लोकमित्र गौतम

ऊना के दलित आंदोलन से चर्चा में आए जिग्नेश मेवानी को महज दलितों का युवा नेता कहना एक तरह से उनकी देशव्यापी चुम्बकीय स्वीकार्यता को कम करके आंकना है। वास्तव में जिग्नेश तमाम दूसरे युवा नेताओं की तरह एक नेता भर नहीं हैं, वह बदलाव की एक नई उम्मीद का नाम हैं। उन्होंने अपने तार्किक और तूफानी भाषणों से देशभर के युवाओं को प्रभावित किया है। वह युवा राजनीति के नये आइकन हैं। यह अकारण नहीं है कि आज देश 2019 के आम चुनावों में जिग्नेश को एक अहम फैक्टर के रूप में देखता है। हाल ही में सम्पन्न गुजरात विधानसभा चुनावों में बडगाम विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक चुने गए जिग्नेश, इन चुनावों में हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर के साथ मिलकर भाजपा को नाको चने चबवा दिए थे। साल 1980 में गुजरात के मेहसाणा में जन्मे जिग्नेश अंग्रेज़ी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उनके पास लॉ की डिग्री भी है और कविताएं लिखने के साथ-साथ वह कई सालों तक पत्रकारिता भी कर चुके हैं। उनकी इस पृष्ठभूमि का भी उनके जोरदार भाषणों में योगदान होता है। इसी की वजह से उनके भाषण बेहद तार्किक और जीवंत होते हैं तथा लोगों के दिल-दिमाग में उतरते चले जाते हैं? पिछली 27 जनवरी 2018 को अहमदाबाद में वरिष्ठ पत्रकार लोकमित्र गौतम ने जिग्नेश के साथ विस्तृत बातचीत की जिसमें उन्होंने जानने की कोशिश की कि उनका राजनीति को लेकर दीर्घकालिक विजन क्या है और कमजोर विपक्ष कैसे आगामी लोकसभा चुनावों में मौजूदा सत्तापक्ष को मजबूत टक्कर दे सकता है? पेश है इस विस्तृत बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश।

लोकमित्र: जिग्नेश गुजरात हो गया अब क्या?

जिग्नेश मेवानी: जहाँ तक मेरा सवाल है तो अब स्वाभाविक तौर पर बडगाम, जहाँ से मैं विधायक चुना गया हूँ, को मुझे एक मॉडल ऑफ़ डेवलपमेंट के तौर पर पेश करना है। मैं साफ़ तौरपर मानता हूँ कि मेरी इलेक्टोरल सक्सेज से जितनी मुझे ख़ुशी हुई है उतने या उससे भी कहीं ज्यादा इस देश के न जाने कितने अम्बेडकराईट, वामपंथी और प्रगतिशील लोग खुश हुए कि मैंने मोदी के गुजरात में सेंध लगाई जबकि न रिसोर्स थे, न पार्टी, न पार्टी का सिंबल। मेरी कोंसीट्वेंसी में, जो अभी गुजरात के चीफ मिनिस्टर हैं, वो विजय रुपानी ने जनसभा की, उत्तर प्रदेश के जो चीफ मिनिस्टर हैं योगी आदित्यनाथ, उन्होंने सभा की, बगल में 15 किलोमीटर दूर अमित शाह व मोदी ने जनसभा की जिसमें अमितशाह ने मुझे गाली देने के लिए 3 मिनट बर्बाद किये।

इन सबके बावजूद हमने यह सीट 15 दिनों में क्रैक कर लिया। इससे तमाम प्रगतिशील लोगों को उम्मीद बंधी है। यह कोंसीट्वेंसी वास्तव में उन सबकी बननी चाहिए। कोई मनरेगा का एक्सपर्ट है, कोई रूरल मैनेजमेंट का एक्सपर्ट है, कोई वाटरशेड मैनेजमेंट का एक्सपर्ट है, कोई आरटीई का एक्सपर्ट है, कोई पब्लिक हेल्थ का एक्सपर्ट है, कोई कल्चरल एक्टिविस्ट है, कोई बच्चों को सिर्फ पेंटिंग करना सिखाना चाहता है। कोई डिसेबल लोगों के बीच में काम करना चाहता है। कोई मेडिकल कैम्प करना चाहता है। कोई बच्चों के बीच आकर सिर्फ गाना, गाना चाहता है। जो भी आप करना चाहते हैं आइये और बडगाम शुड बिकम द मोस्ट बाईब्रंट हैपनिंग इन धमाकेदार कोंसीट्वेंसी ऑफ़ गुजरात टू द एक्सटेंट। कोई बीजेपी का एमएलए मुझे एक साल के बाद आकर कहना चाहिए कि आपको मोदी जी को जो गाली देना है दो। लेकिन मुझे उस एक्सपर्ट से मिलवा दो जो आपकी कोंसीट्वेंसी में ओरगेनिक फोर्मिंग का प्रोग्राम कर रहा है। मैं ये चाहता हूँ। बडगाम को एक मॉडल के रूप में देखना चाहता हूँ।

इसीलिये मैं मानता हूँ कि यह आपकी मेरी, हम सबकी जिम्मेवारी है। ये बडगाम का सवाल है। अब बडगाम से कहीं हजारों गुना ज्यादा इम्पोर्टेंट है कि इन फासीवादी ताकतों को रोका जाए। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होगा तो न बडगाम बचेगा न बडगाम में काम करने वाली फोर्सेज बचेंगी। ये जब मैं कहता हूँ तो इसमें मुझे कहीं एक्जेजेरेशन इसलिए नहीं लगता क्योंकि जो लोग आरएसएस के चहेते, ब्राह्मिन, गुजरात के होम मिनिस्टर हरेन पांड्या को मार सकते हैं। जो लोग कलबुर्गी, दाभोलकर, पंसारे को मार सकते हैं, जो लोग रोहित वेमुला की मौत के लिए जिम्मेदार हैं, नजीब के गायब होने के लिए जिम्मेदार हैं, जो लोग जर्नलिस्ट भूमि को मार सकते हैं। जो लोग चन्द्रशेखर आजाद को जेल में ठूंस सकते हैं। जो लोग इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव यानी मुझे भीमा कोरेगांव के मामले में, एक फर्जी मुकदमे में अंदर डालने की कोशिश कर सकते हैं, वो किसी भी हद तक जा सकते हैं।

यहाँ तक कि मैं कहता हूँ जो लोग खुलेआम यह कहते हैं कि हम संविधान बदलने के लिए आये हैं [हेगड़े ]। तो इन ताकतों को कुछ करके भी रोकना हैज टू बी अल्टीमेट प्रायरिटी…इस समय इससे बड़ी कोई और प्रायरिटी नहीं हो सकती।

लोकमित्र: जिग्नेश जिस तरह से बहुत सारी चीजें आ रही हैं मसलन सर्वे आ रहे हैं, पर्सपेक्टिव आ रहे हैं, उस सबसे लग रहा है कि साल 2019 को लेकर बहुत सारी रणनीतियां चारों तरफ से बन रही हैं। आपकी क्या प्लानिंग है? आप क्या कर रहे हैं?

जिग्नेश: देखिये मुझे ऐसा लगता है कि रेडियो में मन की बात करना, 15 अगस्त, 26 जनवरी को लाल किले से जुमलेबाजी करना, विदेशों में घूमना और ग्राउंड जीरो पर कुछ डिलीवर नहीं करना, इन बातों का कहीं न कहीं इस देश की जनता को सेंस हो रहा है। राम-रहीम काण्ड के वक्त भी उनकी खामोशी, भीमा कोरेगांव के समय भी खामोशी, ऊना के वक्त खामोशी, रोहित वेमुला की आत्महत्या पर भी उनकी खामोशी, गौरी लंकेश के मामले में उनकी खामोशी। नोटबंदी के चलते डेढ़ सौ लोग मर गए, उस मुद्दे पर भी खामोशी। इन सारे मुद्दों को लेकर कोल्लेक्टिवेली देखें तो ये बात साफ़ है कि 2014 में मोदी जिस उम्मीद के प्रतीक थे, अब वो उस उम्मीद का प्रतीक नहीं हैं। 4 सालों में नोटबंदी और जीएसटी ने जिस तरह इकोनामिक क्राइसिस पैदा किया, उससे उनकी पापुलर्टी का ग्राफ बहुत नीचे आया है।

आते ही मोदी जी ने सारे लेबर लॉज को डिसटॉर्ट करने की कोशिश की, दलित और मुसलमानों पर घर वापसी, लव जिहाद और गाय माता के नाम पर उत्पीड़न बढ़ा है। इस सबके चलते न केवल उनकी पॉपुलरटी का ग्राफ नीचे आया है, असंतोष बढ़ा है और आक्रोश बढ़ा है। ..तो एक जेनुइन चांस है कि व्यक्तिगत तौरपर मोदी पीएम न बनें और बीजेपी दुबारा पावर में न आये। इसके लिए मैं ऐसा मानता हूँ कि सारी मेनस्ट्रीम की पोलिटिकल पार्टीज का एक ब्रॉड एलायंस बने। उसी तरह का एक ब्रॉड एलायंस बने सारे पीपुल्स मूवमेंट का और इन दोनों की अपनी स्वतंत्र मौजूदगी रहे। ये दोनों एलाएंस अलग अलग दिशाओं से एक साथ आगे बढ़ें।

ये पीपुल्स मूवमेंट के जो चेहरे हैं– जिनमें जिग्नेश मेवानी, सहला रशीद हैं कन्हैया कुमार हैं, योगेन्द्र यादव हैं, प्रशांत भूषण हैं, एक्स वाई जेड हैं। ये अगर इन पोलिटिकल मेनस्ट्रीम पार्टी का हिस्सा बनते हैं तो जिस संघर्ष की भूमि से ये खड़े हुए हैं, वो भूमि भी उनकी छूट जायेगी, और फिर वो उस उम्मीद का प्रतीक भी नहीं रहेंगे। लेकिन अगर ये दोनों साथी बन सकते हैं तो मैं मानता हूँ देयर इज मोर दैन अ चांस ऑफ़ कीपिंग बीजेपी अवे फ्रॉम पॉवर। इस सबमें एक सबसे अहम भूमिका [हू नोज ?] शायद बहन जी मायावती अदा कर सकती हैं। बीएसपी, सपा और कांग्रेस का एलाएंस हो जाए यूपी में देन मोदी कांट बिकम पीएम।

लोकमित्र: लेकिन जब आप ग्राउंड में जाते हैं, चीजों को रीड करते हैं तो क्या पोस्बिलटी नज़र आती हैं ?

जिग्नेश: इसी ग्राउंड की रीडिंग के बेस में ही मैं यह कहता हूँ। गुजरात में जिस तरह से दलित आन्दोलन हुआ, पाटीदार आन्दोलन हुआ, ओबीसी समाज का राइज हुआ, असावरकर बहनें लड़ीं, आंगनवाड़ी की बहनें लड़ीं, किसान सड़कों पर आये, सूरत के व्यापारी सड़कों पर आये, उसी के चलते ये जो 150 सीटों का घमंड लेकर घूम रहे थे, इट कम डाउन 99। राधनपुर में अल्पेश ठाकोर जीते और बडगाम में मैं। तो राधनपुर के लोग, बडगाम की जनता और गुजरात का दलित समाज। यही दो पॉकेट हैं जहाँ लोग सेलिब्रेट कर रहे हैं। दूसरी तरफ भाजपा सत्ता में आने के बाद भी जुबिलियंट या सेलिब्रेटिंग मूड में नहीं है। क्योंकि वो जानते हैं कि केवल सात सीटों के बल पर ही वो सरकार फॉर्म कर पायी है। ये रियलाइजेशन उनमें है। जिसके चलते अब वो ये क्लेम नहीं कर पा रहे कि ग्रेट गुजराती मॉडल ऑफ़ डेवलपमेंट।

ग्राउंड की रियलिटी अभी भी मुझे ये बता रही है कि जिन मुद्दों को लेकर यह लड़ाई लड़ी गयी, उसमें और कुछ मुद्दे शामिल करके तथा हार्दिक और मैं यदि केवल दलित और पाटीदार इश्यू की बात न करें, जो हम नहीं ही करते बल्कि और भी पब्लिक हेल्थ और एजूकेशन के मुद्दे उठायें, एग्रेरियन क्राइसिस, इकोनोमिक एक्सप्लॉइटेशन और अनइम्प्लॉयमेंट का मुद्दा उठायें, गुजरात में और ग्राउंड तगड़ा हो। बिलकुल इसी तरह की चीज करने की कोशिश पूरे देश में है। इसी के चलते अभी हम सारे यूथ प्लेटफ़ोर्म को एक मंच में लाकर या कोई नया यूथ प्लेटफॉर्म लांच करके, पूरे नेशनवाइड अनएम्पलॉयमेंट का मुद्दा उठाना चाहते हैं और 2 करोड़ रोजगार का जो मुद्दा है, उसी को लेकर बंगलौर में, दिल्ली में, जयपुर में तीन बड़ी रैलियों की हम लोग प्लानिंग कर रहे हैं। नो जॉब, देन नो वोट फॉर बीजेपी। दो करोड़ रोजगार दो या रिटायर हो जाओ।

लोकमित्र: आपको लेकर इन्हीं फोर्सेज के बीच से जो बातें आ रही हैं जैसे बहन जी ने कहा कि आप किसी का मुखौटा हो ….?

जिग्नेश मेवानी: ऊना से लेकर अब तक जितने भी लोगों ने इस तरह से क्रिटिकल बातें कहीं या क्रिटिसाइज किया या बिलो द बेल्ट मारा या विशेष कंपेन की। उन सभी को ‘फ्रॉम द बॉटम ऑफ़ माय हार्ट आई’म सेइंग बिग थैंक यू’ क्योंकि इस सबके चलते मैं इतना चर्चा में रहा, इसके चलते मैं इतना ग्लैमराइज रहा, इसके चलते मुझे इतना अटेंशन मिला है, जनता के बीच में भी और मेनस्ट्रीम मीडिया में भी, इससे आदर्श परिस्थितियाँ कहीं हो ही नहीं सकतीं कि जहां सिर्फ 7% दलित हैं, मेरे लिए इससे बढ़िया कुछ और हो ही नहीं सकता। संघ और बीजेपी को रियलाइज होना चाहिए कि नाउ आई’म मोर पॉपुलर दैन रुपानी। पीपुल्स इन दिस कंट्री नो मी मोर दैन बीजेपी।

लोकमित्र:जिग्नेश कांग्रेस का जो एक लम्बा इतिहास है कि इस देश का पोलिटिकल कैरेक्टर लगभग उसी ने तय किया है। यहाँ तक कि आज बीजेपी कई जगहों पर लगभग उसी के नक्शे कदम पर चल रही है। ऐसे में क्या आपको लगता है कि कांग्रेस के साथ इस ग्रेटर और लार्ज़र विजन के लिए साथ आया जा सकता है?

जिग्नेश मेवानी: नहीं मैं ऐसा मानता हूँ वह ग्रेटर और लार्जर विजन जो हमारी संविधान की प्रस्तावना की स्पिरिट हो-सेक्युलर सोशलिस्ट डेमोक्रेसी यानी धर्मनिरपेक्ष समाजवादी गणतंत्र की सोच का हो, इससे ट्यून करे, इसके साथ हार्मनी रखे। ऐसा विजन तो केवल और केवल पीपुल्स मूवमेंट से ही निकल सकता है। यह तो बिल्कुल साफ़ है।

लोकमित्र: तो फिर इन मेनस्ट्रीम पोलिटिकल पार्टीज का साथ कितना और कहाँ तक हो सकता है ?

जिग्नेश मेवानी: चुनावी राजनीति की जो मेनस्ट्रीम पोलिटिकल पार्टीज हैं और इस देश की इस समय की जो परिस्थितियां हैं, इसके लिए वह जिम्मेवार भी है। हम अगर आज बीजेपी के सामने खुलकर लड़ पा रहे हैं तो इसीलिये कि ये तमाम राजनीतिक पार्टियां भाजपा की तरह ही करप्ट हैं इसलिए जिस तरह से हम उसके खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं वे बोल न पाएंगी। लेकिन कम्प्लीटली ऐसी पार्टियों से दूर दूर तक कोई नाता न हो ऐसी पोजीशन लेकर आइडियली तो हम प्योर रह सकते हैं लेकिन पोलिटिकली बीजेपी के साथ नेविगेट नहीं कर सकते।

लोकमित्र: मतलब रिजल्ट नहीं दे पायेंगे ?

जिग्नेश मेवानी: हाँ। ये तय है। आप व्यक्तिगत तौर पर आब्सोल्यूटली नॉन कम्प्रोमाइजिंग रहें, नॉन करेप्ट रहें, कोई डिसटॉर्ट न होने दें, आपका ग्राउंड जीरो का काम, डेडिकेशन, कमिटमेंट इंटेक रहे। लेकिन आइडियोलोजिकली प्योरिटी के चक्कर में माननीय प्रधानमंत्री जी हमारे सर के ऊपर नोटबंदी, जीएसटी थोपते जाएँ या गाय की पूछ हिलाते जाएँ वो हमको नहीं स्वीकार।

लोकमित्र: आपको वामपंथियों से क्या उम्मीदें हैं ?

जिग्नेश मेवानी: इस देश का जो वामपंथी खेमा है, उसके पास जो विमर्श है, उसके पास जो आइडियाज हैं, उसके पास जो प्रोग्रेसिव कंटेंट है। उसके पास जो एनालिसिस है उसके पास जो एक साइंटिफिक मेथडोलोजी एनालाइजिंग द सोसायटी है। वो दूसरी किसी भी विचारधारा के पास नहीं है। यदि अम्बेडकराईट और वामपंथी साथ आकर सालों तक संघर्ष करें तो बहुत बड़ा रेलीवेंट ट्रांसफर ऑफ़ द सोसायटी का स्कोप है।

लोकमित्र: जिग्नेश अभी तक आपकी जो तमाम लोगों से बातचीत चल रही है उसके आधार पर क्या कहेंगे? आपको उम्मीद है कि 2019 में ये सभी ताकतें एक साथ मिलकर लड़ेंगी ?

जिग्नेश मेवानी: दुर्भाग्य से अभी सीपीएम ने कहा कि कांग्रेस के साथ एलाएंस नहीं करेंगे। शायद मैं गलत नहीं हूँ तो अखिलेश यादव ने भी कहा कि वो कांग्रेस के साथ नहीं जायेंगे। कांग्रेस ने भी दिल्ली में आम आदमी के 20 एमएलए को लेकर उसके सामने बहुत बैटिंग की है। ये न हो। देखिए ये मेनस्ट्रीम पार्टियां पिछले 70 सालों में इतने बड़े-बड़े कम्प्रोमाइज कर चुकी हैं कि इनका तो ये हक़ ही नहीं बनता यह कहने का कि हम एक्स के साथ नहीं जायेंगे या वाई के साथ नहीं जायेंगे। ये सब पोजीशन तो हम ले सकते हैं। हम नॉन कम्प्रोमाइजिंग हैं। हम कह सकते हैं कि किसी भी कीमत पर नहीं बैठेंगे तुम्हारे साथ। तुम जो 70 सालों में देश का कबाड़ा करके बैठो हो, तुम जो इतने करप्ट लोग हो, तुम तो यह सब कह ही नहीं सकते हो। हम तो लार्जर पब्लिक इंटरेस्ट के लिए यह पोजीशन ले रहे हैं और तुम लोग व्यक्तिगत अहम के लिए यह सब कह रहे हो। हम लोग इस बात को जानते हैं कि भाजपा को हराकर भारतीय फासीवाद को नहीं हराया जा सकता। उसकी बहुत गहरी जड़े हैं। वह समाज में बहुत खतरनाक ढंग से मजबूत है। उसको हराना एक लम्बा प्रोजेक्ट है। हम इस बात को भलीभांति जानते हैं। लेकिन तात्कालिक रूप से देश को इस खतरनाक सरकार और माहौल से मुक्त कराने के लिए तमाम ताकतों का एक न्यूनतम कार्यक्रम के तहत साथ आना जरुरी है। हमें उम्मीद है ऐसा होगा। देखना साल 2019 हैरान करेगा।

लोकमित्र: जिग्नेश 2014 तो बंधी मुट्ठी थी, खूब समाँ बांधा गया – ये कर देंगे, वो कर देंगे। लेकिन हो कुछ नहीं सका तो क्या 2019 के आम चुनावों में मुद्दों का संकट होगा ?

जिग्नेश मेवानी: नहीं 2019 के आम चुनावों में खूब कम्युनल वोमेटिंग होगी। जिस प्रकार से भाजपा ने अभी गंध मचा रखा है वही सब वो करती रहेगी। घर वापसी,लव जिहाद।

लोकमित्र: आप लोग क्या मुद्दे लेकर आम चुनाव में जायेंगे?

जिग्नेश मेवानी: हम तो अभी से कह रहे हैं 2 करोड़ रोजगार दो या रिटायर हो जाओ। दूसरा सब कुछ बकवास नहीं चाहिए। नथिंग डू इट। आपके साथ इंटरव्यू के माध्यम से हम यह भी कहना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जी पाकिस्तान के साथ आपका जो मैच फिक्सिंग चल रहा है वो बंद कर दो और वन्देमातरम के साथ हम आपसे अपील कर रहे हैं कि हाफिज सईद और दाऊद को पकड़कर लाओ। क्यों नहीं पकड़कर ला रहे ? पाकिस्तान से कोई घूस खाई है क्या….वंदेमातरम !!! भारत माता को इंतज़ार है कि मोदी जी कुछ करके दिखाएँ।

लोकमित्र: अब तो शायद टाइम नहीं बचा ?

जिग्नेश मेवानी: क्यों टाइम नहीं बचा। उनका सीना तो 56 इंच का है कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन लगता है पैसा खा गए हैं। तभी दाऊद और हाफ़िज़ सईद को नहीं लाये।

लोकमित्र: जिग्नेश आपने कहा कि 2014 में देश को नरेंद्र मोदी से बहुत उम्मीदें थीं….पूर्ण बहुमत भी मिला फिर भी उमीदें क्यों पूरी नहीं हुई ?

जिग्नेश मेवानी: उनको नहीं आता। ही कांट डिलीवर, ही इज टोटली फेल्योर। वह इन कॉम्पिटेंट आदमी हैं।

लोकमित्र: पर्सनली…या उनका आइडिया ही।

जिग्नेश मेवानी: एक पोलिटीशियन के तौरपर, एक प्रधानमंत्री के तौरपर वह एक अक्षम व्यक्ति हैं। आप 6 महीने के बाद मेरा दुबारा इंटरव्यू करियेगा। मैं पब्लिक लाइफ छोड़ दूंगा अगर मेरे पास 21 आइडिया न हों जिनके चलते जॉब क्रियेट हो। मैं जिग्नेश मेवानी अगर गुजरात का सीएम होऊं तो दुनिया भर से घूमकर जॉब क्रियेट करने के आइडिया लेकर आऊंगा। लेकिन मेरा दावा है मोदी ये नहीं कर सकते। वह कम्पीटेंट नहीं हैं। उनके बस की ये बात नहीं है। 2 करोड़ रोजगार का वायदा किया था। वायदे के मुताबिक़ अब तक आठ करोड़ को देना था। लेकिन अपने वादे के मुताबिक़ 1% यानी 8 लाख को भी रोजगार नहीं दे पाए। यह भयानक असफलता है।

लोकमित्र: आपको क्या लगता है इस बात के लिए उन्हें गिल्ट होगा?

जिग्नेश मेवानी: नहीं उनको कोई गिल्ट नहीं होगा। वह ईमानदार आदमी नहीं हैं। वह कभी अपने किये पर पछताने वाले या शर्मिंदा होने वाले व्यक्ति नहीं हैं। वो अच्छा आदमी नहीं हैं। हमने उन्हें 20 साल गुजरात में देखा है। उसकी आत्मा में सच्चाई नहीं है। झूठ है। फरेब है।

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