सिकंदर हयात

आने वाले समय में साफ दिख रहा हे की प्रिंट मिडिया और टेलविजन के पाठक दर्शक कम होंगे नहीं तो कम से कम बढ़ेंगे नहीं जबकि खासकर नेट पर हिंदी पढ़ने लिखने सोचने समझने बहसने वालो की तादाद बढ़ती ही जा रही हे ऐसे में व्यक्ति और समूह के स्तर पर पब्लिसिटी के लिए राजनीती के लिए हिंदी नेट पर पाठको को अपनी तरफ खींचने की खासी मारामारी और बेचैनी देखि जा सकती हे ऐसे में देखा की हिंदी सोशल मिडिया पर काफीसमय से एक ज़ोया मंसूरी नाम की आई डी से संघी बाते की जाती हे एक तो मुस्लिम फिर लड़की फिर कम उम्र फिर भाजपा मोदी संघी हिंदुत्ववादी बाते इस्लाम और मुस्लिम विरोधी स्वर नतीजा बड़े बड़े अच्छे लेखकों से हज़ारो गुना अधिक आज इस ज़ोया के फ़ॉलोअर हे इसे खासा पढ़ा जाता हे तो अपने पाठको बता दे की जितना हम जानते हे और जितना हम समझते हे तो पाठको को बता दे की हम अपना अंदाज़ा बता रहे हे ये आई डी या तो घोर साम्प्रदायिक इस्लाम और मुस्लिम लेखक प्रचारक और गजल आदि से जुड़े ——– चतुर्वेदी की हो सकती हे या तो फिर ———- फॉउंडेशन से जुड़े किन्ही लोगो की ही हो सकती हे मकसद हे हिन्दूकम्युनल राजनीति की मज़बूती के लिए अधिक से अधिक पाठक खींचना हम वो बाते पेश कर रहे हे जिनकी वजह से हमें लगता हे की ये कोई लड़की नहीं हे बल्कि हिन्दू साम्प्रदायिक संघटनो से जुड़ा कोई व्यक्ति हे हमारा शक खासकर चतुर्वेदी पर ही क्यों हे ये बताएँगे पहली बात तो ऐसा नहीं हे की कोई भी मुस्लिम लड़की इस्लाम या मुस्लिम विरोधी बाते नहीं कर सकती हे या फिर उसे हिंदुत्व से प्रेम नहीं हो सकता हे जरूर हो सकता हे मगर जरा सोचिये पाठको अगर किसी गैरहिन्दू को इतनी समझ और हिंदुत्व से इतना प्रेम होगा तो अवशय ही हिंदूवादी संघटनो की क्रूरता और धूर्तता का विरोध करेगी तथाकथित ज़ोया ने ऐसा कभी नहीं किया पाठको समझिये आपके आस पास अगर किसी गैर मुस्लिम को इस्लाम से प्यार हो जाए तो क्या सम्भव हे की वो आज़म ओवेसी बुखारी आदि की राजनीति और हरकतों की निंदा न करे जरूर करेंगे जबकि हिंदुत्त्ववादी ज़ोया ने ऐसा कभी नहीं किया इससे अंदाज़ा होता हे की ज़ोया हिन्दुत्वादी साम्प्रदायिक संघटनो की फेक आई डी हे उसकी भाषा शैली किसी अनभुवी धूर्त व्यक्ति की ना की किसी भी कम उम्र लड़की की!

सोचने वाली बात हे या नहीं , की अगर———— चतुर्वेदी या उसका गेंग या कोई ———– फॉउंडेशन का कोई साज़िश ही अगर सौलह साल की हिंदुत्ववादी हिज़ाब वाली ज़ोया नहीं हे तो फिर भला क्यों एक दिन मेने देखा की —— चतुर्वेदी इसकी आई डी डुगडुगी बजा कर प्रोमोट कर रहा था जितना हम जानते हे की चतुर्वेदी ——— तिवारी का भी टेगिया मित्र भी हे तो फिर क्यों आजतक तो चतुर्वेदी ने —– तिवारी की आई डी का तो कभी प्रचार नहीं किया उस —– तिवारी का जिसने हिंदूवादी कटटरता और ———– फॉउंडेशन के इरादों और साज़िशों के लिए शायद सबसे बड़ी क़ुरबानी दि हे कहा तो ——- तिवारी हिंदी की शायद सबसे बेहतरीन और निष्पक्ष वैचारिक साइट का मालिक सम्पादक था इज़्ज़तदार था आज ये हिन्दू कठमुल्वाद का मोदी का संघ का हिन्दू साम्प्रदायिकता का एक मामूली प्यादा बन गया हे इसकी भी अब वही घटिया बाते भाषा झूठे वीडियो फोटोशॉप———- दवे जैसे शर्तियामनोरोगी से अब इसकी छनती हे हलाकि तमाम घटियापन के बाद भी हिन्दू साम्प्रदायिकता के खेमे में —तिवारी जैसा कोई और बड़ा विद्वान नहीं हे फिर भी ——-चतुर्वेदी ने मेरी जानकारी में कभी ———–तिवारी का प्रचार नहीं किया जबकि जोया की आई डी का ये डुगडुगी के साथ प्रचार कर रहा था क्यों भला ———— ? क्या इसलिए ना की ये कम्युनल गेंग ऑफ़ गाज़ियाबाद या फिर ———— फॉउंडेशन वाले साज़िशी ही ज़ोया हो सकते हे ——– तिवारी की बात करे तो इतनी सेवाओं के बाद भी कोई उसका प्रचार नहीं करता हे नतीजा उसके फॉलोवर इस फ़र्ज़ी ज़ोया के एक तिहाई भी नहीं हे

जब से हमने लोगो को बताया हे की सोशल मिडिया पर तुम्हारी सपनो की रानी सौलह की ज़ोया असल में साठसाल का —– चतुर्वेदी हे या फिर उसके ही गेंग का कोई हे तब से ही शायद शायद . ज़ोया पर बहस चल रही हे ठरकी और कुंठित लोगो मानने को तैयार ही नहीं हे की ज़ोया असल में एक हिन्दू कम्युनल गेंग के लोगो का एक प्रोपेगेंडा हे खेर हास्यपद देखिये जो असम की एक संघी लड़की गीता को शायद ऊपर से आदेश मिला होगा तो उसने भरम फैलाने के लिए यु लिखा की ज़ोया सौलह की सी ही हे लिखती ” गीता—-
8 January at 13:04 ·एक बात बताओ !
मैंने कभी नार्थईस्ट में फैले extremism पर एक भी लेख लिखा ? आपने कश्मीर में बैठ कर किसी को खुलेआम वहां के आतंकवाद पर लिखते देखा ?
हर व्यक्ति के कुछ अपने लोकल , धार्मिक , राजनैतिक खतरे होते हैं..पॉइंट ब्लांक रेंज पर कोई मुझे गोली मार जायेगा और फेसबुक वाले सिर्फ RIP लिखकर चादर तान देंगे अपनी.
जोया का असली नाम ,पता जानने की चाहत रखने वाले ….उसकी सिक्यूरिटी की गारंटी ले पाएंगे ? फतवे की जद में उसका परिवार आयेगा तो आप क्या कर लोगे ? अब तक कितनो को सिक्योर किया है आप लोंगो ने ?
अरे बच्ची है वो …लिखना चाहती है ..उसे बेख़ौफ़ होकर लिखने क्यों नही देते मर्जी से ..उसका चेहरा देखकर क्या करोगे आप लोग ?
हद है एकदम …अदिति गुप्ता वाली चाशनी में जोया मंसूरी को मत भिगोयिये.उसने किसी का नुक्सान नही किया.
आय सपोर्ट हर …..खुलेआम.
पॉवर टू this वंडरफुल गर्ल”

पाठको देखिये इनकी नॉनसेंस कुंठित लोगो को ललचाने के लिए ये बता रही हे की बच्ची हे तो यही इनका झूठ पकड़ा गया मेने पिछले दिनों एक मानव् विज्ञानि के लेख के हवाले से बताया था की इंसानो की मेच्योरिटी में अब दस साल का सा फर्क आ गया हे तीस साल की लड़की या लड़का अब बीस साल की जैसी बचकानी और चाइल्डिश भी हो सकती तो समझ लीजिये की भारत जैसे जटिल देश में कोई भी लगातार का लेखन -माने लेखन दो चार लाइने नहीं बल्कि लेख लेखन जो आपको पसंद या पढ़ने लायक लग रहा हो उनके लेखकों का तीस पैतीस चालीस या ऊपर का होना अनिवार्य सा समझिये ठीक ठाक सा भी लिखने के लिए पहले तो खूब पढ़ना होता हे जीवन के कुछ अनुभव भी चाहिए तब जाकर ऐसा लेखन सामने आता हे जिनसे आप सहमत हो या ना हो पर जिन्हे आप लेख लम्बे भी हो असहमत भी हो तो भी आप जिन्हे पढ़ने की ज़हमत लेते हे तो ऐसे में भला कोई बच्ची ये सब कैसे लिख सकती हे कोई पोएम नहीं हे —————– ? लेकिन इन्हे पता हे की कुंठित लोग कम उम्र लड़कियों के पीछे पागल रहते हे इसलिए एक कम उम्र और मुस्लिम लड़की का करेक्टर बनाया गया जो हिंदुत्ववादी बाते हिन्दू साम्प्रदायिकता का समर्थन और लम्बे लम्बे पोस्ट लिखती हे ये —— चतुर्वेदी और गैंग इतना इतना घोर कम्युनल हे की इनका डी एन ए भी करो तो उसमे भी साम्प्रदायिकता निकलेगी इन लोगो से भिड़ना आसान नहीं हे पैसा ही पैसा सत्ता सब कुछ आज इनका हे पॉवर इतनी हे की ज़्यादा चु चपड़ हम करेंगे तो ये किसी ज़रूरतमंद शिया या अहमदी आदि लड़की को पैसा देकर ज़ोया बनाकर भी पेश कर देंगे कर भी चुके हे कोई मुश्किल नहीं हे आज बस पैसा चाहिए वो इनके पास हे ही सबसे ताकतवर आदमी खुद ये सब झूट तिकड़म पसंद करता हे रविश के शब्दों में ये खुद चुनाव जितने के लिए फेक न्यूज़ प्रोमोट करते हे ज़ोया ही चतुर्वेदी या गेंग हे मुझे ऐसे पता चला की एक तो भाषा और लिखने के स्टाइल से पहचान लेता हे दूसरा की एक दिन ये ही ज़ोया की आई डी डुग डुगी बाज़ा कर प्रोमोट कर रहा था इसका क्या मतलब हुआ — ? , पाठको —- तिवारी और चिप — कब से हिन्दू कटटरता और हिन्दू कठमुल्लावाद हिन्दू साम्प्रदायिकता की दीवानो की तरह सेवा कर रहे हे कब से , फिर भी ना तिवारी के फॉलोवर हे ना चिप—- के क्लिक हे जबकि चिप—– तो रो रो के पागल हो गया अपनी साइट की टी आर पि बढ़वाने के लिए इसने अपने हिन्दू कठमुल्वादी गेंग के लोगो से सौ अपील कर दीं अपने बाल नोच लिए वैचारिकआत्मदाह की धमकी दीं मगर हिन्दू कटटरता वादी गेंग जो आज इतिहास की सबसे बड़ी समर्द्धि और ताकत भोग रहा हे उसने ही कभी इनका तो ऐसा कोई खास प्रचार नहीं किया किया इसने फिर भला कैसे एक दिन ये ही ज़ोया की आई डी प्रोमोट कर रहा था फिर ये ज़ोया भी उर्दू और कुछ शेरो शायरी भी ” करता ” हे और ये चतुर्वेदी तो हे ही उर्दू आदि का भी जानकार और एक फ्लॉप उर्दू ग़ज़ल लेखक , उर्दू लेखन और ग़ज़ल आदि की अंदुरुनी राजनीति ने ही शायद इसे घोर कम्युनल और मुस्लिम विरोधी बना दिया ज़्यादातर लोग इसी तरह अपने जीवन के कुछ बुरे और शोषण भरे अनुभवों से किसी किसी के विरोधी हो जाते हे वो ये नहीं देखना चाहते की ये पूरा उपमहाद्वीप ही हे घोर शोषण का अड्डा!