प्रेम कुमार

अमित शाह ने खोल दी है पोल। झूठ की पोल। गोरखपुर में बच्चों की सामूहिक हत्या पर संवेदना दिखाने का जो उपक्रम 28 घंटे बाद शुरू हुआ, उसकी पोल। इस घटना को हत्या या लापरवाही के कारण हादसा नहीं मानने की सरकार की जिद पर भी बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने मुहर लगा दी है। अमित शाह ने यह भी उजागर कर दिया है कि हर छोटी-मोटी बातों पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ घंटों के भीतर 30 से ज्यादा बच्चों की मौत पर कोई ट्वीट क्यों नहीं किया, कोई संवेदना क्यों नहीं दिखाई, किसी मुआवज़े का एलान क्यों नहीं किया?

शाह ने बोली शिवपाल की भाषा

कभी समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल यादव ने कहा था कि यूपी कई देशों से भी बड़ा राज्य है और इसलिए यहां छोटी-मोटी घटनाएं होती रहतीं हैं। उनके बयान पर हंगामा काटने वाली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी अब वही भाषा दोहरा दी है। बात आगे बढ़ाने से पहले आपके जेहन में अमित शाह के शब्दों को जीवंत बनाए रखना भी जरूरी लगता है। सुनिए उन्होंने क्या कहा- “इतने बड़े देश में बहुत सारे हादसे हुए और ये कोई पहली बार नहीं हुआ। घटनाएं होती रहीं हैं, हो रही हैं और होती रहेंगी।”

वाकई अमित शाहजी, ज़िन्दगी है तभी तो मौत है। अमितशाह जी कहना चाहते हैं कि जिस अस्पताल में इन्सेफेलाइटिस नाम की बीमारी से हर रोज बच्चे मर रहे हैं, वहां किसी दिन किसी और वजह से आंकड़े कुछ बढ़ भी जाएं, तो इतनी हाय-तौबा क्यों?

‘कांग्रेस का काम सिर्फ इस्तीफा मांगना’

अमित शाह को तो विपक्ष का यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफ़ा मांगना भी गवारा नहीं। सुनिए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह क्या कहते हैं “कांग्रेस का काम सिर्फ इस्तीफा मांगना है। क्या उसके शासनकाल में ऐसी घटना नहीं हुई?”

घटनाएं सबके राज में होती हैं, सो ‘भाईचारा’ बना रहे!

अब कांग्रेस नेता के मुंह से यही सुनना बाकी रह गया है कि जब कांग्रेस के शासनकाल में ऐसी घटना घटी थी, तब क्या बीजेपी ने इस्तीफ़ा नहीं मांगा था? कहने का मतलब ये है कि देश में राजनीति ऐसी हो, जिसमें यह मान लिया जाए कि ऐसी घटनाएं सबके राज में होंगी, चाहे वह कांग्रेस हो या बीजेपी। और, कोई एक-दूसरे से इस्तीफ़ा नहीं मांगेगा। बिल्कुल! भाईचारा हो, तो ऐसा! घटनाएं रोकने के लिए ऐसी भाईचारगी नहीं दिखाएंगे। लेकिन बवाल रोकने के लिए या इस्तीफ़ा नहीं मांगने के लिए अमित शाह जी कांग्रेस से भाईचारे की उम्मीद कर रहे हैं।

पार्टी से लेकर सरकार तक दिखी एक ही सोच!

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का ताज़ा बयान इसलिए गम्भीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि वे उसी सोच को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं जिस पर चलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने बच्चों की सामूहिक मौत के लिए ‘एक से अधिक कारण’ बताए थे। राज्य सरकार की ओर से जो ट्वीट जारी किए गये, उनका आशय भी यही था। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने तो साफ तौर पर कहा- “बच्चों की मौत केवल ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई। जिस वक्त ऑक्सीजन सप्लाई नहीं थी, उस वक्त ये मौतें नहीं हुईं”?

पीएम मोदी की चुप्पी के पीछे वही वजह!

अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और सिद्धार्थ नाथ सिंह सबकी सोच में कहीं कोई फर्क नज़र नहीं आता। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आचरण और व्यवहार से इस सोच पर अपनी मुहर लगायी। इसी सोच ने पीएम मोदी को ‘संवेदना के ट्वीट’ करने से रोक दिया, क्योंकि जब मौत लापरवाही से नहीं हुई हो या यह घटना ऐसी हो, जो “इतने बड़े देश में हो जाया करती हैं”, तो ऐसी घटना पर प्रधानमंत्री को ट्वीट करने की आवश्यकता क्यों हो। लिहाजा न मृतक बच्चों के परिजनों को पीएम की ओर से सांत्वना दी गयी, न ही मुआवज़े का मरहम ही पेश किया गया।

मरने वाले गायें नहीं थीं, बच्चे थे!

वैसे अगर गैरबीजेपी सरकार होती, तो यही बीजेपी कह रही होती कि मरने वाले बच्चे अगर अल्पसंख्यक समुदाय से होते, तो सरकार ऐसे सक्रिय होती या वैसे सक्रिय होती। लेकिन, केन्द्र और राज्य दोनों जगहों पर कथित हिन्दूवादी सरकार है इसलिए इस बार लोग इन बच्चों की जान को गायों की जान से तौल रहे हैं। उनके मुताबिक गायें मरी होतीं, तो सरकार ज्यादा एक्टिव रहती। यानी सरकारों के एक्टिव होने की विशेष परिस्थितियां निर्धारित हैं। अल्पसंख्यक के नाम पर सरकारों की सक्रियता की बात एकबारगी समझी जा सकती है। लेकिन इंसानों के मुकाबले गाय को ज्यादा तवज्जो देना कहां तक जायज ठहराया जा सकता है। और उसमें भी मासूम बच्चों का मरना इस देश में रोजाना घटने वाली घटनाओं में से एक घटना बना दी जाती है।

मौत के पीछे एक से अधिक कारण !

अब तो इस बात पर विचार करना ही पड़ेगा कि आखिरकार गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बच्चों की मौत क्या है- रोज़ाना एक अस्पताल में होने वाली मौत! इन्सेफेलाइटिस के मरीजों की हो रही मौत! ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाने के बाद तड़प-तड़प कर हुई बच्चों की मौत! या इन सभी कारणों से ये घटना घटी! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना के 28 घंटे बाद जो चुप्पी तोड़ी, उसके मुताबिक इस घटना की वजह सिर्फ एक नहीं है। यानी सिर्फ ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं हुई। यानी ऊपर गिनाए गये सभी कारण इस घटना के पीछे हैं।

बनता है हत्या का मामला

चलिए मान लेते हैं कि बच्चों की मौत केवल ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई। जो आंकड़े हैं उनमें इन्सेफेलाइटिस के मरीज भी हैं। अगर एक मौत भी (इससे कम तो मुख्यमंत्री भी नहीं बोलेंगे) ऑक्सीजन की कमी से हुई है तो वह हत्या ही कही जाएगी। क्रूर लापरवाही का उदाहरण ही है ये। बिल पेंडिंग रखना। चेतावनी के बावजूद नहीं चुकाना और ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दिया जाना। यह छोटी घटना नहीं है। कोई ऑक्सीजन की सप्लाई रोकने जैसा तोप छोड़ने पर आमादा हो और प्रशासन कह रहा हो कि अरे कुछ नहीं होगा, हम हैं ना। और, तोप छोड़ दिया जाता है। घटना से एक दिन पहले डीएम को ऐसा ही भरोसा दिया गया था।

‘क्रूर हत्याकांड’ पर राजनीतिक व्यवहार और भी क्रूर!

बच्चों की मौत की क्रूरता पर जो व्यवहार दिख रहा है वह कहीं ज्यादा क्रूर है। और, सबसे शर्मनाक बात ये है कि इस व्यवहार में अपने को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाली बीजेपी के अध्यक्ष, सवा करोड़ लोगों के समर्थन का दावा करने वाले पीएम नरेंद्र मोदी, देश के सबसे बड़े सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ और उसी सूबे के स्वास्थ्यमंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह सभी शामिल हैं।

(लेखक 21 साल से प्रिंट व टीवी पत्रकारिता में सक्रिय हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।) http://janchowk.com