सिकंदरहयात

26 जनवरी को एक रिश्तेदार आये हुए थे वेस्ट यु पि के रहने वाले , सरकारी कर्मचारी समाज में खासा प्रभाव इज़्ज़त पैसा पढ़े लिखे सब कुछ उनसे बात हो रही थी तब एकतरफ पढ़ रहा था की कैसे संघी और भाजपाई भेड़िये कासगंज में दंगा करवा रहा था रोहित सरदाना और श्वेता सिंह जैसे लोग कैसे अपनी तरक्की के लिए लोगो को और दंगे के लिए उकसा रहे थे उधर इस सब से बेखबर हमारे रिश्तेदार बता रहे थे की वेस्ट यु के एक अच्छे खासे शहर में ठीक बस अड्डे के पास जहा जमीन के दाम सर्वाधिक होते हे उन्होंने अपनी सौ गज़ जमीन मस्जिद के लिए दे दी और आस पास की भी जो उनके दोस्तों की थी वो भी दिलवाने की बात कर रहे थे में सुनकर सोचने लगा की हमारी जानकारी शायद ही कही वेस्ट यु पि में ऐसा हो की मस्जिदों की कोई कमी हो ऐसा कम से कम मेरी जानकारी में तो नहीं हे मेने उनसे कहने की कोशिश की जिसका उन पर कोई असर नहीं हुआ की फिलहाल नयी मस्जिदों की जगह अगर वो किसी क्लिनिक के लिए जगह देते कोई प्याऊ खुलवा देते या उस जमीन को बेचकर पैसा उनके अपने इलाके के दलित नेता चंद्र शेखर की रिहाई में खर्च करते या रिहाई मंच को देते या आप को देते या कम्युनिस्ट पार्टियों को देते विभिन्न गाँधीवादी उदारवादी लोगो को देते उन नए मिडिया समूहों को देते जो जो इस ज़हरीली कम्युनल सरकार से झूझ रहे हे तो क्या ये भी आज जरुरी नहीं हे एकतरफ संघी दौलत के ढेर पर बैठे हे दूसरी तरफ क्या भूखे पेट और बिना जमानत और वकील के जेल में सड़ सड़ के लोग मोदी और भाजपा से जूझेंगे———————– —————— ?

एक अकेला प्रशांत भूषण किस किस का केस लड़ेगा मेरी बातो का हमारे रिश्तेदार पर कोई असर नहीं हुआ वो अपने फैसले पर बेहद खुश थे चेहरे पर चमक थी तसल्ली थी की उन्होंने बेहद सवाब का काम किया हे ठीक भी हे मगर क्या उनकी और उनके जैसे पैसे वाले मुसलमानो की क्या कुछ और जिम्मेदारी नहीं हे क्या अरुन्धन्ति ने अपने पास से जिग्नेश मवानी को पैसा नहीं दिया नतीजा एक हिन्दू मुस्लिम एकता का समर्थक और दलितों को मुसलमानो के खिलाफ इस्तेमाल करने की भजपाई नीति को कमजोर करने वाले नेता का उदय नहीं हुआ ————— ? क्यों नहीं पैसे वाले मुसलमान ऐसा क्यों नहीं करते हे में जानता हु की ये बात बहुत से लोगो को बहुत ही बुरी लगेगी मगर में साफ़ कहता हु की अब आपको ये करना ही करना होगा वार्ना इस्लाम इंसानियत और इण्डिया के , इण्डिया के सविधान सेकुलरिज्म के हत्यारे दिन पर दिन और भी अधिक ताकतवर होते जाएंगे आपके बच्चो का आपके देश का भविष्य खतरे में हे हमारी अपील हे पुरे मुस्लिम समाज से उस मुस्लिम समाज से जिसमे पैसे वाले लोगो की इतनी कमी भी नहीं हे जितनी दर्शायी जाती हे बहुत हे बहुत पैसा हे लोगो को धार्मिक और उपभोक्ता वादी गतिविधियों पर खूब खर्चा करते देखा जा सकता हे एक सेकड़ो बीघा के जमींदार मुस्लिम परिवार के पड़ोसी ने मुझे बतया की हर साल उमरा को जाते हे और हर साल नयी गाडी लेते हे ——————— ? उन्हें और सबको समझना होगा बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा हे उस खतरे से निपटने के लिए पैसा चाहिए होगा इसलिए आपसे अपील हे की अब आगे मज़हबी गतिविधियों के लिए कुछ कम और सेकुलर लोगो और सेकुलर लोगो की गतिविधियों के लिए पैसा अधिक खर्चना शुरू करे !

मुस्लमान भले ही अपनी बदहाली का रोना रोये लेकिन ना तो पैसे वाले मुसलमानो की कोई कमी हे ना ही ऐसा हे की वो और आम मुस्लिम भी धार्मिक गतिविधयों पर अच्छे खासे पैसा खर्च ना करता हो मगर अब कम से कम आज इस बात को समझे की मस्जिदों में कई कई ऐ सी और मार्बल लगाने नयी नयी मस्जिदों और मदरसों के लिए पैसा खर्च करने बार बार हज और उमरा करने बकरीद पर लाखो लाखो के बकरे लेने मज़ारो दरगाहो पर बड़े बड़े चढ़ावे चढाने बड़ी बड़ी धार्मिक सभाये करने पर अल्लाह के वास्ते कम से कम फ़िलहाल जब तक देश पर से मोदी नामकी आफत पूरी तरह से टल नहीं जाती हे तब तक मुसलमान धार्मिक गतिविधयों पर पैसा खर्च करना कुछ तो कम करे मुशायरो पर शायरों पर भी क्या खूब पैसा लुटाया जाता हे शायद एक साधारण शायर कैसे करोड़पति हो गया ——– ?

मुसलमानो को समझना होगा की इस्लाम इंसानियत और इण्डिया पर कैसा खतरा मंडरा रहा हे और कैसे उस खतरे से निपटा जा सकता हे उसमे पैसे का क्या रोल हे कासगंज के दंगो ने एक बात साफ़ कर दी हे की संघी और भाजपाई नेता खुनी भेड़िये बन चुके हे ये सब लोग पागल हो रहे हे इन्हे पागल किया हे गुजरात दंगो का फायदा उठाकर पी एम् तक बने मोदी की कामयाबी ने लेकिन यही बस नहीं था देश के सबसे बड़े राज्य तक में भी एक ऐसे ही आदमी के हाथ में सत्ता आ गयी जिसकी लोकप्रियता की वजह से सिर्फ दंगे और भड़काऊ गतिविधिया रही हे इसके बाद से तो संघी ब्रिगेड में पागलपन सा सवार हो गया हे हर संघी और भाजपाई नेता जैसे आज हर समय दंगे करवाकर मोदी योगी की तरह अपना कॅरियर चमकाना चाहता हे पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव लिखते हे की ये परवर्त्ती गली मोहल्ले के बेरोजगार लड़को तक में फैला दी गयी हे ” Abhishek Srivastavaकल रात तक अपनी समझ पर बीस परसेंट शंका थी। आज साफ हो गयी जब मृतक नौजवान चंदन के एक अनन्य मित्र ने भारी मन और भरी आंखों से बताया, “भैया, आप नहीं जानते यूपी का हाल। जब से मोदीजी ने नेतानगरी को एक फुलटाइम काम कहा है, यहां की हर गली में हर लौंडा मोदी बनने की इच्छा पाल बैठा है। कासगंज के हर मोहल्ले से एक मोदी निकल रहा है।”यह युवा भाजपा का समर्थक है, चंदन जैसे लड़कों का बौद्धिक संरक्षक और बीटेक पास है। अंग्रेज़ी बोलता है। मॉडर्न है। चंदन को शहीद मानता है लेकिन इस शहादत के पीछे हर लड़के के मन में पनपी नेता बनने को ख्वाहिश को ज़िम्मेदार मानता है। ये लड़का आजतक की कवरेज को सही मानता है लेकिन ABP News को दुश्मन। आज इसी तरह के लोगों ने पंकज झा का जीना हराम किया हुआ है और पूरे पुलिस बल और आरएएफ के सामने ABP की ओबी वैन को उठा लिया और बोनट खोल दिया। ”

ऐसा नहीं हे की देश में सेकुलर हिन्दू सेकुलर ताकते और कोई कम हो गए हे या इतने कमजोर हो गए हे की हर समय दंगो की फ़िराक में घूम रहे इन संघी और भाजपाई भेडियो से भिड़ नहीं सकती हे उन्हें हरा नहीं सकती हे मगर ऐसा लगता हे की पैसा बहुत बड़ी समस्या हे इन लोगो के पास तो पैसा ही पैसा हे उसी पेसो की खनक से मिडिया का एक बड़ा हिसा भी दंगाई हो चुका हे जबकि लिबरल सेकुलर ताकतों के हिस्से का पैसा आज गायब दिखता हे ऐसा लगता हे की वो सारा पैसा खासकर कोंग्रेसी करप्ट खा गए हे इसी कारण लिबरल सेकुलर खेमे में इतनी शिथिलता आ गयी हे आख़िरकार हर काम को करने को पैसा तो चाहिए ही चाहिए होगा वो पैसा मुसलमान भी दे सकते हे खासी मदद कर सकते हे इसलिए बात को समझिये या तो मज़हबी गतिविधियों के साथ ही साथ नहीं तो मज़हबी गतिविधियों में होने वाले खर्च में कटौती करके मुसलमान खासकर पैसे वाले मुसलमान उदार सेकुलर न्यायप्रिय ताकतों की लोगो की पहचान करे उन्हें पैसा दे नहीं तो मोदी और भाजपा के इरादे बेहद भयंकर लग रहे हे कासगंज की घटना साफ़ बताती हे की भाजपाइयों को लाशो पर चढ़ कर सत्ता में बने रहने की खफ्त सवार हो गयी हे ये लोग किसी भी हद तक जा सकते हे दंगा गृहयुद्ध इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं हे मुसलमान अगर आज सेकुलर ताकतों को पैसा सपोर्ट नहीं देंगे तो वैसे भी कल को आपका बहुत ज़्यादा नुकसान होने के आसार हे इसलिए देर ना करे सभी उदारवादी ताकतों की सहायता करे ध्यान दे समय दे पैसा दे और ये भी याद रहे की पैसा किन्ही मुस्लिम तंजीमो को नहीं बल्कि शुद्ध सेकुलर लोगो और कामो को ही दे !