के सबसे बड़े विद्वान् थे और जाति से राव साहब यानि यादव थे और आचार्य जी आज भी पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में ही रहते हैं i तो इसका मतलब गुरुकुल में भी इन के साथ कभी कोई भेदभाव नहीं हुआ।

5. खानपुर गुरुकुल के बाद रामदेव की शिक्षा कालवा गुरुकुल में हुई जहाँ शिक्षक आचार्य बलदेवजी थे जो कूद एक पिछड़े कृषक समुदाय से आते थे ,इसलिए कालवा गुरुकुल में भी रामदेव पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं थी।

6. शिक्षा के बाद इन के मुख्य रूप से दो साथी थे, आचार्य बालकृष्ण जो ब्राह्मण है और आज तक इन के साथ हैं ,तथा दुसरे आचार्य कर्मवीर।

7. गाँव में इनके अग्रज देवदत्त जी मिले जो CRPF से रिटायर्ड हैं और इनका मकान गाँव का सबसे आलिशान महलनुमा मकान है और खेती के लिए इनके पास एक ट्यूबवेल भी है , यानि हर तरह से सम्पन्न। जब उनसे चर्चा हुई तो वे बोले कि सीरियल में काफी बातें सत्य से परे हैं।

8. गाँव में कभी एक मंगतू ब्राह्मण का परिवार था जिसकों यहाँ यादवों ने करीब 30 बीघा ज़मीन दान दे कर बसाया था जिसके एक पुत्र हुआ मांगू ब्राह्मण जिसके सिर्फ एक पुत्री थी जिसके पति निरंजनलाल को यहाँ बसाया गया ,जिसकी संतानें आज भी गाँव में हैं और बड़े सरल स्वभाव का परिवार है। ब्राह्मणों में कोई भी “गोरधन महाराज” नाम का व्यक्ति कभी पैदा ही नहीं हुआ ,यानी सारा टीवी सीरियल सिर्फ एक कपोल-गाथा है। कभी जिस ब्राह्मण परिवार को अहीरों ने बसाया हो वो कैसे अपने सहारा देने वालों पर कोई भेदभाव/ज़ुल्म कर सकता है या जो यादवों पर कभी आश्रित रहा हो वो कभी इतनी हिमाकत कर सकता है?

9. गाँव के कई यादव बुजुर्गों जिनकी आयु 80-90 वर्ष रही होगी उनसे मिले , उन्होंने बताया कि उनके जीवन-काल में कभी भी गाँव में कृष्ण-लीला/रामलीला आदि का मंचन नहीं हुआ। रामदेव का जन्म तो 1973 में हुआ ,फिर टीवी सीरियल में ये कृष्ण-लीला का मंचन एक कोरा झूठ साबित होती है।

10. गाँव के बुजुर्गों और रामदेव के भाई व् कुटुम्ब के लोगों ने बताया कि रामदेव का परिवार तो इतना सबल था कि किसकी हिम्मत थी कि उनको गाँव से बाहर निकालते ? टीवी सीरियल के इस झूठ का भी पर्दाफाश हुआ।

11. रामदेव के बड़े भाई देवदत्त ने खुद बताया कि उनको कभी पंचायत के सामने बाँध कर कोई भी किसी तरह की सामाजिक सज़ा नहीं दी गयी और न ही उनके माँ-बाप को।

12. जब हमने रामदेव के बड़े भाई देवदत्त से पूछा कि रामदेव ने टीवी सीरियल में झूठ क्यों दर्शाया तो वो बोले की “बिना तडके वाली दाल” कौन खायेगा ? इसमें “तड़का” नहीं होगा तो फिर कौन देखेगा ? यानी सिर्फ टीवी सीरियल की पब्लिसिटी के लिए झूठ का सहारा लिया जाएगा और यादवों के स्वाभिमान से खिलवाड़ किया गया। गाँव के कुछ लोग ये बोले कि इस सीरियल से गाँव और समाज की बदनामी हुई है और अब कौन यादव हमारे गाँव में अपने बच्चों का रिश्ता करेगा ?

13. गाँव में आज करीब 300 घरों की बस्ती है ,और 40 साल पहले शायद इस से भी कम घर होंगे। बुजुर्गों ने बताया कि उनके जीवन-काल में कभी भी गाँव में कोई हाट-बाज़ार नहीं लगा। आज भी बस एक-आध ही छोटी सी कोई दुकान हैं। फिर टीवी सीरियल में ये दिखाया गया कि रामदेव और उनकी माता का दुकानदारों ने कोई सामान देने से इंकार कर दिया और कृष्ण-मुकुट नहीं खरीदने दिया ,ये कौन से युग में हुआ ? इस कोरे झूठ का भी पर्दाफाश हुआ।

14. आज गाँव में गिनती के ट्यूबवेल हैं और एक रामदेव के बड़े भाई के पास है। अखबार में छपी ये खबर भी गलत साबित हुई कि अगर उनके मटके से पानी ज़मीन पर छलक जाता था तो पहले उस रस्ते को धोया जाता था। खुद उनके भाई और परिवार ने इस झूठ का खंडन किया। जिस गाँव में करीब 80-90 % यादव परिवार हों और खेडा भी यादवों का ही बसाया गया हो ,तो गाँव के सब रास्तों पर यादवों की ही सबसे ज्यादा आवाजाही रहती है ,फिर ऐसा कैसे हो सकता था ? इस झूठ का भी ग्रामीणों ने पर्दाफाश किया।

15. गाँव में ग्रामीणों और इनके कुटम्ब के लोगों से मिलने पर ये सच्चाई ज्ञात हुई —
(i) गाँव में कोई कृष्ण-मूर्ति या मंदिर नहीं है अपितु एक ठाकुरद्वारा हैं जहाँ गाँव की समस्त जातियाँ बड़े प्रेम से पूजा-अर्चना करती हैं।

(ii) गाँव में किसी भी तरह का जातिगत दुर्भावना नहीं है बल्कि सब जातियां बड़ी समरसता से रहती हैं।

(iii) गाँव बिछवालिया गोत्र के राव साहबों का ठिकाना है यहाँ के ब्राह्मण/कुम्हारों/स्वामी आदि जातियों में बहुत भाईचारा है और ब्याह-शादी आदि पर्वों को सब आपस में एक दुसरे के साथ मनाते हैं i यहाँ के यादव सरदार इतने दानवीर हैं कि अभी हाल ही में एक गरीब कुम्हार की बेटी की शादी में समस्त ग्रामीणों ने खूब दान दिया और गाँव की बेटी को बड़े प्रेम और ठाट-बाट से विदा किया। यानी गाँव खुशहाल है और भाईचारे की मिशाल है। ये ही हाल आस-पास के यादवों के गांवों का है क्योंकि ये अहीरवाल यानी अहीर बाहुल्य क्षेत्र का ही हिस्सा है

अहीरवाल पर यादव राजवंश का राज रहा है। सामंत/ज़मींदार भी यादव थे और आज भी ये यादव राजकुल मौजूद है। अहीरवाल क्षेत्र का बहुत ऐतिहासिक क्षत्रिय इतिहास रहा है। यहाँ के लोग देश व राष्ट्र-रक्षा के लिए तैमुर के खिलाफ लड़े, नादिरशाह के खिलाफ लड़े, अंग्रेजों के खिलाफ नसीबपुर में एक बहुत ही बहादुराना लडाई लड़ी। आधुनिक इतिहास में रेजांगला में वीरता की सबसे बड़ी शौर्यगाथा लिखी, हाजीपीर, जैसलमेर मोर्चा, टाइगर हिल आदि हर लडाई में यहाँ के यदुवंशी मौजूद थे। यहाँ घर-घर में फौजी हैं और ये यादवों का पुश्तैनी कार्य भी रहा है। सैद अलीपुर गाँव में भी बहुत फौजी है, खुद रामदेव के परिवार के कप्तान रोहताश सिंह साहब भी सेना में थे। यानी जिस कौम का इतना शानदार जंगी-इतिहास रहा हो उस पर कोई कैसे ज़ुल्म कर सकता है?

इस टीवी सीरियल के ज़रिये अहीरवाल के सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने की कोशिश है और सिर्फ व्यवसायिक फायदे के लिए विभिन्न वर्गों में विष फ़ैलाने की कोशिश है। रामदेव का परिवार बड़ा बिस्वेदार और धनाढ्य रहा है ,लेकिन झूठी सहानभूति के लिए कपोल-गाथा गढ़ी गयी। जिस परिवार ने गाँव में 1972 में बड़ी धर्मशाला का निर्माण किया, बड़ी ज़मीनों के मालिक हैं वो परिवार कभी तिरस्कार का कैसे भागी रहा होगा ? जिस यादव कौम का शानदार जंगी-इतिहास रहा हो, जिस ने अहीरवाल पर राज़ किया हो वो कैसे इस कपोल-गाथा का हिस्सा हो सकती है?

आज रामदेव के पास इज्ज़त, पैसा,नाम,सम्मान आदि सब कुछ है, फिर ये कैसे झूठा का भागीदार हो गया ? सन्यासी का पहला धर्म है कि सत्य की स्थापना करे और असत्य का खण्डन , फिर ये सन्यास-धर्म से कैसे विमुख हो गया ? खुद को एक अवतार घोषित करने के लोभ में रामदेव ने यादव जैसी मर्द कौम की गरिमा को ही दाँव पर लगा दिया है जिसका हर यदुवंशी को पुरजोर विरोध करना चाहिए।

डॉक्टर ईश्वर सिंह यादव “अजीत”
यादव अस्पताल , रेवाड़ी, हरियाणा

https://visfot.com/2018/02/20/ramdev-ek-pakhand-katha/