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अफ़ज़ल ख़ान

सरदार पटेल ने 1949 मे एक इंटरव्यू मे कहा था के ” मे ने संघ को पेशकश की है के अपने प्लान को बदलो, भारत के संविधान पे अमल करो, भारत के झंडे को मानो और अपनी वफादारी साबित करो और हमे विश्‍वास करने का मौका दो के हम तुम्हारी बातो पे यक़ीं कर सके. कहना कुछ और करना कुछ की पॉलिसी से बाहर आओ.” ये बात स्वय लौह पुरुष सरदार पटेल ने 1949 मे एक पत्रिका को इंटरव्यू देते हुए कहा था जब उन्हो ने संघ के नेताओ से गाँधी जी की हत्या के बाद हटाई गयी पाबंदी के बाद कही थी. 8 december 1948 को क्रिस्टोफेर जफ़्रे को एक इंटरव्यू मे कहा था के ” आप को याद हो गा के लोग मुझे संघ का समर्थक कहते है, किसी हद तक ये बात सही भी है क्यो के संघ वेल नौजवान, बहादुर, मेहनती और समर्पित वेल है लेकिन वे थोड़े पगल और सम्प्रदायिक सोच है, इस लिये मे उन्हे उन के सोच को बदल कर उन का इस्तमाल देश के विकास के लिये करना चाहता हु.”

इस मे कोई शक नही के पटेल संघ के लिये एक सॉफ्ट कॉर्नर रखते थे इस लिये संघ ने पटेल की बात को मानते हुए अपने अंदर कुछ बदलाव लाया और उन्हे ने अपने संघ के लिये एक क़ानून बनया और संघ को एक सामाजिक और संस्कीरति संगठन का रूप दिया और संघ के सदस्यो को शान्ति और भाईचारगी बनाने का संदेश दिया.पटेल चाहते थे के संघ के सदस्य राजनीति दल जाय्न करे मगर नेहरू संघ को कांग्रेस मे शामिल करने के खिलाफ थे, मगर जब पण्डित नेहरू देश से बाहर थे तो 10 अक्टोबर-1949 को पटेल ने कांग्रेस वर्किंग कमीटी से एक बिल पस करा कर संघ के सदस्यो को पार्टी का हिस्सा बनने का अधिकार दे दिया मगर बाद मे नेहरू ने इसे खत्म कर दिया.

सरदार पटेल जहा संघ के बहुत सी अच्छाइयो को मानते थे मगर इस संघ को सरकारी काम काज मे दख्ल देने के खिलाफ थे, 1948मे गाँधी जी के हत्या से कुछ दिन पहले ही उन्हो ने एक प्रेस कॉंफ्रेस्स मे कहा था संघ के सदयो को सरकारी नौकरी से दूर रखा जाये गा और इस के लिये क़ानून भी बनाया जाये गा क्यो के सरकारी काम काज मे एक सम्प्रदायिक संगठन का देश के हित मे नही है क्यो के पटेल खुद संघ के आदत से संकित थे.

पटेल के इंटरव्यू और उन की बातो से साबित हो जाता है के शुरु मे संघ एक सम्प्रदायिक और उग्र पार्टी थी जो के भारत के संविधान पे यकीन नही करता था और राष्ट्र के एकता और अखंडता के लिये खतरा था मगर समय के साथ संघ अपने मे बदलाव लाने मे क़ामयाब रहा और अपने आप को एक संस्कीर्त और सामाजिक संगठन के तौर पे स्थापित करने मे कामयाब रहा मगर अभी तक संघ अपने पुरानी मानसिकता को नही बदल सका , इस करण सभी समुदाय उसे अपनाने मे हिचकिचा रहे है.